आर्थराइटिस में क्या खाना चाहिए
जोड़ों की सूजन को आर्थराइटिस या गठिया कहा जाता है। इसमें समय के साथ जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या होने लगती है, जिसकी वजह से प्रभावित हिस्से की मांसपेशियां सामान्य रूप से कार्य नहीं कर पाती हैं। जानकर हैरानी होगी कि यह केवल एकल (सिंगल) बीमारी नहीं है, बल्कि यह ऐसे 200 से अधिक बीमारियों का एक समूह है, जिनके लक्षण आपस में मिलते हैं।
आर्थराइटिस अक्सर ऑस्टियोआर्थराइटिस, सूजन (रूमेटाइड आर्थराइटिस और सोरियाटिक आर्थराइटिस), जोड़ों में इन्फेक्शन या चयापचय में गड़बड़ी (गाउटी आर्थराइटिस) के कारण गठिया हो सकता है। हालांकि यह बीमारी पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक होती है, खासतौर जिनका वजन ज्यादा हो।
यदि किसी व्यक्ति को गठिया है, तो वे जानते हैं कि यह स्थिति दिन-प्रतिदिन के जीवन में हस्तक्षेप कर सकती है। गठिया के अधिकांश रूपों को नियमित दवाओं के माध्यम से प्रबंधित किया जा सकता है। गठिया के रोगी अपने लक्षणों को कम करने के लिए वैकल्पिक या अतिरिक्त तरीकों की तलाश करते हैं, जिसमें आहार भी शामिल है।
जबकि विशिष्ट प्रकार के गठिया के लिए कोई एकल आहार नहीं है, ऐसे में स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए अपने आहार में कुछ खाद्य पदार्थों को जोड़ अथवा हटा सकते हैं, इससे जोड़ों का स्वास्थ अच्छा बना रहने में मदद मिलती है।
- गठिया होने पर खाने के लिए भोजन - Foods to eat if you have arthritis in hindi
- गठिया के रोगियों के लिए सब्जी - Which vegetables are good for arthritis patients in hindi
- गठिया में फल - Good fruits for arthritis in hindi
- गठिया के लिए फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ - Fiber rich foods for arthritis in hindi
- गठिया में बीज और नट्स - Seeds and nuts are good for arthritis in hindi
- गठिया में नींबू पानी - Drink lemon water if you have arthritis in hindi
- गठिया में दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद - Milk, yoghurt, cheese and other dairy products for arthritis in hindi
- गठिया में किस तरह की चाय अच्छी है - What kind of tea is good for arthritis in hindi
- गठिया में कॉफी - Effects of coffee in arthritis in hindi
- गठिया को बदतर बनाने वाले खाद्य पदार्थ - Which foods make arthritis worse in hindi
गठिया होने पर खाने के लिए भोजन - Foods to eat if you have arthritis in hindi
भले ही किसी व्यक्ति को एंटी-इन्फ्लैमटरी फूड्स (सूजन को रोकने वाले) के बारे में पता न हो, लेकिन हो सकता है कि वो कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में जानते हों, जो जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने के लिए प्रचलित है। इस बारे में पता लगाने के लिए बीते वर्षों में कई अध्ययन किए गए हैं कि कौन से खाद्य पदार्थ वास्तव में गठिया के रोगियों के लिए फायदेमंद हैं। हालांकि इनमें से कई प्रभावी पाए गए हैं, जबकि कुछ खाद्य पदार्थों पर अभी भी अध्ययन किए जा रहे हैं।
इस आर्टिकल में ऐसे ही कुछ सामान्य से खाद्य पदार्थों के बारे में बतााया गया है, जो गठिया की स्थिति में अच्छे होते हैं:
गठिया के रोगियों के लिए सब्जी - Which vegetables are good for arthritis patients in hindi
जब गठिया की बात आती है, तो अमेरिका में मौजूद आर्थराइटिस एसोसिएशन यह सलाह देता है कि जितना संभव हो सके, उतनी सब्जियों को अपने आहार में शामिल करने की कोशिश करनी चाहिए। एसोसिएशन के अनुसार, उबली और ज्यादा तली हुई सब्जियां की अपेक्षा स्टीम और हल्की तली हुई सब्जियों का सेवन करना बेहतर होता है।
पालक और ब्रोकली: गठिया से पीड़ित लोगों को पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक, गोभी और ब्रोकली को सेवन करना चाहिए।
ये सभी सब्जियां एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन सी, विटामिन ए और विटामिन के से भरपूर होती हैं, जो शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव (शरीर में मुक्त कणों और एंटीऑक्सिडेंट के बीच असंतुलन) को कम करने में मदद करती है और बदले में, सूजन को कम करती है। इसके अलावा यह हड्डियों के स्वास्थ्य में भी सुधार लाती है। ऑक्सीडेटिव तनाव तब होता है जब शरीर में अतिरिक्त मुक्त कण बन जाते हैं और यह चयापचय को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
प्याज और लहसुन: ये दोनों तीखी सब्जियां हैं, जो एलियम परिवार से संबंधित हैं। यह एंटी-इन्फ्लैमटरी और एंटीऑक्सिडेंट गुणों के लिए जानी जाती है। एलियम परिवार के लगभग सभी सदस्यों में डायलिसिल डिसलफाइड नामक यौगिक होता है, जो ऑस्टियोआर्थराइटिस के रोगियों में उपास्थि में होने वाले नुकसान में कमी लाता है।
प्याज और लहसुन दोनों में क्वेरसेटिन (आहार में सबसे प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाला एंटीऑक्सिडेंट, जो मुक्त कणों से होने वाले नुकसान से निपटने में मददगार है) नामक फ्लेवोनॉयड होता है, जो गठिया की सूजन को कम करने के लिए अच्छा माना जाता है। पशुओं पर किए गए एक शोध के अनुसार, एंटी-आर्थराइटिस के मामले में क्वेरसेटिन ने महत्वपूर्ण असर दिखाया। हालांकि, इसकी खुराक गठिया के रोगियों की मदद नहीं कर सकी, लेकिन इससे यूरिक एसिड कम हो गया, इस प्रकार यह गठिया के रोगियों के लिए फायदेमंद हो सकती है।
लाल मिर्च, गाजर, शकरकंद और स्वीट कॉर्न: लाल और पीली सब्जियां कैरोटीनॉयड पिगमेंट से भरपूर होती हैं जो अपने एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए अच्छी तरह से जानी जाती हैं। एंटीऑक्सिडेंट सूजन को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा गाजर और लाल मिर्च बीटा-क्रिप्टोक्सैंथिन नामक कैरोटीनॉयड में समृद्ध है। 2005 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, बीटा-क्रिप्टोक्सांथिन से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन सूजन को कम करने में सहायक है।
अदरक: अदरक में ऐसे गुण होते हैं, जो सूजन को दूर करने में मदद कर सकते हैं। यह आयुर्वेदिक चिकित्सा में एक एंटी-इन्फ्लैमटरी जड़ी बूटी के रूप में प्रयोग किया जाता है और विशेष रूप से गठिया से ग्रस्त लोगों के लिए अच्छा माना जाता है।
261 ऑस्टियोआर्थराइटिस रोगियों पर किए गए एक नैदानिक (क्लिनिकल) अध्ययन से यह पता चला है कि अदरक के अर्क से घुटनों में दर्द से राहत प्रदान कर सकता है।
(और पढ़ें - गठिया का आयुर्वेदिक इलाज)
गठिया में फल - Good fruits for arthritis in hindi
सब्जियों की तरह, कुछ फल भी ऐसे हैं जो विटामिन, एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इन्फ्लैमटरी यौगिकों से परिपूर्ण हैं। यह सभी यौगिक गठिया के प्रबंधन में मदद कर सकते हैं। गठिया की स्थिति में खट्टे फल का सेवन करना एक अच्छा विकल्प होता है क्योंकि इसमें विटामिन सी जैसा प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट होता है। संतरा, एवोकाडो, पपीता और अंगूर जैसे फलों में कैरोटिनॉइड की महत्वपूर्ण मात्रा होती है, जो सूजन को कम करने में असरदार है।
इसी तरह, लाल और काले अंगूर में रेसवेराट्रॉल नामक एक पॉलीफेनोल (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) होता है, जो एंटी-इन्फ्लैमटरी के रूप में कार्य करता है। नैदानिक अध्ययन से पता चलता है कि रेसवेराट्रॉल का उपयोग गठिया की दवाओं के सहायक के रूप में किया जा सकता है क्योंकि दोनों एक साथ लेने पर ज्यादा प्रभावकारी होता है।
इन सभी के अलावा, अधिकांश फलों में खनिज और अन्य मैक्रो व माइक्रोन्यूट्रिएंट होते हैं, जो समग्र स्वास्थ्य को बेहतर रखने मदद करते हैं।
तो अगली बार जब भी फलों की खरीदारी करने जाएं, तो इन फलों को अपनी किराने की सूची में जोड़ना न भूलें।
(और पढ़ें - गठिया या संधि शोध का होम्योपैथिक दवा)
गठिया के लिए फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ - Fiber rich foods for arthritis in hindi
फाइबर एक तरह का कार्बोहाईड्रेट होता है जो फलों, सब्जियों और नट्स में पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है। इनके सेवन से पाचन क्रिया अच्छी रहती है और आंतों को खाद्य पदार्थों से उचित पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद मिलती है। फाइबर युक्त आहार लेने से वजन का प्रबंधन करने और शरीर से अतिरिक्त वसा को कम करने में भी मदद मिलती है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या यह गठिया के लक्षणों में सीधे मदद करता है?
हाल ही में 29 रूमेटाइड आर्थराइटिस (आरए) रोगियों पर किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि फाइबर युक्त आहार आरए के लक्षणों में सुधार करने में मदद करता है। इसके अलावा, जो लोग प्रत्येक दिन लगभग 25 ग्राम फाइबर लेते हैं, उन्हें समय के साथ घुटने के दर्द के विकास का जोखिम बहुत कम होता है।
कुछ फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों में साबुत अनाज, दालें, सब्जियां जैसे गाजर और ब्रोकली, फल जैसे संतरे और जामुन को अच्छा माना जाता है। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति फाइबर के पूर्ण लाभ चाहता है और कब्ज नहीं चाहता, तो ध्यान रहे ऐसे में प्रति दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की जरूरत है।
(और पढ़ें - शरीर में पानी की कमी के लक्षण)
गठिया में बीज और नट्स - Seeds and nuts are good for arthritis in hindi
नट्स और बीज ओमेगा -3 फैटी एसिड, प्रोटीन, विटामिन ई, फाइबर और मैग्नीशियम का एक समृद्ध स्रोत हैं, जो सूजन में असरदार साबित हो सकते हैं।
(और पढ़ें - मैग्नीशियम की कमी के कारण)
यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है कि नट्स खाने वाले लोगों में नट्स न खाने वाले लोगों की अपेक्षा सूजन का जोखित कम होता है। यहां कुछ नट्स और बीज के बारे में बताया गया है, जिसे गठिया रोगी अपने आहार में शामिल कर सकते हैं:
व्यक्ति इन्हें सीधे खा सकता है व चाहे तो अपने सलाद, दही या अन्य व्यंजनों में मिलाकर भी खा सकता है। लेकिन ध्यान रहे, बीजों और नट्स का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए क्योंकि इनमें भरपूर मात्रा में कैलोरी होती है, जो वजन बढ़ा सकती है।
(और पढ़ें - गठिया के दर्द का इलाज)
गठिया में नींबू पानी - Drink lemon water if you have arthritis in hindi
अच्छे स्वास्थ के लिए यह बहुत जरूरी है कि पर्याप्त मात्रा में पानी पिया जाए। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है, यदि विषाक्त पदार्थ शरीर से बाहर न निकलें तो इनकी वजह से सूजन की समस्या हो सकती है। यह शरीर में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट के संतुलन को बनाए रखने में भी मदद करता है। इसके अलावा यह जोड़ों को चिकनाई देने के लिए भी आवश्यक है। ध्यान रहे कि प्रति दिन आठ से दस गिलास पानी पिएं।
सादे पानी के अलावा, नींबू पानी भी पिया जा सकता है। नींबू विटामिन सी का एक अच्छा स्रोत है, जो ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन को कम करने में मदद करता है। यह खून में यूरिक एसिड के स्तर को भी कम करता है और इसलिए गठिया के रोगियों के लिए प्रभावी है।
(और पढ़ें - गठिया में परहेज)
गठिया में दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद - Milk, yoghurt, cheese and other dairy products for arthritis in hindi
जब गठिया के रोगियों में डेयरी के प्रभाव की बात आती है, तो हर कोई एक अलग दृष्टिकोण रखता है। कुछ लोग कहते हैं कि दूध और पनीर सूजन को बढ़ाते हैं, तो कुछ का कहना है कि डेयरी प्रोडक्ट वास्तव में गठिया के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं।
आमतौर पर, कम वसा वाले डेयरी प्रोडक्ट को गाउटी आर्थराइटिस की स्थिति में अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत है और यूरिक एसिड के स्तर को अधिक नहीं बढ़ाता है। 2014 में किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि जो महिलाएं कम वसा युक्त दूध का सेवन करती हैं, उनमें अन्य महिलाओं की तुलना में घुटने के दर्द का जोखित कम रहता है।
दूसरी ओर, ईरान में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि डेयरी उत्पादों का नियमित सेवन करने से गठिया के विकास का जोखिम बढ़ सकता है।
यदि किसी को संदेह है कि डेयरी प्रोडक्ट गठिया की समस्या को बढ़ा सकती है, तो एक समय में एक डेयरी प्रोडक्ट का सेवन करें और देखें कि इससे वाकई में किसी तरह का फायदा हो रहा है अथवा नहीं।
गठिया में किस तरह की चाय अच्छी है - What kind of tea is good for arthritis in hindi
एक कप चाय के सेचन से व्यक्ति तरोताजा महसूस कर सकता है, लेकिन क्या जानते हैं कि इसके कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी हो सकते हैं। ग्रीन टी और ब्लैक टी दोनों में एंटी-इन्फ्लैमटरी गुण होते हैं। ग्रीन टी में पॉलीफेनोल नामक यौगिकों का एक सेट होता है, जो मुक्त कणों से होने वाली क्षति और सूजन को कम करने में मदद कर सकता है।
ग्रीन टी में एक विशिष्ट पॉलीफेनोल होता है जिसे एपिगैलोकैटेचिन -3 गैलेट कहा जाता है, यह हड्डियों को संरक्षित करने में मदद करता है और इसलिए ग्रीन टी को हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है।
हालांकि, इस बात का कोई पुष्टि नहीं हुई है कि कितनी मात्रा में चाय पीने से उपरोक्त लाभ हो सकते हैं।
गठिया में कॉफी - Effects of coffee in arthritis in hindi
चाय के बाद दुनिया में कॉफी सबसे पसंदीदा पेय पदार्थों में से एक है। बहुत से लोग इस बारे में जानने के इच्छुक होंगे कि कॉफी का सेवन करना गठिया के मरीजों के लिए उचित है अथवा नहीं। कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि कॉफी से गठिया विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है, जबकि कुछ का मानना है कि ऑस्टियोआर्थराइटिस या रूमेटाइड आर्थराइटिस की स्थिति में इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
हालांकि, लंबे समय तक कॉफी का सेवन गाउटी आर्थराइटिस के खतरे को कम करता है क्योंकि यह हाइपरयुरिसीमिया या यूरिक एसिड की अधिक मात्रा को सीमित करता है। ध्यान रहे, किफायत मात्रा में कॉफी का सेवन करें क्योंकि इसके अधिक सेवन से गुर्दे की बीमारी हो सकती है।
(और पढ़ें - कैफीन के फायदे और नुकसान)
गठिया को बदतर बनाने वाले खाद्य पदार्थ - Which foods make arthritis worse in hindi
जिन लोगों को गठिया की समस्या है, उन्हें निम्नलिखित खाद्य पदार्थों का सेवन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए:
सब्जियां
ज्यादातर सब्जियों को गठिया के लिए अच्छा कहा जाता है, लेकिन नाइटशेड परिवार से संबंधित सब्जियां जैसे आलू, बैंगन और टमाटर सूजन और गठिया के लक्षणों को खराब कर सकती हैं। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि आलू कार्बोहाइड्रेट से भरपूर है, इससे वसा की मात्रा बढ़ सकती है और सूजन व गठिया का खतरा हो सकता है।
इसलिए, यदि किसी व्यक्ति को गठिया की समस्या है, तो सबसे अच्छा तरीका है कि वह अपने चिकित्सक से इस बारे में बात करें और जानने की कोशश करें कि कौन-सी सब्जी उसके लिए उचित है।
अल्कोहल
वाइन को गठिया की स्थिति में अच्छा माना जाता है क्योंकि इसमें रेसवेराट्रॉल होता है, जिसे अंगूर से प्राप्त किया जाता है। रेसवेराट्रॉल यौगिकों के एक समूह का हिस्सा है, जो हृदय, संचार प्रणाली की सुरक्षा और कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए जाना जाता है।
(और पढ़ें - कोलेस्ट्रॉल का स्तर या नार्मल रेंज)
वाइन सूजन को कम करने में मदद करती है, लेकिन किफायती मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिए।
लंबे समय तक शराब का सेवन करने से ऑस्टियोआर्थराइटिस का जोखिम बढ़ सकता है। आर्थराइटिस सोसाइटी, कनाडा के अनुसार, गठिया की स्थिति में ली जाने वाली दवाइयां शराब के साथ रिएक्शन कर सकती हैं और पेट और लिवर के स्वास्थ को खराब कर सकती हैं। इसके अलावा अल्कोहल के सेवन से शरीर में पानी की कमी हो सकती है और यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है।
चीनी और नमक
चीनी और नमक दोनों ही प्रो-इंफ्लेमेटरी खाद्य पदार्थ माने जाते हैं। जब कोई व्यक्ति अतिरिक्त मात्रा में चीनी का उपभोग करता है, तो यह रक्तप्रवाह में वसा और प्रोटीन के साथ मिल जाता है, जिससे सूजन का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह, एक अत्यधिक नमक के सेवन से ऊतकों में सूजन आ सकती है जो विशेष रूप से रूमेटाइड आर्थराइटिस के जोखित से जुड़ा है। इसलिए पैकेट वाला भोजन खरीदते समय शक्कर और नमक की मात्रा जरूर पढ़ लें।
रिफाइंड (परिष्कृत) अनाज
यदि किसी को गठिया की समस्या है, तो सभी प्रकार के परिष्कृत अनाज और आटे से बचना चाहिए। परिष्कृत अनाज में सफेद चावल और सफेद आटा और रिफाइंड आटे से बनी चीजें जैसे केक, ब्रेड, बिस्किट या प्रोसेस्ड फूड शामिल हैं।
इन खाद्य पदार्थों में वे फाइबर नहीं होते हैं जो किसी साबुत अनाज में पाए जाते हैं। इसके अलावा यह जल्दी पच जाते हैं। इसकी वजह से कार्ब्स (कार्बोहाइड्रेट) का उत्पादन होने लगता है और जब ये ज्यादा मात्रा में इकट्ठा हो जाते हैं तो इसकी वजह से सूजन की समस्या हो सकती है। आर्थराइटिस वाले लोगों में अतिरिक्त मात्रा में कार्ब्स जमा होने से अधिक वजन और मोटापे का जोखिम रहता है।
चिकन और जानवरों का मांस
मांस, विशेष रूप से रेड मीट, गठिया के रोगियों के लिए अच्छा नहीं होता है खासकर, यदि किसी को गाउटी आर्थराइटिस की समस्या है।
यह प्रोटीन में समृद्ध है और इसलिए यह सीरम यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ाते हैं, जो गाउटी आर्थराइटिस के कारणों में से एक है।
हालांकि, सूजन पर मांस खाने का क्या प्रभाव पड़ता है इस बात को लेकर कोई विशेष सबूत नहीं हैं। ब्रिटिश जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में वर्ष 2000 में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है कि पशु के मांस में वसा, आयरन और नाइट्राइट होता है, जो सूजन को बढ़ाने का काम करता है। इसलिए गठिया के रोगियों को इनके सेवन से बचने की जरूरत है। इसके विपरीत, 2007 के किए गए एक अध्ययन में आयरन, रेड मीट और आर्थराइटिस के बीच किसी तरह के संबंध का पता नहीं चल पाया।
चीन के कुछ शोधकर्ताओं के अनुसार, चिकन (विशेष रूप चिकन ब्रेस्ट) में कोलेजन होता है, जो रूमेटाइड आर्थराइटिस के रोगियों के लिए अच्छा होता है बशर्तें जब इसे मौखिक रूप (विशेष रूप से कैप्सूल के रूप में) से लिया लाए।
इसके अलावा यह ओरल टोलेरेंस में भी सुधार करता है, ओरल टोलेरेंस का मतलब है कि जब मौखिक रूप से उचित मात्रा में सेवन किया जाए। कोलेजन प्रतिरक्षा प्रणाली की अतिसक्रियता को कम कर देता है, जो रूमेटाइड आर्थराइटिस का कारण बनता है।



