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अमेरिका के शीर्ष ड्रग नियामक फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने हाल में प्रेग्नेंसी के दौरान ली जाने वाली कुछ दवाओं को लेकर चेतावनी जारी की है। इसमें उसने कहा है कि इन नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लेमेटरी ड्रग्स (एनएसएआईडी) को लेने से गर्भवती महिला के अजन्मे बच्चे को नुकसान हो सकते हैं। बीती 15 अक्टूबर को एफडीए ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर बताया कि प्रेग्नेंसी के 20वें हफ्ते के आसपास या उसके बाद इन मेडिकेशन का सेवन करने से गर्भवती महिला के अजन्मे बच्चे को किडनी से जुड़ी दुर्लभ, लेकिन गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।एफडीए की मानें तो इससे गर्भ में पल रहे बच्चे को सुरक्षा देने वाले एम्नियॉटिक फ्लूड का लेवल कम हो सकता है। साथ ही, प्रेग्नेंसी से जुड़ी दूसरी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

एफडीए ने जिन एनएसएआईडी श्रेणी की दवाओं का जिक्र किया है, उनमें इबूप्रूफेन, नैप्रोक्सेन, डाइक्लोफेनेक और सेलिकॉक्सिब शामिल हैं। इन ड्रग्स को लोग दर्द और बुखार से ठीक होने के लिए इस्तेमाल करते हैं। बाजार में प्रेस्क्रिप्शन और बिना नुस्खे (ओटीसी) वाले एनएसएआईडी ड्रग उपलब्ध हैं। एफडीए ने बताया है कि ये ड्रग शरीर में कुछ विशेष रसायनों का उत्पादन को रोकने का काम करते हैं, जिससे इन्फ्लेमेशन की समस्या हो जाती है। एजेंसी ने एस्पिरिन को भी एनएसएआईडी ड्रग बताया है। हालांकि, उसकी चेतावनी कम डोज (81 मिलीग्राम) वाली एस्पिरिन को लेकर नहीं है। इस बारे में एफडीए ने कहा है कि कम डोज वाली एस्पिरिन गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं के लिए जरूरी हो सकती है और इसे किसी हेल्थकेयर प्रोफेशनल के निर्देश या सुझाव पर लिया जा सकता है।

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प्रेग्नेंसी में एनएसएआईडी श्रेणी की दवाओं के सेवन को लेकर दी चेतावनी में एफडीए के सेंटर फॉर ड्रग इवैलुएशन एंड रिसर्च की कार्यकारी निदेशक पैट्रीजिया कावाजोनी ने कहा है, 'यह बहुत महत्वपूर्ण है कि महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान लेने वाली दवाओं के फायदों और नुकसानों को समझें। एजेंसी (एफडीए) इस बारे में अपने नियामक संबंधी अधिकारों का इस्तेमाल महिलाओं और स्वास्थ्य सेवादाताओं को यह बताने के लिए कर रही है कि प्रेग्नेंसी के 20 हफ्तों के आसपास और उसके बाद के समय में एनएसएआईडी ड्रग्स लेने के क्या खतरे हैं।'

एफडीए का कहना है कि उसके पास एनएसएआईडी दवाओं से अजन्मे बच्चों में एम्नियॉटिक फ्लूड या किडनी की समस्याओं से जुड़े मामले आए थे। एजेंसी ने बताया है कि उसने इन मामलों और इनसे जुड़े अध्ययन आधारित दस्तावेजों की समीक्षा के बाद यह चेतावनी जारी की है। एफडीए ने बताया है कि प्रेग्नेंसी के 20वें हफ्ते तक अजन्मे बच्चे की किडनी अधिकतर एम्नियॉटिक फ्लूड पैदा करना शुरू कर देती है, लेकिन भ्रूण की अवस्था में ही किडनी में समस्याएं होने से इस तरल पदार्थ का लेवल कम हो सकता है। इसके चलते ओलिगोहाइड्रॉमनियोज जैसी कंडीशन का सामना कर पड़ सकता है। हालांकि, एफडीए ने यह भी कहा है कि एनएसएआईडी ड्रग्स लेना बंद करने से यह कंडीशन सामान्य रूप से दूर हो जाती है।

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गर्भावस्था में एनएसएआईडी ड्रग्स के खतरों को देखते हुए एफडीए इनके प्रेस्क्रिप्शन में कुछ बदलाव करने की बात कर रहा है। उसका कहना है कि इन दवाओं को प्रेस्क्राइब करते हुए अजन्मे बच्चों को इससे होने वाले नुकसानों (किडनी प्रॉब्लम) के बारे में भी बताया जाए और इनका उपयोग प्रेग्नेंसी के 20वें हफ्ते से 30वें हफ्ते तक सीमित रखा जाए। एफडीए के मुताबिक, 30वें हफ्ते के बाद भी एनएसएआईडी ड्रग्स लेने के नुकसान प्रेग्नेंसी से जुड़े प्रेस्क्रिप्शन में पहले से शामिल होते हैं, क्योंकि इस अवधि यानी गर्भावस्था की दूसरी स्टेज में ये दवाएं लेने से हृदय संबंधी समस्याएं होने का अंदेशा पहले से ज्ञात है। इसके अलावा, शीर्ष अमेरिकी ड्रग एजेंसी ने यह भी कहा है कि अगर 20 से 30 हफ्तों के दौरान एनएसएआईडी ड्रग्स देना जरूरी हो, तो उन्हें सबसे कम प्रभावी वाले डोज में छोटे से छोटे समय के लिए दिया जाना चाहिए। एजेंसी ने निर्देश देते हुए कहा है कि ओटीसी एनएसएआईडी दवाएं बनाने वाली निर्माता कंपनियों इनके लेबल पर ये नई जानकारियां अपडेट करें। ऐसा गर्भवती महिलाओं के अलावा वयस्क लोगों के लिए भी किया जाए।

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