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आपने गर्भावस्था के 23वें सप्ताह में कदम रख लिया है और इस दौरान मां और बच्चे दोनों का वजन बढ़ना चाहिए। इसका मतलब है कि इस हफ्ते में आपका पेट यानी बेबी बंप और ब्रेस्ट दोनों ही कुछ और बड़े हो जाएगें। यह इस बात का संकेत है कि आपका शिशु गर्भ के अंदर बेहतर तरीके से विकसित हो रहा है। अगर आप गर्भावस्था के दौरान अपनी डाइट का ध्यान रख रही हैं, गर्भावस्था के दौरान बताए जाने वाले व्यायाम कर रही हैं और अपनी डॉक्टर की सलाह के मुताबिक प्रेगनेंसी में नियमित रूप से चेकअप के लिए जा रही हैं तो आपकी प्रेगनेंसी में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

वैसे तो प्रेगनेंसी के 23वें हफ्ते तक आते-आते गर्भवती महिलाओं का वजन भी बढ़ जाता है। लेकिन अगर कोई आपसे यह कह रहा हो कि प्रेगनेंसी के हफ्तों के हिसाब से आपका वजन बहुत कम या बहुत अधिक है तो दूसरों की बात सुनने की बजाए सिर्फ इतना याद रखें कि हर महिला का शरीर का गर्भावस्था का अनुभव अलग-अलग होता है। जब तक आपकी डॉक्टर आपसे ये कह रही हैं कि आप और आपका बच्चा पूरी तरह से ठीक है तो आपको वजन बढ़ने को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है।

अगर आप प्रेगनेंसी के इस समय पर पोषक तत्वों से भरपूर चीजों का सेवन करेंगी, सही तरीके से एक्सर्साइज करेंगी, अपनी और अपने होने वाले बच्चे की सेहत का ध्यान रखेंगी तो प्रेगनेंसी के बाद आपके लिए गर्भावस्था के दौरान बढ़े वजन को कम करना आसान होगा। 

(और पढ़ें: गर्भ में बच्चा लात (किक) कब और क्यों मारता है)

बच्चे के विकास की बात करें तो इस समय तक आपका बच्चा किक करने लायक हो जाता है और बच्चे की श्रवण इंद्रियां भी इतनी विकसित हो चुकी होती हैं कि बच्चा, गर्भ में रहते हुए भी आपकी बातों को सुन सकता है। लिहाजा इस समय जितना हो सके अपने बच्चे से बातें करें, उसे गाना सुनाएं, और इन बातों को नोट करें कि कब आपका बच्चा सबसे ज्यादा ऐक्टिव रहता है और आपकी किन बातों पर प्रतिक्रिया देता है। प्रेगनेंसी के 23वें हफ्ते में वैसे तो भ्रूण का अल्ट्रासाउंड नहीं होता लेकिन अगर प्रेगनेंसी में कोई जटिलता हो या आपके गर्भ में एक से ज्यादा बच्चे हों तो अल्ट्रासाउंड हो सकता है। लिहाजा इस हफ्ते में आप रिलैक्स करें, गर्भावस्था की रूटीन को फॉलो करें और अपने बच्चे को बेहतर तरीके से जानने की कोशिश करें।

गर्भावस्था के 23वें सप्ताह में महिला को अपना और बच्चे का स्वास्थ्य जानने के लिए नियमित रूप से प्रसव पूर्व जांचों (Antenatal check ups) के लिए जाना चाहिए। जैसे जैसे दूसरी तिमाही समाप्त होने वाली होती है डॉक्टर के लिए ये जांचें करना आवश्यक हो जाता है।

(और पढ़ें - गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर से चेकअप)

  1. 23वें हफ्ते की गर्भावस्था में शरीर में होने वाले बदलाव - Changes in body during 23rd week of pregnancy in Hindi
  2. तेईसवें हफ्ते की गर्भावस्था में शिशु का विकास - Baby development in 23rd week of pregnancy in Hindi
  3. तेईसवें हफ्ते के गर्भ का अल्ट्रासाउंड - Ultrasound at 23 weeks of pregnancy in Hindi
  4. 23वें हफ्ते में गर्भावस्था के लक्षण - Pregnancy week 23 symptoms
  5. गर्भावस्था के 23वें सप्ताह में ये चीजें जरूर करें - Tips for 23 weeks pregnancy in Hindi
  6. प्रेगनेंसी के तेईसवें हफ्ते का डाइट प्लान - Diet plan for 23 weeks pregnancy in Hindi

बच्चे के बढ़ते वजन की वजह से आपका गर्भाशय लगभग 1½ इंच ऊपर आ जायेगा और जैसे-जैसे आपका गर्भाशय बड़ा होता जाता है आपको अपने फेफड़ों और ब्लैडर पर ज्यादा दबाव महसूस होने लगेगा। फेफड़ों पर दबाव की वजह से सांस फूलने लगती है जबकी ब्लैडर पर दबाव की वजह से प्रेगनेंसी के दौरान बार-बार पेशाब जाने की जरूरत महसूस होती है। इन दोनों ही चीजों की वजह से आपकी परेशानी बढ़ सकती है।

इस समय के आसपास अमीनियोटिक फ्लूइड लीक होने की भी आशंका रहती है जो कि चिंता का विषय है। हालांकि यह पहचानना मुश्किल होता है कि जो लीक हो रहा है वह यूरिन है या अमीनियोटिक फ्लूड। लिहाजा इस बात की जांच करते रहें और अमीनियोटिक फ्लूइड लीक हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

(और पढ़ें - प्रेगनेंसी में होने वाली समस्याएं)

कई बार कमजोर गर्भाशय ग्रीवा की वजह से भी अमीनियोटिक फ्लूइड लीक होने लगता है, लिहाजा प्रेगनेंसी के 23वें हफ्ते के आसपास ग्रीवा के खुलने को चेक करवाना जरूरी होता है। इस दौरान अपनी पेल्विक मासंपेशियों को मजबूत बनाने के लिए पेल्विक फ्लोर एक्सर्साइज करना भी जरूरी होता है। इस हफ्ते आपको अपने पैरों को ऊपर रखना चाहिए ताकि सूजन न हो, पूरा आराम करना चाहिए, अच्छी तरह से स्वस्थ और संतुलित डाइट का सेवन करना चाहिए, एक्सर्साइज करनी चाहिए और पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

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गर्भावस्था के 23वें हफ्ते में गर्भ में पल रहे आपके शिशु की लंबाई सिर से लेकर पैर तक 28.9 सेंटिमीटर या 11.4 इंच के आसपास होती है। वैसे तो इस समय शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में शिशु का सिर बहुत बड़ा होता है लेकिन बाकी के अंग भी अब तक विकसित हो जाते हैं। बच्चे के वजन की बात करें तो इस समय तक बच्चे का वजन करीब 500 ग्राम हो जाता है और यहां से प्रेगनेंसी के बाकी के हफ्तों में बच्चे का वजन बढ़ना शुरू होता है। 

बच्चे की त्वचा में अब भी काफी झुर्रियां होती हैं लेकिन यह धीरे-धीरे भरने लग जाती है जैसे-जैसे बच्चे का वजन बढ़ने लगात है। आपके बच्चे की त्वचा पर मौजूद बाल अब गहरे रंग का होने लगता है और यह अल्ट्रासाउंड में नजर भी आने लगता है।

इस हफ्ते आप अपने गर्भ में बच्चे को घूमते हुए और किक मारते हुए महसूस कर सकती हैं। आपका बच्चा दिन के किस समय सबसे ज्यादा ऐक्टिव रहता है, कौन सी बातें उसे उत्तेजित करती हैं और कब वह प्रतिक्रिया देता है, इन सारी चीजों को नोट करके रखें। ऐसा करना इसलिए जरूरी है क्योंकि अगर आपका बच्चा कम किक मारता है या कम सक्रिय हो जाता है तो यह किसी खतरे का संकेत हो सकता है। ऐसे समय में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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सोनोग्राफी में बच्चे के पैर उसकी छाती की ओर होते हैं। आप उसकी लगभग पूरी छवि देख सकती हैं। बच्चे के पूरे शरीर का चित्र निकालना अब मुश्किल हो सकता है क्योंकि अब वह लंबाई में 8 इंच से अधिक लम्बा हो गया है। आने वाले हफ्तों में उसका वजन बढ़ सकता है लेकिन अभी के लिए वह अपेक्षाकृत काफी पतला होता है।

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गर्भावस्था की पहली तिमाही में जो लक्षण आपको महसूस होते थे जैसे- मॉर्निंग सिकनेस आदि वह सब आपको 23वें हफ्ते में महसूस नहीं होगा लेकिन आपको कई दूसरी चीजें अनुभव करनी पड़ सकती हैं। इन लक्षणों से पेश आने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आप प्रसवपूर्व अपना पूरा ध्यान रखें, आराम करें और किसी भी तरह की जटिलता नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। गर्भावस्था के 23वें हफ्ते के सामान्य लक्षण ये हैं:

साइटिक तंत्रिका में दर्द: जैसे-जैसे आपके बच्चे का वजन बढ़ने लगता है, उसकी वजह से आपके साइटिक तंत्रिका (नसों में) पर अतिरिक्त भार पड़ने लगता है। यह नस, गर्भाशय के नीचे से शुरू होकर नीचे पैरों तक जाती है। इस वजह से साइटिक तंत्रिका नस के रास्ते में दर्द महसूस हो सकता है। यह दर्द लगातार बना रह सकता है या फिर आता-जाता भी रह सकता है।

वेरिकोज वेन्स: बच्चे के बढ़ते वजन और हार्मोन्स में होने वाले बदलाव की वजह से कुछ महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान वेरिकोज वेन्स की भी समस्या हो सकती है। इस स्थिति में पैरों की नसों में, योनिमुख या मलाशय की नसों में सूजन आ जाती है और त्वचा पर आपको ये नसें नीली या बैंगनी रंग की नजर आने लगती हैं। 

राउंड लिगामेंट पेन: प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में बहुत सी महिलाओं को ग्रोइन यानी पेड़ू और जांघ के जोड़ के हिस्से में या फिर पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द महसूस होता है जिसे राउंड लिगामेंट पेन कहते हैं। राउंड लिगामेंट एक स्ट्रेक्चर होता है जिसमें खिंचाव की वजह से यह दर्द होता है और चलने या गतिविधियां करने पर ज्यादा महसूस होता है। वैसे तो यह दर्द पूरी तरह से सामान्य है लेकिन फिर भी अगर आपको ज्यादा तकलीफ महसूस हो रही हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।

ब्रैक्सटन हिक्स संकुचन: वैसे तो इस तरह का गर्भाशय संकुचन गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में देखने को मिलता है लेकिन कई बार यह दूसरी तिमाही में भी हो सकता है। जब प्रेगनेंसी के दौरान इस तरह का संकुचन महसूस होता है तो गर्भाशय की दीवारें 30 या 60 सेकंड के लिए टाइट हो जाती हैं। कुछ संकुचन 2 मिनट तक का भी हो सकता है। अगर इस तरह का संकुचन बार-बार हो और साथ में तेज दर्द भी हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।

नींद से जुड़ी दिक्कतें: गर्भावस्था और लेबर पेन को लेकर तनाव और बेचैनी महसूस होने की वजह से दूसरी तिमाही में नींद से जुड़ी दिक्कतें भी हो सकती हैं। इसके अलावा दर्द, क्रैम्प्स, गर्भ में भ्रूण की गतिविधियां आदि भी गर्भवती महिला की नींद को खराब करने का काम करती हैं।

थकान: इस हफ्ते में थकान भी आपको ज्यादा महसूस होगी। वैसे तो दूसरी तिमाही में महिलाओं को कम थकान महसूस होती है लेकिन अगर आपको ज्यादा थकान लग रही हो तो परेशान न हों, आखिर आप अपने अंदर एक जीवन को बढ़ने में मदद कर रही हैं।

मेलास्मा: इसे मास्क ऑफ प्रेगनेंसी भी कहते हैं। गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में बहुत सी महिलाओं को मेलास्मा का अनुभव होता है। इस दौरान माथे पर, गाल में, नाक या होंठों पर अनियमित और गहरे रंग के निशान बन जाते हैं। गर्भावस्था के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से मेलास्मा होता है।

कई दूसरे लक्षण: ऊपर बताए गए सभी लक्षण आमतौर पर दूसरी तिमाही में होते हैं लेकिन पहली तिमाही के कुछ लक्षण भी हो सकता है कि बरकरार रहें या फिर ज्यादा गंभीर हो जाएं। वे लक्षण हैं- मसूड़ों से खून आना, मसूड़ों में सूजन, सीने में जलन, अपच और बदहजमी, पेट फूलना, कब्ज, ब्रेस्ट में सूजन, सिर में दर्द, नाक से खून आना, मूड स्विंग्स आदि।

गर्भावस्था के 23वें हफ्ते में कुछ चीजें ऐसी हैं जिन्हें आपको निश्चित तौर पर करना चाहिए ताकि प्रेगनेंसी का यह हफ्ता और गर्भावस्था के बाकी बचे दिन भी बेहतर तरीके से गुजरें:

  • अपने डॉक्टर से बात करें और पेल्विक फ्लोर एक्सर्साइज करना शुरू करें ताकि आपकी पेल्विक मांसपेशियां मजबूत बनें। साथ ही अपने गर्भाशय ग्रीवा की ओपनिंग को भी डॉक्टर से चेक करवा लें ताकि आपकी प्रेगनेंसी के बाकी बचे दिन सुरक्षित तरीके से गुजरें। वैसी महिलाएं जिनका सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) कमजोर होता है उन्हें डॉक्टर सर्वाइकल सरक्लाज यानी कमजोर ग्रीवा में टांके लगवाने की सलाह देते हैं ताकि सर्विक्स बहुत जल्दी न खुल जाए।
  • अगर आपको किसी भी तरह के संक्रमण का खतरा हो, अगर आपको खुद में डिप्रेशन या किसी और जटिलता के कोई भी लक्षण नजर आ रहे हों तो डॉक्टर से बात करें और उनसे पूछें कि क्या आप चेकअप के लिए आ सकती हैं। यह जरूरी है कि क्योंकि इलाज में देरी से बीमारी के लक्षण और भी गंभीर हो सकते हैं। लेकिन अगर समय पर इलाज हो जाए तो आपकी और बच्चे दोनों की सेहत बेहतर बनी रहेगी।
  • जहां तक संभव हो अपने लिए मैटरनिटी कपड़ों की व्यवस्था कर लें और टाइट-फिटिंग वाले कपड़े बिलकुल न पहनें क्योंकि इनकी वजह से पैरों में सूजन बढ़ सकती है जिस कारण दर्द ज्यादा होता है।

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23वें हफ्ते का डाइट प्लान 21वें और 22वें हफ्ते की तरह ही होता है। अपने भोजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और डेयरी खाद्य पदार्थों को शामिल करें। इसके अलावा, विटामिन ए और कोलेस्ट्रॉल का सेवन भी ज़रूर करना चाहिए।

(और पढ़ें - गर्भावस्था में क्या खाएं और क्या ना खाएं)

  1. शरीर में कोलेस्ट्रॉल स्तर को बनाए रखना बहुत आवश्यक होता है क्योंकि यह प्लेसेंटा को स्वस्थ रखने में मदद करता है। 
  2. तरल पदार्थों में तरबूज का रस, खुबानी शेक, चुकंदर और गाजर का रस पिएं लेकिन घर के बने जूस का ही सेवन करें इससे संक्रमण से बचने में मदद मिलती है। (और पढ़ें - गर्भावस्था में ये हेल्दी जूस हैं काफी फायदेमंद)
  3. बीटा कैरोटीन के लिए गाजर, शकरकंद, पपीते और संतरों का सेवन करें। (और पढ़ें - प्रेगनेंसी डाइट चार्ट)
  4. विटामिन ए लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करता है। अपने दैनिक आहार में अंडे की जर्दी, मक्खन और दूध आदि को शामिल करके आप विटामिन ए की पूर्ति कर सकती हैं।
  5. ये चीजें न खाएं- गर्भावस्था के दौरान ऐसी चीजें न खाएं जो मना हो। खासकर कच्चे खाद्य पदार्थ जैसे- कच्ची मछली, कच्चा अंडा या कच्चा सीफूड और सॉफ्ट चीज। इन चीजों के सेवन से सैल्मोनेला और लिस्टेरिओसिस जैसे इंफेक्शन का खतरा अधिक होता है। (और पढ़ें: क्या गर्भावस्था में मछली खा सकते हैं)
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References

  1. American Pregnancy Association [Internet]. Irving, Texas, USA; Pregnancy Week 23
  2. Start4Life. National Health Service [Internet]. Hertfordshire. UK; Week 23 – your second trimester
  3. The Fetal Medicine Foundation [Internet]. London. United Kingdom; The 18-23 Weeks Scan
  4. Heath, VC. et al. Cervical Length at 23 Weeks of Gestation: The Value of Shirodkar Suture for the Short Cervix. Ultrasound Obstet Gynecol . 1998 Nov;12(5):318-22. PMID: 9819869
  5. Heath, VC. et al. Cervical Length at 23 Weeks of Gestation: Relation to Demographic Characteristics and Previous Obstetric History. Ultrasound Obstet Gynecol . 1998 Nov;12(5):304-11. PMID: 9819867
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  7. Mehler, Katrin. et al. Survival Among Infants Born at 22 or 23 Weeks' Gestation Following Active Prenatal and Postnatal Care. JAMA Pediatr . 2016 Jul 1;170(7):671-7. PMID: 27214875
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