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अकसर सुनने को मिलता है, मुझे थाइरोइड है - मेरा वजन बढ़ रहा है या मेरा वजन घट रहा है। थाइरोइड ग्रंथि हर इंसान में होता है,  लेकिन जब थाइरोइड ग्रंथि सही तरीके तरीके से काम नहीं कर पाती तब ऐसी समस्याएं होती हैं। 

लेकिन इन सबसे पहले जानना जरुरी है कि थाइरोइड होता क्या है ?

थाइरोइड एक प्रकार का एंडोक्राइन या अन्तःश्रावी  ग्रंथि है, जो तितली के आकार की, गले में स्थित होती है।  थाइरोइड ग्रंथि टी3 एवं टी4 हार्मोन्स बनाती है, एवं पिट्यूटरी ग्रंथि टीएसएच हार्मोन्स श्रावित करती है जो टी3 एवं टी4 हार्मोन्स को नियमित करती है। ये हार्मोन्स हमारे शरीर में:

  •  ऊर्जा के संतुलित उपयोग में मदद करती है 
  •  चयापचय की दर को ठीक रखती है 
  •  शरीर के तापमान को नियमित करती है 
  • हमारे मष्तिष्क, हृदय एवं अन्य अंगो को ठीक से कार्य करने में मदद करती है
 

(और पढ़ें - थायराइड कम करने के उपाय)

क्या होता है हाइपोथाइरॉइडिस्म या थाइरोइड कम होना ?

जब थाइरोइड हॉर्मोन्स अपनी निर्धारित मात्रा से कम श्रावित होती है, उस परिस्थिति को हाइपोथायरायडिज्म कहते हैं।

इन हार्मोन्स की कमी के कारण, शरीर की चयापचय दर ( शरीर की ऊर्जा खर्च की दर) ३०-४० प्रतिशत कम जाता है, अर्थात शरीर ऊर्जा बचा के रखने लगता है, जो हाइपोथायरायडिज्म में वजन बढ़ने का मुख्य कारण है। इसके अलावा, इन हार्मोन्स के कमी के कारण आप हर समय थकान महसूस करना, अत्यधिक सर्दी, थकान, कब्ज़, त्वचा का रूखापन, बाल झड़ना, आवाज़ में परिवर्तन, गर्भ ठहरने में देरी जैसे समस्या देख सकते हैं।  

क्या होता है हाइपरथाइरॉइडिस्म या थाइरोइड का ज्यादा होना ?
जब थायरॉयड ग्रंथि बहुत अधिक टी 3, टी 4, या दोनों बनाता है, इस स्थिति को हाइपरथायरायडिज्म कहते है। जिसके कारण शरीर हाइपरमेटाबोलिक स्टेट यानि अत्यधिक ऊर्जा की मात्रा खर्च करने की स्थिति में आ जाती है है, जो के वजन कम होने का मुख्य कारण है। इसके अलावा आप कमजोरी, बी पी बढ़ना, हृदय गति (हार्ट बीट) का तेज या अनियमित होना, हाथ कांपना, गर्मी बर्दाश्त न होना, लगातार पेट खराब होना, आँखों का बाहर की ओर उभरना, महिलाओं में अनियमित पीरियड्स की समस्या देख सकते हैं। 
 
  1. थायराइड कम हो तो क्या खाना चाहिए - What to eat in Hypothyroidism in Hindi
  2. थायराइड कम हो तो क्या न खाएं - What not to eat in Hypothyroidism in Hindi
  3. थायराइड बढ़ने पर क्या खाएं - What to eat in Hyperthyroidism in Hindi
  4. थायराइड बढ़ने पर क्या नहीं खाना चाहिए - What not to eat in Hyperthyroidism in Hindi
  5. थाइरोइड पर नियंत्रण के लिए आवश्यक टिप्स - Tips to control thyroid hormones in Hindi

कम कैलोरी वाला आहार- हाइपोथायरायडिज्म की समस्या में अपने रोज के ऊर्जा उपभोग पर ध्यान दें। ऐसे खाद्य पदार्थ का सेवन करें जो आपको वजन कम करने में या वजन को नियमित रखने मदद करते हो, साथ ही ऐसे खाद्य पदार्थ का सेवन कम कम करें, जिनसे वजन बढ़ता हो। इसके लिए जाने -

वजन को कम करने के लिए कैसा हो दिन भर का भोजन-  

  • अपने दिन भर के खाने को ६ भाग में बांटे, यानी ३ बड़े मील (सुबह का नाश्ता, दोपहर का खाना, रात का भोजन) और ३ छोटे मील (अर्थात बीच में फल, मखाने, सलाद , भुने चने आदि खाये), जिससे शरीर की चयापचय दर ठीक तरीके से कार्य कर सके. 
  • किसी भी समय का खाना नहीं छोडे । 
  • खाने में साबुत एवं मोटे अनाज जैसे चोकर वाला आटा, ज्वार, बाजरा, रागी, किनवा, दलिया, मल्टीग्रेन ब्रेड, ब्राउन राइस आदि नियमित तौर पर शामिल करें  
  • सलाद में खीरा, प्याज, टमाटर, सलाद पत्ता  की मात्रा अधिक रखें।
  • प्रोटीन के लिए दालें, दही, बीन्स, अण्डा, चिकन, मछलियां अपने भोजन में आवश्यक रूप से शमिल करें। 
  • फाइबर के लिए हरी पत्तेदार एवं रंगीन सब्जियां जैसे भिंडी, लौकी, मेथी, पालक, बैंगन, टमाटर, गाजर, करेला आदि को नियमित रूप से अपने भोजन में रखें। 
  • फलों में नारंगी, सेब, मौसमी, बेर, खरबूजा, तरबूज, आड़ू, आलूबुखारा, पपीता का सेवन आसानी से कर सकते हैं। 

इनके अलावा कुछ बातों का ध्यान रखना अति आवशयक है -

थायराइड कम यानि हाइपोथयरॉइड हो तो खाएं साबूत अनाज -

थायराइड की समस्या में पूरे दिन में 200 से 300 ग्राम अनाज खाना चाहिए। साबुत अनाज थायराइड की समस्या में बहुत फायदेमंद होते हैं। इसके अलावा फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ कब्ज की समस्या से भी राहत दिलाते हैं।  इसके सेवन से पेट अधिक देर तक भरा रहता है और वजन कम करने में भी मदद मिलती है। 

(और पढ़ें - वजन कम करने के लिए क्या खाएं)

(और पढ़ें - कम कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन)

प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ जरूर शामिल करें -

दाल में बहुत कम मात्रा में वसा और अधिक मात्रा में प्रोटीन  होते हैं। अधिक प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ थायराइड हार्मोन्स के लिए फायदेमंद होते हैं। इसके अलावा यह थकान और वजन दोनों को कम करने में भी मदद करते हैं। मूंग दाल, राजमा, काबली चना, मोठ दाल और चना, अंडा, चिकन, मछली आदि  प्रोटीन के बहुत अच्छे स्त्रोत हैं। रोज की आवश्यकता के अनुसार एक दिन में 50 से 60 ग्राम प्रोटीन दिन भर में खाना चाहिए। 

(और पढ़ें - एंटीऑक्सीडेंट युक्त भोजन)

खाएं सूखे मेवे और बीज

अखरोट में ओमेगा-3 एसिड पाया जाता है, जो शरीर की थकान, रोग प्रतिरोधक क्षमता और दिमाग की कोशिकाओं को मजबूत बनाता है। सूखे मेवे में अधिक मात्रा में सेलेनियम पाया जाता है, जो थायराइड ग्रन्थिं को उत्तेजित करने में मदद करता है। इसलिए सेलेनियम युक्त खाद्य पदार्थ जैसे अखरोट, सूरजमुखी के बीज आदि खाएं। एक दिन में 2 से 3 सूखे मेवे से ज्यादा न खाएं क्योंकि इनमें बहुत अधिक फैट होता है और अधिक फैट थायराइड की समस्या को बढ़ाता है। इसके अलावा मांसाहारी लोग ओमेगा-3 फैटी एसिड के लिए मछली खा सकते हैं। सैल्मन, टूना, सारडाइन (एक प्रकार की मछलियां) इनमें बहुत अधिक मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है। हाइपोथायरायडिज्म की वजह से शरीर में सूजन की समस्या होती है, मछली की तेल इसे ठीक करने में मदद करता है। इसके अलावा ये रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है।

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थायराइड कम हो तो खाएं फल और सब्जियां -

एन्टीऑक्सीडेंट से भरपूर सब्जियां और फल शरीर के तनाव को कम करते हैं और त्वचा में भी पानी का स्तर बनाये रखते है।  इसके साथ ही इनमे उपस्थित फाइबर का वजन को कम करने में भी बहुत महत्त्वपूर्ण योगदान होता है।  इसके साथ ही साथ ये रोगप्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। रोजाना कम से कम 500 से 600 ग्राम सब्जी और फल खाना चाहिए। इन्हें आप सलाद सूप, जूस या उबाकर या डेटॉक्स वॉटर के रूप में ले सकते हैं। इनमे आप  गाजर, टमाटर, एवोकाडो, ककड़ी, शिमला मिर्च, मशरूम, चुकंदर, आलू, कद्दू, प्याज और लाल शिमला मिर्च आदि सब्जियों को खाएं। इसके साथ ही साथ सेब, चेरी, अंगूर, कीवी, पपीता जैसे फलों को भी खाएं। थायराइड की समस्या में  एंटी ऑक्सीडेंट्स के लिए सब्जियों के साथ-साथ आपको मिर्च, लहसुन, दालचीनी, हल्दी, अजमोद जैसी जड़ी-बूटियां भी खाना चाहिए। 

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थायराइड कम हो तो खाएं आयोडीन युक्त भोज्य पदार्थ - 

आपकी थायरॉयड ग्रंथि थायराइड हार्मोन बनाने के लिए आयोडीन का उपयोग करती है, अतः दवाओं के साथ साथ आपके आहार में भी आयोडीन की प्रचुर मात्रा होनी चाहिए।  

अपने आहार में आयोडीन  मात्रा बढ़ाने के लिए आप आयोडाइज़्ड नमक का सेवन करें। सीफ़ूड (जलीय पौधे एवं जीव) में भी काफी मात्रा में आयोडीन होता है।  इसके अलावा दूध व दूध से बने खाद्य पदार्थ, राजमा, पालक, अण्डे  का पीला भाग, मछली का भी नियमित रूप से सेवन करें।  इसके साथ ही आजकल बाज़ार में आयोडीन फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ भी आसानी से उपलब्ध है, उनको भी इस्तेमाल किया जा सकता है। 

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विटामिन डी- थाइरोइड ग्रंथि के कार्य करने में  विटामिन डी का बहुत महत्वपूर्ण कार्य होता है , इसके लिए अपने भोजन में मशरूम, अण्डे पीला भाग, फिश लिवर आयल को शामिल करें। इसके साथ ही धुप में बैठें। लेकिन प्राकृतिक स्रोतों में विटामिन डी काफी कम मात्रा में होता है तो समय समय पर विटामिन डी का टेस्ट करा कर अपने डॉक्टर्स से सप्लीमेंट्स लेते रहें।

 

आहार के अलावा, शारीरिक रूप से एक्टिव रखें, जैसा की हाइपोथाइरोइड में चयापचय दर धीमे हो जाती है, व्यायाम चयापचय दर को बढ़ाने में मदद करती है इसलिए अपने  शरीर को हमेशा एक्टिव रखें, नियमित रूप से रोज कम से कम ४५ मिनट्स व्यायाम करें 

 

 

थायराइड कम हो तो न खाएं सोयाबीन -

एक अध्ययन के अनुसार सोयाबीन और सोया युक्त खाद्य पदार्थों में फयटोएस्ट्रोजन पाया जाता, जो थाइराइड हार्मोंस निर्माण करने वाले एंजाइम की गतिविधियों को रोकता है। इसलिए सोयाबीन या सोया युक्त खाद्य पदार्थों को नहीं खाना चाहिए। 

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ना खाएं ग्वाइट्रोजेनीस फ़ूड-  हाइपोथायरायडिज्म के रोगी को ग्वाइट्रोजनीस खाद्य पदार्थों का प्रयोग कम से कम करना चाहिए।  ग्वाइट्रोजनीस खाद्य पदार्थ थाइरोइड ग्रंथि को ठीक तरह से काम करने से रोकते हैं।  इन खाद्य पदार्थों के समूह में फूलगोभी, पत्तागोभी, सोयाबीन, टोफू, मशरूम, मूली, ब्रोक्कोली, शलगम, सरसो का साग आते हैं.

थायराइड कम हो तो न खाएं अधिक फैट वाले खाद्य पदार्थ -

खराब फैट, संतृप्त फैटी एसिड्स शरीर में मोटापा के साथ साथ रक्तचाप एवं कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी बढ़ाता है।  चिप्स, फ्रेंच फ्राइज, फ्राइ किया हुआ चिकन, बटर, मेयोनेज, पास्ता, ब्रेड, बर्गर, डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ, बिस्किट्स, नमकीन, बिस्किट्स, केक, पेस्ट्री, पेटिस, चीज़, क्रीम, डालडा आदि में ये काफी अधिक मात्रा में होता है अतः इनके प्रयोग से बचें ।

(और पढ़ें - महिलाओं के लिए हार्मोन का महत्व)

थायराइड कम हो तो न खाएं प्रोसेस्ड फूड

थायराइड कम होने की समस्या में प्रोसेस्ड फूड नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है जिससे वाटर रिटेंशन यानि शरीर में पानी के संग्रहण की समस्या हो जाती है । सोडियम हाइपोथायरायडिज्म या थायराइड की कमी वाले रोगियों के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक है। प्रोसेस्ड फूड कुकीज, केक, पास्ता और ब्रेड, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ को खाने से न केवल ब्लड शुगर का स्तर बढ़ता है बल्कि ब्लड प्रेशर की समस्या भी होती है। इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि यदि आप इस समस्या के साथ हाई बीपी से भी ग्रसित हैं, तो एक दिन में 1.5 ग्राम से अधिक सोडियम ना खाएं ।

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थायराइड कम हो तो न खाएं चीनी युक्त खाद्य पदार्थ -

हाइपोथायरायडिज्म की समस्या आपके चयापचय को प्रभावित करता है, जिसकी वजह से आपका वजन बढ़ता है। इसलिए हाइपोथायरायडिज्म से ग्रसित लोगों को चीनी या चीनी से बनी वाले खाद्य सामग्रियों से बहुत ज्यादा परहेज करना चाहिए क्योंकि इसमें में बहुत अधिक मात्रा में कैलोरी होती है और किसी भी प्रकार के पोषक तत्व नहीं होते हैं। 

(और पढ़ें - खाने में कितनी कैलोरी होती हैं)

आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि जो खाद्य सामग्री हाइपोथायरायडिज्म की समस्या में हानिकारक है वो हाइपरथाइरॉइडिस्म की समस्या में लाभदायक हो सकते हैं। तो आइए जानते हैं थायराइड अधिक हो तो क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए। 

हाइपरथाइरोइड में कैसा हो आहार-

जैसा की इस परिस्थिति में ऊर्जा की खपत सामान्य से अधिक होती है इसलिए हमे अपनी जरूरत से ज्यादा मात्रा में ऊर्जा का सेवन करना है, जिससे वजन बढ़ाने में मदद मिल सके। 

ज्यादा ऊर्जा  वाले खाद्य पदार्थ (हाई कैलोरी फ़ूड) के लिए -

बिना चोकर के आटा, ब्रेड, चावल, आलू, शकरकंदी, फुल क्रीम मिल्क एवं उससे बने दही, पनीर, आम, चीकू, लीची, केला, खजूर, सूजी, गुड़, चिक्की, चॉकलेट, शहद, मेपल सीरप आसानी से ले सकते हैं, संतुलित आहार लें. रोटी पर घी या मक्खन  लगा कर खाएं, दूध जब भी लें तो रोज सिरप या चॉकलेट पाउडर भी डाल कर कैलोरी बढ़ा सकते है। 

दो खानों में देर न करें-

घर पर बने लड्डू, मिल्कशेक, कॉर्न सलाद, चना सलाद पनीर सैंडविच, साबूदाने की खीर आदि का मध्य भोजन (मिड मील) में सेवन कर सकते हैं. जिससे आप अपनी ऊर्जा की मात्रा बढ़ा पाएंगे। 

भोजन में रखें उच्च मात्रा में प्रोटीन-  

वजन कम होने के कारण मांसपेशिया कमजोर हो जाती हैं इसलिए उच्च मात्रा में प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें, इसके लिए दालें, राजमा, छोले, लोबिया, दही, अंडा, मछली, लीन मीट आदि अपने खाने में रख सकते हैं। यदि आपके भोजन में प्रोटीन की मात्रा कम है तो अपने डॉक्टर से पूछ के प्रोटीन सप्लीमेंट भी ले सकते हैं। 

उच्च गुणवत्ता वाले वसा हैं जरुरी- 

इनको अपने भोजन में अवश्य शामिल करें। इनसे न ही सिर्फ आपकी रोज की वसा की आवश्यकता को पूरी होगी, साथ ही ये आपको वजन बढ़ाने में भी मदद करेंगे। इनमे आप बादाम, अखरोट, पिस्ता, मूंगफली, सफ़ेद तिल, अलसी के बीज, सूरजमुखी के बीज, खरबूजे के बीज आदि को आप अपने सलाद, स्मूथी, फ्रूट चाट या खाने बीच में या चाय के साथ आदि तरीकों से ले सकते है, तेल के लिए आप सरसो, जैतून, सूरजमुखी, कनोला, तिल, नारियल, घर का बना सफेद मक्खन आदि अपने खाने में शामिल करें। 

विटामिन डी-

इस समस्या में हड्डियों के पतले एवं कमजोर होने के काफी हद तक आसार होते है तो ऐसे भोज्य पदार्थों का सेवन करें जिनमे विटामिन डी प्रचुर मात्रा में हो। इनके लिए  मशरूम, अण्डे का पीला भाग, फिश लिवर आयल का सेवन करें। इसके साथ ही धूप में बैठने की आदत डालें । लेकिन प्राकृतिक स्त्रोतों में में विटामिन डी काफी कम मात्रा में होता है तो समय समय पर विटामिन डी का टेस्ट करा के सप्लीमेंट लेते रहें।  

हड्डियों की मजबूती के लिए लें कैल्शियम-

हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए विटामिन डी के साथ कैल्शियम की भी आवश्यकता होती है। कैल्शियम के लिए दूध एवं दूध से बनी चीजें, अंडा, रागी, सोयाबीन  से बनी चीजें, संतरा, चिकन, मछली आदि अपने खाने में उपयोग कर सकें।  

(और पढ़ें - हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए जूस)

थाइरोइड में आवश्यक है सेलेनियम-

सेलेनियम थायराइड हार्मोन के स्तर को संतुलित करने और आपके थायरॉयड को बीमारी से बचाने में मदद करते है, ये चिया सीड्स, मशरूम, चाय, दलिया, चिकन, सूरजमुखी के बीज आदि में ये भरपूर मात्रा में होते हैं।  इनको आप सलाद, स्मूथी  में डाल कर या भून कर भी खा सकते हैं। 

थायराइड अधिक हो तो खाएं ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थ -

ओमेगा-3 फैटी हाइपरथाइरॉइडिस्म को नियंत्रित करने में बहुत उपयोगी है। आप इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि मानव शरीर अपने आप पोषक तत्व का उत्पादन नहीं कर सकता है, इसलिए आपको भोजन के साथ-साथ पूरक आहार की आवश्यकता होती है। ये शरीर में थायराइड के स्तर को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है। मछली ओमेगा-3 फैटी एसिड का सबसे अच्छा स्त्रोत है। लेकिन शाकाहारी लोग ओमेगा-3 फैटी एसिड के लिए जैतून का तेल और अलसी के बीज खा सकते हैं।

(और पढ़ें - अलसी के औषधीय गुण)।

(और पढ़ें - वजन बढ़ाने के तरीके)

थायराइड अधिक हो तो खाएं डेरी प्रोडक्ट -

हाइपर्थाइराइडिज्म की समस्या का इलाज भले ही दवाई के माध्यम से किया जा रहा हो लेकिन हड्डियों के निर्माण के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है। इसलिए डेरी उत्पादों को खाना चाहिए। डेरी उत्पाद में दूध, पनीर और दही कैल्शियम के बेहतर स्त्रोत हैं। इसके अलावा जिन लोगों को लैक्टोज से एलर्जी है वो लोग सोया मिल्क या बादाम का दूध  इस्तेमाल  कर सकते है

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थायराइड अधिक हो तो ये सब्जियाँ जरूर खाएं  -

हाइपरथाइरॉइडिस्म की समस्या में कुछ सब्जियां फायदेमंद होती हैं। सब्जियां जैसे फूल गोभी और ब्रोकली थायराइड हार्मोन्स के उत्पादन को कम करती हैं और हाइपरथाइरॉइडिस्म  लक्षणों को भी कम करते हैं। जिन लोगो को थायराइड अधिक होता है, उन लोगों को कम से कम एक बड़े चम्मच ब्रोकली की सब्जी रोजाना खाना चाहिए।

(और पढ़ें - उबली सब्जी खाने के फायदे)

थायराइड अधिक हो तो नहीं खाना चाहिए आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थ -

हालांकि, आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थ हाइपोथायरायडिज्म के लिए फायदेमंद होते हैं लेकिन हाइपरथायरायडिज्म की समस्या में इनका विपरीत प्रभाव पड़ता है। थायराइड ग्रन्थि आयोडीन के लिए बहुत अधिक संवेदनशील होता है। अधिक आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थ थायराइड ग्रन्थि से थायरोक्सिन हार्मोन्स का अधिक उत्पादन करता है, जिससे  हाइपरथायरायडिज्म की समस्या बढ़ती है। इसलिए खाने में आयोडीन की मात्रा आवश्यकता से ज्यादा न लें। आयोडाइज़्ड साल्ट या आयोडीन फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ न लें। समुद्री पौधे एवं जीव, मछलियां, राजमा, पालक, अण्डे में आयोडीन की मात्रा अधिक होती है इसलिए इन्हे कम मात्रा में खाएं। 

(और पढ़ें - ज्यादा नमक खाने के नुकसान)

भोजन से पहले पानी या कोई भी ड्रिंक लेने से बचें-

इस आदत से आपका पेट पहले ही भर जाएगा जिससे आप पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा नहीं ले पाएंगे। भोजन के आधे या एक घंटे बाद पानी पीएं। यदि भोजन बीच में प्यास लगती है तो छाछ या लस्सी ले सकते हैं। 

जंक फ़ूड को ना कहें-

जंक फ़ूड के सेवन से आप का वजन जरूर बढ़ जाएगा किन्तु वजन के साथ साथ अन्य स्वास्थ्य सम्बंधित समस्याएं जरूर हो जाती है जैसे कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना, हृदय सम्बन्धित समस्या, ब्लड प्रेशर बढ़ना, पेट का मोटापा बढ़ना आदि.

 

 

नियमित तौर पर टेस्ट कराएं-

लिपिड प्रोफाइल समय समय पर चेक करें कि मेटाबोलिज्म में बदलाव  के कारण निर्धारित स्तर से ज्यादा या कम  तो नहीं है।  इसके साथ समय समय पर थाइरोइड फंक्शन टेस्ट करा कर अपनी दवाओं को की जांच कराते रहें। 

वजन की जांच नियमित तौर पर करें-

थाइरोइड की समस्या में वजन पर काफी प्रभाव पड़ता है।  नियमित तौर पर वजन की जाँच करे एवं आहार व व्यायाम से नियंत्रित रखने की कोशिश करें।

धूम्रपान (स्मोकिंग) को कहे ना-

धूम्रपान भूख को दबाने का काम करता है और साथ ही आपके मेटाबोलिज्म को भी खराब कर देता है। जब आप धूम्रपान छोड़ते हैं, तो आपकी भूख और मेटाबोलिज्म वापस सामान्य हो जाता है, जिससे आपको अधिक भूख लगती है साथ ही शरीर को कम कैलोरी खर्च करनी पड़ती  है। इसके अलावा, धूम्रपान छोड़ने के बाद भोजन को सूंघने और स्वाद लेने की आपकी क्षमता में सुधार होता है। अतः इसे जल्दी से जल्दी छोड़ें। 

दवाएं नियमित तौर पर लें -

थाइरोइड के उपचार के लिए दवाओं का नियमित रूप से सेवन करें। यदि आप दवाओं का सेवन बंद करते हैं, ऐसी परिस्थिति में हार्मोन्स के वापस कम या ज्यादा होने के पुरे आसार होते हैं,

इसके साथ ही सन्तुलित आहार लें। तनाव ना लें। नियमित तौर पर व्यायाम करें। 

 

 

 

 

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