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प्रेगनेंसी के 33वें हफ्ते या तीसरी तिमाही के दौरान आप और भिन्न लक्षणों का अनुभव करेंगी। डॉक्टर अब आपको और नियमित रूप से जांच के लिए बुला सकते हैं। खासकर तब जब आपकी प्रेगनेंसी में कोई जोखिम या जटिलताएं होने की सम्भावना हो।

(और पढ़ें - गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर से चेकअप)

  1. 33वें हफ्ते की गर्भावस्था में शरीर में होने वाले बदलाव - Body changes at 33 weeks of pregnancy in Hindi
  2. तैतीसवें हफ्ते की गर्भावस्था में बच्चे का विकास - Baby development in 33rd week of pregnancy in Hindi
  3. तैतीसवें हफ्ते के गर्भ का अल्ट्रासाउंड - 33rd week of pregnancy ultrasound in Hindi
  4. 33वें सप्ताह के गर्भधारण के लिए टिप्स - Tips for 33rd week of pregnancy in Hindi
  5. प्रेगनेंसी के तैतीसवें हफ्ते में डाइट - Diet in 33rd week of pregnancy in Hindi

इस सप्ताह तक आपका पेट एक बास्केटबॉल के आकार का हो जाना चाहिए। आपकी कमर अभी भी बढ़ रही होगी क्योंकि आपका वज़न हर हफ्ते लगभग 450 ग्राम बढ़ रहा होता है।विशेषज्ञों का कहना है कि आपका वजन इस समय सामान्य से 11-12 किलो अधिक होना चाहिए। हालांकि हर महिला की प्रेगनेंसी भिन्न होती है। अगर प्रेगनेंसी से पहले आपका वज़न ज्यादा या कम था तो अब उस हिसाब से आपका वज़न उससे अधिक या थोड़ा कम हो सकता है। हर हफ्ते आपके वज़न में 450 ग्राम की वृद्धि होती है, लेकिन उसका कम से कम आधा वज़न आपके बच्चे और प्लेसेंटा में बँट जाता है।

(और पढ़ें - गर्भावस्था में वज़न बढ़ना)

इस स्तर पर अनिद्रा बहुत ही आम समस्या है क्योंकि अब आपको और बच्चे को आराम करने के लिए अधिक जगह की ज़रूरत होती है। इससे पहले आपको प्रत्येक घंटे में 10 किक महसूस होती थीं और अब यह हर दो घंटे में 10 से ज्यादा हो सकती हैं। इस सप्ताह आप चलने, बैठने, खड़े होने और लेटने के और नए तरीके सीख सकती हैं। पीठ दर्द, पैर दर्द आदि का अनुभव होता रहेगा। पैरों का दर्द दूर करने की कोशिश करें या कुछ देर उन्हें गर्म पानी में भिगो कर बैठें। इससे दर्द में आराम मिल सकता है।

(और पढ़ें - प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानी और प्रेगनेंसी टेस्ट कितने दिन में करे)

आपके बच्चे का वज़न इस सप्ताह तक 2-2.2 किलो तक और लम्बाई लगभग 17 इंच बढ़ जानी चाहिए। चूंकि वसा की परतें त्वचा के नीचे एकत्रित हो रही होती हैं इसलिए सभी हड्डियां भी कठोर होने लगती हैं। लेकिन खोपड़ी कठोर नहीं होती क्योंकि इसे जन्म के समय गर्भनाल के माध्यम से गुजरने के लिए थोड़ा लचीला और नरम रहने की आवश्यकता होती है।

(और पढ़ें - गर्भावस्था में वज़न बढ़ना)

इस समय बच्चे का सिर नीचे की ओर होना चाहिए लेकिन यदि नहीं है तो चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि उसके जन्म में अभी भी बहुत समय बचा है। वो जन्म के पहले कभी भी इस स्थिति में आ सकता है। कुछ लोगों का कहना है कि योग अभ्यास बच्चे को सही स्थिति में ले जाने में मदद करते हैं। लेकिन तीसरी तिमाही में कोई भी नई गतिविधि शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श ज़रूर करें। जैसे जैसे फेफड़े परिपक्व होते हैं, आपका बच्चा गर्भ के बाहर सांस लेने के लिए अभ्यास करने लगता है। अब बच्चा अधिक बार सोने लगता है (हालांकि अभी भी इससे आपको आराम नहीं मिल पायेगा) तथा किक, घूंसे और अन्य गतिविधियां थोड़ी अधिक दर्दनाक हो जाएंगी। ऐसा बच्चे के विकास की वजह से होता है।

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बच्चे के मस्तिष्क की वृद्धि और विकास हो रहा होता है। इस हफ्ते के अल्ट्रासाउंड में, लाल और नीले रंग में उसके मस्तिष्क के हिस्से में होने वाला रक्त प्रवाह दिखाई देता है जो मस्तिष्क के दो हिस्सों को एक दूसरे से जोड़ता है।

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पीठ के बल आराम करने की कोशिश न करें, क्योंकि इससे आपके गर्भाशय में रक्त का प्रवाह कम होता है। बाईं ओर लेटना या सोना सबसे अच्छा है इससे गर्भाशय में बेहतर रक्त प्रवाह होता है। लेकिन अगर सोते समय आप दूसरी तरफ करवट ले लेती हैं तो चिंता की कोई बात नहीं है। अपने घुटनों के बीच प्रेगनेंसी तकिया रखें। इससे इस समय में होने वाली असुविधा को कम करने में मदद मिलती है। यदि आपके पास गर्भावस्था तकिया नहीं है, तो आप साधारण तकिया का उपयोग भी कर सकती हैं।

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सही भोजन और व्यायाम इस स्तर पर बहुत महत्वपूर्ण हैं। कुछ महिलाओं को इस समय अंगों में झनझनाहट और सुन्न पड़ने का अनुभव होता है। ऐसा आपके कम गतिविधियां करने के कारण हो सकता है। इस बारे में डॉक्टर से बात करें वो आपको इस समय के लिए सही व्यायाम बताएंगे।

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आपको इस समय स्वस्थ आहार खाने की आदत बनाए रखने की आवश्यकता है। विशेष रूप से विटामिन K (Vitamin k) युक्त फल और सब्जियां अपने आहार में शामिल करें। विटामिन K आपके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक पोषक तत्व है। यह घावों को ठीक करने में मदद करता है और यदि आपके बच्चे के साथ कोई दुर्घटना हो जाती है, तो विटामिन K रक्त के थक्के ज़माने में मदद करता है।

  1. हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी, सरसों का साग, विटामिन K (Vitamin k) के प्रमुख स्रोत हैं।
  2. ताज़ी सब्जियां, जैसे फूलगोभी, ब्रोकली और पत्तागोभी में विटामिन K अधिक मात्रा में मौजूद होता है।
  3. आप अपने दैनिक आहार में विटामिन K का सेवन करने के लिए सोयाबीन और चोकरयुक्त रोटी शामिल कर सकती हैं।
  4. टमाटर और पुदीने का रस (Mint juice) और मिश्रित फलों का रस आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छे पेय पदार्थ हैं। (और पढ़ें - गर्भावस्था में ये हेल्दी जूस हैं काफी फायदेमंद)
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