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गर्भावस्था के ग्यारहवें सप्ताह के दौरान, माँ और बच्चे में कई बदलाव होते हैं। माँ शायद इस हफ्ते तक बच्चे के दिल की धड़कन सुन चुकी होती हैं और गर्भावस्था के कुछ लक्षण जैसे मॉर्निंग सिकनेस आदि समाप्त हो जाते हैं। गर्भवती महिला को इस सप्ताह से काम कम और रात में घर से बाहर निकलकर सैर करनी चाहिए।

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  1. ग्यारहवें हफ्ते की गर्भावस्था में शरीर में होने वाले बदलाव - Body changes during 11th week of pregnancy in Hindi
  2. ग्यारहवें हफ्ते की गर्भावस्था में भ्रूण का विकास - Baby development in 11th week of pregnancy in Hindi
  3. ग्यारहवें हफ्ते के गर्भ का अल्ट्रासाउंड - Ultrasound of 11th week pregnancy in Hindi
  4. ग्यारहवें सप्ताह के गर्भधारण के लिए टिप्स - Tips for pregnancy week 11 in Hindi
  5. प्रेगनेंसी के ग्यारहवें हफ्ते की डाइट - Diet in 11th week of pregnancy in Hindi

ग्यारहवें सप्ताह से लोग आपको देखकर बोलने लगेंगे कि आप गर्भवती हैं, क्योंकि आपके शारीरिक बदलाव इस सप्ताह से नज़र आने लगेंगे। आपका वज़न बढ़ने लगेगा, स्तन सामान्य से अधिक बड़े और असहज हो जायेंगे और आपका पेट भी इस हफ्ते से दिखाई दे सकता है।

प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ने के कारण आपकी आंतों की कार्य करने की क्षमता में कमी आती है जिसकी वजह से शरीर के अपशिष्ट पदार्थ ठीक प्रकार से बाहर नहीं निकल पाते और पेट फूलने की समस्या हो जाती है। इस कारण इस चरण में कब्ज आदि की समस्या होती है।

हालांकि, कुछ महिलाओं में यह समस्या शुरुआत में नहीं होती है। 

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इस दौरान आप अपने बालों, पैरों और हाथों के नाखूनों में भी बदलाव देख सकती हैं, जो अत्यधिक तेज़ी से बढ़ रहे होते हैं। ये सब भी हार्मोन में अचानक से वृद्धि होने के कारण होता है। गर्भावस्था किसी न किसी तरह से आपके शरीर की हर कोशिका को प्रभावित करती है।

ज्यादातर महिलाएं इस सप्ताह से पेट में होने वाली हलचल की तुलना बच्चे की गतिविधियों से कर लेती हैं, लेकिन वास्तव में यह हलचल आपके पाचन तंत्र में गैस बनने के कारण होती है न कि बच्चे के हिलने डुलने के कारण। हॉट फ्लैशेस या सामान्य से अधिक गर्मी लगना इस सप्ताह के लिए सामान्य है। ऐसा आपके शरीर में रक्त की मात्रा में वृद्धि होने के कारण होता है। 

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जैसे जैसे पहली तिमाही का अंत समय निकट आता है, ज्यादातर महिलाओं का वज़न लगभग एक से दो बढ़ जाता है।

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आपका बच्चा इस समय तक 2½ इंच लंबा और वजन में लगभग 14 ग्राम का हो चुका होता है। उसका सिर शरीर के आकार का लगभग आधा होता है।

हाथ और पैर की उंगलियां एक दूसरे से पूरी तरह से अलग हो जाती हैं। बच्चे की हड्डियां सख्त और मज़बूत होने लगती हैं, लेकिन उसकी त्वचा अभी भी पारदर्शी होती है। शिशु बहुत सक्रिय हो जाता है लेकिन वह अभी भी मां को गतिविधियां महसूस कराने के लिए बहुत छोटा होता है।

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एम्नियोटिक द्रव (Amniotic fluid) से घिरे होने के बावजूद शिशु निगलना सीख लेता है। अन्य अंगों का विकास हो रहा होता है और उनमें से कुछ कार्य भी करने लगते हैं। अगले तीन हफ्तों में बच्चा आकार में दोगुना हो जायेगा।

आपके बच्चे को पोषक तत्वों और ऑक्सीजन पहुंचने के कारण प्लेसेंटा में अधिक रक्त वाहिकाएं दिखाई देंगी ताकि शिशु जल्द से जल्द विकास करे। कान आदि अन्य अंग सही स्थिति में आ जाते हैं।

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बच्चा अल्ट्रासाउंड में पीठ के बल लेता हुआ दिखाई देता है और उसका सिर बाईं ओर और उसके पैर ऊपर की ओर दिखाई देते हैं। इसमें आप देख सकेंगी कि उसकी गर्दन पहले से बड़ी होकर उसके शरीर और सिर में अंतर पता लगाने में मदद करती है। उसका सिर अभी उसके शरीर के आकार का 50% से अधिक भाग बनाता है, जो सामान्य है। चेहरे की हड्डियों को फिर से सफेद चमकदार क्षेत्रों के रूप में देखा जा सकता है।

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अगर गर्भवती होने से पहले आपका वजन कम या अधिक होता है तो डॉक्टर आपको पहली तिमाही के दौरान क्रमशः वज़न बढ़ाने और घटाने के लिए कहते हैं। अपने बच्चे को उचित पोषक तत्व देने के लिए अपने डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें।

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यदि पहली तिमाही के अंत तक आपका वज़न दो किलोग्राम से भी अधिक बढ़ गया है तो आपको अपने खाने की आदतों में थोड़े से बदलाव करने से पहले डॉक्टर से सलाह ले लेनी चाहिए। क्योंकि बच्चे के स्वास्थय के लिए एक दिन में केवल 300 अतिरिक्त कैलोरी का सेवन करने की ज़रूरत होती है।

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पूरी गर्भावस्था के दौरान सामान्य भार वाली किसी महिला का 11 किलो तक का वज़न बढ़ना, गर्भावस्था वजन में अच्छी वृद्धि मानी जाती है।

प्रेगनेंसी के 11 वें सप्ताह तक के समय का डाइट प्लान 9वें और 10वें सप्ताह के समान ही होता है। विटामिन, कैल्शियम और मैग्नीशियम आदि पोषक तत्व मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं।

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  1. विटामिन बी6 आपके शरीर में स्टोर खाद्य पदार्थों से ऊर्जा का उपयोग करने में मदद करता है। मुर्गा, मछली और एवोकाडो आदि विटामिन बी 6 के अच्छे स्रोत हैं। (और पढ़ें - प्रेगनेंसी डाइट चार्ट)
  2. पालक, मूली के पत्ते, सरसों के साग, मेथी के पत्ते, सूखे मेवे, डेयरी उत्पाद, मछली और मांस आदि मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं।
  3. पेय पदार्थों का पर्याप्त मात्रा में सेवन करें। पानी के आलावा पेय पदार्थों में जल जीरा, अदरक की चाय और टमाटर के सूप आदि का सेवन करें।
  4. विटामिन बी12 के लिए, आप अपने आहार में सोया मिल्क और अंकुरित अनाज आदि शामिल कर सकती हैं। ये इस दौरान खून की कमी नहीं होने देते। (और पढ़ें - गर्भावस्था में खून की कमी)
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