गर्भावस्था के 24वें सप्ताह में आने पर दूसरी तिमाही का अंत और तीसरी तिमाही की शुरुआत का समय निकट होता है। बच्चे के जन्म में किसी प्रकार की जटिलता न हो इसलिए नियमित रूप से जांच कराते रहना चाहिए। गर्भकालीन डायबिटीज (Gestational diabetes) की जांच के लिए ग्लूकोज टेस्ट कराएं क्योंकि यह गर्भावस्था के समय ही होती है। लगभग 2-5 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं इससे ग्रस्त होती हैं इसलिए यह स्क्रीनिंग (टेस्ट) गर्भावस्था के 24वें और 28वें सप्ताह के बीच किया जाता है।

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  1. 24वें हफ्ते की गर्भावस्था में शरीर में होने वाले बदलाव - Body changes in 24 week pregnancy in Hindi
  2. चौबीसवें हफ्ते की गर्भावस्था में शिशु का विकास - Baby development in 24th week of pregnancy in Hindi
  3. चौबीसवें हफ्ते के गर्भ का अल्ट्रासाउंड - Ultrasound of 24 weeks pregnancy in Hindi
  4. 24वें सप्ताह के गर्भधारण के लिए टिप्स - Pregnancy tips for 24th week in Hindi
  5. प्रेगनेंसी के चौबीसवें हफ्ते में डाइट - Diet for 24th week of pregnancy in Hindi
  6. गर्भावस्था का 24वां सप्ताह के डॉक्टर

24वें सप्ताह में कुछ महिलाएं ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन (Braxton Hicks contractions) का अनुभव करना शुरू कर देती हैं। ये कभी कभी गर्भाशय के तन (Tightening) जाने के कारण हैं। आपका पेट संभवत: पहले से थोड़ा अधिक दिखाई देने लगेगा क्योंकि इस समय वो लगभग दो इंच तक और बढ़ जाता है। जैसे जैसे आपके पेट और स्तनों के चारों ओर की त्वचा फैलती है, शुष्क होने के कारण उसमें खुजली भी होने लगती है।

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अगर त्वचा के सूखेपन की बात करें तो कुछ महिलाओं को इस स्तर पर आंखें सूखने की शिकायत भी होती है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए चिकित्सक से परामर्श करके आंखों की ड्रॉप्स (Eye drops) का उपयोग करें। कई गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान दृष्टि के धुंधले होने का अनुभव होता है, लेकिन यह कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं है। म्यूकस झिल्ली (Mucous membranes) में सूजन के कारण, इस समय महिलाएं सर दर्द और बंद नाक से पीड़ित हो जाती हैं। डॉक्टर से सुझाव लेकर ही इनका उपचार करें।

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शिशु इस सप्ताह लम्बाई में लगभग एक फुट और आकार में मक्के की बाली के समान, लगभग 680 ग्राम (पिछले हफ्ते से लगभग 113 ग्राम अधिक) का होता है। मस्तिष्क के विकास के साथ साथ उसकी स्वाद ग्रंथियां और फेफड़े भी विकसित हो रहे होते हैं। फेफड़ों में मासपेशियां और कोशिकायें भी विकसित होने लगती हैं जिनसे एक रासायनिक एजेंट उत्पन्न होता है जिसे सर्फेक्टेंट (Surfactant) कहते हैं, जिसकी शिशु को गर्भ के बाहर सांस लेने के लिए आवश्यकता होती है। अगर एक बच्चा समय से पहले इस सप्ताह या आने वाले कुछ हफ्तों में जन्म लेता है तो इसकी कमी की वजह से साँस लेने में समस्या हो सकती है। उसकी आंखें अभी भी बंद होती हैं लेकिन वो अपने हाथों और पैरों से गतिविधियां करता है और स्पर्श पहचानने की योग्यता विकसित करता है। सिर के बाल अभी भी बढ़ रहे होते हैं और बच्चा अपने फेफड़ों से सांस लेने के अभ्यास करना शुरु कर देता है।

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अल्ट्रासाउंड में बाईं ओर बच्चे के हृदय के चारों कक्ष दिखाई देते हैं। दायीं ओर हृदय के ऊपरी कक्षों (एट्रिया) से निचले कक्षों (वेन्ट्रिकल्स) में बहने वाले रक्त का चित्र दिखाई देता है। वेन्ट्रिकल्स (Ventricles) की दीवारें एट्रिया (Atria) से अधिक मोटी होती हैं, क्योंकि बच्चे के फेफड़ों और शरीर के बाकी हिस्सों में रक्त इन्हीं के द्वारा पहुंचाया जाता है।

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यदि आपने अभी तक प्रेगनेंसी योगा क्लासेस जाना शुरु नहीं किया है तो अब जाना शुरु कर दें। अगर आपको ऐसी क्लासेज का पता नहीं लग रहा है तो अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करें।

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इस समय सभी पोषक तत्वों की आवश्यकता बढ़ जाती है, जिसके लिए आपको विभिन्न प्रकार के फलों के साथ साथ कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और डेयरी खाद्य पदार्थ आदि का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा, कोलेस्ट्रॉल और विटामिन ए भी इस तिमाही में बहुत आवश्यक होते हैं।

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  1. विटामिन ए दृष्टि बढ़ाता है और कोशिकाओं के विकास में मदद करता है। विटामिन ए के लिए अपने दैनिक आहार में अंडे की जर्दीदूध और दूध से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करें। (और पढ़ें - गर्भावस्था में खून की कमी)
  2. गाजर, शकरकंद, पपीते और संतरों का सेवन करें जो विटामिन ए के भी बहुत अच्छे स्रोत हैं। (और पढ़ें - प्रेगनेंसी डाइट चार्ट)
  3. कोलेस्ट्रॉल स्तर को बनाए रखें इससे समय से पहले डिलीवरी होने की संभावना कम होती है।
  4. स्वस्थ पेय पदार्थों में आप तरबूज का रसचुकंदर और गाजर का रस पी सकती हैं। लेकिन जहां तक संभव हो घर के बने जूस का ही सेवन करें। (और पढ़ें - गर्भावस्था में ये हेल्दी जूस हैं काफी फायदेमंद)
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