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आजकल प्रदूषण की चर्चा आम हो गई है। दरअसल घर के अंदर और बाहर प्राकृतिक वातावरण का खराब होना ही प्रदूषण कहलाता है। प्रदूषण विभिन्न रूपों में पाया जाता है, जिनमें से वायु, मिट्टी, ऊर्जा, ध्वनि आदि मुख्य रूप से जाने जाते हैं। इनमें से हवा में फैला प्रदूषण सबसे ज्यादा नुकसानदेह माना जाता है, क्योंकि इससे सबसे ज्यादा लोग प्रभावित होते हैं।

देश के अधिकतर शहरों के आसमान में धुएं, धूल, एसिड से भरी जहरीली हवा की परत बार-बार खतरनाक स्तर को पार कर रही है। कई शहरों की हवा सांस लेने लायक नहीं रह गई है। प्रदूषण के खतरनाक स्तर पार कर जाने से अनेक शहरों में धुंध, काले धुंए की घनी चादर छाई हुई है, जिससे देखने में भी परेशानी का सामना करना पर रहा है। वायु में प्रदूषण आगामी दिनों में बद से बदतर हो सकता है। हालांकि, वायु प्रदूषण से सेहत को होने बाले नुकसान के बारे में ज्यादातर लोग जागरुक हैं, लेकिन इससे बालों, त्वचा, चेहरे की सुंदरता पर पड़ने वाले खतरनाक प्रभाव से कम ही लोग वाकिफ हैं।

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हवा में बढ़ते प्रदूषण से न केवल आपके शारीरिक स्वास्थ्य पर कुप्रभाव पड़ता है, बल्कि उससे आपकी खूबसूरती पर भी ग्रहण लगता है। वातावरण में फैले प्रदूषण से जहां त्वचा के बाहरी हिस्सों को नुकसान पहुंचता है, वहीं यह त्वचा के अंदरूनी हिस्सों को भी प्रभावित करता है। वातावरण में फैले प्रदूषण के बढ़ने और त्वचा में जलन, खाज, खुजली, लाल चकत्ते आदि का सीधा संबंध होता है। जहां सूर्य की किरणें त्वचा को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचती हैं, वहीं वातावरण में फैले प्रदूषण का नंबर दूसरा आंका गया है।

हमारी त्वचा को बीमार बना रहा प्रदूषण
शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण से आपको फेफड़ों के रोगों के अलावा समय से पहले बुढ़ापा, पिग्मेंटेशन, त्वचा के छिद्रों में ब्लॉकेज आदि अनेक सौंदर्य समस्याएं खड़ी हो जाती हैं। ज्यादातर भारतीय शहरों में वाहनों, एयर कंडीशन, धूल, धुएं आदि से आसमान में बनने बाली जहरीली धुंध की चादर से माइक्रोस्कोपिक केमिकल्स की एक परत बन जाती है, जिसके कण हमारे रोमछिद्रों के मुकाबले 20 गुणा ज्यादा पतले होते हैं, जिसकी वजह से वह हमारे रोम छिद्रों में प्रवेश कर त्वचा की नमी को खत्म कर देते हैं। इससे त्वचा में लालिमा, सूजन, काले दाग, त्वचा के लचीलेपन में कमी आ जाती है, जिससे त्वचा निर्जीव, शुष्क, कमजोर एवं बुझी-बुझी सी हो जाती है।

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त्वचा और खोपड़ी का संतुलन बिगाड़ता है प्रदूषण
हवा में विद्यमान रसायनिक प्रदूषण त्वचा तथा खोपड़ी के सामान्य संतुलन को बिगाड़ देते हैं, जिससे त्वचा में रूखापन, संवेदनहीनता, लाल चकत्ते, मुहांसे तथा खुजली एवं अन्य प्रकार की एलर्जी एवं बालों में रूसी आदि की समस्याएं उभर सकती हैं। अगर आप शहरों में रहते हैं तो आप प्रदूषण से कभी छुटकारा नहीं पा सकते, लेकिन अच्छी खबर यह है कि आप प्रदूषण से सौंदर्य को होने वाले नुकसान को काम कर सकते हैं।

आर्युवेदिक घरेलू उपचार तथा प्राचीन औषधीय पौधों को मदद से प्रदूषण के सौंदर्य पर पड़ने वाले प्रभाव को पूरी तरह रोका जा सकता है तथा आपका सौंदर्य सामान्य रूप से निखरा रह सकता है। प्राचीन औषधीय पौधों को घर में लगाने से वायु में विषैले तत्वों को हटाकर वायु को स्वच्छ रखा जा सकता है, क्योंकि यह पौधे वातावरण में विद्यमान हानिकारक गैसों को सोखकर घर में वातावरण को शुद्ध कर देते हैं। वायु प्रदूषण का सबसे खतरनाक असर त्वचा पर पड़ता है, क्योंकि प्रदूषण के विषैले तत्व त्वचा पर सीधा प्रहार करके त्वचा में विषैले पदार्थों का जमाव कर देते हैं। वास्तव में यह विषैले पदार्थ त्वचा में खुजली के प्रभावकारी कारक होते हैं।

अपनी त्वचा को प्रदूषण से ऐसे बचाएं
वायु में विद्यमान विषैले पदार्थों का सौंदर्य पर दीघकालीन तथा अल्पकालीक प्रभाव पड़ता है। त्योहारों एवं समारोहों में चलाए जाने वाले पटाखों तथा अतिशबाजी से भी वायु में विषैले पदार्थ प्रवेश करते हैं, जिससे त्वचा में खुजली बढ़ जाती है। वायु में विद्यमान रसायनिक प्रदूषण वातावरण में आक्सीजन को कम कर देते है, जिससे त्वचा में समय से पूर्व झुर्रियां तथा बुढ़ापे के लक्षण झलकना शुरू हो जाते हैं। प्रदूषण की वजह से त्वचा पर जमे मैल, गंदगी तथा रसायनिक तत्वों से छुटकारा प्रदान करने के लिए त्वचा की सफाई अत्यन्त महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि आपकी त्वचा शुष्क है तो आपको क्लींजिंग क्रीम तथा जैल का प्रयोग करना चाहिए, जबकि तैलीय त्वचा में क्लीनिंग दूध या फेसवॉश का उपयोग किया जा सकता है। सौंदर्य पर प्रदूषण के प्रभावों को कम करने के लिए चंदन, यूकेलिप्टस, पुदीना, नीम, तुलसी, घृतकुमारी (एलोवेरा) जैसे पदार्थों का उपयोग कीजिए। इन पदार्थों में विषैले तत्वों से लड़ने की क्षमता तथा बलवर्धक गुणों की वजह से त्वचा में विषैले पदार्थों के जमाव तथा फोड़ो-फुंसियों कम करने में मदद मिलती है। वायु में प्रदूषण तत्व खोपड़ी पर भी जमा हो जाते हैं।

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गर्म नारियल तेल की थैरेपी
एक चम्मच सिरका तथा एलोवेरा में एक अंडे को मिलाकर मिश्रण बना लीजिए तथा मिश्रण को हल्के-2 खोपड़ी पर लगा लीजिए। इस मिश्रण को खोपड़ी पर आधे घंटे तक लगे रहने के बाद खोपड़ी को ताजे एवं साफ पानी से धो डालिए। आप वैकल्पिक तौर पर गर्म तेल की थैरपी भी दे सकते हैं। नारियल तेल को गर्म करके इसे सिर पर लगा लीजिए। अब गर्म पानी में एक तौलिया डुबोइए तथा तौलिए से गर्म पानी निचोड़ने के बाद तौलिए को सिर के चारों ओर पगड़ी की तरह बांध कर इसे पांच मिनट तक रहने दीजिए तथा इस प्रक्रिया को 3-4 बार दोहराएं। इस प्रक्रिया से बालों तथा खोपड़ी पर तेल को सोखने में मदद मिलती है। इस तेल को पूरी रात सिर पर लगा रहने दे तथा सुबह ताजे ठंडे पानी से धो डालिए।

प्रदूषण से त्वचा के नुकसान की भरपाई
प्रदूषण से जंग में पानी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। इस दौरान आप ताजे, स्वच्छ जल का अधिकतम उपयोग कीजिए, क्योंकि पानी शरीर के विषैले पदार्थों को बाहर निकलने तथा कोशिकाओं में पौष्टिक पदार्थों को बनाए रखने में मदद करता है। प्रदूषण की वजह से त्वचा को हुए नुकसान की भरपाई पानी से आसानी से की जा सकती है। ओमेगा 3 तथा ओमेगा 6 फैटी एसिड्स त्वचा को प्रदूषण के दुष्प्रभाव से बचाने में अहम भूमिका अदा करते हैं। फैटी एसिड्स त्वचा में ऑयल शील्ड बना देते हैं, जिससे त्वचा को अल्ट्रा वायलेट किरणों से होने वाले नुकसान से सुरक्षा प्राप्त होती है। ओमेगा 3 फैटी एसिड्स, बर्फीले पहाड़ों की नदियों में पाए जाने वाली मछली, अखरोट, राजमा तथा पालक में प्रचूर मात्रा में मिलता है, जबकि ओमेगा 6 चिकन, मीट, खाद्य तेलों, अनाज तथा खाद्य बीजों में पाया जाता है।

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आंखों प्रदूषण से ऐसे बचाएं
वायु में प्रदूषण तथा गंदगी से आंखों में जलन तथा लालिमा आ सकती है। आंखों को ताजे पानी से बार-बार धोना चाहिए। कॉटनवूल पैड को ठंडे गुलाब जल या ग्रीन-टी में डुबोइए तथा इसे आंखों में आई पैड की तरह प्रयोग कीजिए। आंखों में आई पैड लगाने के बाद जमीन में गद्दे पर 15 मिनट तक आराम में शवासन की मुद्रा में लेट जाइए। इससे आंखों में थकान मिटाने में मदद मिलती है, तथा आंखों में चमक आती है।

प्रदूषण से लड़ता है एलोवेरा
वायु में प्रदूषण से शहरों में रहने वाले नागरिकों के स्वास्थ्य तथा तंदुरुस्ती पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। आजकल हम अत्यधिक प्रदूषण स्तर को झेल रहे हैं, जिससे सांस तथा फेफड़ों की बीमारी सामान्य बन गई है। घर के अंदर प्रदूषित हवा से सिरदर्द, आखों में जलन जैसी बीमारियां घर कर रही हैं। वास्तव में सरकारी तथा वैज्ञानिक संगठनों का मुख्य लक्ष्य वर्तमान में विद्यमान प्रदूषण के उच्च स्तर को सामान्य स्तर तक लाना है, जिसे हम कुछ औषधीय पौधों की मदद से प्राप्त कर सकते हैं। इन पौधों में एलोवेरा सबसे लाभदायक माना जाता है, जो कि सामान्यतः सभी भारतीय घरों में आसानी से देखा जा सकता है। यह घरों में आक्सीजन को प्रवाह को तेज करता है तथा प्रदूषण के प्रभाव को कम करता है। यह कार्बन डाई ऑक्साइड तथा कार्बन मोनोऑक्साइड को सोख कर ऑक्सीजन को वातावरण में छोड़ता है।

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ये पेड़ भी करते हैं हवा साफ
इसके अलावा अंजीर, बरगद, पीपल का वृक्ष स्पाइडर प्लांट भी हवा को साफ करने में काफी सहायक माना जाता है क्योंकि यह हवा में विद्यमान जहरीले तत्वों को सोख लेते हैं। इसके अलावा सान्सेवीरिया, जिसे सामान्य भाषा में स्नेक प्लान्ट कहा जाता है भी वायु प्रदूषण को रोकने तथा ताजा स्वच्छ हवा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। स्नेक प्लांट को सामान्यत: बैडरूम में रखा जाता है तथा इसकी देखभाल भी काफी आसान तथा सामान्य है। इसके अलावा ऐरेका पाम, इंग्लिश आईवी, वोस्टनफर्न तथा पीस लिलो जैसे पौधे भी भारत में आसानी से मिल जाते हैं तथा पर्यावरण मित्र माने जाते हैं।

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