परक्यूटीनियस इंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टॉमी (पीईजी) एक सर्जरी प्रोसीजर है, जिसमें पेट के ऊपर एक छिद्र किया जाता है और उसके माध्यम से एक विशेष ट्यूब पेट में डाली जाती है। इस ट्यूब को फीडिंग ट्यूब कहा जाता है, जिसकी मदद से पेट में आहार सामग्री भेजी जाती है। यह सर्जरी आमतौर पर उन लोगों के लिए की जाती है, जिन्हें निगलने में कठिनाई या निगला हुआ भोजन पेट की जगह फेफड़ों में जाना आदि समस्याएं हैं। सर्जरी से पहले आपको जनरल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन दिया जाएगा, जिससे आप सर्जरी के दौरान गहरी नींद में सो जाएंगे। साथ ही जिस हिस्से में सर्जरी करनी है, वहां पर लोकल एनेस्थीसिया की इंजेक्शन भी दिया जा सकता है, ताकि वह हिस्सा पूरी तरह से सुन्न हो जाए और आपको दर्द न हो।

परक्यूटीनियस इंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टॉमी सर्जरी में लगभग 20 मिनट का समय लगता है। हालांकि, सर्जरी के बाद आपको कम से कम तीन दिन अस्पताल में रुकने की आवश्यकता पड़ सकती है। अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले ही डॉक्टर व डाईटीशियन आपको ट्यूब का इस्तेमाल करने और उसकी देखभाल करने के सही तरीके सिखाएंगे। अन्य एंडोस्कोपिक सर्जरी की तरह ही परक्यूटीनियस इंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टॉमी सर्जरी से भी कुछ जोखिम व जटिलताएं हो सकती हैं, जैसे अधिक रक्तस्राव होना या संक्रमण आदि।

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  1. परक्यूटीनियस इंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टॉमी क्या है - What is Percutaneous endoscopic gastrostomy in Hindi
  2. परक्यूटीनियस इंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टॉमी किसलिए की जाती है - Why is Percutaneous endoscopic gastrostomy done in Hindi
  3. परक्यूटीनियस इंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टॉमी से पहले - Before Percutaneous endoscopic gastrostomy in Hindi
  4. परक्यूटीनियस इंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टॉमी के दौरान - During Percutaneous endoscopic gastrostomy in Hindi
  5. परक्यूटीनियस इंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टॉमी के बाद - After Percutaneous endoscopic gastrostomy in Hindi
  6. परक्यूटीनियस इंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टॉमी की जटिलताएं - Complications of Percutaneous endoscopic gastrostomy in Hindi
  7. परक्यूटीनियस इंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टॉमी के डॉक्टर

पीईजी सर्जरी किसे कहते हैं?

परक्यूटीनियस इंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टॉमी को पीईजी सर्जरी भी कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति के पेट में एक पतली ट्यूब लगा दी जाती है। इस ट्यूब की मदद से व्यक्ति के शरीर में आहार, पोषक तत्व व दवाएं दी जाती हैं। इस सर्जरी में लगाई गई ट्यूब भोजन को बिना मुंह या भोजन नली की मदद से सीधे पेट में पहुंचा देती है। इसलिए जिन लोगों को भोजन निगलने संबंधी समस्याएं हैं या फिर जिन लोगों में निगला हुआ भोजन किसी कारण से फेफड़ों में जा रहा है, उनके लिए भी यह सर्जरी की जा सकती है।

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वैसे तो निगलने में कठिनाई जैसी समस्याओं को अन्य उपचार प्रक्रियाओं से भी ठीक किया जा सकता है, जिसमें एक नली को नाक के माध्यम से पेट तक पहुंचाया जाता है। हालांकि, पीईजी सर्जरी को इसलिए किया जाता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल करना अन्य सर्जरी के मुकाबले आसान होता है और यह मरीज के लिए भी अपेक्षाकृत काफी आरामदायक रहती है। इसलिए जिन लोगों को लंबे समय तक ट्यूब से भोजन प्राप्त करने की आवश्यकता है, तो उनके लिए परक्यूटीनियस इंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टॉमी सर्जरी का सुझाव ही दिया जाता है। साथ ही परक्यूटीनियस इंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टॉमी सर्जरी में लगाई जाने वाली ट्यूब को आसानी से कपड़ों के नीचे छिपाया जा सकता है, जबकि नाक में लगाई गई ट्यूब को छिपाया नहीं जा सकता। पीईजी ट्यूब को कई सालों तक लगा कर रखना पड़ सकता है और कुछ समय बाद ट्यूब में रुकावट भी आ सकती है, ऐसी स्थिति में डॉक्टर ट्यूब को बदल देते हैं। यदि आपकी निगलने या भोजन फेफड़ों में जाने की समस्या ठीक हो गई है, तो डॉक्टर इस ट्यूब को निकाल कर छिद्र को बंद कर सकते हैं। पीईजी फीडिंग ट्यूब में आमतौर पर निम्न भाग होते हैं -

  • दो छोटी डिस्क - पेट की सतह में छिद्र करके दोनों तरफ डिस्क लगाना, जिससे ट्यूब को हिलने-ढुलने से रोका जाए।
  • एक विशेष उपकरण जिसकी मदद से ट्यूब को स्थिर रखा जाता है और एक क्लैंप जिसकी मदद से उस समय ट्यूब के सिरे को बंद रखा जाता है, जब आप भोजन न कर रहे हों।
  • एक ओर दो सिरों वाली ट्यूब जिनमें से एक छिद्र की मदद से दवाएं व भोजन डाले जाते हैं और दूसरे छिद्र की मदद से नली को साफ रखा जाता है।

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पीईजी सर्जरी क्यों की जाती है?

यदि आपको किसी भी कारण से निगलने संबंधी समस्याएं या फिर भोजन फेफड़ों में जाने जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो डॉक्टर पीईजी सर्जरी करवाने की सलाह दे सकते हैं। ये समस्याएं आमतौर पर निम्न समस्याओं के कारण हो सकती हैं -

पीईजी सर्जरी किसे नहीं करवानी चाहिए?

कुछ स्थितियों में परक्यूटीनियस इंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टॉमी सर्जरी नहीं की जाती है और यदि किसी कारण से सर्जरी की जानी आवश्यक है, तो बहुत ध्यानपूर्वक किया जाता है। इनमें निम्न शामिल हैं -

  • सेप्सिस
  • पेरिटोनाइटिस
  • रक्त का थक्का जमने का विकार
  • हीमोडाइनेमिक इनस्टेबिलिटी (हृदय द्वारा ठीक से रक्त को पंप न कर पाने के कारण, अस्थिर रक्तसंचार)
  • पेरिटोनियल कार्सीनोमाटोसिस (गैस्ट्रोइंटेस्टिनल प्रणाली को प्रभावित करने वाला एक विकार)
  • गंभीर गैस्ट्रोपैरेसिस
  • गंभीर जलोदर
  • एक अंग दूसरे अंग में फंस जाना
  • यदि पहले कभी सर्जरी की मदद से पेट को निकाल दिया गया हो (गैस्ट्रेक्टॉमी)

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पीईजी सर्जरी से पहले क्या तैयारी की जाती है?

परक्यूटीनियस इंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टॉमी सर्जरी से पहले आपको कुछ विशेष दिशानिर्देश दिए जाते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -

  • गले व आवाज के विशेषज्ञ डॉक्टर आपके निगलने की क्षमता की जांच करेंगे, जिस दौरान यह देखा जाता है कि आप भोजन ठीक से क्यों नहीं निगल पा रहे हैं।
  • डॉक्टर आपका ब्लड टेस्ट करते हैं, जिसकी मदद से यह पता लगाया जाता है कि आपको रक्त संबंधी कोई समस्या नहीं है और रक्त का थक्का बनने की क्षमता भी सामान्य स्तर में हैं।
  • यदि आप किसी भी प्रकार की दवा, हर्बल उत्पाद, विटामिन, मिनरल या कोई अन्य सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो इस बारे में डॉक्टर को अवश्य बता दें।
  • यदि आप रक्त को पतला करने वाली दवाएं जैसे एस्पिरिन, आइबुप्रोफेन या वारफेरिन आदि ले रहे हैं, तो डॉक्टर को इस बारे में बता दें।
  • अगर आपको स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या या एलर्जी है, तो इस बारे में डॉक्टर को बता दें। यदि आप गर्भवती हैं/हो सकती हैं या फिर गर्भधारण की योजना बना रही हैं, तो डॉक्टर को इस बारे में अवश्य बता दें। (और पढ़ें - गर्भधारण रोकने के उपाय)
  • सर्जरी के लिए आपको खाली पेट जाना होता है। खाली पेट रहने के लिए डॉक्टर आपको सर्जरी वाले दिन से पहली आधी रात के बाद कुछ भी न खाने या पीने की सलाह देते हैं। यदि आपको नाक में लगी ट्यूब के माध्यम से आहार दिए जा रहे हैं, तो सर्जरी से छह घंटे पहले ट्यूब से कुछ भी नहीं दिया जाता है।
  • सर्जरी के दौरान पेट की सामग्री फेफड़ों तक पहुंच सकती है या उल्टी आ सकती है, जिससे बचने के लिए खाली पेट सर्जरी की जाती है।
  • सर्जरी से पहले आपको एक सहमति पत्र दिया जाएगा, जिसपर हस्ताक्षर करके आप सर्जन को सर्जरी करने की अनुमति दे देते हैं। हालांकि, सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे एक बार अच्छे से पढ़ व समझ लेना चाहिए।

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पीईजी सर्जरी कैसे की जाती है?

परक्यूटीनियस इंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टॉमी को निम्न सर्जरी प्रोसीजर की मदद से किया जाता है -

  • जब आप सर्जरी के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं, तो आपको एक विशेष ड्रेस पहनने के लिए दी जाएगी, जिसे हॉस्पिटल गाउन कहा जाता है।
  • आपको ऑपरेशन टेबल पर पीठ के बल लेटने को कहा जाएगा।
  • आपकी बांह या हाथ की नस में सुई लगाकर उसे इंट्रावेनस लाइन से  जोड़ दिया जाएगा। इंट्रावेनस लाइन की मदद से आपको सर्जरी के दौरान दवाएं और आवश्यक द्रव दिए जाएंगे।
  • आपकी उंगली से एक विशेष उपकरण चिपका दिया जाता है, जिसकी मदद से आपके रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा की जानकारी मिलती है। नाक में एक पतली सी ट्यूब लगा दी जाती है, जो सर्जरी के दौरान आपको ऑक्सीजन प्रदान करती है।
  • इसके बाद आपके मुंह में माउथगॉर्ड लगा दिया जाता है और आपको उसे हल्के से दबाने के लिए कहा जाता है। माउथगार्ड की मदद से आप सर्जरी के दौरान एंडोस्कोपी या जीभ को काट नहीं पाते हैं।
  • इंट्रावेनस लाइन की मदद से आपको एनेस्थीसिया दिया जाता है। एनेस्थीसिया का असर होते ही आप गहरी नींद में सो जाते हैं और आपको सर्जरी के दौरान कुछ भी महसूस नहीं होता है। कई बार कुछ अन्य शामक दवाएं दी जाती हैं, जिनसे नींद नहीं आती, लेकिन शरीर शांत रहता है।
  • विशेष उपकरण की मदद से मुंह व गले में मौजूद अतिरिक्त बलगम या लार को निकाल दिया जाता है। (और पढ़ें - अधिक लार आने का कारण)
  • इसके बाद एंडोस्कोप को मुंह के माध्यम से पेट तक पहुंचाया जाता है, जिसकी मदद से अंदरूनी हिस्से को देखा जाता है और यह पुष्टि की जाती है कि फीडिंग ट्यूब को लगाने के लिए कौन सी जगह उचित है। एंडोस्कोप एक पतली व लचीली ट्यूब जैसा उपकरण है, जिसके एक सिरे पर कैमरा और लाइट लगी होती है। यदि एनेस्थीसिया नहीं दिया गया है, तो आप अंदर जाते हुए एंडोस्कोप को महसूस भी कर सकते हैं।
  • उचित जगह की पुष्टि होने के बाद पेट के ऊपरी हिस्से पर लोकल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगा दिया जाता है, ताकि त्वचा सुन्न हो जाए और आपको सर्जरी के दौरान दर्द महसूस न हो।
  • इसके बाद पेट में 2 से 3 मिलीमीटर लंबा चीरा लगाया जाता है और उस चीरे में एक खोखली सुई को डाला जाता है। इस सुई के अंदर से एक धागा डाला जाता है, जिसे एंडोस्कोपी से लगे फोरसेप नामक उपकरण से बांध दिया जाता है।
  • अब एंडोस्कोप को वापस खींच लिया जाता है, जिसके साथ धागे का एक सिरा भी मुंह के माध्यम से बाहर आ जाता है।
  • अब फीडिंग ट्यूब को धागे के उस सिरे से बांध दिया जाता है, जो मुंह से निकला होता है और दूसरे सिरे को खींच लिया जाता है। इस प्रक्रिया की मदद से ट्यूब पेट के चीरे के माध्यम से बाहर निकल जाती है।
  • इसके बाद ट्यूब को पेट की सतह से जोड़ कर स्थिर बना दिया जाता है।

पीईजी सर्जरी को पूरा होने में 15 से 20 मिनट का समय लगता है। यदि सर्जन को लगता है कि आपके शरीर में एंडोस्कोप डालना संभव नहीं है या इससे कुछ जोखिम हो सकते हैं, तो ऐसे में पेट में लगे चीरे के माध्यम से ही फीडिंग ट्यूब को लगाया जाता है। जबकि कुछ मामलों में एंडोस्कोपी की जगह पर एक्स रे मशीन का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

सर्जरी पूरी होने के बाद तीन दिन के लिए मरीज को अस्पताल में ही रखा जाता है। सर्जरी के बाद अस्पताल में निम्न प्रक्रियाएं की जा सकती हैं -

  • सर्जरी होने के करीब 6 घंटे बाद आपको तरल आहार व पानी देना शुरू कर दिया जाता है। करीब 10 घंटे तक आपको ऐसा ही आहार दिया जाएगा।
  • जब आप इसे आसानी से पचा पाते हैं, तो फिर आपको सभी पोषक तत्वों युक्त तरल आहार दिए जाते हैं, जो शुरू में मामूली मात्रा में दिए जाते हैं और फिर धीरे-धीरे मात्रा को बढ़ाया जाता है।
  • पीईजी ट्यूब लगने के बाद आपको कुछ समय तक तकलीफ महसूस हो सकती है, जिसकी धीरे-धीरे आदत पड़ जाती है।
  • ट्यूब द्वारा आहार लेने के दौरान आपको सीधे बैठने की सलाह दी जाएगी, जिससे सीने में जलन और भोजन सामग्री का फेफड़ों में जाना आदि समस्याएं नहीं होती हैं।
  • अस्पताल से छुट्टी देने से पहले ही डॉक्टर आपको ट्यूब को सही तरीके से इस्तेमाल करने के तरीके बता देते हैं। साथ ही आपको यह भी बताया जाता है कि ट्यूब की मदद से कौन-कौन से आहार लिए जा सकते हैं और किनसे परहेज करना है।

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पीईजी सर्जरी के बाद की देखभाल कैसे की जाती है?

परक्यूटीनियस इंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टॉमी सर्जरी होने के बाद जब आप घर आ जाते हैं, तो आपको निम्न बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है -

  • ऑपरेशन के बाद कुछ दिन तक सर्जरी वाली जगह से थोड़ा बहुत स्राव हो सकता है, जो कि सामान्य है। इस हिस्से को स्वच्छ पानी व कपड़े के साथ साफ करते रहना चाहिए।
  • जब तक सर्जरी वाले घाव पूरी तरह से ठीक न हो जाएं तब तक आपको नहाने या शॉवर लेने से मना किया जाता है। घाव को ठीक होने में लगभग दस दिन का समय लगता है, तब तक आप गीला कपड़ा करके शरीर को साफ कर सकते हैं। घावों के ठीक हो जाने के बाद भी सर्जरी वाले हिस्से को ध्यानपूर्वक साफ करें और कठोर साबुन का इस्तेमाल न करें। (और पढ़ें - घाव भरने के उपाय)
  • डॉक्टर आपको रोजाना फीडिंग ट्यूब को स्वच्छ पानी के साथ साफ करने की सलाह देंगे, ताकि वह रुके नहीं। ट्यूब को साफ करने के लिए आपको सिरिंज दिया जाएगा और साथ ही साफ करने का सही तरीका भी समझाया जाएगा।
  • यदि आप पहले कोई टेबलेट लेते थे, तो उन सभी की जगह पर तरल दवाएं (सिरप आदि) दे दी जाएंगी। यदि किसी कारण से तरल में उपलब्ध नहीं है, तो टेबलेट को थोड़े पानी में घोलकर लेने की सलाह दी जाएगी। हालांकि, हर दवा को पानी में घोल कर नहीं लिया जा सकता है, सिर्फ डॉक्टर की अनुमति के अनुसार ही ऐसा करें। इन दवाओं को आहार के साथ भी नहीं लेना चाहिए, क्योंकि आहार के साथ लेने से दवाओं के रसायनों का स्तर असामान्य हो सकता है।

पीईजी ट्यूब उन लोगों को पर्याप्त पोषक तत्व उपलब्ध कराती है, जिन्हें निगलने में कठिनाई हो। इस ट्यूब की मदद से व्यक्ति को प्यास व भूख लगने की भावना से भी राहत मिलती है। इसके अलावा पीईजी ट्यूब लगने पर आपको पर्याप्त पोषक तत्व प्राप्त होंगे और परिणामस्वरूप आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी, जो विभिन्न संक्रमणों और रोगों से लड़ने में मदद करेगी।

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डॉक्टर को कब दिखाएं?

यदि सर्जरी के बाद आपको निम्न में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो डॉक्टर को इस बारे में बता देना चाहिए -

यदि ट्यूब से आहार लेने के बाद आपको निम्न लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो भी जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें -

यदि ट्यूब किसी कारण से रुक जाती है, जो जितना जल्दी हो सके डॉक्टर के पास चले जाएं। यदि ट्यूब अपनी जगह से हिल गई है या निकल गई है और आपको इसे बदलने का तरीका नहीं पता है, तो छिद्र को किसी साफ कपड़े से ढक लें और जल्द से जल्द डॉक्टर के पास चले जाएं। पीईजी ट्यूब निकलने के बाद छिद्र तीव्रता से बंद होने लगता है, इसलिए जल्द से जल्द डॉक्टर के पास जाकर नई ट्यूब लगवाना बेहद जरूरी होता है।

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पीईजी सर्जरी से क्या जोखिम हो सकते हैं?

परक्यूटीनियस इंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टॉमी सर्जरी को एक सुरक्षित सर्जरी माना जाता है। हालांकि, फिर भी सभी सर्जरी प्रक्रियाओं की तरह इससे भी कुछ जोखिम व जटिलताएं हो सकती हैं -

  • सर्जरी वाले हिस्से में दर्द होना
  • ट्यूब लगी हुई जगह पर संक्रमण व रक्तस्राव होना
  • पेट के अन्य अंगों में संक्रमण फैल जाना (और पढ़ें - पेट के संक्रमण का इलाज)
  • सर्जरी के दौरान पेट का कोई अन्य अंग क्षतिग्रस्त हो जाना
  • एनेस्थीसिया से एलर्जी या अन्य समस्याएं होना (और पढ़ें - एलर्जी की आयुर्वेदिक दवा)
  • एंडोस्कोपी से गले में खरोंच या क्षति पहुंचना
  • ट्यूब से प्राप्त आहार भी फेफड़ों में जाना
  • ट्यूब में रुकावट आना

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संदर्भ

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