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प्रेगनेंसी के दौरान मां और बच्चे की अच्छी सेहत के लिए फल खाने की सलाह दी जाती है जिसमें खजूर भी शामिल है। अक्सर प्रेगनेंसी में खजूर खाने का भी मन करता है लेकिन कई महिलाओं को यह पता नहीं होता है कि प्रेगनेंसी में खजूर खाना चाहिए या नहीं। आज इस लेख के जरिए हम आपको यही बताने जा रहे हैं कि प्रेगनेंसी में खजूर खा सकते हैं या नहीं।    

खजूर एक मीठा फल है और यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है। प्रेगनेंसी के दौरान मां और शिशु दोनों के लिए ही खजूर बहुत फायदेमंद होता है। खजूर में प्राकृतिक रूप से शुगर की मात्रा मौजूद होती है और यह पोटैशियम से भी युक्त है। अपने गुणों के कारण खजूर प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली कई समस्याओं को ठीक करके आपकी सेहत का ख्याल रखता है।

प्रेगनेंसी में खजूर खाने के फायदे

एनीमिया से सुरक्षा

प्रेगनेंसी के दौरान, आपको सामान्य से अधिक एनर्जी की जरूरत होती है। रोजाना एक मुट्ठी खजूर खाने से शरीर में कैलोरी को बिना बढ़ाए आवश्यक मात्रा में शुगर की पूर्ति की जा सकती है। खजूर आपके शरीर में आयरन की कमी को भी पूरा कर सकता है जिससे एनीमिया का खतरा कम हो जाता है। आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बनाए रखता है और मां एवं बच्चे की इम्युनिटी को भी बढ़ाता है।   

कब्ज और जन्मदोष से छुटकारा

खजूर फाइबर से युक्त होता है जो आपके पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है जिससे कब्ज की समस्या नहीं होती है। खजूर से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस रहता है साथ ही ये कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है और प्रेगनेंसी में संतुलित वजन बनाए रखने में मदद भी करता है। खजूर फोलेट (फोलिक एसिड) का भी एक अच्छा स्रोत हैं। फोलेट प्रेगनेंसी में शिशु को मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से संबंधित जन्मदोष से बचाता हैं।

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भ्रूण की हड्डियों और दांतों का विकास

मैग्नीशियम एक आवश्यक खनिज पदार्थ है जो गर्भ में शिशु की हड्डियों और दांतों के विकास में मदद करता है। यह आपके ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर लेवल को भी नियंत्रित करता है। खजूर शरीर में मैग्नीशियम की कमी होने से रोकता है। आपको बता दें कि इसकी कमी की वजह से शिशु के लिवर और किडनी में कई विकार आ सकते है।

प्रसव में कोई परेशानी नहीं आती 

खजूर से प्रसव में आने वाली दिक्कतों की संभावना में कमी आने को लेकर कई अध्ययन किए जा चुके हैं। प्रेगनेंसी के आखिरी कुछ हफ्तों में खजूर खाने से प्रसव के समय गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) खुलने में दिक्कत नहीं आती है। कई बार डिलीवरी डेट आने पर भी महिलाओं को प्रसव पीड़ा शुरू नहीं होती है, ऐसे में प्रसव लाने के लिए मां को कुछ दवाएं या इंजेक्शन दिए जाते हैं। अगर गर्भवती महिला डिलीवरी के कुछ हफ्ते पहले खजूर खाना शुरू कर दे तो इस स्थिति या समस्या से बचा जा सकता है। खजूर खाने वाली महिलाओं को प्रसव पीड़ा अधिक समय तक सहनी नहीं पड़ती है।

(और पढ़े - गर्भावस्था में अलसी खानी चाहिए या नहीं)

एक अध्ययन के अनुसार, डिलीवरी से पहले 4 हफ्तों तक रोजाना 6 खजूर खाने वाली 69 महिलाओं में खजूर न खाने वाली प्रेग्नेंट महिलाओं की तुलना में नेचुरल प्रसव की संभावना 20 प्रतिशत अधिक पाई गई।

एक अन्य अध्ययन में प्रेगनेंसी के दौरान खजूर खाने वाली 154 गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के समय (प्रसव के दौरान) उन महिलाओं के मुकाबले बहुत कम समस्या हुई, जो प्रेगनेंसी में खजूर नहीं खाती थी।   

एक तीसरे अध्ययन में 91 गर्भवती महिलाओं ने प्रेगनेंसी के 37 वें हफ्ते से रोजाना 70-76 ग्राम खजूर खाना शुरू किया था, ये महिलाएं खजूर न खाने वाली महिलाओं की तुलना में प्रसव के दौरान लगभग 4 घंटे तक एक्टिव रह पाई थीं।

खजूर प्रेगनेंसी में इसलिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि इसमें ऑक्सीटोसिन रिसेप्टर्स को बांधने वाले घटक मौजूद होते हैं जो कि शरीर में ऑक्सीटोसिन की तरह ही प्रभाव देते हैं। ऑक्सीटोसिन एक ऐसा हार्मोन है जो डिलीवरी के समय गर्भाशय में संकुचन पैदा करता है जिससे शिशु प्रसव के दौरान आसानी से गर्भाशय से बाहर आ पाता है। इसके अलावा, खजूर में टैनिन भी होते हैं जो कि डिलीवरी को आसान बनाने में मददगार साबित होते हैं।

प्रेगनेंसी में खजूर खाना बहुत ही लाभकारी है। वैसे तो प्रेगनेंसी में खजूर खाना फायदेमंद होता है लेकिन किसी भी चीज की अति नुकसानदायक साबित हो सकती है इसलिए आपको भी खजूर का सेवन नियंत्रित मात्रा में करना चाहिए।

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