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जैसे जैसे आप गर्भावस्था के छब्बीसवें सप्ताह में या दूसरी तिमाही के अंत के करीब आती हैं, हो सकता है आपको एक दिन बहुत अच्छा बहुत महसूस हो और अगले दिन कुछ कठिनाई हो। लेकिन आपके शरीर के भीतर होने वाले कई बदलावों के कारण ऐसा होना सामान्य है। इस समय डॉक्टर एनीमिया, गर्भावधि डायबिटीज और आरएचओ जीएएम (RhoGAM) इंजेक्शन के लिए आपका स्क्रीनिंग टेस्ट निर्धारित करेंगे। जिन बच्चों की माताओं का ब्लड प्रकार आरएच नेगेटिव होता है उन महिलाओं को आरएच की एलर्जी और बच्चे में आरएच पॉजिटिव प्रकार के रक्त के लिए एंटीबॉडीज बनने से बचाने के लिए ये इंजेक्शन दिया जाता है।

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  1. 26वें हफ्ते की गर्भावस्था में शरीर में होने वाले बदलाव - Body changes in week 26 of pregnancy in Hindi
  2. छब्बीसवें हफ्ते की गर्भावस्था में शिशु का विकास - Baby development in 26th week of pregnancy in Hindi
  3. छब्बीसवें हफ्ते के गर्भ का अल्ट्रासाउंड - Ultrasound of 26 weeks pregnancy in Hindi
  4. 26वें सप्ताह के गर्भधारण के लिए टिप्स - Tips for 26 weeks pregnancy in Hindi
  5. प्रेगनेंसी के छब्बीसवें हफ्ते में डाइट - Diet for 26th week of pregnancy in Hindi

इस हफ्ते तक आपको अधिक और जल्दी जल्दी ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन (Braxton Hicks contractions) का अनुभव होगा जो मासिक धर्म में होने वाली ऐंठनों की तरह ही महसूस होते हैं और गर्भाशय में तनाव होने के कारण महसूस होते हैं। आपको पेशाब के लिए जल्दी जल्दी जाना पड़ सकता है और आराम करने के लिए लेटने का अधिक मन करेगा। कई महिलाओं को बच्चे की किक और गर्भाशय के खिंचाव के कारण पसलियों के नीचे दर्द होना शुरू हो जाता है। इस दर्द को दूर करने के लिए अपने लेटने-बैठने की स्थिति बदलने की कोशिश करें। आपके बढ़ते वजन के कारण पीठ में अधिक दर्द महसूस हो सकता है। इस चरण में लगभग 9-10 किलो वज़न आपका बढ़ जाना चाहिए। रोज़ रोज़ या दिन में एक से अधिक बार वजन मापने की अब कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि अब आपके वजन में होने वाले उतार-चढ़ाव, वाटर रिटेंशन का परिणाम होते हैं।

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आपका बच्चा इस बिंदु पर काफी धीरे-धीरे बढ़ रहा होता है। वज़न में लगभग 900 ग्राम और लंबाई में 14 इंच का हो जाता है। 26वें हफ्ते के दौरान शिशु की पलकें (जो अभी तक बंद थीं) अपने आप खुलना और झपकना शुरू कर देती हैं। उसकी आंखें नीली होती हैं, लेकिन इनका रंग अक्सर जन्म के बाद बदल जाता है। उसकी आंखों का विकास लगभग पूरी तरह से हो जाता है लेकिन वह अभी भी बहुत दुबला लगता है। वसा निश्चित रूप से त्वचा के नीचे एकत्रित होने लगती है। शिशु का हृदय रक्त पंप करने लगता है। फेफड़ों में रक्त वाहिकाओं का विकास हो रहा होता है और रक्त परिसंचरण प्रणाली ठीक प्रकार से कार्य करने लगती है। गर्भनाल (Umbilical cord) पहले से मजबूत और मोटी होना शुरु कर देती है और सभी आवश्यक पोषक तत्व आपके बच्चे को उपलब्ध कराती है। यदि आपके गर्भ में पल रहा बच्चा लड़का है, तो इस सप्ताह के दौरान उसके अंडकोष (Testicles), अंडकोश की थैली (Scrotum) में चले जाएंगे।

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इस हफ्ते के अल्ट्रासाउंड परीक्षण में बच्चे की नाक और मुंह को करीब से दिखाया जाता है। बच्चा इस छवि में आपको बिलकुल नवजात शिशु की तरह दिखाई देगा।

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अगर आपको गंभीर दर्द हो रहा है, तो अपने चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें और जितना संभव हो सके आराम करने का प्रयास करें। सिर, पैर और पंजे, श्रोणि, पीठ और छाती आदि सभी दर्द संभवतः महसूस होते रहेंगे। अधिक मात्रा में तरल पदार्थ पीने और व्यायाम करने से गर्भावस्था के असहज लक्षणों जैसे निर्जलीकरण, थकान, कब्ज, चक्कर आना और सूजन आदि में मदद मिल सकती है। बच्चे की गतिविधियों और दिल की धड़कन सुनने से जन्म से पहले ही आपका बच्चे से गहरा सम्बन्ध बन जाता है। इसलिए इन्हें अकेले सुनने के बजाय अपने पति को भी सुनाये।

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गर्भावस्था के 26वें सप्ताह का खान पान 25वें हफ्ते की तरह ही होता है। इस समय आपको अपने और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए हर प्रकार के पोषण की आवश्यकता होती है। अधिक से अधिक पोषक तत्वों का सेवन करने के लिए अपने आहार में उनसे समृद्ध खाद्य पदार्थों की मात्रा बढ़ाने की आवश्यकता होती है। कैल्शियम, बच्चे की हड्डियों और दांतों के विकास के लिए बहुत आवश्यक पोषक तत्व है।

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  1. कैल्शियम के लिए डेयरी उत्पादपालक और हरी बीन्स आदि का सेवन करें।
  2. विटामिन डी, द्वारा खाद्य पदार्थों से कैल्शियम का अवशोषण होता है, यह बहुत आवश्यक विटामिन है। इसके लिए आप अंडे और दूध का सेवन कर सकती हैं। साथ ही धूप से सर्वाधिक विटामिन डी मिलता है। थोड़ी देर धूप में ज़रूर निकलें।
  3. पानी के अलावा लस्सी, छाछ आदि पेय पदार्थों का सेवन करें। (और पढ़ें - गर्भावस्था में ये हेल्दी जूस हैं काफी फायदेमंद)
  4. दालें, राजमा, बादाम, अखरोट और अंजीर आदि से भी कैल्शियम प्राप्त कर सकते हैं। (और पढ़ें - गर्भावस्था में क्या खाएं और क्या ना खाएं)
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