परिचय

शरीर में विटामिन सी की कमी होने के कारण स्कर्वी हो जाता है। बहुत ही कम मामलों में किसी व्यक्ति में विटामिन सी की कमी होती है, क्योंकि ज्यादातर लोग पर्याप्त मात्रा में इसे विभिन्न प्रकार के आहारों से प्राप्त कर लेते हैं।

स्कर्वी के कारण शरीर में खून की कमी, कमजोरी, थकावट, हाथों में दर्द, पैरों में दर्दटांगों में दर्द, शरीर के कुछ हिस्सों में सूजन और कभी-कभी मसूड़ों में छाले होना या दांत टूटना आदि हो सकता है।

स्कर्वी का परीक्षण करना एक क्लिनिकल प्रक्रिया होती है, स्कर्वी का परीक्षण मरीज के लक्षण और संकेतों की जांच करके और उनकी भोजन संबंधी पिछली आदतों के बारे में जानकर किया जाता है। शरीर में विटामिन सी के स्तर की जांच करने के लिए खून टेस्ट किया जा सकता है।

डॉक्टरों के अनुसार निर्धारित विटामिन सी की मात्रा को नियमित रूप से प्राप्त करके स्कर्वी रोग से बचाव किया जा सकता है। स्कर्वी का इलाज आहार द्वारा प्राप्त विटामिन सी और एस्कॉर्बिक एसिड है। यदि स्कर्वी को बिना उपचार किये छोड़ दिया जाए तो इससे शारीरिक विकास रुकना, एनीमिया, हाइपरटेंशन और घाव भरने में देरी होने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। 

(और पढ़ें - पल्मोनरी हाइपरटेंशन के लक्षण)

  1. स्कर्वी क्या होता है - What is Scurvy in Hindi
  2. स्कर्वी के लक्षण - Scurvy Symptoms in Hindi
  3. स्कर्वी के कारण - Scurvy Causes & Risk Factors in Hindi
  4. स्कर्वी से बचाव - Prevention of Scurvy in Hindi
  5. स्कर्वी का परीक्षण - Diagnosis of Scurvy in Hindi
  6. स्कर्वी का इलाज - Scurvy Treatment in Hindi
  7. स्कर्वी की जटिलताएं - Scurvy Complications in Hindi
  8. स्कर्वी की दवा - Medicines for Scurvy in Hindi
  9. स्कर्वी के डॉक्टर

स्कर्वी का अर्थ

स्कर्वी एक ऐसा रोग है, जो शरीर में गंभीर रूप से विटामिन सी की कमी होने के कारण होता है। विटामिन सी आहार में पाया जाने वाला एक आवश्यक पोषक तत्व होता है। यह शारीरिक विकास और शरीर की संरचना संबंधी कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्कर्वी रोग होने पर शरीर के काफी सारे कार्य प्रभावित हो जाते हैं। 

(और पढ़ें - विटामिन सी के स्रोत)

स्कर्वी के क्या लक्षण हैं?

विटामिन सी शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करती है, जैसे शारीरिक विकास, हार्मोन व ऊतकों का निर्माण करना और कोशिकाओं से जुड़े कार्य आदि। 

विटामिन सी में कमी होने के 8 से 12 हफ्तों के बाद लक्षण दिखाई देने लग जाते हैं।

शुरुआती लक्षणों में निम्न शामिल हो सकते हैं -

बाद में होने वाले लक्षण -

विटामिन सी में कमी होने के एक से तीन महीने के बाद जो लक्षण विकसित होते हैं, वे कोलेजन के उत्पादन में कमी होने और शरीर में आयरन के अवशोषण में कमी होने से जुड़े होते हैं। (और पढ़ें - आयरन की कमी के लक्षण)


डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि आपको निम्न समस्याएं हैं तो आपको डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए:

  • घाव भरने में बहुत अधिक समय लगना (और पढ़ें - घाव भरने के उपाय)
  • मसूड़ों में सूजन व खून आना (और पढ़ें - मसूड़ों से खून आना)
  • दांत हिलना
  • त्वचा मे लाल या नीले रंग के धब्बे बनने लगना
  • हर समय अत्यधिक थकावट और कमजोरी महसूस होना 
  • पहले लगे किसी घाव या ऑपरेशन आदि के निशान फिर से खुलने लगना
  • अत्यधिक रूखे बाल, जो त्वचा की जड़ के पास से टूटने लग जाते हैं

(और पढ़ें - दांतों में झनझनाहट के लक्षण)

स्कर्वी क्यों होता है?

स्कर्वी से ग्रसित अधिकांश लोग उस वर्ग से आते हैं, जिन्हें ताजी सब्जियां और फल उपलब्ध नहीं हो पाते। ध्यान दें कि आपका शरीर खुद विटामिन सी नहीं बना पाता और विटामिन सी में कमी होने के कारण स्कर्वी रोग हो जाता है। 

इसका मतलब ये है कि आपको भोजन व पेय पदार्थों के माध्यम से या फिर सप्लीमेंट्स लेकर उतनी मात्रा में विटामिन सी प्राप्त करना है जितनी आपके शरीर को जरूरत है। यदि आप कम से कम लगातार तीन महीनों तक पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी नहीं ले रहे तो आपको स्कर्वी रोग हो जाता है।

यदि आपके शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी ना मिल पाए तो वह कोलेजन नहीं बना पाता जिस कारण से ऊतक छोटे टुकड़ों में टूटने (breakdown) लगते हैं। विटामिन सी आयरन को अवशोषित करने में भी मदद करती है। 

विटामिन सी का उपयोग कैसे घट जाता है?

  • रेस्ट्रीक्टिव डाइट - इस आहार में विटामिन सी नहीं पाया जाता या फिर बहुत ही कम मात्रा में पाया जाता है। 
  • धूम्रपान करना - धूम्रपान करने से भोजन से विटामिन अवशोषित करने की क्षमता कम हो जाती है। (और पढ़ें - धूम्रपान छोड़ने के घरेलू उपाय)
  • गर्भावस्था या स्तनपान कराना - इन स्थितियों में शरीर को अधिक विटामिन सी की आवश्यकता पड़ती है। (और पढ़ें - गर्भावस्था में देखभाल)
  • बहुत ही कम मात्रा में खाना खाना - इसके संभावित कारणों में कीमोथेरेपी जैसे वे उपचार शामिल हैं जिनके कारण आपको हर समय बीमार जैसा महसूस होता है। इसके अलावा एनोरेक्सिया जैसे भोजन विकार भी पीड़ित को पर्याप्त खाने से रोकते हैं।

स्कर्वी का खतरा कब बढ़ जाता है? 

स्कर्वी की रोकथाम कैसे करें?

स्कर्वी की रोकथाम करने और स्वस्थ जीवन जीने के लिए विटामिन सी प्राप्त करना आवश्यक है। 19 से 64 साल की उम्र के वयस्कों को एक दिन में 40 एमजी विटामिन सी प्राप्त करना होता है। संतुलित आहार और अलग-अलग प्रकार के खाद्य पदार्थों का सेवन करके आप उतना विटामिन सी प्राप्त कर लेते हैं, जितना आपके शरीर को चाहिए होता है। विटामिन आपके शरीर में एकत्रित नहीं होता, इसलिए आपको हर दिन अपने आहार में इसकी आवश्यकता होती है। 

जो लोग धूम्रपान करते हैं या जिसको पाचन संबंधी समस्या है उनको स्वस्थ लोगों और धूम्रपान ना करने वाले लोगों से 35 एमजी अधिक विटामिन सी चाहिए होता है।

(और पढ़ें - मुंह के कैंसर के लक्षण)

कुछ खाद्य पदार्थ जिनमें खूब मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है:

स्कर्वी की रोकथाम करने के लिए कुछ अन्य सावधानियां - 

  • यदि आप धूम्रपान करते हैं तो उसे छोड़ दें।
  • नियमित रूप से चलना, साइकिल चलाना, तैराकी करना व अन्य कई गतिविधियाँ, स्कर्वी की रोकथाम करने के लिए जरूरी हैं। (और पढ़ें - व्यायाम के फायदे)
  • जिन फलों व सब्जियों को बिना पकाए खाया जा सकता है, उनको खा लेना चाहिए। क्योंकि पकाने से उनके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। (और पढ़ें - पोषक तत्व के नाम)
  • यदि आपको लंबे समय से पाचन संबंधी समस्या है तो इलाज करवा लें। (और पढ़ें - पाचन शक्ति बढ़ाने के उपाय)
  • यदि आप पका कर खाना पसंद करते हैं, तो उनको उबाल कर पकाने की बजाए उन्हें भाप में पकाएं।
  • यदि आपको शराब की लत या भोजन विकार जैसी कोई अंदरूनी समस्या है तो उसका इलाज करवा लें।

स्कर्वी का परीक्षण कैसे किया जाता है?

लक्षणों के बारे में पता लगाकर डॉक्टर आसानी से स्कर्वी का परीक्षण कर लेते हैं। डॉक्टर आपका शारीरिक परीक्षण करेंगे और आपके खून में विटामिन सी के स्तर की जांच करने के लिए कुछ लैब टेस्ट करेंगे। 

खून टेस्ट में जब एस्कॉर्बिक स्तर <11 माइक्रोन / एल दिखाता है, तो परीक्षण की पुष्टि की जाती है और विटामिन सी सप्लीमेंट्स के द्वारा किए गए इलाज के प्रति लक्षणों की प्रतिक्रिया की जांच करके भी परीक्षण की पुष्टि की जाती है। 

एक्स-रे और एमआरआई जैसे कुछ इमेजिंग टेस्ट भी किये जा सकते हैं, जिनकी मदद से हड्डियों और ऊतकों में किसी प्रकार की क्षति की जांच की जाती है।

(और पढ़ें - हड्डियों में दर्द का इलाज)

कुछ अन्य प्रकार के खून टेस्ट जो विटामिन सी की कमी का संकेत देते हैं और शरीर में स्कर्वी विकसित करने का कारण बन सकते हैं:

स्कर्वी का इलाज कैसे किया जाता है?

शुरुआत में ही स्कर्वी की पहचान कर लेना काफी मुश्किल होता है, क्योंकि उस समय इसके लक्षण स्पष्ट नही होते और ना ही इसका कोई विशेष लक्षण होता। साथ ही इससे होने वाले लक्षण कई सामान्य समस्याओं के जैसे होते हैं। 

अगर स्कर्वी की पहचान काफी देर से होती है तो तब तक यह बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। हालांकि इसका इलाज कतई मुश्किल नहीं होता। 

गंभीर स्कर्वी के इलाज करने के लिए विटामिन सी को टेबलेट या सप्लीमेंट्स के रूप में या फिर इंजेक्शन के द्वारा दिया जाता है। स्कर्वी का ठीक से इलाज शुरू होने के कुछ घंटों बाद त्वचा और मसूड़ों से खून आना बंद हो जाता है। इलाज शुरू होने के 4 हफ्तों के बाद बाल फिर उगने लगते हैं। जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द को पूरी तरह से ठीक होने में कुछ हफ्तों का समय लग सकता है। (और पढ़ें - जोड़ों में दर्द के घरेलू उपाय)

डॉक्टर विटामिन सी की खुराक को निम्न तरीके से लेने का सुझाव देते हैं:

  • पहले 2 से 3 दिनों तक प्रतिदिन 1 से 2 ग्राम
  • फिर अगले 7 दिनों में 500 मिलीग्राम 
  • फिर अगले 1 से 3 महीनों तक 100 ग्राम

स्कर्वी का इलाज होने के बाद ज्यादातर लोगों को 48 घंटों के बाद आराम महसूस होने लगता है। यदि नियमित रूप से और सही मात्रा में विटामिन सी के सप्लीमेंट्स लिए जाएं तो स्कर्वी के मरीज 3 महीनों में पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। 

यदि स्कर्वी रोग किसी मानसिक रोग जैसे एनोरेक्सिया, बुलीमिया या डिप्रेशन आदि के कारण हुआ है, तो मानसिक रोगों के विशेषज्ञ या आहार विशेषज्ञों द्वारा मरीज का इलाज किया जाता है, जिससे फिर से स्कर्वी विकसित होने से रोकी जा सके। 

(और पढ़ें - डिप्रेशन के घरेलू उपाय)

स्कर्वी से क्या जटिलताएं हो सकती है?

स्कर्वी रोग विकसित होने से कई जटिलताएँ पैदा होने लगती हैं, जिनमें सूजन, गंभीर रूप से पीलिया, लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट होना, अचानक से खून बहना, न्यूरोपैथी और तेज बुखार होना आदि शामिल हैं। (और पढ़ें - बुखार भगाने के घरेलू उपाय)

यदि स्कर्वी लंबे समय से हो रहा है तो, निम्न जटिलताएँ हो सकती हैं:

  • दांत गिरना
  • घाव ठीक होने में अधिक समय लगना
  • आक्षेप (पेशियों में ऐंठन - Convulsions)
  • प्रलाप (उलझन महसूस करना - Delirium)
  • शरीर के भीतर रक्तस्त्राव होना
  • कोमा
  • शरीर का कोई अंदरुनी अंग काम करना बंद कर देना
Dr. Vineet Saboo

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एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान

Dr. JITENDRA GUPTA

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Dr. Sunny Singh

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