बेल की शरबत को "बेल को बिल्वा" (Bilwa) भी कहा जाता है। बेल का पेड़ भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण है, और इसे ज्यादातर मंदिरों के आसपास लगाया जाता है। यह फल बाहर से कठोर और अंदर से मुलायम होता है। अंदर से इसका गूदा मीठा होता है, जिसे आप ऐसे भी खा सकते हैं। इसे अन्य पेय पदार्थों और मीठे जैसे गुड़ या चीनी के साथ मिलाकर भी खाया जाता है।

बेल के फल को वुड एप्पल भी कहा जाता है जिसमें प्रोटीन, बीटा-केरोटीन, विटामिन, थायमीन (बी1), राइबोफ्लाविन और विटामिन सी होता है। बेल के शरबत को फिट और स्वस्थ रहने के लिए बहुत ही बेहतरीन तरीका माना जाता है।

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तो आइये, आज आपको बताते हैं बेल के शरबत को बनाने की विधि, कब पीना चाहिए और इसके फायदे - 

  1. बेल का जूस (शरबत) बनाने की विधि - Bel ka juice (sharbat) banane ki vidhi
  2. बेल का शरबत कब पीना चाहिए - Bel ka sharbat kab peena chahiye
  3. बेल के शरबत के फायदे - Bel ke sharbat ke fayde

सामग्री -

  1. बेल का फल
  2. दो लीटर - पानी
  3. एक कप - बर्फ
  4. दो चम्मच - चीनी (और पढ़ें - चीनी खाने के फायदे)
  5. एक चम्मच - नींबू का जूस (वैकल्पिक) (और पढ़ें - नींबू के रस के फायदे)
  6. एक चम्मच - भुना हुआ जीरा पाउडर (वैकल्पिक)

विधि -

  1. सबसे पहले बेल फल को तोड़ें। फिर उसमें से गूदे को चाकू की मदद से निकाल लें।
  2. अब एक बर्तन में पानी लें और फिर उसमें गूदे को डाल दें।
  3. फिर हाथों को किसी साफ कपड़े या पन्नी से कवर लें और अब गूदे को पानी में मसलें।
  4. इस प्रकार, गूदे को तब तक मसलें जब तक उसमें से बीज निकल ना जाए।
  5. फिर गूदे को निचोड़ें और उसमें से जूस को निकाल लें और निचोड़ें गए गूदे को अलग रख दें।
  6. अब इस जूस को किसी बड़ी छलनी से छानें।
  7. जूस को छानने के बाद इसमें चीनी और जीरा पाउडर (वैकल्पिक) को अच्छे से मिलाएं। इसे तब तक मिलाएं, जब तक चीनी मिश्रण में घुल न जाए।
  8. चीनी मिलाने के बाद शरबत में नींबू का जूस भी मिलाएं और पूरे शरबत को अच्छे से मिला लें।
  9. अब शरबत में बर्फ डालें और इसे ठंडा-ठंडा परोसें।

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आप बेल के शरबत को हफ्ते में एक बार पी सकते हैं, लेकिन इस शरबत की खुराक अन्य परेशनियों के अनुसार भी दी जा सकती है, जैसे -

  1. लू से बचने के लिए आप इसे रोजाना पूरे दिन में एक बार पी सकते हैं। (और पढ़ें - गर्मी में लू से बचने के उपाय)
  2. अगर आपके कान में दर्द है, तो बेल के जूस की दो बूँद कान में डाल सकते हैं। (और पढ़ें - कान दर्द के घरेलू उपाय)
  3. हिचकी से बचने के लिए आप आंवला के जूस और बेल के जूस को बराबर मात्रा में मिलाकर पूरे दिन में दो बार पी सकते हैं। 

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बेल के शरबत के फायदे कुछ इस प्रकार हैं -

1. बेल का शरबत ह्रदय की बीमारी को रोकता है

छिले हुए बेल फल को कुछ मात्रा में घी के साथ मिला लें। ह्रदय की बीमारी और अटैक से बचने के लिए इस मिश्रण को अपने रोजाना के आहार में मिलाएं। इससे ब्लड ग्लूकोस का स्तर 54% कम हो जाता है।

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2. बेल के शरबत में गैस्ट्रो का बचाव करने के गुण होते हैं -

ये बेहतरीन शरबत गैस्ट्रिक अल्सर का इलाज करता है। गैस्ट्रिक अल्सर म्यूकोसा के स्तर के असंतुलित होने की वजह से या गैस्ट्रिक ट्रैक्ट में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (Oxidative stress) की वजह से बनता है। इस शरबत में मौजूद फेनोलिक घटक एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं, जो गैस्ट्रिक अल्सर को दूर करते हैं।

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3. बेल शरबत कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करता है -

बेल का शरबत कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है और ब्लड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है। साथ ही बेल शरबत ट्रिगलीसराइड्स, सीरम और टिश्यू लिपिड प्रोफाइल को नियंत्रित करता है।

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4. बेल के शरबत में एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं -

बेल के शरबत में एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं। बेल में से निकला जूस फंगल और वायरल संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद करता है।

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5. बेल के शरबत में सूजनरोधी गुण होते हैं -

बेल शरबत में सूजनरोधी गुण होते हैं, जिन्हें हिस्टामाइन को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह अंगों में आयी सूजन को भी आराम देता है और उन्हें ठीक करने में मदद करता है।

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6. बेल शरबत कब्ज को दूर करता है

बेल के फलों का शरबत कब्ज और पेट के दर्द को दूर करता है। इसमें लैक्साटिव के गुण होते हैं जो आँतों को साफ और टोन करते हैं। दो से तीन महीने तक इस शरबत को पीने से पुरानी कब्ज से आपको छुटकारा मिलेगा। छोटे बच्चों के पेट का इलाज करने के लिए आप इसे चीनी के साथ मिलाकर पूरे दिन में दो बार पी सकते हैं। आँतों से विषाक्त पदार्थों को निकालने के लिए इस शरबत में काली मिर्च और नमक भी मिलाकर पी सकते हैं।

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7. बेल का शरबत पेचिश और डायरिया से निजात दिलाता है -

आयुर्वेद में कहा जाता है कि बेल का शरबत पेचिश और डायरिया का इलाज करने में बेहद फायदेमंद है। आप इसे गुड़ या चीनी के साथ भी मिलाकर पी सकते हैं।

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8. बेल का शरबत ठंडक देता है -

एसिडिटी से बचने के लिए बेल के फलों से बने शरबत में शहद मिलाकर पीयें। शरीर को लू से बचाने के लिए आप इस शरबत को दोपहर के खाने या रात के खाने से पहले भी पी सकते हैं। गर्मियों के लिए ये बहुत ही बेहतरीन पेय पदार्थ माना जाता है।

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9. बेल के शरबत से त्वचा के चकत्ते कम होते हैं -

पित्ती का इलाज करने के लिए बेल की पत्तियों से 30 मिलीलीटर जूस को निकालें और फिर उसे जीरा पाउडर के साथ मिला दें। यह त्वचा पर चकत्तों के लिए भी फायदेमंद है और अधिक लाल, बड़े चकत्तों और खुजली वाले चकत्तों जैसे लक्षणों को भी कम करते हैं।

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10. बेल का शरबत स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए फायदेमंद है -

बेल के शरबत में अदरक पाउडर और गुड़ को मिला लें और फिर इस मिश्रण को स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पीने के लिए दें। इससे स्तनपान कराने वाली महिलाओं में अधिक दूध का उत्पादन करने में मदद मिलेगी।

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11. बेल का शरबत कैंसर से बचता है -

ब्रेस्ट कैंसर के इलाज से बचने के लिए इस शरबत को रोजाना पीयें।

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12. बेल का शरबत रक्त को साफ़ करता है -

50 ग्राम बेल के गूदे के जूस को कुछ मात्रा में गर्म पानी के साथ मिला लें और फिर उसमें शहद को भी मिला दें। यह शरबत रक्त को साफ करने में मदद करता है।

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13. बेल का शरबत बवासीर के लिए बेहतर है -

बेल के फल में मौजूद टैनिन डायरिया, कोलेरा और बवासीर का इलाज करने में मदद करता है। ये एनीमिया और आंख या कान के लिए भी फायदेमंद होता है। 

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14. स्कर्वी रोग के लिए बेल का शरबत है लाभदायक -

स्कर्वी एक बीमारी है जो विटामिन सी की कमी से बढ़ती है। इससे रक्त वाहिकाओं पर प्रभाव पड़ने लगता है। बेल का शरबत विटामिन सी का बहुत अच्छा स्रोत है और यह इस बीमारी का इलाज करता है।

15. बेल के शरबत से श्वसन समस्याओं का इलाज होता है -

बेल के फल का शरबत श्वसन समस्याओं का इलाज करता है, जैसे अस्थमा या कोल्ड। तो इन समस्याओं को कम करने के लिए बेल का शरबत पीयें।

(और पढ़ें - अस्थमा के घरेलू उपाय)

16. बेल का शरबत शुगर को नियंत्रित करता है -

बेल के शरबत में लैक्साटिव होता है, जो ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करता है। ये शरबत पैंक्रियाज को उत्तेजित करता है और इन्सुलिन के उत्पादन को संतुलित करता है, जिससे ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित होने लगता है।

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