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गर्भावस्था में महिलाओं के शरीर में कई तरह के परिवर्तन देखने को मिलते हैं। कई मामलों में यह परिवर्तन महिलाओं के लिए परेशानी का कारण भी बन जाते हैं। प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में कई महिलाएं पेट फूलना, मतली और मल में खून आने की समस्याओं को अनुभव करती हैं। मल में खून आने की समस्या को बवासीर (Piles/ Haemorrhoids) के रूप में जाना जाता है। गर्भवती महिलाओं में यह समस्या आम रूप से देखने को मिलती है। मलाशय (गुदा/ Rectal) से रक्तस्राव के कारण ऐसा होता है और कई बार यह आपके लिए परेशानी का कारण भी बन जाता है। इस स्थिति में महिलाओं को खुजली और दर्द होता हैं, लेकिन इस समस्या को इलाज से दूर किया जा सकता है। इस लेख में आप आगे जानेंगे कि गर्भावस्था में बवासीर क्यों होती हैं और इस समस्या के लक्षण, कारण, परीक्षण, इलाज और घरेलू इलाज क्या हैं। 

(और पढ़ें - Pregnancy in Hindi)

  1. क्या प्रेग्नेंसी में बवासीर होना आम बात है? - Kya pregnancy me bavasir hona aam baat hai
  2. प्रेग्नेंसी में बवासीर के लक्षण - Pregnancy me bavasir ke lakshan
  3. गर्भावस्था में बवासीर के कारण - Garbhavastha me bavasir ke karan
  4. क्या गर्भावस्था में बवासीर होने से बच्चे पर प्रभाव पड़ता है - Kya garbhavastha me bavasir hone se bacche pr prabhav padta hai
  5. गर्भावस्था में बवासीर से किस तरह बचा जा सकता है - Garbhavastha me bavasir se kis tarah bacha ja sakta hai
  6. प्रेग्नेंसी में बवासीर का इलाज - Pregnancy me bavasir ka ilaj
  7. गर्भावस्था में बवासीर के घरेलू उपाय - Garbhavastha me bawaseer ke gharelu upay

गुदा या मलाशय के निचले हिस्से में सूजन के कारण बवासीर की समस्या होती है। इसमें मलाशय में होने वाली गांठ छोटी या बड़ी हो सकती है। गर्भावस्था में मुख्यतः दो प्रकार के बवासीर होते हैं। इसमें एक को आतंरिक बवासीर तो दूसरे को बाह्य बवासीर कहते हैं। बाह्य बवासीर गुदा द्वार पर होता है। इसकी वजह से खुजली और दर्द होता है। साथ ही कई बार मल में खून भी आने लगता है। जब तक कोई थक्का न बने इसमें इलाज की आवश्यकता नहीं होती है। जबकि आंतरिक बवासीर में मलाशय के मार्ग में बवासीर हो जाता है। इसमें दर्द नहीं होता, लेकिन यह खुचली और खून आने का कारण होता है।

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महिलाओं को गर्भावस्था में बवासीर कई कारणों से हो सकता है। गर्भाशय के बढ़ने, कब्ज होने और अचानक प्रोजेस्टेरोन स्तर के बढ़ने की वजह से यह समस्या प्रेगनेंसी के दौरान हो सकती है। कई बार पैरों में वैरिकोज वेन्स और योनि की समस्याएं भी बवासीर होने की संभावनाएं बन जाती है। आपको बता दें कि प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली बवासीर बच्चे के जन्म के बाद जल्द ही ठीक हो जाती है। खासकर कब्ज के कारण होने वाली बवासीर जल्द सही हो जाती है।

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प्रेग्नेंसी में महिलाओं के निचले हिस्से में सूजन के कारण नसों में वृद्धि हो जाती है। गर्भावस्था के दौरान हार्मोन्स आपकी नसों को आराम देता हैं, इस कारण भी बवासीर हो सकती है। गर्भावस्था में बवासीर के लक्षणों को निम्नतः बताया जाता है -

  • गुदा के आसपास सूजन, खुजली, जलन और दर्द होना। (और पढ़ें - खुजली का घरेलू उपाय)
  • मल निकलते समय दर्द होना और इसके बाद चिपचिपा पदार्थ निकलना।
  • मलद्वार (Anus/ गुदा) के बाहर गांठ हो सकती है। कई बार मल निकलने के बाद गांठ को अंदर करने की जरूरत पड़ती है।
  • मल त्यागने के बाद रक्तस्राव (खून निकलना) होना। 

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गर्भावस्था के समय होने वाले शारीरिक बदलावों के कारण बवासीर हो सकती है। आइये, नीचे जानते हैं गर्भावस्था में बवासीर होने के कारण क्या हैं।

  1. गर्भाशय का बढ़ना –
    प्रेग्नेंसी के समय गर्भ में बच्चे के बढ़ने के साथ ही गर्भाशय भी बढ़ने लगता है, इसका सीधा दबाव पेल्विक नसों पर और नीचे के अंगों पर पड़ता है। इस दबाव के कारण महिला के शरीर के निचले हिस्से में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। रक्त प्रवाह कम होने से गर्भाशय के नीचे की नसों पर दबाव पड़ता है, जिसके चलते सूजन आना शुरू हो जाता है। सरल तौर पर कह सकते हैं कि मलाशय पर अतिरिक्त दबाव के कारण नसों में रक्त प्रवाह कम होने से बवासीर की समस्या हो जाती है।
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  2. कब्ज –
    कब्ज रहना भी प्रेग्नेंसी में बवासीर होने का एक कारण होता है। कब्ज के कारण जब आंतों की प्रक्रिया (Bowel movement) में बाधा उत्पन्न होती है, तब शरीर में बवासीर के लक्षण बनना शुरू हो जाते है। इसके अलावा आंतों की प्रक्रिया में बाधा होने से मलाशय में दबाव होने लगता है।
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  3. प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का अधिक होना –
    प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के अधिक होने के कारण नसों को आराम मिलता है, लेकिन इससे सूजन होने लगती है। प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के द्वारा गर्भवती महिलाओं को कब्ज की भी समस्या होने लगती है।
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  4. पूर्व में कभी बवासीर होना –
    जिन महिलाओं को पहले कभी बवासीर की समस्या होती है, उनको प्रेग्नेंसी के दौरान बवासीर होने की संभावना बेहद बढ़ जाती है। गर्भावस्था की पहली तिमाही या दूसरे चरण में बवासीर होना एक आम समस्या है। इतना ही नहीं कई महिलाओं को डिलीवरी के बाद भी इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है।

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गर्भावस्था के दौरान महिला को बवासीर होने से उसके गर्भ में पलने वाले बच्चे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। यह गर्भावस्था के समय होने वाली एक आम समस्या है। बच्चे के जन्म के बाद यह समस्या अपने आप ही ठीक हो जाती है। अगर आपको बवासीर की शिकायत ज्यादा दिनों तक रहती है या इसके कारण आपको परेशानी होती है, तो आप अपने डॉक्टर से इस बारे में बात कर सकते हैं।

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गर्भावस्था के दौरान बवासीर होना सामान्य समस्या है, जो बच्चे के जन्म के बाद स्वतः ही ठीक हो जाती है। इस समस्या से बचाव नहीं किया जा सकता है, लेकिन फिर भी आप इसके कारणों को दूर करके काफी हद तक आराम पा सकती हैं। इस समस्या से बचाव व राहत के लिए निम्न तरह के उपाय बताए जाते हैं।

  • गर्भावस्था के दौरान आपको अपने आहार में अधिक मात्रा में फाइबर युक्त चीजों को शामिल करना चाहिए। जिससे आपकी आंतों की प्रक्रिया ठीक रहे और आपको कब्ज में राहत मिले। (और पढ़े - बवासीर में क्या खाना चाहिए)
  • दिन में कम से 10 से 12 गिलास पानी पीएं। जिससे आपके आंतों में सूखापन न हो। निश्चित मात्रा में पानी पीने से पेट में मल बनने की प्रक्रिया सही रहेगी, साथ ही आपके शरीर में भी पानी की कमी नहीं होगी। (और पढ़ें - पानी पीने के फायदे
  • नियमित रूप से व्यायाम करें। इसके अलावा आपको थोड़ी देर के लिए सैर पर भी जाना चाहिए। (और पढ़ें - पैदल चलने के फायदे)
  • जब आपको सहज रूप से मल त्यागने की इच्छा हो, तब ही शौच जाना चाहिए। अनावश्यक शौच को रोकने से मल कठोर हो सकता है।
  • शौचालय में जाने पर मल त्यागते समय ज्यादा जोर न लगाएं। इससे भी आपको कई तरह की परेशानियां हो सकती है। 
  • शौचालय में मल त्यागते समय परेशानी हो तो आप योनि और मलद्वार के बीच के हिस्से (Perineum/ पेरिनियम) पर अंगुलियों की सहायता से हल्के से दबाव उत्पन्न करें। इससे आंतरिक मांसपेशियों में संचालन होता है और आपको मल त्यागने में सहायता होती है।
  • अधिक देर तक खड़े रहने और बैठने से बचें। ज्यादा देर तक खड़े रहने या बैठने से पेट के निचले हिस्से पर दबाव पड़ता है।

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प्रेग्नेंसी के दौरान बवासीर का इलाज करने के लिए कई तरह की दवाइयों का प्रयोग किया जाता है। इन दवाइयों की मदद से आपको दर्द और जलन से राहत मिलती है। आपको इस समय किसी भी तरह की दवाइयों के सेवन से पूर्व अपने डॉक्टर से इस बारे में सलाह ले लेनी चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान बवासीर से यदि आपको लगातार दर्द महसूस हो तो आप निम्न तरह के बिना सर्जरी वाले इलाज को चुन सकती हैं -

  • द्विध्रुवी जमावट (Bipolar coagulation/ एक इलाज की पद्धति) से आंतरिक बवासीर में रक्त के प्रवाह को कम कर दिया जाता है।
  • बवासीर के प्रभावित क्षेत्र को रबड़ से बांधना भी इसके इलाज का तरीका है। इससे रक्त का प्रवाह बंद हो जाता है।
  • रसायन युक्त इंजेक्शन लगाने से बवासीर में बनी गांठे सूखकर गिर जाती हैं।
  • इंफ्रारेड रोशनी को प्रभावित क्षेत्र पर डालकर बवासीर को ठीक किया जाता है।  

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गर्भावस्था में बवासीर होने पर आप निम्न तरह के घरेलू उपायों को आजमां सकती हैं।

  • ठंडे पानी के तौलिए या किसी कपड़े को गुदा पर लगाने से बवासीर का दर्द और जलन कम होती है।
  • शौच जाने के बाद गुदा को अच्छी तरह से साफ करें और इसे हल्के हाथों से पोंछे या साफ करें, तेजी से रगड़ने से इसमें दर्द बढ़ सकता है।
  • हल्के गर्म पानी में बैठने से भी आपको बवासीर की जलन और दर्द से राहत मिलती है। गर्म पानी से नहाने से आपको आराम मिलता है। इससे शरीर में रक्त प्रवाह सही होता है। (और पढ़ें - गर्म पानी से नहाने के फायदे)
  • त्वचा की कई समस्याओं को बेकिंग सोडा से ठीक किया जा सकता है। आप इस समस्या में भी थोड़ा सा बेकिंग सोडा का प्रयोग करने से खुजली मे आराम पा सकती हैं। (और पढ़ें - योनि में खुजली के उपाय)
  • इस समस्या में महिलाओं को हवा भरी बड़ी गेंद में कुछ देर बैठना चाहिए। मगर इस उपाय को नियमित करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे महिलाओं के निचले हिस्से का रक्त संचार कम हो सकता है। (और पढ़ें - गर्भावस्था में व्यायाम)

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