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गर्भावस्था और मसालेदार खाने का गहरा संबंध है क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि प्रेगनेंसी में मसालेदार खाना खाने का बहुत मन करता है। आज हम इस लेख के जरिए जानेंगे कि गर्भावस्था के दौरान मसालेदार खाने का सेवन कितना सुरक्षित है?

(और पढ़ें - गर्भावस्था में होने वाली समस्याएं)  

मसालेदार खाद्य पदार्थ आपके बच्चे के लिए सुरक्षित हैं लेकिन उनके सेवन से आपको असहजता हो सकती है। कई गर्भवती महिलाओं को सीने में जलन की समस्या होती है और मसालेदार खाना खाने से यह समस्या और बढ़ सकती है। आखिरी तिमाही में सीने में जलन की शिकायत और ज्यादा बढ़ जाती है। 

(और पढ़ें - सीने में जलन दूर करने के उपाय)

  1. मसालेदार भोजन से शिशु को नुकसान - Masaledar khane se shishu ko nuksan
  2. गर्भावस्था की पहली तिमाही में मसालेदार भोजन - Pregnancy ki pehli timaahi mein masaledar khana
  3. गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही में मसालेदार भोजन - Pregnancy ki dusri aur teesri timahi mein masaledar food
  4. मसालेदार भोजन कितना खाना चाहिए - Masaledaar bhojan kitna khana chahiye
  5. प्रेगनेंसी में मसालेदार भोजन के नुकसान - Garbhavastha me masaledaar khane ke nuksaan
  6. मसालेदार भोजन के अन्य विकल्प - Masaledaar bhojan ke any vikalp
  7. मसालेदार भोजन को अपने आहार में कैसे शामिल करें - Masaledaar khane ko diet me kaise le

मसालेदार खाना आपके पेट में एसिड की मात्रा को बढ़ाता है क्योंकि उसे पचाने के लिए अधिक मेहनत की जरूरत पड़ती है। अगर आपके पेट में अधिक एसिड हो तो भोजन के बाद खाने के भोजन नली में फंसने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि गर्भावस्था के दौरान मसालेदार भोजन का सेवन आपके भ्रूण के लिए सुरक्षित होता है। 

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शोधकर्ताओं के अनुसार गर्भावस्था की पहली तिमाही बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इसमें मिसकैरेज होने का खतरा बना रहता है लेकिन अब तक मसालेदार भोजन की वजह से मिसकैरेज होने का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। पहली तिमाही में मसालेदार भोजन का सेवन बिलकुल सुरक्षित है और इससे गर्भस्थ शिशु के विकास पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

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दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान मसालेदार भोजन का सेवन करने से सीने में जलन और एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्या की संभावना बढ़ जाती है। तीसरी तिमाही में गर्भवती स्त्री के पेट में गैस की समस्या हो जाती है और जैसे-जैसे भ्रूण का विकास होता है ये समस्या और बढ़ जाती है।

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जब तक आपका शरीर मसालों को पचा पाने में सक्षम है तब तक इनका सेवन सीमित मात्रा में किया जा सकता है लेकिन आपको गर्भावस्था में बाहर का मसालेदार खाना नहीं खाना चाहिए। बेहतर होगा कि आप ताजे मसाले खरीदकर उन्हें घर पर ही पीस लें और इस्तेमाल करें।  

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मसालेदार भोजन खाने से पाचन संबंधी समस्याएं उतपन्न होती हैं जिससे गर्भवती को असहजता हो सकती है। हार्मोनल स्तर में बदलाव होने की वजह से गर्भावस्था के शुरुआती चरण में मॉर्निंग सिकनेस बहुत आम है और मसालेदार भोजन के सेवन से यह समस्या और बढ़ सकती है।  

मसालेदार भोजन करने के बाद एक गिलास दूध या एक चम्मच शहद के सेवन से सीने में जलन की समस्या से आराम मिलता है।

उन अलग-अलग व्यंजनों को भी खाया जा सकता है जो स्वाभाविक रूप से मसालेदार हो, सीमित मात्रा में मसालेदार भोजन का सेवन सीने में जलन और पाचन संबंधी समस्याओं से बचाव कर सकता है। घर के बने खाने को प्राथमिकता दें और उसमें मसालों की मात्रा और गुणवत्ता दोनों को सुधारा जा सकता है।

आप निम्नलिखित तरीकों से अपने आहार में मसालेदार भोजन को शामिल कर सकते हैं:

  • करी सॉस में प्याज, लहसुन, मिर्च और सभी आम मसालों के मिश्रण का इस्तेमाल कर सकते हैं और गर्भावस्था में इसका सेवन करना सुरक्षित रहता है।
  • गर्भवती के आहार में अचार को शामिल करें।

यूं तो मसालेदार भोजन गर्भवती के गर्भ में पल रहे शिशु को कोई हानि नहीं पहुंचाता इसे बिना किसी डर के खाया जा सकता है लेकिन फिर भी गर्भवती और उसके शिशु की सुरक्षा के लिए किसी भी खाद्य पदार्थ को आहार में हिस्सा देने के पहले चिकित्सकीय परामर्श जरूर लेना चाहिए।

ऐसा करने से बाद में कोई खतरा नहीं होता। अगर किसी भी खाद्य पदार्थ के लाभ और हानि दोनों बिंदुओं को पहले ही जांच लिया जाए तो निसंकोच उसका सेवन भी किया जा सकता है। 

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