17वें हफ्ते तक आप अपनी गर्भावस्था के साथ अधिक सहज महसूस करने लगती हैं और गर्भावस्था के लक्षणों को समझने लगती हैं तो उनसे निपटना भी सीख जाती हैं। आपका पेट भी अब एक गर्भवती महिला की तरह दिखने लगता है।

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  1. 17वें हफ्ते की गर्भावस्था में शरीर में होने वाले बदलाव - Changes in body during 17th week of pregnancy in Hindi
  2. सत्रहवें हफ्ते की गर्भावस्था में शिशु का विकास - Baby development in 17th week of pregnancy in Hindi
  3. सत्रहवें हफ्ते के गर्भ का अल्ट्रासाउंड - Ultrasound in 17th week of pregnancy in Hindi
  4. 17वें सप्ताह के गर्भधारण के लिए टिप्स - Pregnancy tips for week 17 in Hindi
  5. प्रेगनेंसी के सत्रहवें हफ्ते की डाइट - Diet during 17th week of pregnancy in Hindi
  6. गर्भावस्था का सत्रहवां सप्ताह के डॉक्टर

17वें सप्ताह में आपका पेट पूरी तरह से दिखना शुरू हो जाएगा। बच्चे को पेट में चारों ओर घूमने के लिए जगह प्रदान करने के लिए गर्भाशय बढ़ने लगता है। आपका गर्भाशय पेट की ओर, आंतों को ऊपर या बाहर की ओर धकेलना शुरू कर देता है। सोने और बैठने की तुलना में खड़े होने पर आपको पेट पर अधिक भार महसूस होगा।

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कुछ महिलाओं को पैरों की नसों में कभी कभी साइटिका का दर्द (Sciatic pain) भी महसूस होता है जो बहुत कष्टदायी हो सकता है। साइटिका नस, शरीर में सबसे बड़ी नस होती है और यह गर्भाशय से लेकर पूरे पैरों में फैली होती है।

इस दर्द का कारण आमतौर पर बढ़ते बच्चे की वजह से नसों पर पड़ने वाला दबाव होता है। एक स्थान पर लंबे समय तक खड़े रहने या सोते समय पैरों के नीचे तकिया लगाकर सोने की आदतों को छोड़ने से इस समस्या को कम किया जा सकता है।

डॉक्टर दर्द को दूर करने के अन्य तरीकों का सुझाव दे सकते हैं। रक्त की मात्रा में वृद्धि होने के कारण अधिक पसीना भी आ सकता है।

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इसके अलावा, कुछ महिलाओं को योनिस्राव या नाक बंद होने का अनुभव भी होता है। लेकिन यह सामान्य स्थितियां होती हैं और बच्चे के जन्म के बाद अपने आप गायब हो जाती हैं।

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सत्रहवें हफ्ते की गर्भावस्था में शिशु लगभग 5½ इंच लंबा और वजन करीब 140 ग्राम का हो जाता है जो कि प्लेसेंटा से भी ज्यादा होता है। गर्भनाल की लम्बाई, मज़बूती और मोटाई में वृद्धि होती है। बच्चे की सुनने की क्षमता का तेजी से विकास होता है और इसी कारण तेज़ आवाज़ों से वो गर्भ के अंदर ही डरने भी लगता है।

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हड्डियों का पूरी तरह से विकास हो जाता है और कान अपनी सही जगह पर स्थित हो जाते हैं। वसा ऊतक और वर्निक्स (Vernix- नवजात शिशु की त्वचा पर विकसित होने वाला सुरक्षात्मक आवरण) का विकास होता है और ये शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

नरम हड्डियों से एक छोटे कंकाल का निर्माण होता है। हड्डियां लचीली होती हैं जो जन्म देने वाली नली (Birth canal) के माध्यम से बच्चे का जन्म होने में मदद करती हैं। यदि बच्चा लड़का होता है, तो इसी 17वें सप्ताह के दौरान उसमें प्रोस्टेट ग्रंथियों का निर्माण होता है।

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इस हफ्ते के अल्ट्रासाउंड टेस्ट में बच्चे का छोटा सा दायां हाथ दिखाई देता है और आप उसकी नाजुक उंगलियों की हड्डियां भी देख सकती हैं। लेकिन वह अभी अपनी उंगलियों का उपयोग करने लायक बड़ा नहीं हो पाया है। पैदा होने के बाद वो अपनी उंगलियों का उपयोग करना भी सीख जायेगा यहां तक कि वो अपने हाथ में आपकी उंगली भी पकड़ने लगेगा।

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  1. कुछ महिलाओं को इस सप्ताह से रैशेस (Rashes) पड़ने की समस्या होने लगती है और नए नए प्रकार की एलर्जी भी होती हैं। यदि आपको भी इन लक्षणों का सामना करना पड़ रहा है तो अपने डॉक्टर से बात करने में संकोच न करें। (और पढ़ें - गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर से चेकअप)
  2. बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें।
  3. यदि आपको ऐंठन या परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तो अपने खड़े होने, बैठने या सोने की स्थिति में बदलाव लाएं। (और पढ़ें - गर्भावस्था में सोते समय इन खास बातों का ध्यान रखें)

गर्भावस्था के 17वें सप्ताह के दौरान, आपका वज़न धीरे-धीरे बढ़ना शुरू हो जायेगा लेकिन आपको इसे समय समय पर जांचना होगा। आम तौर पर यह समय आपके बच्चे के मस्तिष्क और आंखों के विकास का समय होता है। इसके अलावा, हार्मोनल ग्रंथियां भी विकासशील होती हैं। आपको अपने आहार में कुछ अतिरिक्त पोषक तत्व शामिल करने की आवश्यकता होती है, जैसे ओमेगा-3 फैटी एसिड, आयोडीन और विटामिन डी आदि। (और पढ़ें - गर्भावस्था में क्या खाएं और क्या ना खाएं)

  1. ऑयली मछली, ओमेगा 3 फैटी एसिड का एक अच्छा स्रोत है, लेकिन आपको सप्ताह में दो बार ही इसका सेवन करना चाहिए उससे अधिक नहीं क्योंकि इसमें पॉलीक्लोरिनेटेड बाइफिनाइल्स (Polychlorinated Biphenyls - PCBs) और डाइआक्सिन (Dioxins) होते हैं, जो आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छे नहीं होते हैं।
  2. खाद्य पदार्थों में, ओमेगा 3 फैटी एसिड प्राप्त करने के लिए आप टोफू, सोयाबीन, अखरोट, हरी पत्तेदार सब्जियां, अंडे और दूध पी सकती हैं।
  3. सैल्मन (एक प्रकार की मछली), झींगा, सार्डिन (एक प्रकार की छोटी मछली), मांस और अण्डों में आयोडीन होता है। (और पढ़ें - प्रेगनेंसी डाइट चार्ट)
  4. पेय पदार्थो में, एप्पल स्मूदी (एक प्रकार का शेक) और रसम (सूप का नाम) आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे भारतीय पेय हैं।
Dr. Venkatesh

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