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गर्भावस्था के पन्द्रहवें हफ्ते और दूसरे तिमाही के दौरान महिलाओं को थोड़ा अधिक आराम करने की ज़रूरत होती है। गर्भावस्था के खराब लक्षणों में से अधिकांश, जैसे मतली, मॉर्निंग सिकनेस और थकान आदि दिन पर दिन कम होते जाते हैं। लेकिन प्रसव से कुछ समय पहले महसूस होने वाले दर्द अभी महसूस नहीं होते इसलिए अभी आप अपनी प्रेगनेंसी का आनंद लें और किसी भी प्रकार की समस्या महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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  1. पन्द्रहवें हफ्ते की गर्भावस्था में शरीर में होने वाले बदलाव - Body changes in 15th week of pregnancy in Hindi
  2. 15वें हफ्ते की गर्भावस्था में भ्रूण का विकास - Baby development in 15th week of pregnancy in Hindi
  3. पन्द्रहवें हफ्ते के गर्भ का अल्ट्रासाउंड - Ultrasound in 15th week of pregnancy in Hindi
  4. 15वें सप्ताह के गर्भधारण के लिए टिप्स - Tips for 15th week of pregnancy in Hindi
  5. प्रेगनेंसी के पन्द्रहवें हफ्ते की डाइट - Diet during 15th week of pregnancy in Hindi

जैसा कि इस सप्ताह से पहले के लेखों में बताया जा चुका है कि पन्द्रहवें हफ्ते में आपके शरीर के भीतर होने वाले बदलाव नज़र नहीं आते हैं। लेकिन इस सप्ताह तक कई महिलाओं का वज़न लगभग 2 किलो तक बढ़ जाता है। हालांकि प्रत्येक महिला अलग अलग भर अर्जित करती है।

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निर्धारित भार से थोड़ा अधिक या कम वज़न होना स्वाभाविक है। इस हफ्ते के दौरान गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे कठिन स्थिति यह होती है कि गर्भाशय को सहारा देने वाली अस्थियों के बढ़ने के कारण पेट में तेज दर्द होता है।

(और पढ़ें - गर्भावस्था में दर्द, सामान्य हैं या नहीं)

इस हफ्ते तक आपका बच्चा पिछले हफ़्तों की अपेक्षा काफी बड़ा हो जाता है। उसका वज़न करीब 50 ग्राम और लंबाई चार इंच हो जाती है। उसके गर्भरोम (कोमल बाल या रोम) जिन्हें लैन्यूगो भी (Lanugo) कहते हैं, बच्चे के शरीर के तापमान को स्थिर रखने के लिए त्वचा को ढक लेते हैं।

गर्भरोम केवल तब तक ही रहते हैं जब तक बच्चा पैदा नहीं होता अर्थात गर्भ में रहता है इसी कारण इन्हें गर्भरोम कहते हैं और यह बच्चे के जन्म से तुरंत पहले गायब हो जाते हैं। पन्द्रहवें सप्ताह के दौरान गर्भ के अंदर कई अच्छी और नयी चीजें होती हैं।

कान की हड्डियां सख्त हो रही होती हैं और आपका बच्चा अब ध्वनि सुनने में सक्षम होता है। यहां तक कि वो मां के दिल की धड़कन, उनकी आवाज़ और सांस लेने की ध्वनि आदि भी सुनने लगता है।

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महिला को अभी तक बच्चे की किक या गतिविधियां महसूस कर सकती है नहीं होती हैं। कभी कभी केवल महिला को हिचकियां आ सकती हैं। ये गतिविधियां गर्भावस्था में आगे के हफ़्तों में महसूस हो सकती हैं।

आपका बच्चा मुँह बनाने लगता है जैसे भौहें बनाना, आँखें मीचना और अंगूठा चूसना आदि। पिछले हफ्ते की अपेक्षा हाथ और पैर, सिर से ज्यादा लंबे हो जाते हैं और यह महत्वपूर्ण भी है क्योंकि अब तक भ्रूण का सबसे बड़ा हिस्सा सिर ही रहा है। स्वाद ग्रंथियों का निर्माण होने लगता है और पैर और हाथ के नाखून बढ़ने लगते हैं।

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इस सप्ताह के अल्ट्रासाउंड की छवि में, बच्चे के हाथ उसके चेहरे के ऊपर होते हैं। उसकी बड़ी बड़ी हड्डियां जो उसकी खोपड़ी बनाती हैं, वे सख्त होने लगती हैं। जैसे ही ये कठोर होती जाती हैं, अल्ट्रासाउंड में ये अधिक सफेद और चमकदार दिखाई देने लगती हैं। जब तक बच्चे का जन्म नहीं होता ये आपस में सही से जुड़ती नहीं हैं।

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चूंकि आपका पेट अभी तक इतना नहीं बढ़ा है कि आपको उसकी वजह से परेशानी महसूस हो और न ही आपका वजन इतना ज्यादा हुआ है। आपने अभी तक नई स्थिति में चलना भी नहीं शुरु किया है। इसलिए ये सब सीखने के लिए यह सप्ताह बिलकुल उपयुक्त है। अब से आप प्रेगनेंसी में सोने का बेहतर तरीका कौन सा है, कैसे बैठने से अधिक आराम का अनुभव होगा या खड़े रहने और चलने की बेहतर मुद्रा क्या है आदि सीखना शुरु कर दें।

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यदि आप अभी से अभ्यास करना शुरु कर देंगी तो गर्भावस्था में बाद में आने वाली मुश्किलों, दर्द आदि का सामना करना बहुत आसान हो जाएगा।

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किसी भी हफ्ते की गर्भावस्था में आयरन, विटामिन और कैल्शियम, मैग्नीशियम समृद्ध खाद्य पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए। हालांकि गर्भावस्था के 15वें हफ्ते की डाइट 13वें और 14वें हफ्ते की डाइट के समान ही होती है। आयरन का सेवन करने से एनीमिया की शिकायत नहीं होती क्योंकि आयरन लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ाता है और कैल्शियम आपको आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है।

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  1. नाश्ते में सोया से बने खाद्य पदार्थसूखे मेवे, स्प्राउट्स, मसूर की दाल आदि अन्य चीज़ों का सेवन करें।
  2. विटामिन सी युक्त चीज़ों और फलों का सेवन करें। अधिकतर खट्टे फलों जैसे संतरे, नींबू आदि में विटामिन सी होता है।
  3. कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करें जैसे दूध, दही, पनीर आदि। (और पढ़ें - प्रेगनेंसी डाइट चार्ट)
  4. कैफीन का सेवन बहुत कम करें या न करें क्योंकि यह इस समय आपके और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।

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