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अलसी क्या है?

वर्तमान समय में स्‍वस्‍थ रहने में अलसी बहुत मददगार साबित हुई है। अलसी का शरीर एवं स्‍वास्‍थ्‍य पर सकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है जिससे स्‍वस्‍थ और निरोगी रहने में मदद मिलती है।

शरीर में प्रोटीन की पूर्ति के लिए हर उम्र का व्‍यक्‍ति अपने आहार में अलसी को शामिल कर सकता है और यही वजह है कि अलसी एक महत्‍वपूर्ण जड़ी बूटी के रूप में लोकप्रिय है। आजकल मार्केट में भी अलसी के सप्‍लीमेंट आने शुरु हो गए हैं। अपने आहार में अलसी को शामिल कर आप पर्याप्‍त पोषण पा सकते हैं।

बाइबिल में भी अलसी और फाइबर का उल्‍लेख किया गया है। अनेक बीमारियों में अलसी रामबाण औषधि का काम करती है। कई वर्षों से स्‍वस्‍थ एवं निरोगी काया पाने के लिए अलसी का उपयोग किया जाता रहा है और आज भी अनेक रोगों के इलाज में अलसी के सेवन की सलाह दी जाती है।

मछली में पाया जाने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड अलसी में भी मौजूद होता है और इसलिए शाकाहारी लोगों के लिए अलसी किसी वरदान से कम नहीं है। अलसी के औषधीय गुणों को मनुष्‍य के लिए अमृत समान बताया गया है।

अलसी के बारे में तथ्‍य:

  • वानस्‍पतिक नाम: लिनेन उसितटिसिमम
  • वंश: लिनेसी
  • सामान्‍य नाम: अलसी के बीज, अलसी, लीनसीड, कॉमन फ्लेक्‍स, फ्लैक्‍स सीड
  • संस्‍कृत नाम: अतसी
  • उपयोगी भाग: बीज
  • भौगोलिक विवरण: यूरोप और एशिया, कनाडा एवं अमेरिका के कई हिस्‍सों में अलसी पाई जाती है। भारत में प्रमुख रूप से महराष्‍ट्र, बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्‍य प्रदेश में अलसी का उत्‍पादन किया जाता है।
  • गुण: गर्म
  1. अलसी को कब खाएं और इसको खाने के तरीके - alsi ko kab khaein aur isko khaane ke treeke
  2. अलसी की तासीर - alsi ki taaser
  3. अलसी के फायदे - Alsi ke Fayde in Hindi
  4. अलसी के नुकसान - Alsi ke Nuksan in Hindi

अलसी को खाने का सही समय इसे खाली पेट लेना ही है। ऐसे में आप रोजाना सुबह के समय अलसी खा सकते हैं। 

इसे किस तरह से खा सकते हैं - 

लोगों के मन में आमतौर पर ये सवाल रहता है की अलसी को खाने का सही तरीका क्या है। अलसी को अगर सही तरीके से चबाया ना जाए तो ये बिना पचे ही आपके शरीर से बहार निकल सकता है। पिसी हुई अलसी उस मामले में, एक बेहतर विकल्प है। आप अपने खाना पकाने के अन्य तेलों को बदलकर अलसी का तेल भी इस्तेमाल कर सकते हैं। 

यदि आप साबुत अलसी खरीदते हैं, तो आवश्यकतानुसार पीस लें और दही, दलिया या अनाज में मिलाकर इसको खा सकते हैं। कथित तौर पर अंकुरित फ्लेक्ससीड में प्रोटीन और ओमेगा -3 वसा की अधिक मात्रा होती है।   

आप अलसी का कई रूप में सेवन कर सकते हैं जैसे कि अलसी की रोटी, पराठा, पूरी, ब्रेड, मिठाई, सूप, सलाद और भी बहुत कुछ। अलसी की एक चम्मच आपके खाने को काफी पोषित बना सकती है।

(और पढ़ें - सलाद खाने के फायदे)

अलसी की तासीर गर्म होती है इसलिए कुछ लोगों को इसकी वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, इसलिए अगर आपको भी ऐसा लगे की अलसी को खाने से कोई परेशानी हो रही है तो इसका सेवन बंद कर दें।  

लेकिन अगर ऐसा नहीं तो आप इसका सेवन गर्मियों में भी कर सकते हैं बस इसकी मात्रा कम लें और पानी ज़्यादा पीएं। 

(और पढ़ें - गर्मी के मौसम में क्या खाना चाहिए)

अलसी के बीज के फायदे हृदय रोग के लिए - Flax Seeds for Heart in Hindi

अलसी के बीज कई हृदय-स्वास्थ्यवर्धक पोषक तत्वों से युक्त हैं जो आपको कई दिल की बीमारियों से दूर रख सकते हैं। यह मोनोअनसेचुरेटेड (monounsaturated) और पॉलीअनसेचुरेटेड (Polyunsaturated) वसा सहित ओमेगा -3 फैटी एसिड से भरपूर हैं जो दिल को स्वस्थ रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

छोटे भूरे रंग के इन बीजों में बड़ी मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं और इसे नुकसान से बचाते हैं। ओमेगा -3 फैटी एसिड रक्तचाप को कम करने, सूजन को कम करने और दिल की धड़कन को सामान्य बने रखने में मदद करता है। इसमें पाए जाने वाला लिंगन (lignan) दिल को एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों की सख्तता) से बचाता है और उनमें से प्लेक की मात्रा को कम करता है।

इसके अलावा, फ्लेक्ससीड्स में मौजूद उच्च फाइबर 'खराब कोलेस्ट्रॉल' या एलडीएल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है और रक्त में 'अच्छा कोलेस्ट्रॉल' या एचडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है।

इसके अलावा, अलसी धमनियों में प्लाक के निर्माण (Plaque formation in arteries) को कम कर, हृदय रोग और स्ट्रोक के खतरे को कम करने में मदद करता है। यह धमनियों में सूजन को भी कम करते हैं तथा धमनियाँ सुचारू रूप से कार्य करने लगती हैं। स्वस्थ हृदय पाने के लिए अपने दैनिक आहार में पिसे हुए अलसी बीज शामिल कर सकते हैं। 

(और पढ़ें - स्ट्रोक के लक्षण)

अलसी के बीज का उपयोग करें रजनोवृत्ति में - Flax Seeds for Menopause in Hindi

2013 के एक अध्ययन में पाया गया कि अलसी के बीज रजोनिवृत्त महिलाओं (menopausal women) में रजोनिवृत्ति के उपचार में बहुत कारगर हो सकते हैं। अलसी में पाए जाने वाले लिगनन यौगिक में एस्ट्रोजेनिक गुण होते हैं जिसकी मदद से हॉट फ्लैशेस (Hot flashes), मूड में उतार-चढ़ाव और योनि का सूखापन कम हो जाता है।

मैरीलैंड के विश्वविद्यालय का सुझाव है कि एक चम्मच अलसी के बीज के पाउडर का प्रतिदिन दो या तीन बार सेवन करने से रजोनिवृत्ति के प्रभाव को कम किया जा सकता है। यह रजस्वला महिलाओं (menstruating women) द्वारा भी नियमित मासिक धर्म चक्र को बनाए रखने और प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

(और पढ़ें - प्रजनन क्षमता बढ़ाने के उपाय)

अलसी के फायदे कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए - Flax Seeds for Lowering Cholesterol in Hindi

अलसी का नियमित रूप से सेवन करने से खराब कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद मिलती है। पोषण अनुसंधान में प्रकाशित 2010 के एक अध्ययन में पाया गया है कि प्रतिदिन 100 मिलीग्राम अलसी के बीजों का सेवन करने से रक्त कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है। अलसी के बीज में पाए जाने वाले फ्लेवनॉइड्स (Flavonoids) कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (LDL) को घटा कर हृदय रोग के खतरे को कम करते हैं। अलसी के बीज घुलनशील फाइबर युक्त होते हैं जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकने में मदद करते हैं।

बुरे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिए रोजाना 2 से 4 चम्मच पिसे हुए अलसी के बीजों का सेवन करें। 

(और पढ़ें - कोलेस्ट्रॉल कम करने के उपाय)

अलसी का पाउडर है वजन कम करने में सहायक - Flax Seeds for Weight Loss in Hindi

अलसी के बीज में पाए जाने वाले तीन मुख्य तत्व - ओमेगा -3 फैटी एसिड, फाइबर और लिगनेन वजन कम करने में सहायक सिद्ध होते हैं। स्वस्थ वसा और फाइबर भूख को दबाने और पेट को लंबी अवधि के लिए संतुष्ट एवं भरा रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा, अलसी विटामिन बी, पोटेशियम, मैग्नीशियम और जस्ता से भी भरपूर है, जो वजन घटाने में सहायक है। 

भोजन में अधिक फाइबर का सेवन करने से आप लंबे समय तक पेट भरे होने जैसा महसूस कर सकते हैं। यह चयापचय में वृद्धि कर आपके पाचन को तेज करने में भी मदद करता है। अलसी आपको जल्द से जल्द पेट भर जाने जैसा महसूस करवाता है, जिससे आप बेकार की कैलोरी लेने से बच सकते हैं।  

अलसी प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत हैं, लगभग 100 ग्राम अलसी में 18 ग्राम प्रोटीन होता है। प्रोटीन वजन कम करने में मदद करता है। इसलिए आपको अगर अपना बढ़ा हुआ वजन कम करना है तो आप अलसी का सहारा ले सकते हैं।  

वजन कम करने के आसान उपाय के लिए पिसे हुए अलसी के बीज का सेवन करें। इसका सेवन सूप, सलाद, शाक-सब्जी एवं दही या फिर मिक्स जूस में छिड़ककर भी कर सकते हैं।

(और पढ़ें - वजन घटाने के लिए योगासन)

अलसी का उपयोग करता है कैंसर के खतरे को कम - Flax Seeds for Cancer in Hindi

अमेरिकी कैंसर अनुसंधान कर्ताओं के अध्ययन से संकेत मिलता है कि कैंसर के जोखिम को कम करने में अलसी के बीज प्रभावी है। यह साबित हुआ कि अलसी के बीज प्रोस्टेट, डिम्बग्रंथि, स्तन कैंसर और पेट के कैंसर से लड़ने में लाभकारी हैं।

अलसी के बीज में लिगनन का स्तर अधिक होता है जो हार्मोन चयापचय और ट्यूमर कोशिकाओं के प्रसार के लिए जिम्मेदार एंजाइमों को अवरुद्ध करके स्तन कैंसर से रक्षा प्रदान करता है। इसके अलावा, अलसी के बीज का पाउडर और अलसी का तेल अल्फा-लिनोलेनिक एसिड, ओमेगा -3 फैटी एसिड से लबालब हैं जो कैंसर में फायदेमंद है।

पिसे हुए अलसी के बीज का सेवन दही में डालकर कर सकते हैं। अलसी के तेल का इस्तेमाल आप खाद्य समाग्री को पकाने के लिए कर सकते हैं। 

(और पढ़ें – कैंसर से लड़ने वाले आहार)

अलसी के औषधीय गुण मधुमेह के लिए - Flaxseed for Diabetes in Hindi

अलसी के प्रतिदिन सेवन से टाइप 2 मधुमेह के रोगियों में रक्त शर्करा के स्तर में सुधार लाया जा सकता है। विज्ञान पब्लिक लाइब्रेरी में प्रकाशित 2007 के एक अध्ययन में पाया गया है कि जो लोग 12 हफ्तों के लिए अलसी के बीज के सप्लीमेंट का सेवन करते हैं, उनके रक्त-शर्करा के स्तर पर सकरात्मक प्रभाव पड़ता है।

इसके अलावा, अलसी के बीजों में अल्फा-लिनोलेनिक एसिड के साथ-साथ प्रोटीन और फाइबर भी होता है जो ब्लड शुगर की मात्रा को नियंत्रित करने में सक्षम है।  

अपनी दवाइयों के साथ अलसी के बीज का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) या फिर कम रक्त-शर्करा के स्तर से बचने के लिए निरंतर अपने रक्त-शर्करा के स्तर की जांच भी करते रहें। 

(और पढ़ें – मधुमेह के कारण और लक्षण)

अलसी का सेवन करे पाचन शक्ति में सुधार - Flaxseed for Digestion in Hindi

अलसी में पाए जाने वाला ओमेगा -3 फैटी एसिड कुछ पाचन समस्याओं, जैसे इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज और आँतों के सूजन में सुधार कर सकता है।

अलसी फाइबर में समृद्ध है। इस वजह से, इसे अक्सर कब्ज से छुटकारा पाने के लिए प्राकृतिक उपचार के रूप में प्रयोग किया जाता है। अलसी की एक चम्मच में 2.8 ग्राम फाइबर होता है। फाइबर आपके मल की मात्रा को बढ़ाता है और इसे नरम करने में मदद करता है, जिससे इसे त्यागना आसान हो जाता है। इससे आपकी आँतों की समस्याओं और कब्ज़ में राहत मिलती है।  

आप अपने आहार में अलसी को जोड़कर पाचन क्रिया में सुधार कर सकते हैं। अलसी साबुत भी उपलब्ध होता है पर उसको पचाना मुश्किल है। आप अपने घर पर मिक्सर का प्रयोग करके उसको पीस सकते हैं या फिर पीसा हुवा भी खरीद सकते हैं। हालांकि अलसी का तेल भी एक विकल्प है, परन्तु इसमें आपके पाचन में सुधार करने के लिए आवश्यक फाइबर नहीं होता है। 

अपनी पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए आप अलसी को विभिन्न रूपों में इस्तेमाल कर सकते हैं। ये पाचन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने का प्राकृतिक उपाय है।   

अलसी बीज बेनिफिट्स विषाक्त पदार्थों की मुक्ति के लिए - Flax Seeds for Detox in Hindi

अपने शरीर का डिटॉक्सिफ़िकेशन करने का मुख्य उद्देश्य विषाक्त पदार्थों, कोलेस्ट्रॉल और अन्य अपशिष्ट उत्पादों का लिवर से निष्कापित करना है। अलसी के बीजों में घुलनशील और अघुलनशील फाइबर दोनों होते हैं जो आंत्र पथ (intestinal tract) से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में बहुत प्रभावी हैं।

इसके अलावा, अलसी में आवश्यक फैटी एसिड, विशेष रूप से ओमेगा -3 फैटी एसिड पाया जाता है जो विषाक्त पदार्थों की सफाई के लिए आवश्यक और एक स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली बनाए रखने में सहायक है। जब शरीर विषाक्त पदार्थों से मुक्त होता है तब थकान, कमजोरी, सूजन और रक्त-संकुलन से पीड़ित होने की संभावना कम हो जाती है।

आप डिटॉक्सिफिकेशन के लिए साबुत या फिर पिसे हुए अलसी के बीज का उपयोग कर सकते हैं। रात भर एक कप पानी में साबुत अलसी के एक चम्मच बीज भिगों दें। अगली सुबह, दोनों बीज एवं पानी का उपभोग करें। 2 सप्ताह हर रोज सेवन करें। 

(और पढ़ें – लिवर को साफ रखने के लिए आहार)

अलसी के बीज का प्रयोग करें बालों की समस्याओं में - Flaxseed for Hair Growth in Hindi

ओमेगा -3 फैटी एसिड से समृद्ध होने के कारण, फ्लेक्ससीड ख़राब और सूखे बालों के लिए एक जादूई औषधि हैं। ये ना सिर्फ आपके बालों की गुणवत्ता को बढ़ाकर उनके स्वास्थ्य को पुनर्जीवित करता है बल्कि सिर की त्वचा को पोषण भी देता है। अलसी का नियमित उपयोग और सेवन बालों की समस्याओं को कम करने में मदद करता है जैसे डैंड्रफ़, खुजली और बालों का टूटना।

संक्षेप में, बालों से संबंधित सभी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए अलसी प्राकृतिक और निश्चित तरीका है। अलसी बैक्टीरिया और कवक के कारण से होने वाला सिर की त्वचा के संक्रमण को दूर रखने का प्राकृतिक और सस्ता इलाज है, साथ ही ये आपके बालों के कूपों को मजबूत करता है।  

अलसी के बीज ओमेगा -3 फैटी एसिड से भरे होते हैं जो बालों के रोम को पोषित कर उन्हें मजबूत और स्वस्थ बनाते हैं। अलसी के बीज में मौजूद विटामिन ई बालों की जड़ों और सिर की त्वचा को पोषण प्रदान करते हैं और झड़ते हुए बालों और गंजेपन को रोकने में मदद करते हैं। यह सोरायसिस (Psoriasis) से संबंधित बालों के झड़ने की समस्या में भी मदद कर सकते हैं। पिसे हुए अलसी के बीज या फिर उसके तेल को अपने दैनिक आहार में शामिल करें और बालों को स्वस्थ व मजबूत बनाएँ। घुंघराले बालों वाले व्यक्ति इसके जैल का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो अलसी के बीज को पानी में उबाल कर बनाया जाता है।

(और पढ़ें – सफेद बालों को काला करने के लिए तेल)

अलसी के गुण लाए त्वचा में सुधार - Flaxseed for Skin in Hindi

अलसी और अलसी के तेल में समाविष्ट विटामिन बी और स्वस्थ वसा त्वचा के लिए फायदेमंद होते हैं। अलसी सूखेपन को कम करने में सक्षम हैं और मुँहासेएक्जिमा, त्वचा एलर्जी और सनबर्न जैसे त्वचा-सम्बंधित विकारों के लक्षणों में सुधार ला सकता है। (और पढ़ें – एक्जिमा के घरेलू उपचार)

त्वचा से तेल निकलता होता है जो त्वचा को नमी प्रदान करने के लिए जिम्मेदार होता है। लेकिन जब ये अनियंत्रित हो जाता है तो इसकी वजह से गंदगी और अन्य अशुद्धियां चेहरे की तरफ आकर्षित हो सकती हैं, जिससे चेहरे पर मुँहासे विकसित हो जाते हैं। रोजाना एक-दो चम्मच पिसी हुई अलसी खाने से आप ऐसा होने से रोक सकते हैं।  

अलसी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा में जलन, चकत्ते, ऊतक सूजन और लालिमा को कम करने में सहायक हैं। इसके अलावा, अलसी में ओमेगा -3 फैटी एसिड आपकी त्वचा को हाइड्रेटेड और चमकदार रखने में मदद करता है। त्वचा के घावों के उपचार के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

आपकी त्वचा की सुंदरता बढ़ाने के लिए कई चेहरे के पैक और स्क्रब्स बनाने के लिए अलसी का उपयोग किया जा सकता है।  

सुगंधित तेल (essential oil) की कुछ बूंदों के साथ अलसी का तेल मिलाकर प्राकृतिक त्वचा मॉइस्चराइजर के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा, स्वस्थ त्वचा के लिए भी अपने दैनिक आहार में अलसी को शामिल कर सकते हैं।  

(और पढ़ें - अलसी के तेल के फायदे और नुकसान)

सावधान: अलसी का उपयोग कब और कौन ना करें

अलसी के नुकसान निम्न हैं -

  • गर्भवती महिलाओं और स्तनपान करा रही महिलाओं को अलसी के बीज या फिर अलसी के तेल की खुराक लेने से बचना चाहिए।
  • रक्त को पतला करने वाली दवाई का सेवन कर रहे लोगों को इसका सेवन अपने डॉक्टर से परामर्श लेकर ही करना चाहिए क्योंकि यह रक्तस्राव के खतरे को बढ़ा सकता है। प्रोस्टेट कैंसर, उच्च ट्राइग्लिसराइड्स, हाइपोथायरायडिज्म और हार्मोन के प्रति संवेदनशील स्थितियों से पीड़ित लोगों को भी अलसी के बीज का सेवन सावधानी के साथ करना चाहिए।
  • मधुमेह दवा के साथ-साथ अलसी के बीज का प्रयोग करते समय ब्लड शुगर के स्तर की जांच करते रहें।
  • क्योंकि अलसी के बीज में उच्च मात्रा में फाइबर पाया जाता है, स्वस्थ रहने के लिए अलसी का सेवन करते समय पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए अन्यथा यह आंत और पैरों पर दुष्प्रभाव डाल सकते हैं।
  • अलसी के बीज का अधिक मात्रा में सेवन ना करें क्योंकि यह आंतो में रुकावट पैदा कर सकता है।
  • अलसी का अधिक मात्रा में सेवन एलर्जिक रिऐक्शन का कारण भी बन सकता है।
  • अत्यधिक फाइबर का सेवन दस्त या पोषक तत्व को ना पचा पाने का भी कारण बन सकता है।

(और पढ़ें - दस्त रोकने के उपाय)

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