सर्दियों के मौसम में होने वाले सामान्य सर्दी-जुकाम का वायरस गर्भवती महिला के साथ उसके भ्रूण को भी प्रभावित कर सकता है। ताजा रिसर्च के मुताबिक सर्दी-जुकाम का वायरस फैलोपियन ट्यूब (गर्भनाल) से होते हुए भ्रूण को भी नुकसान पहुंचा सकता है। अमेरिका में लुसियाना प्रांत की टुलैन यूनिवर्सिटी की हाल की इस रिसर्च में यह बात सामने आई है।

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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
जरनल प्लोस वन में प्रकाशित इस अध्ययन का नेतृत्व डॉक्टर जियोवानी पिडिमोन्टे ने किया था, जो टुलैन यूनिवर्सिटी में वाइस प्रेसिडेंट ऑफ रिसर्च और प्रोफेसर ऑफ पेडियाट्रिक्स हैं। डॉक्टर पिडिमोन्टे के मुताबिक यह पहली बार प्रमाणित हुआ है कि सर्दी-जुकाम का वायरस गर्भनाल को भी प्रभावित कर सकता है।

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शोधकर्ताओं ने बताया कि उनकी थ्योरी के अनुसार अगर महिला को गर्भावस्था के दौरान सर्दी-जुकाम होता है तो मैटरनल इंफेक्शन का कारण बना वायरस भ्रूण तक पहुंच सकता है और बच्चे में जन्म से पहले ही पल्मोनरी इंफेक्शन का कारण बन सकता है।

क्या कहती है रिसर्च?
टुलैन यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा यानी गर्भनाल एक द्वारपाल या चौकीदार की तरह कार्य करती है, जिसकी वजह से सारे आवश्यक पोषण मां से बच्चे को मिलते हैं। साथ ही गर्भनाल सब बीमारियों को भी फिल्टर करती है, ताकि बच्चे तक ऐसी कोई बीमारी ना पहुंच सके, जिससे उसे नुकसान पहुंचे। हालांकि, रिसर्च में पता चला है कि बीमारियों को रोकने के लिए ये बैरियर या अवरोधक अब इतना असरदार नहीं रहे हैं, जैसा कि पहले माना जाता था।

नई रिसर्च के मुताबिक जीका जैसे खतरनाक वायरस गर्भवती महिला के इस बैरियर को तोड़ने में सक्षम है, जिससे इस तरह के घातक वायरस गर्भ में पल रहे बच्चे तक पहुंच जाते हैं।

क्या था रिसर्च का आधार ?
शोधकर्ताओं ने गर्भनाल के जरिए तीन सेल (साईटोट्रोफोब्लास्ट, स्ट्रोमा फाइब्रोब्लास्ट और होब्योर सेल) के माध्यम से इसकी जांच की है, जो गर्भनाल में पाए जाते हैं। इस दौरान इन सेल को आमतौर पर सर्दी-जुकाम के लिए जिम्मेदार रेस्पिरेटरी सिंसीटियल वायरस (आरएसवी) के आमने-सामने रखा गया। इस दौरान जो साईटोट्रोफोब्लास्ट तो कुछ हद तक ही इस वायरस को सपोर्ट कर रहे थे जबकि, बाकी दोनों सेल इंफेक्शन से ज्यादा प्रभावित हो रहे थे।

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उदाहरण के तौर पर होब्योर सेल वायरस को सेल्स के अंदर आने की अनुमति दे रहे थे। होब्योर सेल गर्भनाल के अंदर बच्चे तक जाता है, इसलिए शोधकर्ताओं को लगता है कि यह ट्रोजन हॉर्स की तरह काम करते हुए वायरस को भ्रूण तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं।

डाक्टर की क्या राय है?
myUpchar जुड़ी डॉक्टर अर्चना निरूला का कहना है कि गर्भवती के जीका और आरएसवी जैसे वायरस से संक्रमित होने पर ही भ्रूण में ये वायरस फैलने का खतरा होता है। जीका वायरस के गर्भनाल से बच्चे में फैलने से मिसकैरेज या गर्भस्राव (गर्भ में ही बच्चे की मृत्यु होना) हो सकता है। जबकि आरएसवी यानी रेस्पिरेटरी सिनशल वायरस से बच्चे को जन्म के बाद सांस संबंधी बीमारी हो सकती है।

टुलैन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉक्टर जियोवानी पिडिमोन्टे ने बताया कि ये सेल जब वायरस से संक्रमित होते हैं तो मरते नहीं है जो कि एक बड़ी समस्या है। जब ये सेल भ्रूण के अंदर जाते हैं तो ये वायरस से भरे बम की तरह होते हैं। ये बम की फटकर वायरस को नहीं फैलाते, बल्कि ये इंटरसेलुलर चैनल के जरिए वायरस को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करते हैं।

अध्ययनकर्ताओं को ये शक है कि आरएसवी भ्रूण के फेफड़ों पर हमला करके इंफेक्शन कर सकता है, जिसकी वजह से बच्चे को बचपन में अस्थमा हो सकता है। अब डॉक्टर जियोवानी पिडिमोन्टे क्लीनिकल स्टडी का प्लान कर टुलैन में इस थ्योरी को और टेस्ट करने का प्लान बना रहे हैं।

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Dr. Pulkit Nandwani
MBBS,MD / MS - Obstetrics & Gynaecology,MRCOG(UK),Diploma In Minimal Access Surgery,Diploma in Gynaecology Endoscopy,Laparoscopic Training,Medical Writing Course,Laparoscopic Suturing Skills in Surgical Disciples,Fellowship In Endoscopy,FOGSI Ethi Skills Course,Training Course in Ultrasound - Obs & Gynae,PG Diploma
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