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गर्भावस्था के दौरान हाई ओमेगा-6 और लो ओमेगा-3 का सेवन करने से भ्रूण के मस्तिष्क का विकास बेहतर होता है। अंगूर के बीज का तेल, मक्का के तेल और तिल के तेल में ओमेगा-6 वसा होता है। पूरी दुनिया में ये तीनों प्रकार के ओमेगा-6 युक्त तेल सलाद बनाने के काम आते हैं। वहीं, ओमेगा-3 आधारित वसा मछली, पेरिला ऑइल और अलसी के तेल से प्राप्त होता है। जापान की हीरोशिमा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि इन फैट्स से बने संतुलित आहार स्वस्थ मस्तिष्क के विकास के लिए जरूरी हैं। अध्ययन के आधार पर इन वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि इस डाइट के सेवन से गर्भाशय में विकसित हो रहे भ्रूण के मस्तिष्क के मध्य में डोपामाइन पैदा करने वाले न्यूरॉन में बढ़ोतरी होती है।

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डोपामाइन एक हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर है, जिसे हमारा दिमाग और शरीर कई प्रकार से इस्तेमाल करता है। मेडिकल विशेषज्ञ बताते हैं कि मस्तिष्क का वह हिस्सा, जिसे 'रिवॉर्ड सर्किट' कहते हैं, उन गतिविधियों, व्यवहार या भावनाओं के प्रति डोपामाइन को रिलीज करता है, जो किसी प्रकार की सकारात्मकता से जुड़ी होती हैं। जैसे- अच्छा व्यवहार, हंसना, संगीत सुनना आदि। शोधकर्ताओं के मुताबिक, ओमेगा-6 की उच्च मात्रा और ओमेगा-3 की कम मात्रा वाली संतुलित डाइट लेने से गर्भावस्था की एक विशेष अवधि में भ्रूण के मस्तिष्क में इन न्यूरॉन्स की संख्या बढ़ जाती है। ये न्यूरॉन आगे चलकर डोपामाइन हार्मोन को रिलीज करने का काम करते हैं। इससे भ्रूण आगे के पूरे जीवनकाल के लिए वसा युक्त डाइट के लिए तैयार हो जाता है। शोधकर्ताओं ने चूहों पर ओमेगा-6 (हाई) और ओमेगा-3 (लो) की डाइट आजमाकर यह जानकारी निकाली है, जिसे हाल में कम्युनिकेशंस बायोलॉजी नामक मेडिकल पत्रिका में प्रकाशित प्रकाशित किया गया है।

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1960 के दशक से पश्चिमी देशों में पॉलीअनसैच्युरेटिड ओमेगा-6 फैट और इसके अनुपात में पॉलीअनसैच्युरेटिड ओमेगा-3 फैट युक्त डाइट में बढ़ोतरी देखने को मिली है। जानकार बतातें है कि ये दोनों प्रकार के वसा का सही अनुपात शरीर के लिए आवश्यक है, क्योंकि ये जैव-रासायनिक रूप से एक-दूसरे से कंपीट करते हैं ताकि कोशिका झिल्लियों में समावेशन हो। ओमेगा-6 और ओमेगा-3 असंतुलित डाइट का लाल रक्त कोशिकाओं की झिल्लियों के ज्यादा वजन से संबंध बताया जाता है। चूहों पर हुए पिछले अध्ययनों में यह पाया गया है कि गर्भवती महिला के ओमेगा-6/ओमेगा-3 की असंतुलित डाइट लेने से नवजात के दिमाग में इन वसा या फैट्स का संतुलन बिगड़ जाता है और इससे मस्तिष्क का विकास भी बिगड़ सकता है। शोधकर्ता इस दिशा में अभी आगे और अध्ययन करना चाहते हैं। उनका मानना है कि इस प्रयास से बच्चों में मोटापे को रोकने की नई रणनीति तैयार की जा सकती है। ऐसा गर्भवती महिलाओं द्वारा खाए जाने वाले वसा में संतुलन स्थापित करके किया जा सकता है. 

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