नमक जिससे हर व्यंजन में स्वाद आ जाता है और जिसकी अनुपस्थिति से हर खाना बेस्वाद हो जाता है, नमक हमारे आहार में अहम भूमिका निभाता है। नमक जीवन के लिए बहुत जरूरी है और यह भारत की हर रसोई की शान होता है। आज हम इस लेख के जरिए बताएंगे कि गर्भावस्था में नमक क्यों जरूरी है? इस दौरान नमक कब नहीं खाना चाहिए? गर्भावस्था में नमक खाने के फायदे क्या हैं?
- गर्भावस्था में नमक का सेवन क्यों जरूरी है - Pregnancy me namak ka sevan kyu jaruri hai
- गर्भावस्था में नमक की ज्यादा मात्रा लेने के नुकसान - Pregnancy me namak ki jyada matra lene ke nuksaan
- नमक की मात्रा रोजाना कितनी लेनी चाहिए - Namak ki kitni matra leni chahiye
- गर्भावस्था में कब नहीं खाना चाहिए नमक - Pregnancy me kab namak nahi khana chahiye
- गर्भावस्था में काला नमक - Pregnancy me kala namak
गर्भावस्था में नमक का सेवन क्यों जरूरी है - Pregnancy me namak ka sevan kyu jaruri hai
गर्भावस्था में नमक के बिना हमारे शरीर का ठीक से काम कर पाना बहुत मुश्किल होता है। यह सोडियम का अच्छा स्रोत है, जो हमारे शरीर के द्रव स्तर और पीएच संतुलन को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। गर्भावस्था में नमक शरीर में द्रव के स्तर को बनाए रखता है जो आपके बच्चे के विकास में मदद करता है।
गर्भावस्था के दौरान नमक निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण है:
- शरीर में नमक की कमी होने के पर नसें, मांसपेशियां और अन्य अंग गर्भावस्था के दौरान ठीक से काम नहीं कर पाएंगे। (और पढ़ें - मांसपेशियों की कमजोरी दूर करने के उपाय)
- गर्भावस्था में गर्भवती के शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है जो भ्रूण के विकास में मदद करता है और इस प्रक्रिया में सोडियम अहम भूमिका निभाता है।
- नमक में आयोडीन होता है जो भ्रूण के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास के लिए जरूरी होता है।
- गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की कमी से मस्तिष्क का असामान्य विकास, मिसकैरेज और अन्य चिकित्सा संबंधी दिक्क्तों का सामना करना पड़ सकता है।
- गर्भावस्था में पर्याप्त नमक का सेवन न करने के कारण भ्रूण की मृत्यु की संभावना भी रहती है।
गर्भावस्था में नमक की ज्यादा मात्रा लेने के नुकसान - Pregnancy me namak ki jyada matra lene ke nuksaan
किसी भी चीज की अति अच्छी नहीं होती और नमक के ज्यादा सेवन में भी यही बात लागू होती है। गर्भावस्था में नमक का ज्यादा सेवन करने के निम्नलिखित दुष्प्रभाव हो सकते हैं:
- ज्यादा नमक के सेवन से गर्भवती को शरीर में सूजन महसूस हो सकती है।
- अधिक नमक के सेवन से द्रव प्रतिधारण (शरीर में पानी जमा हो जाना) भी हो सकता है।
- अगर आहार में ज्यादा नमक लिया जाएगा तो टखनों, पैरों या चेहरे पर अत्यधिक सूजन हो सकती है। (और पढ़ें - पैरों में सूजन का इलाज)
- खाने में नमक की मात्रा बढ़ने से हाई बीपी या प्रीक्लेम्पसिया होने की संभावना रहती है।
- अधिक मात्रा में नमक लेने से शरीर से कैल्शियम पेशाब के जरिए बाहर निकल सकता है। (और पढ़ें - पेशाब कम आने के कारण)
नमक की मात्रा रोजाना कितनी लेनी चाहिए - Namak ki kitni matra leni chahiye
जैसा की ऊपर बताया गया है कि नमक गर्भावस्था में आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है लेकिन तब जब इसे पर्याप्त मात्रा में लिया जाए, इसका मतलब है कि नमक का सेवन न तो बहुत ज्यादा मात्रा में करना उचित है और न ही कम। गर्भावस्था में सोडियम का सेवन प्रति दिन लगभग 3.8 ग्राम होना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा इसका सेवन 5.8 ग्राम तक किया जा सकता है।
(और पढ़ें - क्या गर्भावस्था में अचार खाना चाहिए)
गर्भावस्था में कब नहीं खाना चाहिए नमक - Pregnancy me kab namak nahi khana chahiye
नमक में सोडियम होता है और बहुत अधिक सोडियम की मात्रा शरीर में अतिरिक्त द्रव प्रतिधारण का कारण बन सकती है, विशेष रूप से तीसरी तिमाही में। गर्भावस्था में सोडियम की जरूरत को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता है। इसलिए नमक का सेवन पूर्णतः बंद नहीं करना चाहिए, लेकिन इसके सेवन में थोड़ी कटौती जरूर की जा सकती है।
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गर्भावस्था में काला नमक - Pregnancy me kala namak
गर्भावस्था के दौरान काले नमक का सेवन करना चाहिए क्योंकि यह पेट की बीमारियों से निजात दिलाने में असरकारी होता है। गर्भावस्था में काला नमक खाने से सीने में जलन और कब्ज आदि समस्याएं नहीं होती। अगर गर्भवती को उच्च रक्तचाप या कोई अन्य दिक्क्त है तो चिकित्सक की सलाह के बिना गर्भावस्था में काले नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।
(और पढ़ें - पेट खराब होने पर क्या करें)
अगर खाने में नमक न हो तो खाने में कोई स्वाद नहीं आता है। नमक जितना जरूरी होता है उतना ही गुणकारी भी है। गर्भावस्था में नमक का सेवन गर्भवती और विकासशील भ्रूण दोनों के लिए बहुत जरूरी होता है। लेकिन नमक का ज्यादा मात्रा में सेवन करने से कई गंभीर समस्याएं भी उतपन्न हो सकती हैं इसलिए ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।



