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हर महिला के लिए प्रेग्नेंट होना एक बेहद ही खास अहसास होता है। इस दौरान महिला के मन में कई तरह के भावनात्मक बदलाव आते हैं। इस समय महिला अपने गर्भ में धीर-धीरे विकसित होते भ्रूण को खुद भी महसूस कर पाती है। इस दौरान बच्चे के द्वारा हिलने और लात मारने का अहसास हर महिला को बेहद ही खुशी प्रदान करता है। गर्भवती महिला के पेट में हल्के से हाथ रखने से कोई भी बच्चे की हलचल को आसानी से महसूस कर सकता है।

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प्रेग्नेंसी के दौरान बच्चे के द्वारा लात मारने से मां को अहसास होता है कि उसके शरीर के अंदर भी एक जीवन पल रहा है। बच्चे की इसी सक्रियता की वजह से मां बच्चे के जन्म से पूर्व ही उससे भावनात्मक रूप से जुड़ जाती है।

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  1. गर्भ में बच्चे का लात मारना मां को कब महसूस होता है - Garbh me bache ka laat marna maa ko kab mahsus hota hai
  2. गर्भ में बच्चे के पैर मारने पर महिलाओं को कैसा अनुभव होता है - Garbh me bache ka laat marna maa ko kab mahsus hota hai
  3. प्रेग्नेंसी में बच्चे की हलचल कितनी बार महसूस होती है? - Pregnancy me bache ki halchal kitni baar mahsus hoti hai
  4. क्या गर्भ में बच्चे के किक करने की गनती करनी चाहिए? - Kya garbh me bache ke kick karne ki ginti karni chahiye
  5. गर्भ में बच्चे की हलचल न महसूस होने पर क्या करें - Garbh me bache ki halchal na mahsus hone pr kya karen
  6. बच्चा कब लात मारना शुरू करता है सप्ताह के अनुसार - Bacha kab laat marna suru karta hai saptah ke anusar

गर्भवती महिलाओं को प्रेग्नेंसी के 16 से 25 सप्ताह के दौरान गर्भ में पलने वाले बच्चे की हलचल महसूस होने लगती है। इस हलचल में महिलाएं गर्भ में बच्चे का लात मारना भी अनुभव करती है। लेकिन गर्भ में बनने वाले भ्रूण की हलचल प्रेग्नेंसी के 7वें से 8वें सप्ताह से ही शुरू हो जाती है। गर्भ में बच्चे के लात मारने को चिकित्सीय भाषा में क्विकइंनिंग (Quickening) कहा जाता है। जो महिलाएं पहली बार प्रेग्नेंट होती हैं उनको भ्रूण की इस तरह की हलचल को महसूस करने में थोड़ा समय लग सकता है। वहीं पहली बार मां बनने वाली कई महिलाओं को 25 सप्ताह बीत जाने के बाद भी गर्भ में बच्चे का लात मारना महसूस नहीं हो पाता है। जबकि दूसरी बार प्रेग्नेंट होने वाली अधिकतर महिलाओं को प्रेग्नेंसी का 13वां सप्ताह पूरे होने पर ही गर्भ में पलने वाले बच्चे की हलचल या उसका लात मारना आसानी से महसूस होने लगता है। प्रेग्नेंसी के दौरान अक्सर शांत बैठने और लेटने पर महिलाओं को भ्रूण के हिलने का अनुभव होता है। पतली महिलाएं भ्रूण की सक्रियता को अन्य महिलाओं के मुकाबले आसानी से महसूस कर पाती हैं।

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प्रेग्नेंट महिलाएं गर्भ में बच्चे की हलचल के दौरान पेट में किसी चीज के घूमने का अहसास करती हैं। यह अहसास धमनियों में ऐंठन की तरह होता है। पहली बार मां बनने वाली महिलाएं इस स्थिति को सही तरह से उजागर नहीं कर पाती हैं। लेकिन, दूसरी और तीसरी बार मां बनने वाली महिलाएं भूख और गैस के कारण पेट में हलचल व भ्रूण के हिलने की वजह से पेट में होने वाली हलचल की स्थिति को सही तरह से महसूस कर समझ पाती हैं।

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गर्भ में बच्चे का पैर मारना गर्भावस्था के दूसरी और तीसरी तिमाही में बेहतर तरीके से महसूस हो पाता है। इस दौरान प्रेग्नेंट महिला गर्भ में पलने वाले बच्चे के द्वारा किक, कोहनी या मुक्का मारने की हलचल को अनुभव कर सकती है।

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प्रेग्नेंसी के शुरूआती दौर में महिलाएं इस तरह की हलचल बेहद कम महसूस करती हैं, लेकिन प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही तक बच्चा बड़ा हो जाता है और इस दौरान उसकी हलचल मां को सही तरह से महसूस होने लगती है। साथ ही इस समय बच्चे के द्वारा मां के गर्भ में हलचल करने की स्थिति में बढ़ोतरी हो जाती है। कुछ अध्ययन बताते हैं तीसरी तिमाही तक गर्भ में बच्चा हर घंटे करीब तीस बार घूमता है।

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गर्भ में बच्चा दिनभर एक स्थिति में स्थिर नहीं रह पाता है और वह सोते समय भी हिलाना शुरू कर देता है। माना जाता है रात 9 बजे से सुबह 1बजे तक जब मां सोने जा रही होती है, तब बच्चा अधिक सक्रिय हो जाता है। इस समय मां के रक्त शर्करा के स्तर में बदलाव के कारण गर्भ में पलने वाले बच्चे में यह बदलावा होता है। बच्चा ध्वनि और किसी के द्वारा छूने पर अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर देता है। प्रेग्नेंट महिला का साथी सोते समय यदि उनके करीब आ जाए तो बच्चा किक करता है।

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प्रेग्नेंसी के 28वें सप्ताह के बाद जब बच्चा सही तरह से हलचल करना शुरु कर देता है, तब कुछ डॉक्टर्स प्रेग्नेंट महिला को सलाह देते हैं कि उनको बच्चे की हलचल, जैसे- मुक्के और लात मारने के संख्या को गिनना चाहिए। इस तरह से डॉक्टर पता लगाते हैं कि बच्चा गर्भ में सामान्य तरह से बढ़ रहा है या नहीं। लेकिन इस तरह के तरीके का ऐसा कोई भी वैज्ञानिक आधार मौजूद नहीं है जो यह साबित करता हो कि गर्भ में आपका बच्चा सही है, इसलिए गर्भ में पल रहे अपने बच्चे की जांच के लिए आपको डॉक्टर से समय-समय पर मिलकर इसकी जांच करवाते रहनी चाहिए।

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अगर प्रेग्नेंट महिला अपने गर्भ के बच्चे की हलचल को सही तरह से महसूस करना चाहती है, तो इसके लिए उनको ऐसे समय को चुनना चाहिए, जब बच्चा सबसे ज्यादा सक्रिय होता हो। सामान्यतः प्रेग्नेंट महिलाओं के भोजन करने के बाद बच्चे की हलचल बढ़ जाती है। इस दौरान बच्चे की हलचल का सही पता लगाने के लिए प्रेग्नेंट महिला को आराम से कहीं बैठ जाना चाहिए या एक करवट लेकर लेट जाना चाहिए।

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बच्चे की हलचल को गिनने के तरीके पर कई विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है। इस तरीके पर एक विदेशी विश्वविद्यालय ने अपना तर्क रखते हुए कहा है कि दो घंटे में बच्चे को कम से कम दस बार हलचल करनी चाहिए। अगर प्रेग्नेंट महिला दो घंटों में ऐसा महसूस नहीं करती है, तो उसको अगले दो घंटों में इसका अनुभव करना चाहिए। यदि फिर भी बच्चे की हलचल दस बार महसूस न हो तो इस बात की आशंका होती है कि बच्चा सामान्य की अपेक्षा कम सक्रिय है। इस स्थिति में आपको डॉक्टर से मिलकर बच्चे की हृदय की दर और अन्य जांच करवानी चाहिए।

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कई महिलाएं प्रेग्नेंसी के 25वें सप्ताह पूरे होने से पहले ही बच्चे की हलचल न महसूस करने से घबराने लगती हैं। जबकि, इस समय अवधि तक बच्चा बेहद कम सक्रिय हो पाता है या वह किक करता भी है तो भी मां को महसूस नहीं हो पाता। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को धैर्य बनाए रखना चाहिए और बच्चे के बड़े होने का इंतजार करना चाहिए।

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गर्भ में पलने वाले बच्चे के बड़े होने के बाद आप उसके द्वारा लात मारने, कहनी मारने या हलचल करने को बेहतर तरह से अनुभव कर पाएंगी। इस दौरान गर्भवती महिलाएं बच्चे की सक्रियता को सही तरह से महसूस कर पाती हैं। कई बार बच्चे के द्वारा कम हलचल का मतलब यह भी हो सकता है कि वो उस समय सोया हुआ हो। प्रेग्नेंसी के 32वें सप्ताह के बाद जब बच्चे को गर्भाशय में घुमने के लिए जगह नहीं मिल पाती है तो वह लात मारना शुरू करता है। अगर गर्भ में पल रहें बच्चे की हलचल करने की स्थिति हर दो घंटे में दस बार से कम हो तो आपको इसके लिए अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

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12वां सप्ताह : इस समय बच्चा बढ़ना शुरू करता है, लेकिन फिर भी वह हलचल करता है। बच्चे के बहुत छोटे होने की वजह से महिलाएं इस समय कुछ भी महसूस नहीं कर पाती हैं।

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16वां सप्ताह : इस समय कुछ गर्भवती महिलाओं को गर्भाशय में तितली घूमती हुई महसूस होती है। इस दौरान गैस की वजह से पेट में होने वाली हलचल व बच्चे की हलचल में वह अंतर महसूस नहीं कर पाती हैं।

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20वां सप्ताह : इस समय तक गर्भ का बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाता है और महिलाएं बच्चे के लात मारने को महसूस कर पाती हैं।

24वां सप्ताह : इस दौरान बच्चा और विकसित हो जाता है और महिलाएं बच्चे की हिचकी के रूप में हल्के झटके अनुभव करती हैं।

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28वां सप्ताह : इस समय प्रेग्नेंट महिलाएं अपनी सांसों को लेने के दौरान बच्चे के किक और कोहनी मारने को महसूस करती हैं।

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36वां सप्ताह : इस सप्ताह तक बच्चा गर्भाशय के आकार के अनुसार विकसित हो चुका होता है। इस दौरान यदि बच्चा हलचल कम कर दें, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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