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गर्भावस्था के दसवें सप्ताह में आने के बाद बच्चे में जन्मजात असामान्यताओं के होने का खतरा कम होता है। लेकिन इस हफ्ते में प्रवेश करने के बाद असामान्यताओं या विकृति होने का खतरा पूरी तरह से तो नहीं ख़त्म होता लेकिन उसके विकास के सबसे महत्वपूर्ण सप्ताह खत्म हो चुके होते हैं। निरंतर देखभाल और चिकित्सा द्वारा आप प्रेगनेंसी के आगे के हफ़्तों में बढ़ सकती हैं। 

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  1. दसवें हफ्ते की गर्भावस्था में शरीर में होने वाले बदलाव - Body changes during 10th week of pregnancy in Hindi
  2. दसवें हफ्ते की गर्भावस्था में भ्रूण का विकास - Baby development in 10th week of pregnancy in Hindi
  3. दसवें हफ्ते के गर्भ का अल्ट्रासाउंड - Ultrasound of 10th week pregnancy in Hindi
  4. दसवें सप्ताह के गर्भधारण के लिए टिप्स - Tips for 10th week pregnancy in Hindi
  5. प्रेगनेंसी के दसवें हफ्ते का डाइट प्लान - Diet plan in 10th week of pregnancy in Hindi
  6. गर्भावस्था का दसवां हफ्ता के डॉक्टर

प्रेगनेंसी के दसवें सप्ताह में भी आपको देखकर नहीं कहा जा सकता है कि आप गर्भवती हैं, लेकिन आपको गर्भवती होने का अनुभव होने लगता है।

अभी तक आपका वज़न तकरीबन एक किलोग्राम ही बढ़ा होता है लेकिन इस सप्ताह से आपको अधिक वज़न बढ़ने का अनुभव होने लगता है। जैसे जैसे आप अपनी पहली तिमाही के अंत तक पहुंचती हैं, मॉर्निंग सिकनेस जैसे अन्य गर्भावस्था में महसूस होने वाले लक्षण थोड़े कम हो जाते हैं।

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दसवें सप्ताह के दौरान आप अपनी प्रेगनेंसी के बारे में अधिक सकारात्मक महसूस करने लगती हैं, क्योंकि आपका पहला चेकअप हो चुका होता है और आप अपने बच्चे के दिल की धड़कन को भी सुन सकती हैं।

भावी माता पिता के लिए यह क्षण बहुत ही रोमांचक होते हैं, और यह आपके शरीर में एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन के बढ़ते स्तरों के कारण उत्पन्न होने वाली नकारात्मक भावनाओं को कम कर करने में मददगार है।

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इस समय शिशु का विकास तेजी से हो ही रहा होता है। हालांकि यह विकास इतनी तेज़ी से होता है कि इसका वर्णन करना थोड़ा कठिन हो जाता है।

इस हफ्ते बच्चा चकोतरे के आकार का हो जाता है। सप्ताह दर सप्ताह आपका बच्चा इसी तेज़ी से बढ़ता रहता है।

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इस हफ्ते आपके बच्चे के अंदरूनी अंगों का विकास होता है जैसे गुर्दे, लिवर, आंतों आदि और मस्तिष्क कार्य करना शुरु कर देता है।

अगले तीन हफ्तों के दौरान आपका बच्चा काफी बड़ा हो जायेगा। पैरों की उंगलियों के नाखून भी दिखाई देने लगेंगे और यदि आप अधिक करीब से देखेंगी तो आपको बच्चे की त्वचा पर रोयें भी दिखाई देंगे।

 

इस सप्ताह के अल्ट्रासाउंड की छवि में बच्चा नवजात शिशु की तरह दिखाई देता है। उसके हाथ और पैर भी दिखाई देते हैं। छवि में चमकदार सफेद क्षेत्रों में चेहरे की हड्डियां होती हैं।

एम्नियोटिक द्रव (Amniotic fluid) आपके बच्चे के केवल बाहर ही नहीं रहता है, शिशु इसे निगल भी सकता है। लेकिन इसमें चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, एम्नियोटिक द्रव बच्चे के लिए हानिकारक नहीं होता है।

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यदि आपने अपना पहला चेकअप करवा लिया है और उस वक़्त आपके पति आपके साथ नहीं थे तो अगली बार आप उन्हें भी ज़रूर लेकर जाएं। ऐसा करने से अगर उनके मन में कोई सवाल होगा तो वह वो भी पूछ लेंगे। डॉक्टर आप दोनों को अल्ट्रासाउंड के माध्यम से बच्चे की दिल की धड़कन सुनाएंगे और साथ ही आप दोनों अपने बच्चे की छवि भी देख सकते हैं। 

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इन सबसे आपके पति को आपकी प्रेगनेंसी के बारे में अधिक रूचि होगी साथ ही वे स्वयं को भी इस प्रक्रिया का हिस्सा महसूस करेंगे। इससे आपके पति और बच्चे के बीच अच्छे सम्बन्ध बनेंगे जो गर्भधारण के समय बहुत महत्वपूर्ण होता है।

अपने लिए मातृत्व कपड़े खरीदना भी शुरू कर दीजिये क्योंकि अब आपको नए साइज के कपड़ों की आवश्यकता बहुत जल्द पड़ेगी।

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9 से 12 सप्ताह तक के समय का डाइट प्लान लगभग समान ही होता है। विटामिन बी, कैल्शियम और मैग्नीशियम आदि पोषक तत्वों से युक्त खाद्य पदार्थ आपके और आपके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी होते हैं। कैल्शियम बच्चे के दांतों और हड्डियों आदि को मजबूत बनाने में मदद करता है। 

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  1. पेय पदार्थों का पर्याप्त मात्रा में सेवन करें। पानी के आलावा आप आम का पना, जल जीरा, अदरक की चाय और टमाटर का सूप आदि भी पी सकती हैं।
  2. ब्राउन राइस, मुर्गा, मछली और एवोकाडो तथा बिना चर्बी के मांस आदि विटामिन बी 6 के अच्छे स्रोत हैं। (और पढ़ें - प्रेगनेंसी डाइट चार्ट)
  3. मैग्नीशियम आपके बच्चे का सही वजन बनाए रखने में मदद करता है। हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मूली के पत्ते, सरसों के साग, मेथी के पत्ते, सूखे मेवे, मछली आदि मैग्नीशियम के प्रमुख स्रोत हैं।
  4. विटामिन बी12, गर्भावस्था के दौरान खून की कमी होने से रोकता है। विटामिन बी12 के लिए, आप प्रतिदिन सोया मिल्क और स्प्राउट्स का सेवन करें। (और पढ़ें - गर्भावस्था में खून की कमी)
Dr. Deepak Waghmare

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