अर्टिकेरिया को पित्ती नाम से भी जाना जाता है, यह त्वचा संबंधी एक स्थिति है, जिसमें त्वचा पर गुलाबी या लाल रंग के उभरे हुए चकत्ते दिखाई देने लगते हैं। इनमें खुजलीसूजन हो जाती है। शरीर का तापमान अचानक बढ़ना, व्यायाम, तनाव, साबुन या कॉस्मेटिक उत्पादों में मौजदू इरिटेटिंग केमिकल (ऐसी चीजें जो सूजन या अन्य किसी स्थिति का कारण बनती है) और सूर्य की रोशनी जैसे कारकों से पित्ती हो सकती है। यह एक अंतर्निहित बीमारी के लक्षण के रूप में भी हो सकता है। पित्ती शरीर के किसी भी हिस्से पर दिखाई दे सकते हैं। यदि किसी प्रतिक्रिया की वजह से पूरे शरीर पर पित्ती हो जाती है, तो ऐसे में घरघराहट, जीभ में सूजन, छाती में जकड़न और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं। आमतौर पर 8 से 12 घंटों के अंदर यह हल्के पड़ने लगते हैं। हालांकि, बार-बार होने वाली या क्रोनिक अर्टिकेरिया हफ्तों या महीनों तक प्रभावित कर सकती है। पित्ती के इलाज के लिए पारंपरिक दवाओं में निम्नलिखित का प्रयोग किया जाता है -

पित्ती के इलाज के लिए होम्योपैथिक उपचार की भी मदद ली जा सकती है, यह उपचार व्यक्तिगत तौर पर निर्धारित किए जाते हैं। विशेषज्ञ हमेशा इस बात को ध्यान में रखकर होम्योपैथिक उपचार की सलाह देते हैं कि स्थिति एक्यूट (अचानक या तेज) है या क्रोनिक (धीरे-धीरे व लंबे समय से प्रभावित करने वाली) है। लक्षणों के अलावा, व्यक्ति की स्वास्थ्य (शारीरिक और मानसिक दोनों), उम्र और अन्य कारकों को भी ध्यान में रखा जाता है। कुछ होम्योपैथिक उपचार जिनका उपयोग पित्ती के उपचार के लिए किया जाता है, उनमें एपिस मेलिफिका, रस टॉक्सिकोडेंड्रोन, कैम्फोरा, सल्फर, आर्सेनिकम एल्बम, कोपाइवा ऑफिसिनैलिस, एंटीमोनियम क्रूडम और बोविस्टा लाइकोपेरोडन शामिल हैं।

(और पढ़ें - पित्ती उछलने पर क्या करना चाहिए)

  1. पित्ती की होम्योपैथिक दवाएं - Homeopathic medicines of urticaria in Hindi
  2. पित्ती (शीतपित्त) के लिए होम्योपैथी के अनुसार आहार - Diet according to homeopathy for hives in Hindi
  3. पित्ती (शीतपित्त) के लिए होम्योपैथिक उपचार कितना प्रभावी है - How effective is homeopathic treatment for hives in Hindi
  4. पित्ती (शीतपित्त) के लिए होम्योपैथिक चिकित्सा के नुकसान - Disadvantages of homeopathic medicine for hives in Hindi
  5. पित्ती (शीतपित्त) के लिए होम्योपैथिक उपचार से जुड़े टिप्स - Tips related to homeopathic treatment for hives in Hindi
पित्ती की होम्योपैथिक दवा और इलाज के डॉक्टर

नीचे कुछ होम्योपैथिक उपचार के बारे में बताया गया है, जिनका उपयोग पित्ती के ट्रीटमेंट में किया जाता है : 

एपिस मेलिफिका
सामान्य नाम : ​दि हनी-बी विनोम
लक्षण :
यह उपाय सूजे हुए ऊतकों और त्वचा पर असर करके पित्ती को कम करता है। इसका प्रयोग निम्नलिखित लक्षणों के प्रबंधन के लिए किया जा सकता है :

  • चुभने वाला दर्द और त्वचा में जलन
  • सूजन (और पढ़ें - सूजन की होम्योपैथिक दवा)
  • संवेदनशील त्वचा
  • किसी कीट के काटने से होने वाली सूजन
  • त्वचा पर कई फोड़े हो जाना व साथ में जलन होना
  • गर्मी बर्दाश्त न कर पाना
  • एरीसिपेलस (त्वचा के ऊपरी डर्मिस परत पर संक्रमण) व साथ में सूजन और त्वचा का संवेदनशील हो जाना
  • त्वचा का सख्त होना
  • उंगलियों का सुन्न हो जाना
  • पित्ती की वजह से हाथ और पैरों में असहनीय तौर पर खुजली

यह लक्षण दोपहर में, गर्म व बंद कमरे में सोने के बाद, दाईं ओर लेटने और छूने के दौरान बढ़ जाते हैं। जबकि ठंडे पानी से नहाने या कुछ समय खुली हवा में रहने से इनमें सुधार होता है।

कैम्फोरा
सामान्य नाम :
कैम्फोर
लक्षण : यह उपाय उन लोगों के लिए बेहतरीन है, जो प्रभावित हिस्से को छुए जाने और ठंड के प्रति बहुत संवेदनशील हैं, जिन्हें गंभीर रूप से दौरे पड़ते हैं और ठंड लगने के साथ छींक आती है। कैम्फोरा पित्ती के इलाज के साथ-साथ निम्नलिखित लक्षणों को भी कम करने में मदद करता है :

  • त्वचा का गहरा-नीला ग्रे होना
  • त्वचा ठंडी होना
  • चेहरे पर ठंडा पसीना आना (और पढ़ें - पसीना रोकने के उपाय)

यह लक्षण रात में और ठंड के मौसम में खराब हो जाते हैं जबकि गर्मी में इन लक्षणों में सुधार होता है।

कोपाइवा ऑफिसिनैलिस
सामान्य नाम :
बालसम ऑफ कोपाइवा
लक्षण : कोपाइवा ऑफिसिनेलिस त्वचा की श्लेष्म झिल्ली, मूत्र पथ और श्वसन संबंधी अंगों पर सबसे अच्छा असर करता है। यह कब्ज और बुखार के साथ पित्ती को कम करने में उपयोगी है। यह बच्चों में ​क्रोनिक पित्ती के इलाज में भी फायदेमंद है। इसके अतिरिक्त, नीचे दिए गए लक्षणों से भी यह राहत देता है :

  • त्वचा चित्तीदार दिखना
  • एरिसिपेलाटस इंफ्लेमेशन (त्वचा या श्लेष्मा झिल्ली में लालिमा के साथ सूजन)
  • रोजोला (वायरल संक्रमण जिसकी वजह से चकत्ते और तेज बुखार होता है) (और पढ़ें - बच्चों में बुखार का इलाज)
  • क्रोनिक अर्टिकेरिया (बच्चों में)

रस टॉक्सिकोडेंड्रोन
सामान्य नाम :
प्वॉइजन-आइवी
लक्षण : रस टॉक्सिकोडेंड्रोन ऐसे लोगों में अच्छा असर करता है, जिन्हें टियरिंग पेन (मांस फटने जैसा दर्द) होता है। उन्हें तब बेहतर महसूस होता है जब य​ह लंबे समय तक बैठे रहने के बाद उठ कर अपने शरीर को स्ट्रेच करते हैं। रस टॉक्सिकोडेंड्रोन, पित्ती को कम करने में और अचानक या तेज होने वाली खुजली से राहत देता है। इसके अलावा यह नीचे दिए गए लक्षणों का भी प्रबंधन कर सकता है :

  • त्वचा की लालिमा और सूजन
  • सेल्यूलाइटिस (बैक्टीरियल स्किन इंफेक्शन)
  • वेसिकल (फफोले)
  • एरिसिपलस (यह एक त्वचा संक्रमण है जो कि सेलुलाइटिस का ही एक रूप है, लेकिन सेलुलाइटिस ऊतकों को गहराई तक प्रभावित करते हैं, जबकि एरिसिपलस केवल त्वचा की ऊपरी परतों को प्रभावित करता है) (और पढ़ें - स्किन इन्फेक्शन के घरेलू उपाय)
  • पेम्फिगस (त्वचा विकार, जिसमें त्वचा और श्लेष्म झिल्ली पर फफोले बनते हैं)
  • ठंडी ताजी हवा के संपर्क में आने पर दर्द होना

रात, ठंड और बरसात के मौसम में यह सभी लक्षण खराब हो जाते हैं। नींद लेने और पीठ के बल या दाईं ओर लेटने से भी लक्षण बढ़ते हैं, जबकि चलने, गर्म सिकाई और गर्म और शुष्क मौसम में रोगी को बेहतर महसूस होता है।

आर्सेनिकम एल्बम
सामान्य नाम :
आर्सेनिक एसिड
लक्षण : यह उपाय उन लोगों के लिए सर्वोत्तम है, जो ज्यादातर चिंतित और घबराए होते हैं। यह उपाय पित्ती व संबंधित लक्षणों जैसे बेचैनी और जलन के इलाज में फायदेमंद है। आर्सेनिकम एल्बम का इस्तेमाल नीचे दिए लक्षणों को ठीक करने के लिए भी किया जाता है :

  • जलन और खुजली के साथ सूजन
  • सोरायसिस
  • पूरे शरीर में ठंड लगना
  • गैं​ग्रीन (संक्रमण या रक्त प्रवाह की कमी की वजह से ऊतकों का खराब या नष्ट होना) के साथ सूजन
  • सिरियस (धीमी गति से बढ़ने वाला ट्यूमर जो छूने पर टाइट लग सकता है)
  • एंथ्रेक्स (जीवाणु संक्रमण, जिसकी वजह से त्वचा के अल्सर और सांस की तकलीफ होती है)
  • अल्सर में डिस्चार्ज होना
  • पपड़ीदार, खुरदरी और सूखी त्वचा जो खरोंच लगने और ठंडे वातावरण में स्थिति को खराब कर देता है
  • स्किन एपिथीलिओमा (त्वचा की एपिथीलियम परत में असामान्य वृद्धि)

यह लक्षण आधी रात को, बरसात और ठंड के मौसम में और समुद्र के किनारे और ठंडे खान-पान से बढ़ जाते हैं। जबकि गर्म ड्रिंक और गर्म वातावरण में रहने से इनमें सुधार होता है।

सल्फर
सामान्य नाम :
सब्लीमेटड सल्फर
लक्षण : यह उपाय उन लोगों के लिए उपयुक्त है, जिन्हें पानी पसंद नहीं है, जिनकी त्वचा सूखी है, खुद की साफ-सफाई अच्छे से नहीं करते हैं और जिनकी त्वचा में संक्रमण होने का खतरा है। सल्फर, पित्ती से जुड़ी त्वचा की खुजली और जलन को कम करता है। इसके अलावा नीचे दी गई स्थितियों का भी प्रबंधन करने में मदद करता है :

  • सूखी और पपड़ीदार त्वचा
  • त्वचा की चोटें, जिनमें मवाद बनता है
  • स्किन इरप्शन (जैसे दाने, मुहासे इत्यादि) (और पढ़ें - मुंहासे कम करने के उपाय)
  • पस्ट्यूले (Pustules - लाल रंग के उभार, जिनके ऊपरी हिस्से पर सफेद मवाद होता है)
  • खुजली जो गर्म वातावरण और शाम को होती है

यह लक्षण सुबह और रात में, खड़े रहने, नहाने के दौरान और आराम करते समय खराब हो जाते हैं। लेकिन दाईं ओर लेटने और गर्म व शुष्क मौसम में इनमें सुधार होता है।

बोविस्टा लाइकोपोरडन
सामान्य नाम :
पफ-बॉल
लक्षण : यह उपाय हकलाने वाले बच्चों, पैल्पिटेशन (किसी गतिविधि, अधिक थकान या बीमारी की वजह से दिल की धड़कन अनियमित होना) से ग्रस्त उम्रदराज महिलाओं के लिए अधिक फायदेमंद है। यह पित्ती के इलाज के अलावा निम्नलिखित लक्षणों से राहत दिलाने में मदद करता है :

अर्टिकेरिया जो सुबह टहलने के दौरान शुरू होता है और नहाने के बाद खराब हो जाता है।

एंटीमोनियम क्रूडम
सामान्य नाम :
ब्लैक सल्फाइड ऑफ एंटीमोनी
लक्षण : यह उपाय उन लोगों के लिए बेस्ट है जो अत्यधिक बेचैन और चिड़चिड़े होते हैं। ऐसे लोग, जिन्हें इस उपाय से फायदा होता है, वे सूर्य की रोशनी को बर्दाश्त नहीं कर पाते और उनमें मोटे होने की प्रवृत्ति रहती है। यह त्वचा पर खसरे जैसे इरप्सन से जुड़े पित्ती को कम करता है। इस उपाय से अन्य लक्षणों में भी लाभ होता है जैसे :

  • एक्जिमा के कारण होने वाली गैस्ट्रिक समस्याएं
  • त्वचा पर शहद के रंग जैसे सख्त और मोटे निशान
  • मुहासे
  • ठंडे पानी के प्रति त्वचा संवेदनशील होना
  • सूखी त्वचा (और पढ़ें - रूखी त्वचा के लिए घरेलू उपाय)
  • मस्सा
  • ड्राई गैंग्रीन
  • खुजली और जलन के साथ त्वचा पर पपड़ी जम जाना, यह स्थिति रात में खराब हो जाती है
  • खुजली जो बिस्तर पर लेटने के बाद लगने वाली गर्मी की वजह से होती है

गर्म माहौल में और शाम के समय में यह लक्षण बिगड़ जाते हैं। हालांकि, पानी, शराब और एसिड के संपर्क में आने से भी यह लक्षण खराब हो जाते हैं। लेकिन मरीज के आराम करने या खुली हवा में समय बिताने के बाद अच्छा महसूस होता है।

(और पढ़ें - त्वचा पर चकत्ते की होम्योपैथिक दवा)

पित्ती एक आम समस्या है जो किसी को भी हो सकती है। ज्यादातर लोगों को उनके जीवनकाल में पित्ती की समस्या रही होगी। यह फूड एलर्जी या एक कीट के काटने से होने वाली स्थिति है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि यह कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो सकती है। वैसे, पित्ती लंबे समय तक भी प्रभावित कर सकती है। आप किसी भी मामले के लिए यदि होम्योपैथिक उपचार लेना चाह रहे हैं तो बता दें, कि ऐसे में डॉक्टर होम्योपैथिक दवाई लेने के साथ जीवन शैली और आहार में कुछ जरूरी बदलाव करने के लिए कहेंगे। ऐसा करने से जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है। आइए जानते हैं इन जरूरी सावधानियों के बारे में :

क्या करना चाहिए

  • पित्ती के एक्यूट मामलों में, बिना किसी हिचकिचाहट के कुछ भी खाने-पीने की इच्छाओं को पूरा करें, बशर्ते कम मात्रा में
  • इच्छानुसार कमरे का तापमान एडजस्ट करें।
  • पित्ती के क्रोनिक मामलों में, स्वस्थ भोजनपौष्टिक आहार खाएं, सक्रिय जीवन शैली (जैसे व्यायाम या योग) अपनाएं और साफ-सफाई वाले ​क्षेत्र में रहें।

क्या नहीं करना चाहिए

  • पित्ती के क्रोनिक मामलों में कॉफी, हर्बल चाय या ऐसी सब्जियों, खाद्य या पेय पदार्थ का सेवन न करें, जिसमें या तो औषधीय गुण हैं या वे मसालेदार हैं।
  • सुगंधित वस्तुओं जैसे परफ्यूम का उपयोग न करें।
  • गर्म कमरे और उमस भरे स्थानों पर न रहें।
  • लेटते समय पढ़ाई न करें।
  • कोशिश करें कि ज्यादा चिंता न करें या नाराज न हों। (और पढ़ें - चिंता की होम्योपैथिक दवा)
  • एक्यूट मामलों में अपने दिमाग पर ज्यादा जोर न पड़ने दें।

(और पढ़ें - त्वचा पर चकत्तों के घरेलू उपाय)

होम्योपैथिक उपचार से पित्ती और एलर्जी से होने वाले रिएक्शन का प्रबंधन किया जा सकता है।

पित्ती से ग्रस्त लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके, इसके लिए पित्ती को ठीक करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली होम्योपैथिक दवाओं की प्रभावशीलता का आकलन किया गया। इस दौरान भारत के विभिन्न राज्यों के होम्योपैथिक डिस्पेंसरी में पित्ती से ग्रस्त करीब 134 लोगों पर एक अध्ययन किया गया। इन रोगियों को होम्योपैथिक उपचार के तहत रस टॉक्सिकोडेंड्रोन, सल्फर, नेट्रम म्यूरिएटिकम और एपिस मेलिफिका दिया गया। 7 दिनों तक आंकलन करने के बाद मरीजों की स्थिति यानी उनके लक्षणों की जांच की गई और उनसे जीवन की गुणवत्ता के बारे में पूछने के लिए सवाल-जवाब किए गए। 12 महीनों तक होम्योपैथिक दवाइयां लेने के बाद, रोगियों में पित्ती के लक्षणों में महत्वपूर्ण सुधार देखा गया। इस दौरान प्रभावित हिस्से को नोचने या खुजली करने की प्रवृत्ति, नींद लेने के पैटर्न, फोकस और मनोदशा यानी मूड में सुधार पाया गया। अध्ययन से निष्कर्ष निकला कि होम्योपैथिक उपचार पित्ती के साथ लोगों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद कर सकता है।

(और पढ़ें - एलर्जी की आयुर्वेदिक दवा)

होम्योपैथिक उपाय प्राकृतिक पदार्थों से मिलकर तैयार किए जाते हैं। इन्हें बेहद घुलनशील रूप दिया जाता है। यही वजह है कि होम्योपैथिक ट्रीटमेंट को पित्ती या अन्य किसी स्थिति के उपचार के लिए सुरक्षित माना जाता है। इनका कोई साइड इफेक्ट नहीं है, लेकिन इन्हें कभी डॉक्टर के परामर्श के बिना नहीं लेना चाहिए, क्योंकि एक अनुभवी होम्योपैथिक डॉक्टर हमेशा मरीज की उम्र, शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य और बीमारी के लक्षणों को जानने के बाद ही दवाइयां निर्धारित करते हैं।

(और पढ़ें - कोल्ड अर्टिकेरिया का इलाज)

पित्ती की विशेषताओं में त्वचा पर खुजली और लाल चकत्ते होना शामिल हैं। यह स्थिति आमतौर पर अपने आप हल हो जाती है, लेकिन कई बार बहुत परेशानी का कारण भी बन सकती है। परंपरागत रूप से, पित्ती का उपचार प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाने वाली दवाइयों के माध्यम से किया जाता है। हालांकि, इन दवाओं का आमतौर पर लंबे समय तक उपयोग किए जाने पर दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, लेकिन होम्योपैथिक उपचार प्राकृतिक पदार्थों से तैयार किए जाते हैं और माना जाता है कि किसी अनुभवी डॉक्टर के मार्गदर्शन में इन दवाइयों को लेने से लेने पर इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है।

(और पढ़ें - खुजली का आयुर्वेदिक इलाज)

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संदर्भ

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  2. Oscar E. Boericke. Repertory. Médi-T; [lnternet]
  3. Rashmi Sharma et al. Assessment of the effectiveness of homoeopathic remedies in improving quality of life of chronic urticaria patients in a typical clinical setting. Year : 2018, Volume : 12, Issue : 3, Page : 139-148
  4. Homeopathy For Women. Homeopathy for Hives - Urticaria. USA; [internet]
  5. Hahnemann Samuel. Repertotium Homeopathicum. Médi-T; [Internet]
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