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आजकल हर कोई फिट और स्लिम दिखना चाहता है, लेकिन फिट और स्लिम ट्रिम दिखने के लिए आपको एक सही डाइट प्लान अपनाना होगा। इस लेख में हम आपको पालेओ डाइट प्लान के बारें में बता रहे हैं। इस डाइट प्लान में आपको भरपूर फल, सब्जियां, मीट और ड्राई फ्रूट्स खाने होते हैं, क्योंकि इस डाइट में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है और प्रोटीन व फैट की मात्रा अधिक होती है।

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तो चलिए आपको इस लेख में पालेओ डाइट प्लान के बारें में और अधिक जानकारी देते हैं जैसे पालेओ डाइट प्लान क्या है, पालेओ डाइट के फयदे और नुकसान –

  1. पालेओ डाइट प्लान क्या है - paleo diet plan kya hai
  2. पालेओ डाइट प्लान का पालन कैसे करें - paleo diet plan kaise kare
  3. पालेओ डाइट प्लान के फायदे - paleo diet plan ke fayde
  4. पालेओ डाइट प्लान के नुकसान - Paleo diet plan ke nuksan

पालेओ डाइट प्लान को अगर सरल शब्दों में समझाएं तो, इसका अर्थ है कि आप बस ऐसे खाद्य पदार्थों को खाएं जो कई हजारों साल पहले पुरापाषाण काल (Paleolithic Age) में उपलब्ध होते थे। इसका मतलब है कि कुछ चीजें जैसे प्रोसेस्ड फूड, परिष्कृत अनाज नहीं खाने चाहिए, इनकी जगह भरपूर मात्रा में फल, सब्जियां, मीट और ड्राई फ्रूट्स खाएं। इस डाइट का लक्ष्य होता है कि आप हमेशा स्वस्थ रहें और आपको वजन कम करने में मदद मिले, क्योंकि प्रोसेस्ड फूड के कारण कई स्वास्थ्य समस्याएं होती है और कई बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। इस डाइट कार्बोहाइड्रेट कम और के साथ साथ अन्य डाइट के मुकाबले प्रोटीन व फैट की मात्रा अधिक होती है।

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पालेओ डाइट प्लान का पहला दिन - paleo diet plan ka pehla din

नाश्ता - अंडा और खूब सारी सब्जियां जैतून के तेल में या नारियल तेल में तली हुई और पांच भीगे हुए बादाम या एक फल।

दोपहर का खाना - चिकन के सलाद में जैतून का तेल मिलाएं और उसके साथ मुट्ठीभर ड्राई फ्रूट्स खाएं।

रात का खाना - स्टीम या भुनी हुई मछली के साथ खूब सारी सब्जियां।

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पालेओ डाइट प्लान का दूसरा दिन - paleo diet plan ka dusra din

नाश्ता - खूब सारी सब्जियों में एक अंडा मिला हुआ और एक फल।

दोपहर का खाना - मछली या चिकन सलाद।

रात का खाना - भुना हुआ चिकन और एक कटोरी घर के बने मशरूम सूप के साथ सब्जियां।

(और पढ़ें - कीटो डाइट प्लान)

पालेओ डाइट प्लान का तीसरा दिन - paleo diet plan ka teesra din

नाश्ता - मीट (रात में बची हुई) के साथ सब्जियां या फिर अंडे का ऑमलेट, एक बड़ी कटोरी तरबूज और आधे से एक चम्मच अलसी के बीज।

दोपहर का खाना - सलाद पत्ते, मीट और ताजा सब्जियों से बना हुआ सैंडविच।

रात का खाना - सेकी गई मछली के साथ एक बड़ी कटोरी पत्ता गोभी का सूप।

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पालेओ डाइट प्लान का चौथा दिन - paleo diet plan ka chautha din

नाश्ता - अंडे और एक फल या ब्रोकली

दोपहर का खाना - मछली, एवोकाडो और सलाद के पत्ते को एक साथ मिलाकर और मुट्ठीभर ड्राई फ्रूट्स। 

रात का खाना - तला हुआ मीट और सब्जियां।

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पालेओ डाइट प्लान का पांचवा दिन - paleo diet plan ka panchva din

नाश्ता - नारियल के तेल में तले हुए​ अंडे और सब्जियां।

दोपहर का खाना - चिकन सलाद में जैतून का तेल मिला हुआ और मुट्ठीभर ड्राई फ्रूट्स।

रात का खाना - चिकन चेत्तीनाद (साउथ इंडियन खाना) के साथ खूब सारी सब्जियों का मिश्रण।

(और पढ़ें - प्रेगनेंसी डाइट चार्ट)

पालेओ डाइट प्लान का छठा दिन - paleo diet plan ka chhatha din

नाश्ता - शकरकंद में अंडा मिलाकर खाएं और एक फल खाएं।

दोपहर का खाना - पिछली रात का बचा हुआ मछली या मीट का टुकड़ा या बची हुई सब्जी।

रात का खाना - सिकी हुई मछली में नींबू और अजवाइन के पत्ते डालकर खाएं।

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पालेओ डाइट प्लान का सातवां दिन - Paleo diet plan ka satva din

नाश्ता - उबले अंडे टमाटर और प्याज मिलाकर या फिर मीट के साथ खूब सारी सब्जियां (पिछली रात का रह गया हो तो)

दोपहर का खाना - सलाद के पत्ते, मीट और खूब सारी सब्जियां मिलाकर सैंडविच खाएं या फिर भूने हुए टमाटर के साथ चिकन खाएं।

रात का खाना - नारियल की तरी और सब्जियों के साथ कीमा बना कर खाएं।

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पालेओ डाइट प्लान के फायदे इस प्रकार हैं -

1. वजन कम होता है -

पालेओ डाइट में कार्बोहाइड्रेट कम होता है। कई लोग जो पालेओ डाइट का पालन करते हैं वो प्रोसेस्ड फूड और रिफान चीनी को कम करके वजन को कम कर पाते हैं। इस डाइट में वेसे फल और सब्जियों अधिक मात्रा में में खाया है, जिनमें फाइबर अधिक मात्रा में होता है और स्वस्थ फैट व प्रोटीन भी शामिल हों। इस तरह आप संतुष्ट रहते हैं और आपको भूख भी कम लगती हैं।

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2. प्रोटीन अधिक होता है -

अपनी डाइट में सही मात्रा में प्रोटीन शामिल करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। प्रोटीन, ऊतक कोशिकाओं को सही रखने में अहम भूमिका निभाता है, ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता है, चोट को ठीक रखता है और मांसपेशियों के मांस को बढ़ाता है। प्रोटीन की कमी से कई नुकसान देखने को मिलते हैं जैसे ऊर्जा स्तर कम होना, रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना, ध्यान लगाने में तकलीफ होना और घाव भी धीरे-धीरे ठीक होना आदि।

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3. सूजन कम होती है -

रिसर्च का मानना है कि हृदय रोग के पीछे सबसे अहम कारक है सूजन। पालेओ डाइट में सबसे बड़ी चीज है कि इसमें मौजूद खाद्य पदार्थ सूजनरोधी होते हैं। जिसका सबसे बड़ा कारण इसमें मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड है, जिसकी वजह से यह डाइट सूजनरोधी होती है।

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4. संतुष्ट रखती है -

पालेओ डाइट प्लान स्वस्थ वसा और प्रोटीन से भरपूर होती है, जिसकी मदद से आप संतुष्ट रहते हैं और भूख कम लगती है। फैट बहुत ही धीरे-धीरे पचता है, जिस वजह से यह लंबे समय तक पेट में ही रहता है और इस तरह आपका पेट भरा हुआ रहता है। इस दौरान, अधिक मात्रा में प्रोटीन घ्रालिन (Ghrelin) के स्तर को कम करता है (यह भूख को बढ़ाने वाला हार्मोन है) जिससे भूख लगने की समस्या से छुटकारा मिलता है। प्रोटीन मेटाबॉलिज्म को तेज करत है और कैलोरी को बर्न करता है।

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5. शरीर में पोषण की कमी पूरी होती है -

पालेओ डाइट प्लान का सबसे बड़ा फायदा है कि इसमें प्रोसेस्ड फूड या रिफाइन फूड की जगह पर पोषित खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी जाती है। यह खाद्य पदार्थ आपको कई आवश्यक पोषक तत्व देते हैं, जो आपकी डाइट में मौजूद नहीं होते। इससे याददाश्त खोने से लेकर कई समय से चली आ रही थकान के लक्षण कम होते हैं।

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पालेओ डाइट प्लान के नुकसान इस प्रकार हैं -

1. ऊर्जा की कमी –

जब आप लो कार्ब डाइट लेते हैं, तो आपके शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है जिससे चक्कर आने लगते हैं, थकान महसूस होने लगती है, सुस्ती आने लगती है और चिड़चिड़ापन होने लगता है। इसे लो-कार्ब फ्लू भी कहते हैं। लो-कार्ब फ्लू के लक्षण आमतौर पर तीन से चार हफ्ते तक रहते हैं। इस दौरान आपके शरीर में मौजूद फैट कार्बोहाइड्रेट की जगह बर्न होने लगता है। कार्बोहाइड्रेट का सेवन करके आप लो कार्ब फ्लू के प्रभाव को धीरे-धीरे कम कर सकते हैं।

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2. ह्यपरथाइरोइडिस्म की समस्या शुरू हो जाती है -

जो लोग लंबे समय तक लो कार्ब पर रहते हैं उनमें हाइपोथाइरोइड के लक्षण शुरू हो जाते हैं जैसे थकान, सुस्ती और ठंड से संवेदनशीलता। लो-कार्ब डाइटिंग आपकी भूख को दबा देती है, जिससे आखिर में आपको भूख नहीं लगती। यदि आप बहुत ज्यादा वजन कम करते हैं, तो आपका शरीर ऊर्जा बचाने के लिए थायराइड के कार्य को नियंत्रित कर देता है। शरीर में कार्बोहाइड्रेट के स्तर को बढ़ाने के लिए पालेओ डाइट में ज्यादा से ज्यादा सब्जियों को शामिल करें, इससे ह्यपरथाइरोइडिस्म की समस्या नहीं होगी।

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3. डाइट से हटकर कुछ और खाने की तलब -

पालेओ डाइट में शुरू के पहले हफ्ते में चीनी, फ्रेंच फ्राइस या आलू के चिप्स की तलब लगती है, लेकिन ये ज्यादा लंबे समय तक नहीं रहती।

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4. प्रोटीन की अधिक मात्रा नुकसानदायक -

पालेओ डाइट में अधिक मात्रा में जानवरों से मिलने वाला प्रोटीन होता है जैसे मीट, शेलफिश, चिकन, अंडे और मछली। मछली को छोड़कर, क्योंकि इनमें वसा कम होती है, अन्य खाद्य पदार्थों में सेचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल अधिक मात्रा में होता है। जानवरों से मिलने वाले प्रोटीन की मात्रा अधिक लेने से बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है और गुड कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम हो जाता है। इस तरह ह्रदय रोग का जोखिम बढ़ जाता है। पालेओ डाइट में मौजूद अधिक मात्रा में प्रोटीन के कारण विषाक्त पदार्थ साफ करने के लिए आपकी किडनी को अधिक कार्य करना पड़ता है।

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