myUpchar प्लस+ के साथ पूरेे परिवार के हेल्थ खर्च पर भारी बचत

गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ और फिट रहना अपने लिए और अपने बच्चे के लिए बेहद ज़रूरी होता है। अगर आपको गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में सुबह उठकर मॉर्निंग सिकनेस (morning sickness) या अन्य असहजता महसूस होती है तो उस स्थिति से ध्यान हटाकर थोड़ा घूमने फिरने पर भी ध्यान ज़रूर दें। गर्भावस्था के दौरान फिट और स्वस्थ रहने के लिए ज़रूरी है कि आप रोज़ाना व्यायाम करें।

व्यायाम आपके वज़न को नियंत्रित रखता है, बढ़ते वज़न के लिए आपको सहन-शक्ति देता है और डिलीवरी के लिए आपको तैयार करता है। लेकिन अपने वर्कऑउट्स के दौरान बेहद सतर्क रहना भी ज़रूरी होता है।

तो आज हम आपको इस लेख में गर्भावस्था के दौरान व्यायाम से जुड़े कुछ फायदे, सावधानियां, नियम आदि बताने वाले हैं। जिनको ध्यान में रखकर आप खुदको और अपने बच्चे को स्वस्थ रख सकते हैं।

  1. गर्भावस्था के दौरान व्यायाम करने के फायदे - Benefits of exercise during pregnancy in Hindi
  2. गर्भावस्था में व्यायाम करते से समय सावधानियां - Precautions for exercise during pregnancy in Hindi
  3. गर्भावस्था के दौरान व्यायाम से संबंधित नियम - Rules of exercise during pregnancy in Hindi
  4. पहली तिमाही में व्यायाम - First trimester pregnancy exercises in Hindi
  5. दूसरी तिमाही के दौरान व्यायाम - Prenatal exercises during second trimester in Hindi
  6. तीसरी तिमाही में व्यायाम - Pregnancy exercises for third trimester in Hindi
  7. प्रेग्नेंसी के दौरान पैदल चलने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान फिट और व्यायाम करते रहने से आपको बेहद फायदा पहुँचता है जैसे -

  1. इससे आप गर्भावस्था में होने वाली समस्या जैसे कमर दर्द, कब्ज़, चिंता आदि से दूर रहते हैं। (और पढ़ें - प्रेगनेंसी में होने वाली समस्याएं)
  2. गर्भावस्था के दौरान होने वाले बदलाव में भी व्यायाम बहुत आराम पहुंचाता है। (और पढ़ें - प्रेग्नेंट होने के लिए क्या करें)
  3. स्वस्थ वज़न बनाये रखता है।
  4. रात को अच्छी नींद देने में भी मदद करता है।
  5. तनाव को दूर रखता है और आत्मविश्वास को सुधारता है।
  6. आपके शरीर और दिमाग को डिलीवरी के लिए तैयार करता है।
  7. अगर आपको गर्भावस्था के दौरान शुगर (gestational diabetes) हो जाती है तो व्यायाम आपके शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
  8. डिलीवरी होने के बाद व्यायाम आपके शरीर को वापस आकार में लाता है। (और पढ़ें - डिलीवरी के बाद वजन कम कैसे करें)

गर्भावस्था में व्यायाम करने के लिए सबसे पहले अपने डॉक्टर से बात ज़रूर करें। डॉक्टर से परामर्श और भी महत्वपूर्ण है अगर -

  1. आपकी इस गर्भावस्था से पहले हुई डिलीवरी समय से पहले हो गयी हो या गर्भावस्था के दौरान रक्त स्राव हुआ हो या मिसकैरिज हुआ हो।
  2. आपके खून में आयरन का स्तर कम हो (गंभीर एनीमिया)। (और पढ़ें - गर्भावस्था में खून की कमी)
  3. आपके बच्चे का विकास गर्भावस्था के दौरान सही से नहीं हो रहा हो। (और पढ़ें - गर्भ में बच्चे का विकास)
  4. आपको हाई ब्लड प्रेशर या प्री-एक्लेमप्सिया है और ये स्थिति दवाई से भी ठीक न हो। (और पढ़ें - गर्भावस्था में हाई बीपी)
  5. गर्भावस्था से पहले आपका वज़न का अधिक था (बॉडी मॉस इंडेक्स (body mass index) 40 या उससे अधिक)। (और पढ़ें - गर्भावस्था में वजन बढ़ना)
  6. गर्भवती होने से पहले आपका वज़न बहुत कम हो (बॉडी मॉस इंडेक्स (body mass index) 12 या उससे कम)
  7. आप बहुत ज़्यादा धूमपान करते हों।
  8. आपको जोड़ों और मांसपेशियों से जुडी समस्या हो।
  9. आपको ह्रदय और फेफड़ों से जुडी परेशानी हो।
  10. आप जुड़वा की अपेक्षा कर रहे हों।
  11. आपका शुगर (डायबिटीज) नियंत्रित न हो। (और पढ़ें - गर्भावस्था में शुगर)

गर्भावस्था के दौरान ​व्यायाम न करें अगर -

  1. आपकी इस गर्भावस्था से पहले हुई डिलीवरी समय से पहले हो गयी हो या अभी के गर्भावस्था के दौरान आपको मिसकैरिज होने का जोखिम हो।
  2. अगर गर्भावस्था के 26 हफ्ते होने के बाद भी आपकी प्लेसेंटा गर्भाशय में अधिक नीचे स्थित (placenta praevia) है।
  3. आपकी ग्रीवा में कमज़ोरी हो।
  4. आपके गर्भ में एक से अधिक बच्चे हो।
  5. आपको बहुत गंभीर ह्रदय और फेफड़ों की बिमारी हो।
  6. आपकी योनि से लगातार खून निकलता हो। (और पढ़ें - गर्भावस्था में रक्तस्राव)
  7. आपको बहुत ज़्यादा हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो।

गर्भावस्था में व्यायाम और अन्य विषयों के बारे में हमेशा अपने डॉक्टर से जानकारी ज़रूर लेते रहें।

अगर आपकी प्रेगनेंसी पूरी तरह से सामान्य है, तो भी नीचे बताये नियमों का भी पालन ज़रूर करें -

(और पढ़ें - प्रेगनेंसी टेस्ट कितने दिन बाद करे)

1. सबसे पहले अपने डॉक्टर से बात करें

नियमित व्यायाम को शुरू, जारी या बदलने के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से बात ज़रूर करें। अगर आप गर्भवती होने से पहले भी व्यायाम कर रहीं थी और अगर आपको गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह की समस्या नहीं है तो आप अपने व्यायाम में कुछ बदलाव लाकर उसे जारी रख सकते हैं। हालाँकि कुछ मामलों में गर्भावस्था के दौरान व्यायाम करना ठीक नहीं होता इसलिए इसे शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से बात ज़रूर करें।

2. सही मात्रा में कैलोरी का सेवन करें

व्यायाम कैलोरी को बर्न कर देता है तो शरीर में उसकी मात्रा पूरी करने के लिए ऐसे खाद्य पदार्थ खाये जो आपको पोषण और मजबूती दोनों दे सके। जब आप गर्भवती होती हैं तब आपका वज़न धीरे धीरे बच्चे के विकास के साथ साथ बढ़ने लगता है। अगर आपका बॉडी मॉस इंडेक्स 18.5 और 24.9 के बीच है तो आपको पूरे दिन में 340 कैलोरी का सेवन दूसरे तिमाही में करना चाहिए। तीसरी तिमाही में आपको पूरे दिन में 450 कैलोरी का सेवन करना चाहिए। कैलोरी का सेवन आपके व्यायाम करने पर भी निर्भर करता है। कैलोरी अधिक वज़न या कम वज़न के अनुसार खाएं।

3. गर्भावस्था के दौरान ज़्यादा भारी खेल न खेलें

ऐसे खेल न खेलें जिनसे आपका संतुलन बिगड़ सकता है और जिनसे आप गिर सकते हैं जैसे हॉर्सबैक राइडिंग, जिमनास्टिक्स, माउंटेन बाइकिंग, बास्केटबॉल आदि। गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में साइक्लिंग करना बिलकुल ठीक है लेकिन गर्भावस्था के बाद अगर आप स्टैशनेरी बाइक का इस्तेमाल करते हैं तो वो आपके शरीर के लिए बेहद फायदेमंद रहेगी। रैकेट, स्कूबा डाइविंग जैसे खेल भी आपके लिए नुकसानदेह हैं।

4. सही कपड़ों का चयन करें

गर्भावस्था के दौरान हमेशा ढीले ढाले कपडे पहने। ऐसे कपड़ों में आप सांस आसानी से ले सकेंगे। ऐसे कपड़ों का चयन करें जिन्हे आप आसानी से उतार सकें। आपकी ब्रा आरामदायक होनी चाहिए और आपके पैरों में जूते एकदम फिट होने चाहिए जिससे आप आसानी से चल सकें। अगर आप पैरों की सूजन की वजह से जूतों में आराम महसूस नहीं करते तो फ्लोटर्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

5. व्यायाम करने से पहले करें वार्मअप

वार्मअप करने से आपकी मांसपेशियां और जोड़ों को व्यायाम के लिए तैयार करने में मदद मिलती है और आपके ह्रदय की गति भी धीरे धीरे बढ़ती है। अगर आप सीधा व्यायाम शुरू कर देते हैं और वार्मअप नहीं करते तो आपकी मांसपेशियों और लिगामेंट्स में खिचांव आ सकता है और वर्कआउट के बाद दर्द आपका बढ़ सकता है। आप वार्मअप के लिए चलने की प्रक्रिया को धीरे धीरे कुछ मिनट में बढ़ाते रहें।

6. ज़्यादा से ज़्यादा पानी पियें

व्यायाम से पहले, दौरान और बाद में पानी ज़रूर पियें। अगर आप पानी पिने का ध्यान नहीं रखते हैं तो आपका शरीर डिहाइड्रेटेड होने लगेगा और रक्त प्लेसेंटा तक नहीं पहुंच पाएगा। गर्भवती महिलाओं को कितना पानी पीना चाहिए इसका जवाब अभी नहीं मिल पाया है लेकिन आप अपने मूत्र को देखकर इस सवाल का जवाब पा सकते हैं। जब भी आप टॉयलेट जाएँ तो मूत्र का रंग ज़रूर देखें। अगर उसका रंग ज़्यादा पीला है तो इसका मतलब आपको हर घंटे एक से दो ग्लास पानी पीना ज़रूरी है।

7. अपनी कमर के बल एकदम सीधा न लेटें

पहले तिमाही के बाद सीधा कमर के बल लेटने वाले व्यायाम न करें। क्योंकि आपके गर्भाशय का वजन मुख्य नस पर पड़ने लगता है जिसे वेना कावा (vena cava) कहते हैं, जिसकी वजह से रक्त का प्रवाह ह्रदय तक कम होता चला जाता है और आपके दिमाग और गर्भाशय तक रक्त का प्रवाह नहीं पहुंच पाता। इससे आपको साँस की तकलीफ, मतली जैसे समस्या हो सकती है। कुछ गर्भवती महिलायें इस स्थिति में किसी भी तरह की दिक्कत महसूस नहीं करती लेकिन इस तरह लेटना आपके गर्भाशय के लिए बिलकुल भी सही नहीं है। आप अपनी कमर के नीचे तकिया लगा सकते हैं।

8. चलते फिरते रहें

उदहारण के लिए जब आप योग अवस्था में हो या वेट उठाते वक़्त ज़्यादा समय के लिए एक जगह खड़े हैं या एक जगह स्थिर हैं। तो रक्त का प्रवाह ह्रदय और गर्भाशय तक पहुंच नहीं पाएगा और इससे कई कारण हो सकते हैं जैसे पैरों में रक्त का प्रवाह जाने लगेगा, ब्लड प्रेशर लो हो सकता है जिसकी वजह से आपको चक्कर आने की समस्या हो सकती है। इसलिए जिस भी स्थिति में आप हो तो चलने फिरने, हिलने डुलने की प्रक्रिया भी करते रहें।

9. ज़्यादा व्यायाम न करें

जब भी आप थकावट महसूस करें तो व्यायाम को आगे न बढ़ाएं। हमेशा अपने शरीर की सुने। जिस भी समय आपको कही भी दर्द हो तो व्यायाम को रोक दें। फिर व्यायाम के बाद दिन का काम शुरू करने से पहले थोड़ा आराम कर लें। जैसे अगर आप आधे घंटे के लिए चले हैं तो आधे घंटे के लिए आराम भी करें।

10. अधिक गर्मी और उमस में व्यायाम न करें

गर्भावस्था के दौरान व्यायाम करने से आपका रक्त का प्रवाह और उच्च चयापचय दर बढ़ता है। इससे आप हमेशा से ज़्यादा गर्म महसूस करने लगते हैं। इसलिए गर्भावस्था के दौरान गर्म और उमस वाली जगह पर व्यायाम न करें। ये स्थिति किसी किसी के साथ होती है लेकिन अगर आपको अधिक पसीना आ रहा है तो इस बात पर ज़रूर ध्यान दें क्योंकि इससे आपको चक्कर, मतली और साँस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है। ठंडा होने के लिए अपने पसीने वाले कपड़ों को उतारे और हल्के कपडे पहने, किसी ठंडी जगह या एयर कंडीशनर के सामने जाकर बैठ जाएँ और खूब सा पानी पियें।   

11. उठने के लिए किसी का सहारा लें या आराम से उठें

जैसे जैसे आपका वज़न और पेट बढ़ता जाता है वैसे वैसे आपको चलने उठने के लिए किसी के सहारे या सावधानियों की ज़रूरत होती है। जब भी अवस्था को बदले तो ध्यान से बदलें। एकदम से न उठे। एकदम से उठने से आपको चक्कर आ सकते हैं और आप ऐसे गिर भी सकते हैं।

12. कुछ आरामदायक व्यायाम करें

वर्कआउट के बाद पांच से दस मिनट के लिए गर्भावस्था से जुडी कुछ स्ट्रेचिंग करें। इससे आपका लचीलापन सुधरता है और हृदय की दर सामान्य रहती है। स्ट्रेचिंग से मांसपेशियों का दर्द भी कम होता है।

13. व्यायाम को बनाये आदत

गर्भावस्था के दौरान रोज़ाना व्यायाम करने की आदत डालें। इससे आपके गर्भावस्था के बाद भी व्यायाम करने का रूटीन बना रहेगा। इससे आप और आपका बच्चा दोनों स्वस्थ और फिट रहेंगे। व्यायाम करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपने दोस्तों के साथ चलना, व्यायाम करना या जिम आदि बाते करते करते कर सकते हैं।

(और पढ़ें - एक्सरसाइज के फायदे)

पहली तिमाही में व्यायाम की शुरुआत कैसे करें

गर्भवती होने से पहले अगर आप व्यायाम नहीं करते तो यही समय है कि व्यायाम को अपनी आदतों में शामिल कर लें। सबसे पहले हल्के प्रयास से शुरू करें प्रति दिन 30 मिनट तक व्यायाम करें। हर हफ्ते तीन से पांच बार व्यायाम को दोहराएं। अगर संभव हो तो आप गर्भावस्था के दौरान व्यायाम से जुड़े ट्रेनर की सलाह भी ले सकते हैं।

पहली तिमाही में योग

गर्भावस्था के दौरान और हमेशा के लिए योग आपके लिए बेहद फायदेमंद है। योग करने से आपके शरीर को मजबूती और संतुलन मिलता है, मांसपेशियां लचीली होती है, ब्लड प्रेशर दूर होता है और सांस लेने में किसी भी तरह की तकलीफ महसूस नहीं होती। एक रिसर्च के अनुसार जब आपका शरीर रजोनिवृत्ति में प्रवेश करता है तो योग ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis) को रोकने में मदद करता है। अगर शुरुआत से ही आप योग कर रहे हैं और आपको गर्भावस्था के दौरान इसे करने में किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो रही है तो आप इसे जारी रख सकते हैं।

इस तरह के योग न करें

  1. कमर मुड़ने से जुड़े योग।
  2. ऐसे योग जिसमे आपका पेट मुड़ रहा हो।
  3. ऐसी अवस्था जिसमे आपके पैर आपके सिर के ऊपर हो जैसे हेडस्टैंड।
  4. कमर के बल लेटने वाले योग।
  5. विक्रम या "गर्म" योग न करें।

कितना करना चाहिए

योग आप कितना भी करे ये आपके शरीर को स्वस्थ ही रखता है लेकिन आवश्यकता से अधिक अर्थात यदि इससे आपकी मांसपेशियों पर अधिक दबाव पड़ने लगे, तो यह सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकता है। पूरे दिन में सिर्फ आधा घंटा योग आपके शरीर के लिए काफी है।

(और पढ़ें - गर्भावस्था में योग और प्राणायाम)

पहली तिमाही में चलना है आपके लिए फायदेमंद -

गर्भावस्था में चलना एक बहुत ही फायदेमंद व्यायाम होता है। आप धीरे धीरे टहल सकते हैं और शरीर का ऊपरी हिस्सा मजबूत करने के लिए अपने कंधों को गोल गोल घुमाएं। हार्ट पम्पिंग को बढ़ाने के लिए अपने चलने की गति को बढ़ाएं।

कितना करना चाहिए

अगर आपको चलने की आदत नहीं है तो आप पूरे दिन में दस मिनट तक चलने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। हफ्ते में तीन से पांच बार चलने की प्रक्रिया करें। गिरने से बचने के लिए खुरदुरे सड़कों की बजाए प्लेन सड़कों का इस्तेमाल करें। 

पहली तिमाही में करें स्विमिंग -

गर्भावस्था के दौरान स्विमिंगपूल आपका सबसे अच्छा दोस्त होता है। पानी आपके शरीर को बेहद आराम देता है और इसमें गिरने का भी डर नहीं होता। गर्भावस्था में इसका उपयोग आपकी कोर स्ट्रेंथ को बढ़ाता है। अगर आप पहले से ही वाटर एक्ससरसाइस कर रहे हैं तो अपने रूटीन में किसी भी तरह के बदलाव लाने की ज़रूरत नहीं है। पूरे व्यायाम में अपने पेट को ज़्यादा न मोड़ें और अपनी ऊर्जा क्षमता पर बेहद ध्यान दें। अगर आप थक गए हैं तो इससे आगे न बढे और अपने ट्रेनर की मदद से इस व्यायाम को करें। 

कितना करना चाहिए

हफ्ते में तीन से पांच बार और आधे घंटे के लिए इस व्यायाम को करें।

पहली तिमाही में करें रनिंग

अगर आप कभी रनर नहीं रहें हैं तो गर्भावस्था के दौरान इसे न अपनाएं। हालाँकि ये पहली तिमाही में गर्भावस्था में समस्या पैदा कर सकता है। आपको भागने से जुड़े व्यायाम अगले कुछ महीनों तक नहीं करने चाहिए। रनिंग के अलावा अन्य स्वस्थ वर्कआउट भी है जिन्हे आप कर सकते हैं। अगर आप गर्भावस्था से पहले रनर रह चुके हैं तो आप अपनी पहली तिमाही में सुरक्षित रनिंग रूटीन दोहरा सकते हैं। हमेशा प्लेन सड़कों पर भागे और जब आप थक जाये तो तभी आराम से कही बैठ जाएँ।

कितना करना चाहिए

अगर आपकी गर्भावस्था से जुड़े रूटीन एकदम सही चल रहे हैं तो भागने की प्रक्रिया को हफ्ते में तीन दिन तक आधे घंटे के लिए ज़रूर रखें।

पहली तिमाही में करें वेट ट्रेनिंग

वेट ट्रेनिंग आपके शरीर को मजबूती देती है और गर्भावस्था के भार और डिलीवरी के लिए तैयार करती है। आप फ्री वेट या वेट मशीन पर वर्कआउट कर सकते हैं। पेट पर पड़ने वाले वज़न और कमर के बल लेटने वाले वर्कआउट न करें। वर्कआउट करने के लिए हमेशा ट्रेनर की मदद लें।

कितना करना चाहिए

एक रिसर्च के अनुसार गर्भावस्था के दौरान निम्न से मध्य स्ट्रेंथ ट्रेनिंग हफ्ते में दो बार ही करनी चाहिए।

दूसरे तिमाही तक आते आते ध्यानपूर्वक व्यायामों को करें।

दूसरे तिमाही में चलने की प्रक्रिया

चलना हर इंसान के लिए बेहद ज़रूरी है और गर्भावस्था के लिए ये एकदम फायदेमंद व्यायाम है। आजकल के मॉडर्न बर्थिंग सेंटर गर्भवती महिलाओं को समय समय पर चलने की सलाह देते हैं। चलते समय जब आप अपने कंधों का इस्तेमाल करते हैं तो आपका ऊपरी हिस्सा मजबूत और लचीला बन रहा होता है। चलना ह्रदय के लिए बेहद ही अच्छा व्यायाम है।

कितना करना चाहिए

हफ्ते में तीन से पांच बार आधे घंटे के लिए ज़रूर चलें। अगर आपको ज़्यादा चलने की आदत नहीं है तो आप शुरुआत दस मिनट से कर सकते हैं।

दूसरी तिमाही में करें योग

हल्के योग गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। यह आपकी मांसपेशियों को स्ट्रेच करते हैं, ब्लड प्रेशर को दूर करते हैं, कमर के दर्द को कम करते हैं। योग में सांस लेने की प्रक्रिया डिलीवरी करने में आपकी बहुत मदद करती है। अगर आप पहले से भी योग कर रहे हैं तो उसे गर्भावस्था में भी जारी रखें। इन योग को न करें जिनसे आप गिर सकते हैं जैसे वीरभद्रासन और वृक्षासन। कमर के बल लेटने वाले और पेट मोड़ने वाले योग न करें।

कितना करना चाहिए

हफ्ते में तीन से पांच बार योग करें। लेकिन अगर आप इसका अभ्यास रोज़ करना चाहते हैं तो आप इसे रोज़ भी कर सकते हैं। आधे घंटे के लिए आपके शरीर के लिए ये स्वास्थ्यमंद है लेकिन आप और ज़्यादा कर सकते हैं अगर आपको किसी भी तरह की परेशानी नहीं है तो।

दूसरी तिमाही में करें स्विमिंग

गर्भावस्था के दौरान पानी से जुड़ा व्यायाम बेहद अच्छा है। स्विमिंग में आपको गिरने का डर भी नहीं होता और आपकी मांसपेशियां कोर भी होती है। स्विमिंग करते समय पेट को न मोड़ें। अगर आप पहले से ही स्विमिंग करते हैं तो उसे जारी रखें अगर आप स्विमिंग करने के लिए नए हैं तो एक ट्रेनर की मदद ज़रूर लें।

कितना करना चाहिए

स्विमिंग हफ्ते में तीन से पांच बार आधे घंटे के लिए ज़रूर करें।

दूसरी तिमाही में करें रनिंग

अगर आप गर्भावस्था से पहले रनर रह चुके हैं और पहली तिमाही में आप ध्यानपूर्वक भागे हैं तो अपनी रनिंग की प्रक्रिया को जारी रख सकते हैं। ध्यान रहे आपके शरीर में बदलाव होना शुरू हो रहा है तो सभी व्यायाम ध्यान से करें जिससे आपके साथ गिरने जैसी समस्या न हो। ट्रैक पर या ट्रेडमिल पर सुरक्षित रूप से भागें। खुरदुरी सड़कों पर इस समय चलने से बचें। अगर आप पहले रनर नहीं रहें हैं तो भागने की प्रक्रिया न करें।

कितना करना चाहिए

अपने पहले के रनिंग रूटीन को फोलो करें और आधे घंटे तक भागने का लक्ष्य रखें। हफ्ते में तीन से पांच बार इस प्रक्रिया को करें।

तीसरी तिमाही आपके लिए बहुत ही ज़्यादा सवेंदनशील होती है तो इसमें व्यायाम करते समय पहले से और अधिक ध्यान रखने की आवश्यकता है।

तीसरी तिमाही में चलने की प्रक्रिया

गर्भवती महिलाओं के लिए चलना सबसे अच्छा व्यायाम है। इसमें सिर्फ और सिर्फ जूते और प्लेन ट्रैक की ज़रूरत पड़ती है। अगर चलना कार्डियोवस्कुलर के लिए पर्याप्त नहीं है तो चलने की जगह जॉगिंग कर सकते हैं। गर्भावस्था में चलने का रूटीन हालाँकि सही नहीं है लेकिन अगर आपने 27 हफ्ते तक इसे जारी रखा है तो आगे भी इसे जारी रखें।

तीसरी तिमाही में करें स्विमिंग

अगर आप स्विमिंग कर सकते हैं तो इसमें एक्वा स्पोर्ट्स (aqua sports) का भी मज़ा लें। लैप स्विमिंग पूरे शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होती है। ये उन महिलाओं के लिए भी लाभदायक है जिन्हे दर्द से संबंधित शिकायते रहती हैं। पानी कमर और पैरों का प्रेशर कम करता है और ज़्यादा ओवरहीटिंग से भी बचाता है। इस बात का भी ध्यान रखें कि आपको स्विम करते समय भी पसीना आ सकता है। तो ज़्यादा स्विमिंग भी न करें जिससे आपका शरीर ओवरहीट हो।

तीसरी तिमाही में करें योग

तीसरी तिमाही तक योग आपके शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। योग आपकी सारी मांसपेशियों को मजबूत करता है और फिट भी रखता है। योग के अलावा सभी वर्कआउट सुरक्षित और आरामदायक हैं। योग तनाव और चिंता को कम करता है। तीसरी तिमाही में योग को ध्यानपूर्वक करें।

तीसरी तिमाही में करें टोनिंग मूव्स

तीसरी तिमाही में आपके लिए भारी वज़न से जुड़े व्यायाम नुकसानदेह हो सकते हैं। आप बॉडी वेट वर्कआउट कर सकते हैं जैसे स्क्वाट्स, मॉडिफाइड प्लैंक (modified plank) और वोल-पुशअप (wall-pushups)। ये आपके शरीर को मजबूत रखने में मदद करेंगे। क्रंचेस व्यायाम और कमर के बल लेटने वाले व्यायामों को न करें।

और पढ़ें ...