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गर्भावस्था में पैरों में सूजन होना आम बात है। बड़ी समस्या न होने के बावजूद गर्भवती महिलाओं को इस वजह से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। दरअसल गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ और गर्भाशय के बढ़ते आकार की वजह से पैरों और एड़ी में सूजन होने लगती है। जैसे-जैसे प्रसव के दिन नजदीक आते हैं, वैसे-वैसे सूजन बढ़ती जाती है। गर्मियों के मौसम में दिन के अंतिम समय में सूजन और ज्यादा होने लगती  है। लेकिन ध्यान रखें कि पैरों की तरह चेहरे और हाथ की सूजन सामान्य नहीं है। पैरों की सूजन को लेकर आपको चिंतित होने की जरूरत नहीं होती। जबकि चेहरे और हाथों की सूजन अन्य बीमारी की ओर इशारा करते हैं जैसे प्री-एक्लेमप्सिया। भ्रूण को पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन और पोषक तत्व न मिलने की वजह से प्री-एक्लेमप्सिया जैसी समस्या होती है।

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  1. गर्भावस्था में कब होती है पैरों में सूजन और कैसे रखें अपना ख्याल

गर्भावस्था में कब होती है पैरों में सूजन

यूं तो गर्भावस्था के दौरान किसी भी समय गर्भवती महिला के पैरों में सूजन आ सकती है, लेकिन आमतौर पर पांचवे महीने में यह सूजन ज्यादा दिखती है और अंतिम तिमाही में पैरों की सूजन ज्यादा बढ़ जाती है। इसके अलावा पैरों में सूजन की कई वजह मौजूद हैं जैसे -

  • गर्मी का ताप
  • लम्बे समय तक खड़े रहना
  • पूरे दिन शारीरिक रूप से सक्रिय रहना
  • लो पोटेशियम डाइट लेना
  • ज्यादा मात्रा में कैफीन का सेवन करना
  • सोडियम ज्यादा मात्रा में लेना

जैसा कि ऊपर बताया गया है कि गर्भावस्था में पैरों में सूजन सामान्य होती है। पैरों के साथ-साथ शरीर के किसी अन्य हिस्से में सूजन है, खासकर चेहरे और हाथ में तो डाॅक्टर से संपर्क करने में देरी न करें।

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क्या पैरों और एड़ी की सूजन की वजह से कोई जोखिम हो सकते हैं?

एडीमा की वजह से पैरों और एड़ी में आई सूजन नुकसानदायक नहीं है। अगर कुछ महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान पैरों में सूजन नहीं होती है, तब भी यह चिंता का विषय नहीं है। लगभग 4 में से 1 महिला को सामान्यतः गर्भावस्था के दौरान पैरों में सूजन की समस्या नहीं होती। इस दौरान आपके लिए जरूरी है कि अपना बीपी और यूरिन नियमित चेक करवाएं। यदि ये सामान्य स्तर पर हैं तो परेशान होने की कोई बात नहीं है।

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गर्भावस्था में पैरों की सूजन को कम कैसे करें
पैरों की सूजन को कम करने के लिए गर्भवती महिला कुछ जरूरी उपायों को आजमा सकती हैं मसलन-

  • लम्बे समय तक न तो एक जगह बैठें और न ही खड़ी रहें। अगर लम्बे समय तक खड़े रहने का कोई काम कर रही हैं, तो बेहतर है कुछ-कुछ देर में  ब्रेक लेती रहें। अगर घंटों बैठे-बैठे काम करती हैं तो प्रति घंटे में 5-10 मिनट का गैप लें। कुछ देर के लिए चहलकदमी कर आएं। आराम मिलेगा।
  • गर्भवती महिलाओं को घंटों पैर लटकाकर नहीं बैठना चाहिए। इससे भी सूजन बढ़ती है। संभव हो तो पैरों को चेयर पर उठाकर रखें या फिर चेयर पर ही आलथी-पालथी मारकर बैठें। ऐसा करना संभव नहीं है तो  पैरों के नीचे छोटा सा स्टूल रख लें ताकि पैरों को सपोर्ट मिल सके।
  • बैठे-बैठे पैरों को स्ट्रेच करने वाली एक्सरसाइज करें। इसके लिए सबसे पहले पैरों को सीधा करें। इसके बाद पैरों के पंजों में खिंचाव बनाएं। इस तरह पैरों की मांसपेशियों को आराम मिलेगा। अगर काफी देर से बैठी हैं तो पैरों के पंजों को अपनी जगह पर बैठे-बैठे गोल-गोल घुमाएं।  
  • गर्भावस्था में हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें। उदाहरण के लिए वाॅकिंग या स्विमिंग करें। वाॅकिंग यानी चलने से शरीर में रक्त प्रवाह बढ़ता है। स्वीमिंग करने के लिए बेहतर होगा एक बार विशेषज्ञ से राय ले लें। स्वीमिंग करने से पानी के दबाव के कारण ऊतकों का तरल पदार्थ नसों की ओर चला जाता है जिससे यह किडनी तक पहुंचता है। किडनी तक पहुंचने के कारण आप पेशाब के जरिए इस तरल पदार्थ को बाहर निकल सकती हैं। परिणामस्वरूप पैरों की सूजन कम हो जाती है। गर्भावस्था के दिनों एरोबिक क्लासेज ज्वाइन करना भी फायदेमंद रहता है।
  • सोते समय अपनी पाॅजिशन का ध्यान रखें। पीठ के बल लेटने के बजाय दाईं या बाईं ओर करवट लेकर लेटें। विशेषज्ञ गर्भवती महिलाओं को बाईं ओर करवट लेकर सोने की सलाह देते हैं। दरअसल बाईं ओर करवट लेकर सोने से किडनी दुरुस्त रहती है। नतीजतन पैरों में सूजन की आशंका कम होती है।
  • गर्भावस्था के दिनों में टाइट इलास्टिक वाली जुराबें और स्टाॅकिंग्स न पहनें। इन दिनों रक्त को अच्छी तरह प्रवाहित होने दें। रक्त प्रवाह बाधित होने से सूजन की समस्या पैदा हो सकती है।
  • हल्के और सुविधाजनक जूते पहनें। हाई हील और टाइट फिटिंग जूते कतई न पहनें। इससे पैरों को दिक्कत हो सकती है। हल्के और थोड़े से ढीले जूते पहनने से गर्भावस्था के दिनों में आपको सहजता महसूस होगी।
  • जूतों की ही तरह आरामदायक और ढीले-ढाले कपड़े चुनें ताकि पैरों तक रक्त प्रवाह में किसी तरह की बाधा न आए। टाइट टाॅप, जीन्स से कुछ महीनों के लिए दूर हो जाएं।
  • गर्भावस्था के दिनों में महिलाओं को खूब पानी पीना चाहिए। पैरों की सूजन को कम करने के लिए भी यह जरूरी है। अमूमन पैरों में सूजन सोडियम की वजह से आती है और अवशिष्ट सोडियम को पेशाब द्वारा पानी की सहायता से बाहर निकाला जा सकता है। इसलिए पानी पीना जरूरी है।
  • नमक आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी है। लेकिन अतिरिक्त नमक आपके स्वास्थ्य को खराब कर सकता है। अतः उतना ही नमक खाएं या अपनी डाइट में उतना ही नमक शामिल करें जितना कि जरूरी है। नमक की ज्यादा मात्रा आपके पैरों में सूजन बढ़ा सकती है।
  • पैरों में सूजन को कम करने के लिए हेल्दी डाइट लें। जंक फूड से दूर रहें। ध्यान रखें कि आपको सिर्फ अपना ही नहीं बल्कि अपने बच्चे के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना है। इसलिए ऐसे आहार बिल्कुल न खाएं जो स्वास्थ्य को बिगाड़ सकते हैं। साथ ही पैरों की सूजन को बढ़ा सकते हैं।
  • जितना संभव हो गर्भावस्था के दिनों में घर से बाहर निकलने से बचें। खासकर गर्मी की दोपहरी में।
  • पैरों में सूजन होने पर आराम करना बेहतर उपाय होता है। आराम करने से पैरों की सूजन अपने आप कुछ दिनों में कम हो जाती है।

कुल मिलाकर कहने की बात यह है कि गर्भावस्था में पैरों की सूजन को लेकर ज्यादा परेशान न हों। पैरों में सूजन होना सामान्य है। यह किसी गंभीर बीमारी की ओर इशारा भी नहीं करता। हां, पैरों में सूजन की वजह से गर्भवती महिला को असहजता हो सकती है। इसीलिए यहां बताए गए उपायों को आजमाएं। यकीनन पैरों की सूजन से कुछ आराम जरूर मिलेगा।

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