गर्भावस्था के दौरान गैस की समस्या अक्सर हो जाती है अर्थात गर्भावस्था के दौरान गैस बनना एक आम चिंता का विषय है। कुछ के लिए, गैस बनने का मतलब पेट फूलना होता है जिसे "अपच" भी कहा जाता है। हालांकि, अधिकांश के लिए यह सिर्फ गैस पास करना होता है। गैस का नाम सुनने से सीधा ध्यान "फार्ट" की ओर जाता है, लेकिन व्‍यावसायिक (Professionally) रूप में इसे पेट फूलना कहते हैं। शरीर से गैस, कभी-कभी पेट फूलकर, जबकि कभी यह डकार के रूप में निकलती है।

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इसके लक्षण, गर्भावस्था के 11वें हफ्ते के आसपास शुरु होते हैं और पूरी गर्भावस्था के दौरान अर्थात प्रसव तक इसके होने की संभावना होती है।

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प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़ता प्रोजेस्टेरोन का स्तर, पाचन तंत्र सहित शरीर की सभी मांसपेशियों को आराम देता है। जिस कारण पाचन क्रिया धीमी हो जाती है और पेट में गैस बनने लगती है, जिसके कारण डकार, फार्ट (Fart) और पेट फूलने की समस्या होती है। अधिक भोजन कर लेने के बाद आंत में असहजता भी महसूस होती है।

बढ़ते गर्भाशय और हार्मोनल स्तर में वृद्धि के कारण गर्भावस्था के अंतिम दिनों में भी पेट फूलने की समस्या हो सकती है। हार्मोनों में वृद्धि के अलावा, गर्भावस्था के दौरान पेट में बनने वाली गैस के अन्य कारण भी हो सकते हैं जो इस प्रकार हैं।

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  1. गर्भावस्था में गैस बनने के कारण - Causes of bloating during pregnancy in Hindi
  2. आहार जिनसे बनती है पेट में गैस - Foods that cause gas and bloating during pregnancy in Hindi
  3. प्रेगनेंसी में पेट फूलने के इलाज और घरेलू उपाय - Treatment and home remedies for gas and bloating in pregnancy in Hindi
  4. गर्भावस्था में पेट में गैस से रोकथाम - Prevention of gas during pregnancy in Hindi
  5. प्रेगनेंसी में गैस बनना या पेट फूलना के डॉक्टर

बढ़ते प्रोजेस्टेरोन के स्तर और गर्भाशय के अलावा, अन्य कारक भी हैं जो गैस बनने का कारण बनते हैं।

कब्ज

भोजन, पाचन तंत्र के माध्यम से गुज़रता है और लंबे समय तक आंत में ही रहता है। इससे भ्रूण को पानी सहित सभी पोषक तत्व अवशोषित करने में मदद मिलती है। हालांकि, इस वजह से आंतो के अंदर मल सूख जाता है, जिस कारण उसे शरीर से बाहर निकालने में ज़्यादा समय लगता है। जिस वजह से गैस बनती है और पेट फूलता है।

खाद्य पदार्थों के प्रति संवेदनशीलता

कुछ खाद्य पदार्थ दूसरे कारणों की तुलना में अधिक गैस उत्पन्न करते हैं। उदाहरण के लिए, सीलिएक रोग (Celiac disease) से पीड़ित लोगों को गैस की समस्या अधिक होती है।

लैक्टोस असहिष्णुता (Lactose intolerance- दूध या डेयरी उत्पादों को पचाने में असमर्थता) से ग्रस्त लोगों को भी यही दिक्कत होती है। इसका कारण यह है कि उन लोगों का शरीर लैक्टोज (डेयरी उत्पादों में मौजूद शुगर) के लिए पर्याप्त लैक्टेज एंजाइम नहीं बना सकता है जिस वजह से वे इन उत्पादों को पचा नहीं पाते हैं।

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बड़ी आंत में बैक्टीरिया

यदि बड़ी आंत में बैक्टीरिया के संतुलन में कोई भिन्नता है, तो इससे अधिक गैस बनने और पेट फूलने की दिक्कत होती है।

वज़न बढ़ना

जब आपकी भूख के स्तर में वृद्धि होती है और आप अधिक खाने लगती हैं तब यह समस्या उत्पन्न होती है। विटामिन सप्प्लिमेंट्स के साथ पौष्टिक आहार लेने से आपके द्वारा ग्रहण की गयी कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है, जो आपको सुस्त और कम सक्रिय बनाती है। इसलिए, आप गैस बनने, पेट फूलने और असहजता महसूस करती हैं।

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कुछ खाद्य पदार्थ गर्भवती महिला में बदबूदार गैस बनने का कारण बन सकते हैं:

  1. पत्तागोभी, फूलगोभी, बीन्स, ब्रसल्ज़ स्प्राउट, प्याज, ब्रोकली, चुकंदर (Artichokes), और शतावरी में अवशोषित न होने वाले कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जिन्हें पचाया नहीं जा सकता। इसलिए, इनसे सल्फर युक्त गैस का उत्पादन हो सकता है।
  2. चने की दाल, मसूर की दाल, हरे चने की दाल और अरहर की दाल आदि दालों में फाइबर होता है लेकिन उच्च फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों के अत्यधिक सेवन से पेट में गैस हो सकती है।
  3. हालांकि, कुछ व्यक्तियों में, फाइबर युक्त आहार गैस में राहत पहुंचाने में मदद करता है।
  4. फल जैसे कि सेब, आम, किशमिश, सूखा आलूबुखारा, चेरी, तरबूज और आड़ू में भी न अवशोषित कर पाने वाला कार्बोहाइड्रेट होता है। आपका शरीर उन्हें पचा नहीं सकता है और वे बड़ी आंत से गुज़रते हैं जो पेट में गैस का कारण होता है।
  5. शीतल पेय (Soft drinks), शराब और बीयर से पेट में कार्बन डाइऑक्साइड बनती है जिसके कारण पेट फूलने की समस्या हो सकती है।
  6. फ्रक्टोज़ युक्त शुगर वाले फलों से भी गैस और पेट में सूजन हो सकती है।
  7. गेहूं, गेहूं के चोकर और गेहूं के उत्पादों से बड़ी आंत में फेर्मेंटेशन (Fermentation) होता है, इसलिए, पेट में गैस और सूजन होती है।
  8. सोर्बिटोल (Sorbitol) जो कुछ खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों में पाया जाने वाला एक कृत्रिम स्वीटनर है जो पेट में गैस बनाता है।

ज्यादातर मामलों में, आपको गैस से निजात पाने के लिए किसी भी उपचार की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद ये समस्या अपने आप ठीक हो जाती है। इसके अलावा, कुछ घरेलू उपचार और तरीके भी हैं जो इस दिक्कत में मदद कर सकते हैं।

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निम्न उपचार पर्याप्त मात्रा में उपयोग करने के लिए सुरक्षित माने जाते हैं और गर्भावस्था के बाद में भी इस्तेमाल किये जा सकते हैं। लेकिन पहली तिमाही में कुछ भी खाने पीने के बारे में सतर्क रहें क्योंकि अधिकांश जड़ी-बूटियां जन्म दोषों और अन्य जटिलताओं का कारण भी होती हैं। किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर सलाह ले लें।

  1. रात में एक गिलास पानी में मुठी भर मेथी भिगो कर रख दें और अगली सुबह बीजों को निकाल लें। गैस से छुटकारा पाने के लिए इस पानी को सुड़क सुड़क कर पिएं।
  2. खाने के बाद एक कप ताजा कैमोमाइल चाय पिएं। यह आपके पाचन तंत्र को सही रखने में मदद करता है और गैस और पेट फूलने की समस्या से छुटकारा दिलाता है।
  3. इलायची के बीज चबाने से सूजन और पेट के फूलने का स्वाभाविक रूप से इलाज होता है। आप इलायची की चाय भी पी सकती हैं। इसके लिए दो कप उबलते हुए पानी में छह छोटी इलायची और एक चुटकी जायफल पाउडर डालें। और इसे ताज़ा ताज़ा पी लें।
  4. एक कप उबलते पानी में एक बड़ा चम्मच शहद और दालचीनी पाउडर मिलाएं। इसे पी लें।
  5. धनिया के बीजों को कुचल कर एक कप गर्म पानी में मिलाएं। इस मिश्रण को छानें और इसे पी जाएं।
  6. एक चम्मच अदरक का ताज़ा रस तैयार करें, स्वाद के लिए इसमें शहद मिलाएं। यह पेट गैस के लिए उत्कृष्ट घरेलू उपचार है।

गंभीर पेट गैस और पेट फूलने की स्थिति में अपने डॉक्टर से परामर्श लें। कई ओवर-द-काउंटर और प्रिस्क्रिप्शन एंटी-गैस दवाएं आती हैं। लेकिन किसी भी दवा का सेवन डॉक्टर के कहने के बाद ही करें।

कम सोडियम युक्त ऐन्टैसिड (Antacids- जो पदार्थ अम्लता को कम करते हैं) को अक्सर एसिड रिफ्लक्स और पेट फूलने के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है।

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गर्भावस्था के दौरान गैस बनने से रोकना असंभव है, लेकिन उसे नियंत्रित करने के लिए आप निम्न आदतें ज़रूर अपना सकती हैं।

  1. अपने सिस्टम को साफ रखने के लिए खूब सारा पानी पिएं।
  2. धूम्रपान न करें। क्योंकि धुएं को अंदर लेते समय सांस के साथ हवा भी अंदर चली जाती है जिससे गैस बनती है।
  3. दिन में तीन समय अधिक भोजन करने के बजाय कई बार थोड़ी थोड़ी मात्रा में भोजन करें।
  4. बत्तीसी की जांच करें क्योंकि उनके ठीक से फिट न होने की वजह से भोजन करते या पानी पीते समय अतिरिक्त हवा अंदर चली जाती है।
  5. पेय पदार्थ पीने के दौरान स्ट्रॉ (Strow) का उपयोग न करें।
  6. धीरे-धीरे और ठीक से चबा कर भोजन करें अपने भोजन के बीच में पानी न पिएं और बातें भी न करें।
  7. पेट पर अतिरिक्त दबाव न पड़े इसके लिए आरामदायक ढीले कपड़े पहनें।
  8. एक आहार पत्रिका खरीद लें जिसमें ऐसे खाद्य पदार्थ लिखे हों जिनसे अपच और गैस पैदा होने की अधिक संभावना होती है, ताकि आप उनका सेवन न करें।
  9. कुछ गर्म खाने या पीने के तुरंत बाद ठंडा न खाएं क्योंकि आपके पेट के तापमान में तेज़ी से परिवर्तन होने से भी गैस बन सकती है।
  10. तनाव से राहत के लिए विश्राम तकनीक और योग का अभ्यास करें। (और पढ़ें - गर्भावस्था में योग)
  11. अपनी पाचन क्रिया को बेहतर बनाने के लिए हल्के व्यायाम करें जैसे भोजन के बाद थोड़ा टहल लें आदि। (और पढ़ें - गर्भावस्था में व्यायाम)
  12. भोजन के बाद बैठते या लेटते समय अपने पैरों को थोड़ा सा ऊपर उठा कर बैठें। इससे पाचन प्रक्रिया में मदद मिलती है, क्योंकि इससे गर्भाशय का दबाव आंतों पर कम पड़ता है।

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