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गर्भावस्था का समय एक ऐसा समय होता है जिसमे शरीर और दिमाग एक नए निर्माण की तरफ बढ़ रहे होते हैं। यह जीवन का एक अनूठा और मूल्यवान अनुभव होता है। इस अवस्था में स्वस्थ रहना ज़रूरी है और स्वस्थ रहने के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है आप अपनी दिनचर्या में योग और प्राणायाम को जोड़ें। योग और प्राणायाम आपको स्वस्थ गर्भावस्था और डिलीवरी में मदद करते हैं।

जब भी योग और प्राणायाम का अभ्यास करें तो आराम से और धीरे धीरे करें। योग और प्राणायाम से आपका शरीर शिथिल और मजबूत रहता है, गर्भावस्था में होने वाले शारीरिक परिवर्तन और सांस की तकलीफ में भी ये मदद करते हैं। 

(और पढ़ें - गर्भावस्था में व्यायाम)

गर्भावस्था में योग और प्राणायाम को शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक या योग शिक्षक से ज़रूर इजाज़त ले लें या उन्हें आप एक ट्रेनर के रूप में भी रख सकते हैं। इससे वे आपको आपके शरीर के हिसाब से उपयुक्त आसान बता पाएंगे। कुछ ज़रूरी सुझाव जो आपको अपने अभ्यास के दौरान नहीं करने चाहिए -

  1. पेट पर दबाव पड़ने वाले आसन करने से बचें।
  2. पेट को अच्छी तरह से विस्तृत (extended) रखें।
  3. गहरी सांस लेने पर ज़्यादा ध्यान दें।
  4. अपने शरीर के हिसाब से अभ्यास को करें।

तो आज हम आपको गर्भावस्था के दौरान योग के फायदे, किस तरह के योग और प्राणायाम आपको करने चाहिए आदि बताने वाले हैं।

(और पढ़ें - डिलीवरी के बाद के लिए योग)

  1. गर्भावस्था के दौरान योग के लाभ - Benefits of yoga during pregnancy in Hindi
  2. गर्भवती महिलाओं के लिए योगासन - Yoga poses for pregnant women in Hindi
  3. गर्भवती महिलाओं के लिए प्राणायाम - Pranayama for pregnant women in Hindi
  4. गर्भावस्था के दौरान योग से संबंधित सावधानियां - Precautions to take for yoga during pregnancy in Hindi
  5. गर्भावस्था के दौरान कुछ अन्य योग करने से बचें - Yoga poses to avoid during pregnancy in Hindi
  1. योग में श्वास लेने की प्रक्रिया शरीर को अधिक ऑक्सीजन प्रदान करती है जो कि गर्भावस्था के दौरान बेहद जरूरी है। (और पढ़ें - प्रेग्नेंट होने के लिए क्या करें)
  2. योग करने के बाद भ्रूण को ऑक्सीजन से भरपूर रक्त का लाभ मिलता है।
  3. योग अभ्यास के दौरान आपका दिमाग एक दम शांत हो जाता है साथ ही तनाव से भी मुक्त रहता है। ये शान्ति आपके बच्चे तक पहुँचती है जिसकी मदद से आप और आपका बच्चा दोनों ही शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहते हैं।
  4. कमर और पेल्विक मांसपेशियां गर्भावस्था के दौरान और बाद में कमज़ोर पड़ जाती हैं। नियमित योग अभ्यास उन्हें टोन और स्वस्थ रखने में मदद करता है।
  5. कोमल तरीके से टोनिंग और स्ट्रेचिंग आपके शरीर को बच्चे के लिए गर्भावस्था के दौरान और बाद में  तैयार कर रही होती है। 
  6. योग आसन शरीर को कोमल रखने में मदद करते हैं। ये पैल्विक क्षेत्र खोलकर गर्भाशय ग्रीवा के आसपास तनाव से राहत दिलाते हैं। योग माँ को डिलीवरी के लिए तैयार करता है।
  7. योग सामान्य लक्षण जैसे सुबह उठकर होने वाली समस्या, पैर की ऐंठन, एंकल में सूजन और कब्ज़ से राहत दिलाने में मदद करते हैं।
  8. योग आसन डिलीवरी के बाद भी माँ को तेज़ी से ठीक करने में मदद करते हैं।

गर्भावस्था के दौरान व्यायाम करना बेहद ज़रूरी होता है। नीचे दिए गए योग अभ्यास से आपको थोड़ी परेशानी हो सकती है लेकिन इन्हे करने के लिए एक शिक्षक की निगरानी में करें।

मार्जरी आसन -

सबसे पहले घुटने मोड़ते हुए ज़मीन पर बैठ जाएँ। अब अपने हाथों को थोड़ा आगे ले जाते हुए धीरे-धीरे ज़मीन पर रखें।

अब अपने पेट को नीचे ज़मीन की तरफ झुकाये और गर्दन को जितना हो सके उतना ऊपर की तरफ लेकर जाएँ। कुछ मिनट इसी अवस्था में रहें। कुछ मिनट बाद इसी प्रक्रिया में कमर को ऊपर की तरफ लेकर जाएँ और सिर को दोनों हाथों के बीच लाकर नीचे की तरफ झुका लें। कुछ मिनट इसी अवस्था में रहें। क्षमता अनुसार भी आप इसका समय तय कर सकते हैं।

(और पढ़ें - मार्जरी आसन करने का तरीका और फायदे)

मार्जरी आसन के फायदे -

  1. इससे आपकी रीढ़ की हड्डी लचीली होगी। यह इसलिए उपयोगी है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान कमर पर पड़ने वाले भार को ये आसन सहारा देता है।
  2. पेट के क्षेत्र को ये आसन टोन करता है।
  3. रक्त परिसंचरण में सुधार होता है।
  4. इससे प्रजनन अंग अच्छी तरह पोषित भी होते हैं।

कोणासना -

सबसे पहले दोनों पैरों को जोड़कर सीधे खड़े हो जाएँ। अब दायां हाथ ऊपर सीधा खड़ा कर लें और बाएं हाथ को पैर से चिपकाकर रखें। अब अपने शरीर को जितना मुमकिन हो उतना बाईं ओर अपने दाएं हाथ के साथ घुमाएं। कुछ मिनट तक इसी अवस्था में रहें। क्षमता अनुसार भी आप इसका समय तय कर सकते हैं। फिर अपने दाएं हाथ के साथ शरीर को सीधा कर लें और दोनों हाथ को पैरों से चिपकाकर सीधे खड़े हो जाएँ।

कोणासना के फायदे -

  1. इस आसन को करने से आपकी रीढ़ की हड्डी लचीली रहेगी।
  2. इससे आपका शरीर खुलेगा।
  3. गर्भावस्था में होने वाली सबसे आम समस्या कब्ज़ से भी ये आसन राहत दिलाता है।

वीरभद्रासन 2 -

सबसे पहले सीधा खड़ा हो जायें। अब अपने बाएं पैर को आगे की और लेकर जाएँ ओर दाएं पैर को पीछे की ओर जैसा की चित्र में दर्शाया गया है लेकिन ये अपनी क्षमता के अनुसार करें। अब अपने दोनों हाथों को ऊपर उठायें और एकदम सीधा कर लें और हथेलियों को ऊपर की तरफ घुमा दें। कुछ मिनट तक इस अवस्था में रहें या अपनी क्षमता के अनुसार भी समय को तय कर सकते हैं।

(और पढ़ें - वीरभद्रासन 2 करने का तरीका और फायदे)

वीरभद्रासन के फायदे -

  1. इस आसन को करने से आपका शरीर संतुलित रहता है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान गिरने की संभावना ज़्यादा रहती है।
  2. यह कंधों, पैरों और कमर के निचले हिस्से को टोन करता है।
  3. इस आसन को करने से आपकी सहनशक्ति बढ़ जाती है।
  4. इससे आपको डिलीवरी में मदद मिलती है।

त्रिकोणासन -

सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएँ। अब पैरों को खोल लें और बाएं पैर को आगे की तरफ लेकर जाएँ। दाएं पैर को एकदम सीधा रखें अब शरीर को झुकाएं और बाएं हाथ को बाएं पैर के पंजे या घुटने पर रख दें। और दाएं हाथ को ऊपर की तरफ लेकर जाएँ। अपनी गर्दन भी दाईं हाथ की ओर घुमा लें। इस प्रक्रिया को क्षमता अनुसार करें।

(और पढ़ें - उत्थित त्रिकोणासन करने का तरीका और फायदे)

त्रिकोणासन के फायदे -

  1. शारीरिक और मानसिक रूप से ये आसन आपको संतुलित रखता है।
  2. कूल्हों को स्ट्रेच और खोलने में मदद करता है जो कि गर्भावस्था के दौरान बेहद फायदेमंद है।
  3. कमर का दर्द और खिचाव को दूर करता है।

बद्धकोणासन -

सबसे पहले बैठ जाएँ। और अपने दोनों पैरों के तलवों को एक साथ मिला लें जैसा चित्र में दर्शाया गया है। अब हाथों से पैरों के अंगूठों या पंजों को पकड़ लें। फिर कुछ मिनट तक या क्षमता अनुसार तितली की तरह पैरों को धीरे धीरे हिलाएं।

(और पढ़ें - बद्ध कोणासन करने का तरीका और फायदे)

बद्धकोणासन के फायदे -

  1. कूल्हों और पेट और जांघ के बीच के भाग को लचीला बनाता है।
  2. जांघ और घुटनों को स्ट्रेच करता है और दर्द से राहत देता है।
  3. थकान को दूर करता है।
  4. डिलीवरी में आसानी होती है।

विपरीत करनी आसन

इस आसन को करने के लिए दीवार का सहारा लें। सबसे पहले घुटने मोड़ते हुए दीवार की तरह लेट जाएँ। अब पेरो को धीरे धीरे ऊपर की तरफ उठायें। आपके कुल्हें और कमर के नीचे गुदगुदा तकिया रखा होना चाहिए जिससे कमर और कूल्हे सीधा कठोर ज़मीन से न लगें। अपने कंधों और सिर को आराम दें। अपने हाथों को साइड में रख दें और हथेलिया ऊपर की तरफ घुमा लें। इसी अवस्था में पांच मिनट तक आराम से आराम से सांस लें और नीचे की तरफ सांस हल्के हल्के लेकर आएं। अपनी क्षमता के अनुसार की अवस्था का समय तय कर सकते हैं।

(और पढ़ें - विपरीत करनी करने का तरीका और फायदे)

विपरीत करनी आसन के फायदे

  1. इस आसन को करने से पीठ दर्द से राहत मिलती है।
  2. पेल्विक क्षेत्र तक रक्त के प्रवाह को सुधारता है।
  3. गर्भपात के सामान्य लक्षण एंकल और वेरिकोस नसों की सूजन को कम करता है।

शवासन

सबसे पहले सीधा लेट जाएँ। पैरों में थोड़ी दूरी बनाएं और हाथों को शरीर से अलग रख दें। हाथों की हथेलियों को ऊपर की तरफ रखें। फिर आँखों को बंद कर लें। अब शरीर को ढीला छोड़ दें और धीरे धीरे गहरी सांस लें। इस प्रक्रिया को आप जब चाहे उतनी देर तक कर सकते हैं।

(और पढ़ें - शवासन करने का तरीका और फायदे)

शवासन के फायदे

  1. गर्भवती महिलाओं को लगतार अपने रक्तचाप पर ध्यान रखना चाहिए।
  2. इस आसन से आपका शरीर आरामदेह रहता है, कोशिकाओं को ठीक रखता है।
  3. ये आसन खुद में ही एक दर्द निवारक है।
  4. गर्भवती महिलाओं को दर्द को दूर करने के लिए दवाइयों से बचना चाहिए।
  5. इस आसन से तनाव दूर रहता है।

योग निद्रा

सबसे पहले सीधा लेट जाएँ। पैरों में थोड़ी दूरी बनाएं और हाथों को शरीर से अलग रख दें। हाथों की हथेलियों को ऊपर की तरफ घुमा लें। फिर अपनी आँखों को बंद कर लें। अब शरीर को ढीला छोड़ दें और धीरे धीरे गहरी सांस लें। इस प्रक्रिया को आप जब चाहे उतनी देर तक कर सकते हैं।

(और पढ़ें - योग निद्रा के माध्यम से पायें सुखद गहरी नींद)

योग निंद्रा के फायदे

  1. ये दर्द से राहत दिलाता है।
  2. तनाव और चिंता को कम करता है।
  3. रक्तचाप को नियमित करने में मदद करता है।
  4. ये सभी कोशिकाओं को आराम देता है और डिलीवरी के लिए शरीर को तैयार करता है।

प्राणायाम गुस्सा और हताशा जैसी नकारात्मक भावनाओं से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। तनाव को कम करता है और दिमाग को शांत रखता है।

भ्रामरी प्राणायाम -

सबसे पहले सुविधाजनक आसन में बैठ जाएँ। अब दोनों हाथों की उँगलियों को आँखों के पास या सिर पर रख लें। और अंगूठे से कानों को हल्के से बंद कर लें। अब सांस अंदर बाहर गहरी गहरी लें। ये प्रक्रिया करते समय मक्खी जैसी भिनभिनाने वाली आवाज़ निकालें। इस प्रक्रिया को क्षमता अनुसार करते रहें।

(और पढ़ें - भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका और फायदे)

भ्रामरी प्राणायाम करने के फायदे -

  1. रक्त परिसंचरण को नियमित करता है।
  2. सिर के दर्द में आराम पहुंचाता है।

नदी शोधन प्राणायाम -

सबसे पहले सुविधाजनक आसन में बैठ जाएँ। अब अपने दाएं हाथ हो नाक के पास लाएं और अंगूठे से दाई और से नाक को दबाएं और बाएं और से सांस लें। फिर सांस छोड़ने के लिए अपनी ऊँगली से बाएं नाक बंद कर लें। आपका बाय हाथ बाएं पैर पर रखा होना चाहिए। इस प्रक्रिया को क्षमता अनुसार करें।

(और पढ़ें - अनुलोम-विलोम प्राणायाम करने का तरीका और फायदे)

नदी शोधन प्राणायाम के फायदे -

  1. दिमाग को शांत रखता है।
  2. शरीर के तापमान को संतुलित रखता है।
  3. ये प्राणायाम ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाता है।
  4. इससे गर्भ में बच्चे के विकास में मदद मिलती है।
  1. गर्भावस्था के बढ़ते चरणों के दौरान पेट पर दबाव डालने वाले आसनों से बचें।
  2. गर्भावस्था की पहली तिमाही में खड़े होकर योग आसन करें। इससे आपके पैरों को मजबूती मिलेगी और रक्त परिसंचरण भी बढ़ेगा। इससे आपके पैरों की ऐठन भी दूर होगी।
  3. गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही में थकावट से बचने के लिए ज़्यादा देर तक के आसन को न करें। इसके बदले में श्वास व्यायाम या मैडिटेशन करें।
  4. गर्भावस्था के 10 से 14 सप्ताह तक योग अभ्यास करने से बचें क्योंकि ये समय बेहद महत्वपूर्ण होता है।
  5. ऐसे आसन न करें जिनमें आपका शरीर औंधी स्थिति में होता है।
  6. अपने शरीर के हिसाब से आसन को करें।
  7. इन योग के नियम का पालन अवश्य करें। 

गर्भवती महिलाओं को ये आसान नहीं करने चाहिए - 

  1. नौकासन (और पढ़ें - नावासन करने का तरीका और फायदे)
  2. चक्रासन (और पढ़ें - ऊर्ध्व धनुरासन (या चक्रासन) करने का तरीका और फायदे)
  3. अर्ध मत्स्येन्द्रासन (और पढ़ें - अर्ध मत्स्येन्द्रासन करने का तरीका और फायदे)
  4. भुजंगासना (और पढ़ें - भुजंगासन करने का तरीका और फायदे)
  5. विपरीत शलभासन (और पढ़ें - शलभासन करने की विधि और फायदे)
  6. हलासन (और पढ़ें - हलासन करने का तरीका और फायदे)

गर्भावस्था में योग शुरू करने से पहले कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें की यह आपके लिए ठीक है कि नहीं। योग करें तो एक प्रशिक्षित गुरु के निर्देशन में करें। 

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