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प्रेग्नेंसी के दौरान अच्छी डाइट लेना बहुत जरूरी होता है। ये गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत से जुड़ा है, क्योंकि गर्भवती महिला के खान-पान का सीधा असर भ्रूण पर पड़ता है। हालांकि, इस दौरान ये जानना जरूरी है कि गर्भवती के लिए कैसी डाइट होनी चाहिए। डॉक्टरों की मानें तो गर्भावस्था के दौरान महिला को दूध उत्पाद यानी मिल्क प्रोडक्ट्स की काफी जरूरत होती है। 

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चूंकि मिल्क प्रोडक्ट्स (दूध, दही, पनीर इत्यादि) में कैल्शियम पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है, जो कि भ्रूण की ग्रोथ या विकास के लिए भी जरूरी है, लेकिन क्या आपको पता है कि डेयरी प्रोडक्ट्स का कम सेवन जन्म के बाद बच्चे को प्रभावित कर सकता है। एक रिसर्च के मुताबिक मिल्क या डेयरी प्रोडक्ट्स का कम इस्तेमाल बच्चे की सेहत (उम्र की तुलना में वजन कम होना) पर असर करता है।

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क्या कहती है रिसर्च ?
यूरोपियन जरनल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रिशन में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक मां के पोषण को बच्चे के विकास के लिए मुख्य स्रोत में से एक माना जाता है। इसके तहत शोधकर्ताओं ने गर्भावस्था के दौरान दूध उत्पादों के कम सेवन से नवजात बच्चों में कम वजन (स्मॉल जेस्टेशनल एज; SGA) के जोखिम का विश्लेषण किया। इस अध्ययन को स्पेन में आयोजित किया गया था, जिसमें गर्भावस्था के दौरान आहार के मूल्याकांन से जुड़े सवाल पूछे गए।

एक कंडीशनल लॉजिस्टिक रिग्रेशन मॉडल का उपयोग करके ऑड रेशो (Odds retios) और उनके 95 प्रतिशत कॉन्फिडेंस इंटर्वल (CI) का अनुमान लगाया गया। इसमें 518 मामले (एसजीए) और 518 नियंत्रित (उम्र के हिसाब से पर्याप्त वजन) शामिल थे। शोध में हिस्सा लेने वाली ज्यादातर महिलाएं ऐसी थी, जिन्होनें उचित मात्रा में डेयरी उत्पादों का सेवन नहीं किया था।

  • डेयरी उत्पादों का सेवन करना एसजीए की स्थिति से संबंधित नहीं था। लिहाजा रिसर्च के परिणामों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान कम मात्रा में डेयरी उत्पाद लेना एसजीए के खतरे को नहीं बढ़ाता है।
  • ऐसे में रिसर्च के परिणाम बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान कम डेयरी सेवन SGA (उम्र की तुलना में वजन का कम होना)  के बढ़ते जोखिम से जुड़ा नहीं है। बल्कि रिसर्च में महिलाओं के दोनों समूहों के अंदर मिल्क प्रोडक्ट की कम मात्रा में सेवन करने की संभावना हो सकती है।
  • यह अध्ययन हेलसिंकी द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार आयोजित किया गया था और अध्ययन में भाग लेने वाली महिलाओं को अस्पताल और एथिक्स समितियों द्वारा सभी प्रक्रियाओं में शामिल करने की मंजूरी दी गई थी।

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क्या है डॉक्टर की राय?
myUpchar से जुड़ी डॉक्टर अर्चना निरूला के मुताबिक दूध उत्पाद की कमी से बच्चे के वजन में अंतर होने को परिभाषित नहीं करता है। हां, अगर मां के अंदर प्रोटीन की कमी है तो बच्चे का वजन प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा भी कई कारण हो सकते हैं। जैसे-

  • गर्भावस्था के दौरान- उच्च रक्तचाप, किडनी की पुरानी बीमारी का होना
  • गर्भाशय और गर्भनाल को शामिल करने वाले कारक: गर्भाशय और नाल में रक्त का प्रवाह कम होना।
  • भ्रूण से संबंधित कारक: मल्टीप्ल जैस्टेशन (उदाहरण के लिए, जुड़वां या तीन बच्चे)

रिसर्च के आधार पर कहा जा सकता है कि दूध उत्पाद की कमी से बच्चे या भ्रूण के वजन में थोड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन पूरी तरह से इस समस्या की वजह मिल्क प्रोड्क्टस की कमी नहीं हो सकते, जिसका उल्लेख शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में किया है।

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