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प्रेग्नेंसी के दौरान आप रात में अचानक पैरों में तेज़ दर्द और ऐंठन का अनुभव कर सकती हैं। यह गर्भावस्था में होने वाली सामान्य समस्याओं में से एक है। जब शरीर को दिन के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिलता या आप पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीतीं, तब पैरों में दर्द होता है लेकिन अगर आप प्रेग्नेंसी में यह अनुभव कर रही हैं, तो आपको सावधानी बरतने की ज़रूरत है और इसकी वजह जानने की कोशिश ज़रूर करें।

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  1. गर्भावस्था में पैरों में दर्द और ऐंठन की शुरुआत और अंत कब होता है - When do leg cramps start and end during pregnancy in Hindi
  2. प्रेग्नेंसी के दौरान पैरों में दर्द होने के कारण - Leg cramps during pregnancy causes in Hindi
  3. गर्भावस्था के दौरान टांगों का दर्द और ऐंठन दूर करने के उपाय - Leg cramps during pregnancy treatment in Hindi
  4. गर्भावस्था के दौरान होने वाली मांसपेशियों की ऐंठन से बचाव - How to prevent muscle cramps in pregnancy in Hindi
  5. प्रेग्नेंसी में पैरों में दर्द होने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए - When to see a doctor for leg cramps during pregnancy in Hindi
  6. गर्भावस्था में पैरों व टांगों में दर्द एवं ऐंठन के डॉक्टर

पैरों और टांगों में दर्द और ऐंठन की शुरुआत आमतौर पर गर्भावस्था की दूसरी या तीसरी तिमाही में होती है। बहुत अधिक ऐंठन होने पर कुछ दिनों तक लगातार दर्द हो सकता है, लेकिन इसके बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।

पैरों में ऐंठन विशेष रूप से गर्भावस्था की दूसरी छमाही में होना आम है, जब गर्भावस्था में वजन बढ़ना, प्रेग्नेंसी में सूजन आना और गर्भावस्था में थकान आदि समस्याएं होने लगती हैं और इनकी वजह से आपको सोने में भी परेशानी होने लगती है। दुर्भाग्यवश अधिकतर महिलाओं को, तीसरी तिमाही तक पैरों में ऐंठन की शिकायत रहती है। हालांकि खूब सारा पानी पीने से, अच्छी तरह से संतुलित आहार खाने से पैरों की ऐंठन को कम किया जा सकता है।

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प्रेग्नेंसी में पैरों और टांगों में ऐंठन या दर्द होना बहुत ही आम है। यह आम तौर पर दूसरी तिमाही में महसूस होता है और जैसे जैसे आपकी प्रेग्नेंसी बढ़ती है ये और भी बदतर होता जाता है। हालांकि गर्भावस्था के दौरान इस समस्या का कोई भी तथ्य या विशिष्ट उत्तर नहीं है, लेकिन फिर भी निम्नलिखित कुछ संभावित कारण हैं जिनकी वजह से प्रेगनेंसी में पैरों में दर्द हो सकता है।

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  1. मोटे लोगों में गर्भावस्था में अतिरिक्त भार या वज़न की वजह से होने वाली थकान, पैरों में ऐंठन होने का सामान्य कारण है। जब होने वाली माँ उचित शाकाहारी भोजन नहीं करतीं तब वज़न संबंधी समस्याएं अधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं। ऐसा कहा जाता है कि मां के गर्भ में बढ़ते बच्चे की पोषण सम्बन्धी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए दिन में केवल 300 कैलोरी का सेवन करना पर्याप्त है। लेकिन अधिक वसा खाना ठीक नहीं है, क्योंकि इससे ज़रूरत से ज्यादा वज़न बढ़ सकता है।
  2. आपके गर्भाशय के बढ़ने से, पैरों से हृदय तक रक्त को स्थानांतरित करने वाली नसों पर दबाव पड़ता है, जिससे रक्त परिसंचरण में रूकावट आ सकती है और इसीलिए ऐंठन होती है। जो महिलाएं गर्भवती नहीं भी हैं वो भी इसका अनुभव करती हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि जब लोग लंबे समय तक पैर क्रॉस करके बैठते हैं या लंबे समय तक एक ही अंग पर दबाव पड़ता है, तब कुछ समय तक उन्हें कुछ भी महसूस नहीं होता जब तक कि रक्त परिसंचरण वापस से शुरु न हो जाये। यही बात गर्भवती महिलाओं पर भी लागू होती है।
  3. अगर आपके भोजन में फॉस्फोरस की मात्रा अधिक लेकिन कैल्शियम या मैग्नीशियम की मात्रा कम होती है, तो इससे आपके रक्त में संचरित होने वाले पोषक तत्वों और लवणों (Salts) में कमी आती है। इसके अलावा यह कमी इसलिए भी होती है क्योंकि गर्भ में शिशु भी इनका उपयोग करता है।
  4. प्रोजेस्टेरोन हार्मोन आपके पैरों की मांसपेशियों को प्रभावित करता है। माना जाता है कि यह हार्मोन, गर्भावस्था के दौरान पैरों की ऐंठन के लिए जिम्मेदार होता है। यह ऐंठन, थकान और वाटर रिटेंशन के कारण रात में अधिक होती है।
  5. कभी कभी धमनियों (Arteries) के पतले होने से भी दर्द हो सकता है। आर्टेरिओस्क्लेरोसिस (Arteriosclerosis- धमनियों में वसा के जमने) की गंभीर स्थिति भी पैरों में ऐंठन पैदा कर सकती है। कभी कभी यह गंभीर दर्द, व्यायाम करने से भी हो जाता है। यह आमतौर पर तब बंद होता है जब आप थोड़ी देर के लिए काम करना बंद कर देती हैं।
  6. ब्लड प्रेशर के लिए मूत्रवर्धक (Diuretics) और दवाएं लेने से खनिज की कमी हो सकती है। बहुत कम कैल्शियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम की मात्रा पैरों में ऐंठन पैदा कर सकती है।

(और पढ़ें - पैरों में दर्द के घरेलू उपाय)

लगभग आधी गर्भवती महिलाएं पैरों में ऐंठन की समस्या से प्रभावित होती हैं, और यह आमतौर पर दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान होता है। वज़न, हार्मोनल परिवर्तन, डिहाइड्रेशन, नसों और रक्त वाहिकाओं पर भ्रूण द्वारा पड़ने वाले दबाव के कारण रक्त परिसंचरण में कमी हो जाती है जिसकी वजह से पैरों में ऐंठन का अनुभव होता है। दर्द को रोकने के लिए निम्न सरल रणनीतियों का पालन करें:

  1. पहले आप अपनी पिंडलियों और पंजों की स्ट्रेचिंग पर फोकस करें। सोने से पहले थोड़ा स्ट्रेच कर लें और ऐसा ही व्यायाम करने से पहले और बाद में करें।
  2. आप बैठकर पिंडलियों को स्ट्रेच करने की कोशिश कर सकती हैं। इसके लिए आपको दो कुर्सियां और एक स्कार्फ की जरूरत होगी। अब आप एक कुर्सी पर बैठ जाएं और दूसरी कुर्सी पर पैर रखिये। अपने पंजों के उभरे हुए भाग पर स्कार्फ लगाएं और अपनी ओर स्कार्फ खींचें। आपको अपने पंजों और पिंडलियों की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस करना चाहिए। 30 सेकंड के लिए इसी स्थिति में रहें और यही अभ्यास दूसरे पैर में दोहराएं।
  3. आप गर्भावस्था के दौरान पैरों की ऐंठन को दूर करने के लिए खड़े होकर भी पिंडलियों की स्ट्रेचिंग करने की कोशिश कर सकती हैं। इस अभ्यास के लिए आपको अच्छी फिटिंग के जूते पहनने और सपाट सतह पर खड़े होने की जरूरत है। दीवार से 2-3 फीट की दूरी बनाए। अपने हाथों को दीवार पर रखें। धीरे धीरे आगे झुकें और अपनी पिंडलियों की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस करें। स्ट्रेचिंग पूरी करने के लिए, अपने हाथों को दीवार पर तब तक ऊपर तक ले जाएं, जब तक आप सीधी खड़ी न हो जाएं। (और पढ़ें - गर्भावस्था में पेट दर्द)
  4. गर्मियों में थकावट से बचने के लिए व्यायाम के बीच बीच में थोड़ा पानी पीती रहें।
  5. आप प्रीनेटल योग और एक्सरसाइज के बीच में आराम कर सकती हैं। सैर और एक्वा एरोबिक्स जैसी हल्की एक्सरसाइज से रक्त परिसंचरण में सुधार होता है और पैरों में ऐंठन की संभावना कम करने में मदद मिल सकती है।
  6. अपनी स्थिति बदलती रहें अर्थात अधिक समय के लिए खड़ी या बैठी न रहें। यदि आप नौकरी करती हैं तो शरीर और पैरों को स्ट्रेच करने के लिए ब्रेक लेती रहें।
  7. प्रीनेटल मसाज लें क्योंकि इससे रक्त परिसंचरण में सुधार होता है और सूजन भी कम होती है।
  8. मेडिकल सपोर्ट या कम्प्रेशन मोज़े (Compression stockings) सूजन को कम करने में मदद करते हैं, पैरों और एड़ियों में रक्त परिसंचरण को बढ़ा सकते हैं।
  9. दर्द और सूजन को कम करने के लिए प्रभावित जगह की सिकाई के लिए किसी मोज़े या कपड़े में चावल भरकर या गर्म पानी की बोतल का उपयोग करें।

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कभी कभी मासपेशियां बाहरी बल द्वारा संकुचित हो जाती हैं जिस कारण मांसपेशियों में ऐंठन होती है। मांसपेशियों को आराम की अवस्था में आने में कुछ समय लगता है लेकिन दर्द वास्तव में तेज और असहनीय होता है। शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और पोषण की कमी के कारण मांसपेशियों में ऐंठन हो सकती है। मांसपेशियों में ऐंठन के अन्य कारण हो सकते हैं जो शरीर के किसी भी भाग को प्रभावित कर सकते हैं। इस दर्द को कम करने और आराम पाने के लिए निम्न आसान चरणों को अपनाएं:

  1. खूब सारा पानी पिएं। रात को सोने से पहले भी पानी ज़रूर पिएं क्योंकि जब आप सोती हैं तब शरीर से तरल पदार्थ निकलते हैं।
  2. व्यायाम से पहले वार्म अप करना ज़रूरी है, भले ही कम देर के लिए किया जाये। मांसपेशियों को खींचने से पहले शरीर को तैयार करना महत्वपूर्ण होता है। रात को सोने से पहले हमेशा थोड़ी सी स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें।
  3. व्यायाम में नियमितता कायम करके आप मांसपेशियों में होने वाली ऐंठन से बच सकती हैं। आप एक पर्सनल ट्रेनर भी रख सकती हैं, जो यह तय कर सके कि आपको कब, कितना और कौन से व्यायाम कितनी तीव्रता से करने की ज़रूरत है। हालांकि अचानक किये जाने वाले व्यायामों में बदलाव करने से भी मांसपेशियों में ऐंठन हो सकती है। व्यायाम में नियमितता होने से शरीर को ऐंठन के खिलाफ प्रतिरोध (Resistance) उत्पन्न करने में मदद मिलती है।
  4. रात का समय विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए अच्छा नहीं होता है क्योंकि इस समय उन्हें दर्द और ऐंठन और तेज़ महसूस होती है। यदि आप गर्भवती हैं और मांसपेशियों में बहुत दर्द के साथ ऐंठन हो रही है, तो अपने डॉक्टर से पूछकर कैल्शियम और मैग्नीशियम सप्पलीमेंट लें।
  5. थकान होने वाले काम न करें। पर्याप्त आराम करें ताकि ऐंठन से बच सकें।
  6. पोटेशियम का अधिक सेवन करने के लिए केले, कच्चे एवोकाडो, पके हुए आलू, पका हुआ पालक और मलाईरहित दूध लें।
  7. बिगड़ा हुआ इलेक्ट्रोलाइट संतुलन ठीक करने के लिए नारियल पानी पिएं और इस प्रकार मांसपेशियों की ऐंठन से काफी हद तक बचाव हो सकता है।

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यदि दर्द लगातार हो रहा है और काफी गंभीर है मतलब अगर दर्द वाले हिस्से में सूजन या लालिमा आ रही है तो डॉक्टर से बात करें। बहुत ही कम मामलों में ऐसा होता है कि नसों में रक्त के थक्के जमने  लगते हैं, जिनमें इलाज की आवश्यकता होती है।

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