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मेलेनिन क्या है?

मेलेनिन शरीर में उपस्थित एक प्राकृतिक पदार्थ होता है। मेलेनिन आंखों की पुतली, बालों और त्वचा को रंग प्रदान करता है। त्वचा की मेलैनोसाइट्स (Melanocytes ) नामक कोशिकाएं शरीर में मेलेनिन का निर्माण करती हैं। मेलेनिन एक प्राकृतिक सनस्क्रीन का काम भी करता है, जो त्वचा को पराबैंगनी किरणों (UV rays) से बचाता है। हालांकि यह सनबर्न को पूरी तरह से नहीं रोक पाता। आपके शरीर में मेलेनिन की मात्रा, विटामिन डी बनाने की शरीर की क्षमता को भी निर्धारित करती है। विटामिन डी एक आवश्यक पोषक तत्व होता है, जो धूप के संपर्क में आने पर बनता है। मेलेनिन का स्तर इस इस पर निर्भर करता है, कि आप कितना समय धूप में बिताते हैं और धूप कितनी तेज है। 

इसके अलावा हार्मोन में किसी प्रकार का बदलाव मेलेनिन के सामान्य स्तर को प्रभावित कर सकता है। जिन लोगों में मेलेनिन की मात्रा जितनी अधिक होती है उनकी त्वचा का रंग उतना ही काला होता है, जबकि जिन लोगों में मेलेनिन कम होता है उनकी त्वचा गौरी होती है। मानव स्वास्थ्य के कई अलग-अलग पहलुओं के लिए मेलेनिन भी महत्वपूर्ण है और शरीर पर इसके कई अलग-अलग प्रभाव होते हैं। (और पढ़ें - गोरा होने के उपाय)

शरीर में मेलेनिन की कमी कई समस्याओं से जुड़ी होती है, जैसे विटिलिगो (Vitiligo) और एल्बीनिज़्म (Albinism)। शरीर में मेलेनिन की कमी होने पर आंख, बाल और त्वचा का रंग बिगड़ने जैसे लक्षण पैदा होने लगते हैं। शरीर में मेलेनिन कम होने पर रोशनी के प्रति अतिसंवेदनशीलता, देखने संबंधी समस्याएं और भेंगापन जैसे लक्षण भी पैदा हो जाते हैं। 

डॉक्टर इस स्थिति का परीक्षण आपके लक्षणों के आधार पर करते हैं, जांच के दौरान आपका शारीरिक परीक्षण किया जाता है। स्थिति की जांच की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर जेनेटिक टेस्टिंग और स्किन बायोप्सी जैसे टेस्ट करवाने का सुझाव भी दे सकते हैं। (और पढ़ें - डीएनए टेस्ट क्या है)

मेलेनिन के कारण होने वाली रंगहीनता (त्वचा का रंग बिगड़ना) आनुवंशिक समस्या है, जिसकी रोकथाम करना संभव नहीं है। मेलेनिन की कमी से होने वाली समस्या में सुधार करने के लिए त्वचा को धूप से बचाकर रखना, धूप से सुरक्षा करने वाली क्रीम का उपयोग करना, यू.वी. लाइट फोटोथेरेपी, कोर्टिकोस्टेरॉयड क्रीम और सोरलेन (psoralen) और टोक्रोलीमस (tacrolimus) जैसी दवाएं शामिल हैं। 

मेलेनिन की कमी होने पर कई जटिलताएं होने लगती हैं, जिनमें स्किन कैंसर, कम दिखाई देना, तनाव, भावनात्मक तनाव और सामाजिक अलगाव (समाज से दूर रहना) आदि शामिल हैं।

(और पढ़ें - तनाव दूर करने के घरेलू उपाय)

  1. मेलेनिन की कमी क्या है - What is Melanin Deficiency in Hindi
  2. मेलेनिन की कमी के लक्षण - Melanin Deficiency Symptoms in Hindi
  3. मेलेनिन की कमी के कारण और जोखिम कारक - Melanin Deficiency Causes & Risk Factors in Hindi
  4. मेलेनिन की कमी से बचाव - Prevention of Melanin Deficiency in Hindi
  5. मेलेनिन की कमी का परीक्षण - Diagnosis of Melanin Deficiency in Hindi
  6. मेलेनिन की कमी का इलाज - Melanin Deficiency Treatment in Hindi
  7. मेलेनिन की कमी की जटिलताएं - Melanin Deficiency Risks & Complications in Hindi
  8. मेलेनिन की कमी में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Melanin Deficiency in Hindi?
  9. मेलेनिन की कमी की दवा - Medicines for Melanin Deficiency in Hindi

मेलेनिन की कमी क्या है - What is Melanin Deficiency in Hindi

मेलेनिन की कमी क्या है?

मेलेनिन की कमी होना एक आम समस्या है, जिसमें शरीर सामान्य से कम मात्रा में मेलेनिन का निर्माण करने लगता है। इसके कारण त्वचा के कुछ क्षेत्रों में सफेद रंग के दाग बन जाते हैं, जिस स्थिति को विटिलिगो कहा जाता है या पूरी तरह से त्वचा रंगहीन हो जाती है जिसे एम्बीनिज्म कहा जाता है। 

(और पढ़ें - मेलेनिन कम करने के उपाय)

मेलेनिन की कमी के लक्षण - Melanin Deficiency Symptoms in Hindi

मेलेनिन की कमी होने के क्या लक्षण हैं?

मेलेनिन की कमी होने पर मुख्य रूप से विटिलिगो होता है, जिसका मुख्य लक्षण त्वचा पर रंगहीन या सफेद रंग के धब्बे बनना हैं। आमतौर पर ये रंगहीन धब्बे त्वचा के उन अंगों पर सबसे अधिक बनने लगते हैं, जो धूप के संपर्क में अधिक आते हैं, जैसे हाथ, पैर, बाजू, चेहरा और होंठ आदि। 

  • त्वचा पर सफेद रंग के निशान या धब्बे बनना विटिलिगो का मुख्य लक्षण होता है। 
  • सबसे पहले यह एक साधारण धब्बे या निशान के रूप में विकसित होता है, जो बाकी की सामान्य त्वचा से थोड़ा पीला दिखाई पड़ता है। लेकिन समय के साथ-साथ यह निशान धीरे-धीरे पीले से सफेद होने लग जाता है। 
  • जब सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं, तो कुछ समय के लिए ये वे वैसे के वैसे रहते हैं। लेकिन कुछ समय के बाद वे धीरे-धीरे बड़े होने लग जाते हैं। आपकी त्वचा में धब्बे बनने और स्थिर रहने की अवधि का एक चक्र बन सकता है। 
  • सामान्य तौर पर इस से किसी प्रकार की तकलीफ, जलन, खुजली या दर्द नहीं होता है और ना ही इससे त्वचा में किसी प्रकार का रूखापन आता है। (और पढ़ें - रूखी त्वचा की देखभाल)
  • इन सफेद धब्बों का कोई निश्चित आकार नहीं होता। कभी-कभी इन धब्बों के किनारे पर हल्की सी सूजन व लालिमा आ जाती है और उससे खुजली होने लगती है। (और पढ़ें - सूजन कम होने के उपाय)

ये धब्बे खासतौर पर शरीर के इन स्थानों पर होते हैं:

  • कोहनी
  • घुटने
  • पैर
  • नाभि
  • हाथ के पीछे
  • बाजू
  • नाक
  • आंख
  • जननांग क्षेत्र
  • गुदा क्षेत्र
  • मुंह
  • कांख और ग्रोइन (जांघ और पेडू के बीच का क्षेत्र)

एल्बीनिज़्म होने पर निम्न लक्षण महसूस होने लगते हैं:

  • त्वचा, आंख या बाल रंगहीन हो जाना
  • आंख, त्वचा का बालों का रंग सामान्य से हल्का होने लगना
  • त्वचा पर धब्बे पड़ना जो सामान्य त्वचा की तुलना में रंगहीन दिखाई पड़ते हैं। 

यदि एम्बीनिज्म, देखने से संबंधित किसी समस्या के साथ विकसित हुआ है, तो निम्न समस्याएं हो सकती हैं:

  • आंखों का भेंगापन, इस स्थिति में आंखे अलग दिशा में ताकती है
  • ठीक से दिखाई ना देना (और पढ़ें - 
  • अंधापन
  • रोशनी के प्रति अतिसंवेदनशीलता (रोशनी सहन ना कर पाना) (और पढ़ें - आंखों की रोशनी बढ़ाने के घरेलू उपाय)
  • अनैच्छिक रूप से (बिना मर्जी के) आंखें हिलना

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि आपकी त्वचा, बाल या आंख का रंग बिगड़ रहा है, तो अपने डॉक्टर को दिखा लें। यदि मेलेनिन की कमी की जांच समय पर की जाए तो रंग बिगड़ने की स्थिति को कम किया या रोका जा सकता है और जिस त्वचा का रंग बिगड़ चुका है उसको वापस सामान्य रंग प्रदान किया जा सकता है।

(और पढ़ें - बाल टूटने से कैसे रोकें)

मेलेनिन की कमी के कारण और जोखिम कारक - Melanin Deficiency Causes & Risk Factors in Hindi

मेलेनिन की कमी के कारण और जोखिम कारक - Melanin Deficiency Causes & Risk Factors in Hindi

मेलेनिन की कमी किस कारण होती है?

यदि आपका शरीर बहुत कम मात्रा में मेलेनिन बनाता है, तो आपकी त्वचा का रंग हल्का होने लगता है।

विटिलिगो एक ऐसी स्थिति है, जिसमें त्वचा पर चकत्ते बनने लग जाते हैं। सामान्य रूप से बालों और त्वचा का रंग मेलानिन के द्वारा ही निर्धारित किया जाता है। विटिलिगो तब होता है, जब मेलानिन बनाने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं या काम करना बंद कर देती हैं। विटिलिगो किसी भी प्रकार के रंग की त्वचा वाले लोगों को हो जाता है, लेकिन यह मुख्य रूप से गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों में अधिक देखा गया है। 

डॉक्टर भी कोशिकाओं के नष्ट होने या काम करना बंद कर देने के कारण के बारे में नहीं जानते, हालांकि यह निम्न समस्याओं से संबंधित हो सकती है:

  • कोई ऐसा विकार होना जिसमें आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली मेलानिन बनाने वाली कोशिकाओं पर हमला करने लग जाए। 
  • परिवार में पहले किसी को मेलेनिन से संबंधित कोई समस्या होना (और पढ़ें - मेलेनिन क्या है)
  • इस स्थिति को शुरू करने वाला कोई कारक (ट्रिगर) जैसे सनबर्न, तनाव या किसी औद्योगिक रसायन के संपर्क में आना
  • एल्बीनिज़्म एक आनुवंशिक समस्या है, जो किसी व्यक्ति की त्वचा को प्रभावित करती है। यह माता-पिता से प्राप्त किया गया विकार होता है, जो किसी व्यक्ति में जन्म से ही होता है। एल्बीनिज़्म से ग्रस्त किसी व्यक्ति की त्वचा या तो पूरी तरह से रंगहीन हो जाती है या उसकी त्वचा का रंग सामान्य से हल्का हो जाता है या फिर त्वचा के किसी हिस्से पर धब्बे बन जाते हैं। 
  • मेलेनिन को बनाने वाली या बनाने में मदद करने वाली किसी जीन में किसी प्रकार का दोष होने से एल्बीनिज़्म हो सकता है। अगर किसी ऐसी जीन मे किसी प्रकार का दोष है, तो उसके परिणामस्वरूप मेलेनिन के निर्माण में कमी हो जाती है या मेलेनिन बनना पूरी तरह से बंद हो जाता है। यह दोषपूर्ण जीन माता-पिता से बच्चे में भी जा सकती है, जिस से बच्चे को भी एल्बीनिज़्म हो जाता है।

मेलेनिन में कमी होने के कुछ अन्य कारण:

  • कुष्ठ रोग
  • ट्यूबरस स्क्लेरोसिस
  • पोस्ट इंफ्लेमेटरी हाइपोपिगमेंटेशन (किसी चोट, संक्रमण या जलने आदि के कारण कुछ समय के लिए त्वचा का रंग बिगड़ना)

(और पढ़ें - फंगल संक्रमण के घरेलू उपाय)

मेलेनिन की कमी होने का खतरा कब बढ़ता है?

कुछ स्थितियां हैं, जिससे मेलेनिन कम होने का खतरा बढ़ जाता है:

  • ज्यादातर लोगों को बीस साल की उम्र के आस-पास ही विटिलिगो होता है, हालांकि यह किसी भी उम्र में हो सकता है। 
  • जिन माता-पिता को एल्बीनिज़्म है या उनमें इस से संबंधित कोई दोषपूर्ण जीन है, तो उनकी संतान को एल्बीनिज़्म हो सकता है। 
  • किसी केमिकल के संपर्क में आना
  • जलना
  • संक्रमण होना
  • फफोला बनना

(और पढ़ें - जलने पर क्या करें)

मेलेनिन की कमी से बचाव - Prevention of Melanin Deficiency in Hindi

मेलेनिन की कमी से बचाव - Prevention of Melanin Deficiency in Hindi

मेलेनिन की कमी होने से कैसे बचाव करें?

मेलेनिन की कमी के दोनों प्रकारों (विटिलिगो और एल्बीनिज़्म) की रोकथाम करना संभव नहीं है, क्योंकि ये माता-पिता से प्राप्त किये जाने वाले विकार होते हैं। हालांकि कुछ प्रकार की सावधानियां बरतने से इनके मरीजों को जीवन जीने में थोड़ी आसानी हो जाती है। 

  • धूप से बचाव करें -  विटिलिगो के धब्बे अक्सर शरीर की उस जगह पर ही बनते हैं, जो धूप के संपर्क में अधिक आती है। तेज धूप से बचें और लंबे समय तक धूप में ना रहें। साथ ही साथ धूप से होने वाली क्षति से बचने के उपाय करने से विटिलिगो की रोकथाम करने में भी मदद मिलती है। (और पढ़ें - सनबर्न से बचने के उपाय)
  • तनाव ना लें - शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के तनाव से मेलेनिन से संबंधित समस्याएं होती हैं। (और पढ़ें - तनाव के लिए योग)
  • फलों व सब्जियों को धोकर खाएं - किसी भी सब्जी या फल को खाने से पहले साफ पानी में अच्छे से धो लें।
  • अपने पोषण और आहार में सुधार करें - आहार का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि आहार में कमी होना भी विटिलिगो विकसित होने का एक महत्वपूर्ण कारक है। 
  • खूब पानी पीना (हाइड्रेटेड रहना) - त्वचा का स्वास्थ्य हाइड्रेशन से स्तर पर निर्भर करता है। इसलिए दिन भर ताजा और साफ पानी पीते रहना अनिवार्य है।  (और पढ़ें - शरीर में पानी की कमी के लक्षण)
  • सूरज से बचाव के उपाय करना - धूप में जाने से पहले धूप से सुरक्षा प्रदान करने वाले कपड़े पहनना या धूप से सुरक्षा प्रदान करने वाली प्राकृतिक क्रीम आदि लगा लें। ऐसा करने से धूप का असर कम हो जाता है और त्वचा के रंग में बदलाव आदि नहीं हो पाते। (और पढ़ें - सूर्य के प्रकाश के लाभ)
  • क्लोरीन युक्त पानी का उपयोग कम से कम करना - सार्वजनिक पूल आदि में ना नहाएं क्योंकि उनके पानी में क्लोरीन का इस्तेमाल किया जाता है। 

(और पढ़ें - स्विमिंग के दौरान देखभाल)

मेलेनिन की कमी का परीक्षण - Diagnosis of Melanin Deficiency in Hindi

मेलेनिन की कमी की जांच कैसे की जाती है?

यदि आपके डॉक्टर को यह संदेह है कि आपको विटिलिगो हो गया है, तो उसका पता लगाने के लिए डॉक्टर आपकी पिछली मेडिकल जानकारी के बारे में आपसे पूछेंगे और आपका शारीरिक परीक्षण करेंगे। डॉक्टर डर्मेटाइटिस या सोरायसिस जैसे रोगों का पता लगाने के लिए भी कुछ जांच कर सकते हैं। डॉक्टर आपके शारीरिक परीक्षण के दौरान आपकी त्वचा को देखकर ही विटिलिगो का पता लगा लेते हैं। यदि आपके परिवार में किसी व्यक्ति को विटिलिगो है, तो इस बारे में भी डॉक्टर को जरूर बता दें। 

स्थिति का परीक्षण करने के लिए कुछ प्रकार के टेस्ट करवाने की आवश्यकता पड़ सकती है, जैसे:

  • अल्ट्रावॉयलेट लैंप टेस्ट (Ultraviolet lamp test) - विटिलिगो के धब्बों की जांच करने के लिए अल्ट्रावॉयलेट लैंप टेस्ट किया जा सकता है। इस लैंप को वुड्स लैंप (Wood’s lamp) भी कहा जाता है, इसकी मदद से डॉक्टर विटिलिगो और अन्य स्थितियों में अंतर स्पष्ट कर पाते हैं। (और पढ़ें - पैप स्मीयर टेस्ट क्या होता है)
  • स्किन बायोप्सी (Skin biopsy) - कई बार आपके डॉक्टर को त्वचा का सैंपल लेना पड़ सकता है, इस प्रक्रिया को बायोप्सी कहा जाता है। लेबोरेटरी में इस सेंपल की जांच की जाती है। स्किन बायोप्सी टेस्ट से पता लगाया जाता है, कि आपकी त्वचा के उस भाग में मेलेनिन बनाने वाली कोशिकाएं अभी भी मौजूद हैं या नहीं। (और पढ़ें - लैप्रोस्कोपी क्या है)
  • जेनेटिक टेस्टिंग (Genetic testing) - यह टेस्ट एल्बीनिज़्म की जांच करने का सबसे सटीक तरीका है। जेनेटिक टेस्टिंग की मदद से एल्बीनिज्म से संबंधित दोषपूर्ण जीन का पता लगाया जाता है। (और पढ़ें - ब्रोंकोस्कोपी क्या है)
  • इलेक्ट्रोरेटिनोग्राम टेस्ट (Electroretinogram test) - इस टेस्ट के द्वारा आंखों में उपस्थित उन कोशिकाओं का पता लगाया जाता है, जो प्रकाश के प्रति अतिसंवेदनशील होने लगी हैं। यह टेस्ट करने से एल्बीनिज्म से जुड़ी प्रकाश से प्रति अतिसंवेदनशीलता का पता लग जाता है। 

(और पढ़ें - ईसीजी क्या है)

मेलेनिन की कमी का इलाज - Melanin Deficiency Treatment in Hindi

मेलेनिन की कमी का इलाज - Melanin Deficiency Treatment in Hindi

मेलेनिन की कमी का इलाज कैसे किया जाता है?

विटिलिगो का इलाज:

  • सनस्क्रीन का उपयोग करना - त्वचा पर बने हल्के धब्बे प्रकाश के प्रति अतिसंवेदनशील होते हैं। इन धब्बों में सनबर्न जल्दी होता है। एेसे में अच्छी सनस्क्रीव का उपयोग करना चाहिए। (और पढ़ें - एक अच्छी सनस्क्रीन कैसे चुनें)
  • यू.वी लाइट के साथ फोटोथेरेपी - यूएवी (UVA) या यूवीबी (UVB) लाइट थेरेपी के साथ सोरलेन दवाओं का उपयोग भी किया जा सकता है, क्योंकि ये दवाएं त्वचा को यूवी लाइट के प्रति और अधिक संवेदनशील बना देती है। कभी-कभी त्वचा के ठीक होने के साथ-साथ उसकी सामान्य रंगत वापस आने लगती है। 
  • स्टेरॉयड युक्त कोर्टिकोस्टेरॉयड क्रीम और मलम - सफेद धब्बों पर ये क्रीम व मलहम लगाने से ये धब्बे फैलना बंद हो जाते हैं। यदि महीने के बाद कुछ सुधार दिखाई देता है, तो ये धब्बे दोबारा फैलना शुरू होने से पहले कुछ समय तक क्रीम का उपयोग रोक दिया जाता है।
  • टैक्रोलिमस युक्त मलम (Tacrolimus) - यदि छोटे-छोटे धब्बे बने हुऐ हैं, तो इस मलम की मदद से उनकी रंगत बिगड़ने से रोका जा सकता है। (और पढ़ें - दाग धब्बे मिटाने के उपाय)
  • मेकअप उत्पादों का उपयोग करना - यदि विटिलिगो के हल्के धब्बे हैं, और समस्या अधिक गंभीर नहीं है, तो आप उन हल्के धब्बों को कुछ कॉस्मेटिक क्रीम या मेकअप प्रोडक्ट की मदद से छिपा सकते हैं। 

(और पढ़ें - मेकअप हटाने का तरीका)

एल्बीनिज्म का कारण बनने वाली मेलेनिन की कमी को पूरा करने का कोई इलाज नहीं है। इसके अलावा डॉक्टर एल्बीनिज्म के कारण होने वाली आंख संबंधी समस्या में सुधार तो कर देते हैं, लेकिन इसका पूरी तरह से इलाज संभव नहीं है। 

एल्बीनिज्म के इलाज का मुख्य लक्ष्य मरीज में उपस्थित एल्बीनिज्म से संबंधित सभी लक्षणों का पता लगाना होता है। जिन लोगों को यह रोग है, उनको अपनी त्वचा व आंखें सूरज से बचा कर रखनी चाहिए। ऐसा करने के लिए कई तरीके अपनाए जा सकते हैं, जैसे:

  • लंबे समय तक धूप में ना रहना
  • ऐसे सनस्क्रीन का उपयोग करना जिसमें एसपीएफ की मात्रा अधिक हो
  • अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचाव करने के लिए धूप के चश्मे पहनना
  • जिन लोगों को नजर से जुड़ी समस्याएं हो गई हैं उनको अपने अनुसार नजर के चश्मे पहनने चाहिए
  • कुछ बहुत ही कम मामलों में ऑपरेशन करवाने की जरूरत भी पड़ सकती है
  • धूप में जाने से पहले कपड़ों से अपनी त्वचा को पूरी रह से ढक लें
  • जिन लोगों को एल्बीनिज्म की समस्या है, उनको नियमित रूप से त्वचा की जांच करवाते रहना चाहिए। ऐसा करने से त्वचा में कैंसर या कैंसर का कारण बनने वाले घाव आदि का पता लगाया जा सकता है। 

(और पढ़ें - घाव भरने के घरेलू उपाय)

मेलेनिन की कमी की जटिलताएं - Melanin Deficiency Risks & Complications in Hindi

मेलेनिन की कमी से क्या समस्याएं होती हैं?

विटिलिगो से ग्रस्त लोगों में निम्न जटिलताएं होने का खतरा बढ़ जाता है:

एल्बीनिज्म से होने वाली समस्याएं:

  • सनबर्न और स्किन कैंसर होने का खतरा बढ़ना
  • कुछ सामाजिक समस्याएं जैसे भयभीत रहना या अन्य शारीरिक हिंसा
  • सामाजिक समस्याओं के कारण तनाव, आत्म सम्मान की कमी और समाज से अलगाव रहना

(और पढ़ें - त्वचा की देखभाल कैसे करें)

मेलेनिन की कमी में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Melanin Deficiency in Hindi?

मेलेनिन की कमी होने पर क्या खाना चाहिए?

विटिलिगो के रोगियों के लिए कुछ प्रकार के खाद्य पदार्थ फायदेमंद हो सकते हैं, जैसे:

(और पढ़ें - चना दाल के फायदे)

मेलेनिन की कमी की दवा - Medicines for Melanin Deficiency in Hindi

मेलेनिन की कमी के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
KuvadexKuvadex 10 Mg Tablet0
MelacylMelacyl Tablet16
Meladerm (Inga)Meladerm 10 Mg Tablet0
MelanMelan 10 Mg Tablet14
MelanexMelanex 10 Mg Tablet20
MelcylMelcyl 10 Mg Tablet22
MacsoralenMACSORALEN DROPS 15ML0
MelanocylMelanocyl 1% Solution68
OctamopOctamop 0.75% Lotion103
SalenSalen 1% W/V Solution46

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References

  1. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Skin Pigmentation Disorders.
  2. Stanford Children's Health. [Internet]. Palo Alto, California, United States; Skin Pigment Disorders.
  3. American Vitiligo Research Foundation. [Internet]. Clearwater, Florida, United States; Vitiligo Signs & Symptoms.
  4. British Association of Dermatologists. [Internet]. United Kingdom. Vitiligo.
  5. TeensHealth. [Internet]. The Nemours Foundation, Jacksonville, Florida. Vitiligo.
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