myUpchar प्लस+ के साथ पूरेे परिवार के हेल्थ खर्च पर भारी बचत

चाहे आप गर्भावस्था के किसी भी पड़ाव पर हों, आप उसके अंतिम चरण के बारे में जरूर सोच रहे होंगे - प्रसव, डिलीवरी, और आपके सुन्दर स्वस्थ बच्चे का जन्म। इस अंतिम चरण की शुरआत होते हैं गर्भशय संकुचन (contractions)।

(और पढ़ें - नॉर्मल डिलीवरी कैसे होती है)

यह संकुचन आपके प्रसव की शुरुआत का संकेत होते हैं। लेकिन कई बार गर्भावस्था का समय पूरा होने से पहले ही कुछ महिलाओं को संकुचन (ऐंठन) महसूस होने लगती है। संकुचन का हर बार यह मतलब नहीं होता कि आपकी डिलीवरी का समय आ गया है।इस लेख में गर्भाशय संकुचन के बारे में बताया जा रहा है ताकि आपको इन्हे समझने और पहचानने में कोई कठिनाई न हो, चाहे वह गर्भावस्था के दौरान किसी भी समय हों। 

आगे जानते हैं कि गर्भाशय संकुचन क्या है, संकुचन कितने प्रकार के होते हैं और कब यह प्रसव की शुरुआत की ओर संकेत करते हैं।

(और पढ़ें - pregnancy in hindi)

  1. गर्भाशय संकुचन या प्रसव संकुचन क्या है - Garbhashay sankuchan ya contractions kya hai
  2. संकुचन के प्रकार - Sankuchan ke prakar
  3. प्रसव और डिलीवरी के लिए तैयारी - Prasav aur delivery ke liye taiyari
  4. क्या संकुचन या कंट्रक्शन में बहुत दर्द होता है - Kya contractions me dard hota hai

गर्भाशय संकुचन को प्रसव संकुचन भी कहा जाता है। पेट में हल्की ऐंठन और दबाव के रूप में गर्भाशय संकुचन महसूस होता रह सकता है। पेट में इस तरह का दबाव व ऐंठन इसलिए होती है, क्योंकि आपका गर्भाशय डिलीवरी के लिए तैयार हो रहा होता है। डॉक्टर इसको एक तरह से प्रेग्नेंसी के अंतिम दौर के लिए गर्भाशय की एक्सरसाइज भी मानते हैं।

(और पढ़ें - प्रेगनेंसी में क्या खाना चाहिए)

गर्भाशय संकुचन से आपका शरीर डिलीवरी के दौरान बच्चे को बाहर आने में मदद करता है। बच्चा गर्भाशय के अंदर होता है और जब गर्भाशय की मांसपेशियों में संकुचन होता है तो यह प्रसव की प्रक्रिया को आग बढ़ाता है।

प्रसव संकुचन - यानी प्रसव की शुरुआत के समय गर्भाशय संकुचन - पेट में हलकी ऐंठन या सख्तपन जैसा महसूस हो सकता है, लेकिन ये जल्द ही गंभीर हो जाते हैं। यह कुछ ऐसा महसूस हो सकता है जैसा माहवारी ​या पेट में गैस की वजह से अत्यधिक ऐंठन या दर्द महसूस होता है। धीरे-धीरे इनकी तीव्रता बढ़ती जाती है, और ज्यादा होने लगते हैं। लेकिन ये प्रसव का एक आवश्यक हिस्सा होते हैं क्योंकि ये बच्चे को जन्म के लिए सही पोजीशन में लाता है और बाहर आने में उसकी मदद करता है। 

(और पढ़ें - गर्भावस्था में भ्रूण का विकास)

गर्भावस्था के दौरान कई तरह के संकुचन हो सकते हैं। यहां इनके बारे में बताया गया है, और साथ ही कि इनका मतलब क्या होता है -

  1. गर्भावस्था में शुरूआती संकुचन (Early contractions)
    इस तरह का संकुचन आपको गर्भावस्था के पहली तिमाही में महसूस हो सकता है। यह संकुचन आपको प्रेग्नेंसी के लिए तैयार करता है। गर्भाशय के चारों ओर के अस्थि बंधन (ligaments) के खिंचाव के कारण इस तरह का संकुचन का अनुभव होता है। इस वजह से निर्जलीकरण, कब्ज और गैस का दर्द भी हो सकता है। अगर आपको इन लक्षण के साथ पेट के निचले हिस्से में दर्द, योनि से रक्तस्त्राव या खून के थक्के जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाकर इस बात की पुष्टि करनी चाहिए कि कहीं यह स्थिति एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (Ectopic pregnancy/ अस्थानिक गर्भावस्था/ गर्भावस्था से संबंधित समस्या) या मिसकैरेज (Miscarriage/ गर्भपात) की वजह से तो नहीं हैं।

    आप खुद इस बात का आसानी से पता लगा सकती हैं कि ऐठन या दर्द वाकई में गर्भाशय संकुचन हैं कि नहीं। इसके लिए आप नीचे लेटें और अपने हाथों को गर्भाशय पर रखें। अगर ऐंठन के दौरान आपका पूरा गर्भाशय सख्त हो रहा हो, तो यह प्रसव संकुचन की सही स्थिति होता है। यदि आपका गर्भाशय किसी जगह से सख्त और किसी जगह से सॉफ्ट हो तो यह संकुचन के बजाय गर्भ में बच्चे का हिलना हो सकता है। (और पढ़ें - प्रेगनेंसी के बारे में महीने के हिसाब से जानें)
     
  2. समय से पहले प्रसव के संकुचन (Preterm contractions)
    कई तरह के संकुचन प्रेगनेंसी के 34 सप्ताह के बाद अचानक कभी भी अनियमित रूप से होना शुरू हो जाते हैं। इस तरह के संकुचन को "ब्रैक्सटन-हिक्स संकुचन" (Braxton-Hicks contractions) कहते हैं। अगर संकुचन इस तरह रूक-रूककर आने की बजाय हर दस मिनट में लगातार आएं, तो ये प्रीटर्म लेबर (समय से पहले प्रसव) का लक्षण हो सकते हैं। किसी भी तरह के संकुचन को महसूस करने पर अपने डॉक्टर को तुरंत बताएं। आपके डॉक्टर ही आपकी स्थिति का सही अनुमान लगे सकते हैं।

    अगर ये गर्भाशय संकुचन समय से पहले प्रसव के संकुचन न हों, तो ऐंठन को दूर करने के लिए भरपूर पानी पीएं, गर्म पानी से स्नान करें, बार-बार पेशाब जाएं और आराम से सांस लें। (और पढ़ें - गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर से चेकअप)
     
  3. सेक्स के बाद होने वाला संकुचन (Sex contractions)
    अगर आपकी प्रेग्नेंसी सामान्य है, तो ओर्गास्म (चर्म सुख) से समय से पहले प्रसव शुरू होने का जोखिम नहीं होता है। उस ही तरह गर्भावस्था के दौरान सेक्स करने से भी प्रसव शुरू नहीं होता, लेकिन आपको कुछ "ब्रैक्सटन-हिक्स संकुचन" (Braxton-Hicks contractions) या हलकी स्पॉटिंग हो सकती है।

    लेकिन ये कुछ ही घंटों बाद कम हो जाता है। अगर ये रक्तस्त्राव, लगातार दर्द, योनि से तरल स्त्राव या गर्भ में बच्चे का कम हिलाने जैसे गंभीर लक्षण के साथ हो, तो इस स्थिति में आपको अपने डॉक्टर से जल्द ही बात करनी चाहिए। (और पढ़ें - सेक्स के बाद रक्तस्त्राव)
     
  4. कमर में संकुचन (Back contractions)
    प्रसव संकुचन की वजह से कमर में दर्द हो सकता है। ये दर्द कई प्रकार हो सकता है - हल्का दर्द व ऐंठन जो पीठ में शुरू होकर गर्भाशय की तरफ बढ़ता है या फिर पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द। अगर दर्द अधिक हो और पीठ में महसूस हो रहा हो, तो इस स्थिति को "बैक लेबर" (Back labour/ प्रसव संकुचन की वजह से पीठ में दर्द) कहते हैं। (और पढ़ेें - गर्भावस्था में पीठ में दर्द का इलाज)

    बर्थ कैनल (Birth canal: बच्चा जिस नलिका से बाहर आता है) में बच्चे के हिलने और उसकी स्थिति के परिणामस्वरूप बैक लेबर होता है। यदि बच्चे का सिर ऊपर की तरफ होता है तो इससे मां की पीठ की नसों में अधिक दबाव पड़ता है, जिससे दर्द अधिक होना शुरू हो जाता है। लेकिन कई गर्भवती महिलाएं बच्चे की स्थिति और प्रसव प्रक्रिया ठीक होने पर भी पीठ में संकुचन महसूस करती हैं। ऐसा हो सकता है कि पूरे प्रसव के दौरान पीठ में दर्द रहे। ऐसे में आपको अपने डॉक्टर से दर्द कम करने की दवा लेने के बारे में बात करनी चाहिए।

(और पढ़ें - प्रेग्नेंसी में होने वाले पेल्विक दर्द का इलाज)

एक बार आपको इस बात की पुष्टि हो जाए की संकुचन आपके प्रसव की शुरुआत हैं, तो आपको समझ जाना चाहिए कि आपकी डिलीवरी का समय नजदीक है और आपको खुद को आने वाले समय के लिए तैयार कर लेना चाहिए।

(और पढ़ें - नार्मल डिलीवरी और सिजेरियन डिलीवरी

इस समय आपको या आपके पति को संकुचन की अवधी पर गौर करना होगा कि यह कब शुरु होता है और कितनी देरी तक रहता है। गर्भावस्था के अंतिम दौर में होने वाला यह संकुचन थोड़े-थोड़े समय के बाद नियमित रूप से होता रहता है। सक्रिय प्रसव के दौरान यह संकुचन आपको एक मिनट तक के लिए हो सकता है और हर पांच मिनट में दोबारा होने लगता है।

संकुचन के दौरान यदि आपको असहज महसूस हो रहा हो और आपका घर अस्पताल से काफी दूर हो, तो डॉकटर आपको अस्पताल में एडमिट (भर्ती) होने की सलाह दे सकेत हैं। इससे वह आपकी हर दो घंटे में जांच कर सकते हैं। अन्यथा प्रसव प्रक्रिया शुरू होने से पहले आपको घर में ज्यादा से ज्यादा आराम करने की आवश्यकता होती है, क्योंकि बच्चे का बाहर आना कोई सहज कार्य नहीं होता और प्रसव के समय आपको अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है।

(और पढ़ें - गर्भावस्था में होने वाली परेशानी)

पहली बार प्रेग्नेंट होने वाली महिलाओं के शरीर को प्रसव के लिए तैयार होने में थोड़ा समय लग सकता है। आपका प्रसव का समय कई घंटों से लेकर पूरे एक दिन तक हो सकता है। जबकि दोबारा गर्भवती होने वाली महिलाओं का प्रसव काल कम हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि दूसरे और तीसरे बच्चे पहले की अपेक्षा कम पीड़ा से पैदा हो जाते हैं। जो महिलाएं पहले भी बच्चे को जन्म दे चुकी होती हैं, उनका शरीर प्रसव और डिलीवरी से वाकिफ होता है जिसकी वजह से उनको कम परेशानी होती है।

(और पढ़ें - प्रेगनेंसी में क्या करें)

संकुचन में दर्द कितना होता है, यह कई कारको पर निर्भर करता है - 

  • आपके गर्भ में बच्चे की पोजीशन
  • प्रसव के समय आपकी स्थिति
  • आप दर्द के प्रति कितनी संवेदनशील हैं। कुछ महिलाओं को ब्रैक्सटन हिक्स कंट्रक्शन में भी बहुत दर्द होता है, वहीँ कई महिलाओं को ये भी नहीं पता चलता कि उनका लेबर (प्रसव) शुरू हो गया है - वह बस हल्की ऐंठन और पीठ में दर्द ही अनुभव करती हैं।

इस दौरान आप कई तरह की पोजिशन के द्वारा अपनी असहजता को कम कर सकती हैं। गर्म पानी में बैठना या नहाना और दर्द को कम करने वाली दवाओं के सेवन से भी आप इस स्थिति से राहत पा सकती हैं। अगर संकुचन असहज हो और नीचे की ओर हो रहा हो तो आपकी डिलीवरी का समय नजदीक होता है।

(और पढ़ें - गर्भ में बच्चे का लात मारना)                                              

और पढ़ें ...