सेरोटोनिन में कमी क्या है?

सेरोटोनिन एक शक्तिशाली न्यूरोट्रांसमीटर होता है, जो शरीर के कई सबसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए जरूरी होता है।  आप शायद अपने मूड को विनियमित करने में इसकी भूमिका से परिचित होंगे, सेरोटोनिन अन्य शारीरिक प्रक्रियाओं के साथ आपके नींद चक्र, भूख और पाचन प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है।

सेरोटोनिन की कमी तब होती है जब आपके शरीर में पर्याप्त मात्रा में सेरोटोनिन ना हो। यह कई वजहों से हो सकता है। सेरोटोनिन की कमी के साथ कई शारीरिक और मानसिक लक्षण जुड़े होते हैं। इसके लक्षणों में चिंता, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और भूख में कमी आदि शामिल है।

सेरोटोनिन की कमी के परीक्षण क्लिनिकल होते हैं। सेरोटोनिन के परीक्षण लक्षणों के आधार किए जाते है, इसके लिए कोई विशेष टेस्ट उपलब्ध नहीं है। इस समस्या के इलाज में दवाएं, लाइट थेरेपी, एक्सरसाइज और आहार आदि शामिल है।

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  1. सेरोटोनिन की कमी के लक्षण - Serotonin Deficiency Symptoms in Hindi
  2. सेरोटोनिन की कमी के कारण और जोखिम - Serotonin Deficiency Causes & Risks in Hindi
  3. सेरोटोनिन की कमी के बचाव के उपाय - Prevention of Serotonin Deficiency in Hindi
  4. सेरोटोनिन की कमी का परीक्षण - Diagnosis of Serotonin Deficiency in Hindi
  5. सेरोटोनिन की कमी का इलाज - Serotonin Deficiency Treatment in Hindi
  6. सेरोटोनिन की कमी से होने वाले रोग - Disease caused by Serotonin Deficiency in Hindi
  7. सेरोटोनिन की कमी में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Serotonin Deficiency in Hindi?
  8. सेरोटोनिन कैसे बढ़ाएं
  9. सेरोटोनिन की कमी के डॉक्टर

सेरोटोनिन में कमी होने पर कौन से लक्षण महसूस होते हैं?

सेरोटोनिन में कमी से कई मानसिक व शारीरिक लक्षण पैदा हो जाते हैं।

शारीरिक लक्षण:

सेरोटोनिन शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए इसमें कमी होने से शरीर में कई लक्षण विकसित हो जाते हैं जैसे :

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मानसिक लक्षण:

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि आपको सेरोटोनिन में कमी से जुड़े निम्न लक्षण महसूस हो रहे हैं तो डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए:

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सेरोटोनिन में कमी किस कारण से होती है?

सेरोटोनिन में कमी पैदा करने वाले सटीक कारण अज्ञात हैं। कुछ लोग साधारण रूप से अन्य लोगों के मुकाबले कम मात्रा में सेरोटोनिन का उत्पादन करते हैं:

कुछ संभावित कारणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:

  • सेरोटोनिन के रिसेप्टर कम होना
  • सेरोटोनिन का अवशोषण बहुत जल्दी हो जाना
  • सेरोटोनिन के ऐसे रिसेप्टर होना जो प्रभावी रूप से सेरोटोनिन प्राप्त नहीं कर रहे
  • एल-ट्रिप्टोफैन, विटामिन डी, विटामिन बी6 या ओमेगा-3 फैटी एसिड का स्तर कम होना, क्योंकि आपके शरीर को सेरोटोनिन का उत्पादन करने के लिए इनकी आवश्यकता पड़ती है।

(और पढ़ें - विटामिन डी की कमी से होने वाली बीमारियां)

जीवन के कई तनाव भी सेरोटोनिन के स्तर को कम करने का कारण बनते हैं:

  • हार्मोन के बदलाव से भी सेरोटोनिन व अन्य न्यूरोट्रांसमीटर्स के स्तर में असंतुलन हो जाता है। (और पढ़ें - हार्मोन के प्रकार)
  • धूप की कमी से भी सेरोटोनिन की कमी को बढ़ावा मिलता है। (और पढ़ें - सूर्य के प्रकाश के लाभ)
  • खराब आहार। शरीर के अंदर न्यूरोट्रासंमीटर प्रोटीन से बनते हैं। कुछ विटामिन और मिनरल की भी आवश्यकता पड़ती है जिनको कोफैक्टर (Cofactors) कहा जाता है। यदि आपके शरीर में पोषक तत्वों की कमी है और आप सेरोटोनिन के निर्माण के लिए पर्याप्त मात्रा में प्रोटीनविटामिन या मिनरल नहीं ले रहे हैं तो न्यूरोट्रांसमीटर असंतुलन हो जाता है। जो हम खाते हैं उसके बारे में हमे वास्तव में सोचना और महसूस करना चाहिए।
  • कुछ प्रकार के ड्रग व पदार्थ जैसे कैफीन, अल्कोहल, निकोटीन, एंटीडिप्रैसेंट्स और कुछ कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने वाली दवाएं भी सेरोटोनिन व अन्य न्यूरोट्रांसमीटरों के स्तर को कम कर देती हैं। (और पढ़ें - कोलेस्ट्रॉल कम करने के उपाय)
  • लंबे समय से तनाव सेरोटोनिन के स्तर को कम कर सकते हैं। हमारी तेज रफ्तार जिंदगी इस असंतुलन के मुख्य कारणों में से एक है। (और पढ़ें - तनाव के लिए योग
  • आनुवंशिक कारक, मेटाबॉलिज्म में खराबी और पाचन संबंधी समस्याएं भी भोजन का अवशोषण और अपघटन करने की प्रक्रिया को बिगाड़ देती है जिससे सेरोटोनिन का निर्माण करने की क्षमता कम होती जाती है। 
  • विषाक्त पदार्थ जैसे भारी धातु, कीटनाशक, नशीले पदार्थ, व कुछ प्रकार की दवाएं हैं जो उस तंत्रिका कोशिका को क्षतिग्रस्त कर देती है जो सेरोटोनिन और अन्य न्यूरोट्रांसमीटर बनाते हैं। (और पढ़ें - बॉडी को डिटॉक्स कैसे करें)

सेरोटोनिन के स्तर में कमी का खतरा कब बढ़ जाता है?

निम्नलिखित कुछ कारक हैं जो सेरोटोनिन के स्तर में कमी का कारण बनते हैं या उसको बढ़ावा देते हैं:

  • खराब आहार
  • कैफीन (चायकॉफी आदि)
  • सिगरेट पीना (और पढ़ें - सिगरेट के नुकसान)
  • कोर्टिसोल का उच्च स्तर
  • ब्लड शुगर का निम्न स्तर (और पढ़ें - ब्लड शुगर टेस्ट)
  • हार्मोन में असंतुलन, कमी या उतार-चढ़ाव
  • धूप की कमी
  • लंबे समय से तनाव की स्थिति
  • जेनेटिक्स प्रीडिस्पोजिशन (आनुवंशिक समस्या)
  • कुछ प्रकार के ड्रग व डॉक्टरों द्वारा निर्धारित दवाएं

(और पढ़ें - डायबिटीज में परहेज)

सेरोटोनिन में कमी होने से रोकथाम कैसे करें?

  • सूरज की रोशनी के संपर्क में आते रहें।
  • रोज़ाना 6 से 8 गिलास पानी पिएं। (और पढ़ें - पानी कब और कैसे पीना चाहिए)
  • प्रार्थना करें और ध्यान करें। (मेडिटेशन करना)
  • शराब आप में डिप्रेशन, चिंता और नींद संबंधी समस्याओं को और बदतर बना देती है। (और पढ़ें - शराब छुड़ाने के उपाय)
  • चीनी, अल्कोहल, सफेद चावल, कुकीज़ और केक आदि को ना खाएं। कैफीन और आर्टिफिशियल स्वीटनर पदार्थों को कतई ना खाएं। (और पढ़ें - चीनी की लत दूर करने के उपाय)
  • लगातार 30 मिनट एक्सरसाइज करें और कम से कम हफ्ते में 3 बार करें। (और पढ़ें - एक्सरसाइज करने का सही समय)
  • नियमित रूप से पैदल चलें, योगा और स्ट्रेचिंग करें। (और पढ़ें - पैदल चलने के फायदे)
  • दिन में कम से कम 3 बार खाना खाएं। एक बार भी खाना छोड़ना उच्च तनाव व ऊर्जा की कमी पैदा कर सकता है। हर बार भोजन के साथ प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
  • कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन करें जैसे ब्राउन राइस

(और पढ़ें - स्ट्रेचिंग करने के तरीके)

सेरोटोनिन की कमी का परीक्षण कैसे करें?

सेरोटोनिन की कमी का परीक्षण करना काफी कठिन होता है क्योंकि आपके मस्तिष्क में सेरोटोनिन के स्तर का पता लगाने का कोई सटीक तरीका नहीं है और इसके लिए कोई विशिष्ट नैदानिक मानदंड (Diagnostic criteria) भी नहीं है। हालांकि एक ऐसा टेस्ट है जिसकी मदद से खून में सेरोटोनिन के स्तर की जांच की जा सकती है, इसका उपयोग आमतौर पर केवल सेरोटोनिन का उत्पादन करने वाले ट्यूमर की जांच के लिए किया जाता है। इसके अलावा यह भी जरूरी नहीं कि खून में सेरोटोनिन का स्तर मस्तिष्क में सेरोटोनिन के स्तर को दर्शा दे। (और पढ़ें - खून की जांच कैसे करें)

आपका मस्तिष्क एक झिल्ली (Membrane ) से ढ़का होता है जिसके ब्लड-ब्रेन बैरियर (BBB) कहा जाता है। यह झिल्ली कुछ चीजों को गुजरने देती है और कुछ को नहीं। सेरोटोनिन भी एक ऐसा पदार्थ होता है जो ब्लड-ब्रेन बैरियर झिल्ली के अंदर से नहीं गुजर पाता। इसका मतलब यह है कि आपके मस्तिष्क के अंदर के सेरोटोनिन का उत्पादन मस्तिष्क के अंदर ही होना चाहिए। पेशाब और खून में सेरोटोनिन का स्तर मापना मस्तिष्क में सेरोटोनिन का गलत स्तर बता सकता है।

 (और पढ़ें - पेशाब की जांच कैसे करें)

यदि आपको लगता है कि आप में सेरोटोनिन की कमी के लक्षण महसूस हो रहे हैं तो बेहतर होगा कि आप कुछ हफ्ते लक्षणों की निगरानी करें और परीक्षण को जल्दी करने के लिए इन लक्षणों को बताकर अपने डॉक्टर की मदद करें।

 (और पढ़ें - लैब टेस्ट लिस्ट)

सेरोटोनिन की कमी का इलाज कैसे करें?

सेरोटोनिन में कमी पैदा करने वाले कारण की परवाह ना करते हुए, कुछ सिद्ध तरीके हैं जिनसे आपके मस्तिष्क और शरीर दोनों में सेरोटोनिन का स्तर बढ़ाया जा सकता है। 

सेलेक्टिव सेरोटोनिन रयूप्टेक इनहिबिटर (Selective serotonin reuptake inhibitors):

सेलेक्टिव सेरोटोनिन रयूप्टेक इनहिबिटर या एसएसआरआई एक एंटीडिप्रैसेंट्स दवा होती है जो सेरोटोनिन का और अच्छे से उपयोग करने में आपके शरीर की मदद करती है। आपके मस्तिष्क को इसे फिर से अवशोषित करने से रोक कर ऐसा किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप आपके मस्तिष्क में अधिक सेरोटोनिन सर्कुलेट होने लगती है, जो उपयोग में आने वाली उपलब्ध मात्रा को बढ़ा देती है। कुछ सामान्य सेलेक्टिव सेरोटोनिन रयूप्टेक इनहिबिटर दवाएं निम्न हैं:

  • सिटैलोप्राम (Citalopram)
  • एससिटैलोप्राम (Escitalopram)
  • फ्लुक्सेटाइन (Fluoxetine)
  • सेर्ट्रालीन (Sertraline)
  • पैरोक्सेटाइन (Paroxetine)

(और पढ़ें - दवा की जानकारी)

प्राकृतिक उपचार: 

सभी दवाओं की तरह एसएसआरआई दवाएं सभी लोगों में समान रूप से काम नहीं करती। कुछ मामलों में ये दवाएं कई प्रकार के साइड इफेक्ट भी पैदा कर सकती हैं। यदि एसएसआरआई दवाएं आपके लिए ठीक से काम नहीं कर पा रही हैं तो आप कुछ प्रभावी प्राकृतिक उपायों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं:

  • आहार:
    उन खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक करना जिनमें वे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो सेरोटोनिन का उत्पादन करने में शरीर की मदद करते हैं। आप कैफीन वाले पदार्थों (चाय-कॉफी) का सेवन भी कम या बंद करने की कोशिश कर सकते हैं क्योंकि ये पदार्थ सेरोटोनिन के स्तर में कमी करते हैं। (और पढ़ें - पौष्टिक आहार के लाभ)
  • तेज रोशनी:  
    खुद को तेज रोशनी या फिर सूरज के संपर्क में लाने से भी मस्तिष्क में सेरोटोनिन का स्तर बढ़ जाता है। (और पढ़ें - सूर्य के प्रकाश के फायदे)
  • मूड इंडक्शन (Mood induction):
    कुछ ऐसा करना जो आपको बेहद पसंद है  या उन चीजों के बारे में सोचना जो आपको खुश कर देते हैं, इस प्रक्रिया में ऐसा करके आपके मूड को खुश किया जाता है। (और पढ़ें - मूड ठीक करने के तरीके)
  • एक्सरसाइज: 
    कई अध्ययनों से पता चला है कि शारीरिक गतिविधियां, मस्तिष्क में सेरोटोनिन के उत्पादन और उसके जारी करने की प्रक्रिया, इन दोनों को ही बढ़ाकर मस्तिष्क के सेरोटोनिन के स्तर में सुधार करती है। इसके लिए एरोबिक एक्सरसाइज को सबसे बेहतर माना जाता है, एरोबिक एक्सरसाइज जैसे चलना, दौड़ना और स्विमिंग करना
  • आंतों के बैक्टीरिया:
    आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को स्वस्थ रखने के लिए फाइबर में उच्च खाद्य पदार्थों का सेवन करें। नई खोज से पता चला कि ये बैक्टीरिया, आंत-मस्तिष्क की धुरी में सेरोटोनिन के स्तर में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। (और पढ़ें - फाइबर युक्त आहार)
  • एक्सरसाइज: 
    कई अध्ययनों से पता चला है कि शारीरिक गतिविधियां, मस्तिष्क में सेरोटोनिन के उत्पादन और उसके जारी करने की प्रक्रिया, इन दोनों को ही बढ़ाकर मस्तिष्क के सेरोटोनिन के स्तर में सुधार करती है। इसके लिए एरोबिक एक्सरसाइज को सबसे बेहतर माना जाता है, एरोबिक एक्सरसाइज जैसे चलना, दौड़ना और स्विमिंग करना।

(और पढ़ें - फिट रहने के लिए एक्सरसाइज)

 

सेरोटोनिन में कमी होने से कौन से रोग हो सकते हैं?

सेरोटोनिन का निम्न स्तर कुछ मानसिक स्थितियों (Psychological conditions) से भी जुड़ा होता है, जिसमें निम्न शामिल हैं:

सेरोटोनिन के स्तर में कमी होने से होने वाली अन्य समस्याएं व बीमारीयां हैं:

  • थकान: 
    ऊर्जा की कमी या थकावट महसूस होना भी सेरोटोनिन की कमी का परिणाम हो सकता है। ये समस्याएं अक्सर तब होने लगती हैं जब आप सेरोटोनिन की दवाएँ लेना बीच में ही बंद कर देते हैं और तब तक बनी रहती हैं जब तक आप सेरोटोनिन के स्तर को फिर से सामान्य स्तर पर नहीं लाते। (और पढ़ें - थकान दूर करने के लिए क्या खाएं)
  • सिरदर्द: 
    सेरोटोनिन के स्तर में कमी के साथ होने वाला सिर का दर्द काफी गंभीर होता है, जब मरीज़ अपने सेरोटोनिन के स्तर में फिर से वृद्धि करता है तो उसके सिर का दर्द अपने आप ठीक हो जाता है। (और पढ़ें - सिर का दर्द दूर करने का उपाय)
  • अनिद्रा: 
    मेलाटोनिन शरीर में उपस्थित एक ऐसा पदार्थ होता है जो नींद लाने में मदद करता है, और इसके उत्पादन से सेरोटोनिन भी जुड़ा होता है। सेरोटोनिन का स्तर कम होना मेलाटोनिन से स्तर में भी कमी ला सकता है जिससे सोने में असमर्थता महसूस होने लगती है। (और पढ़ें - नींद संबंधी विकार के लक्षण)
  • वजन बढ़ना: 
    यह कार्बोहाइड्रेट्स की लालसा (Craving ) से संबंधित होता है, जो अक्सर सेरोटोनिन के स्तर के कम रहने पर होता है। जो लोग अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन करते हैं वजन बढ़ना उनके लिए एक अपेक्षित परिणाम हो सकता है। (और पढ़ें - वजन कम करने के लिए भोजन)
  • ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता:
    सेरोटोनिन की कमी का एक संभव साइड इफेक्ट यह भी होता है कि इससे ग्रस्त लोग ध्वनि के किसी भी स्तर से प्रभावित हो जाते हैं। सामान्य से कम सेरोटोनिन के स्तर वाले लोगों को मामूली या यहां तक ​​कि कम डेसिबल आवाज़ भी परेशान कर सकती है। ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता तनाव और असुविधा की भावना पैदा कर सकती है।
  • खुदकुशी के विचार: 
    अक्सर सेरोटोनिन के स्तर में कमी होने से होने वाले डिप्रेशन के परिणामस्वरूप खुदखुशी के विचार भी आने लग सकते हैं। यह समस्या आमतौर पर उन लोगों को अधिक होती है जिनका इलाज एंटीडिप्रैसेंट्स दवाओं के साथ हो रहा होता है और वे अचानक से ये दवाएं लेना बंद कर देते हैं। (और पढ़ें - आत्महत्या का इलाज)
  • रौशनी के प्रति संवेदनशीलता: 
    यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें जब आप किसी तेज रोशनी की तरफ देखते हैं तो आपको दर्द या तकलीफ महसूस होती है। संवेदनशीलता का यह ढ़ंग आपके सेरोटोनिन के स्तर में संभावित रूप से कमी होने का संकेत दे सकता है। सेरोटोनिन को हमारे मूड में सुधार करने और हमे शांत रहने में मदद करने के लिए जाना जाता है। संभावित रूप से यही कारण हो सकता है कि सेरोटोनिन का स्तर कम होने पर हमको तेज प्रकाश से तकलीफ होने लगती है। (और पढ़ें - मूड को अच्छा करने वाले फल)
  • लिबिडो (कामेच्छा) में बदलाव:

(और पढ़ें - कामेच्छा बढ़ाने के उपाय)

 

सेरोटोनिन में कमी होने पर क्या खाना चाहिए?

विटामिन, मिनरल और अन्य पोषक से भरपूर आहार का सेवन करना सेरोटोनिन के स्तर को सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं। 

निम्न खाद्य पदार्थों को खाएं क्योंकि ये सेरोटोनिन के कम स्तर को ठीक करते हैं:

(और पढ़ें - संतुलित आहार के फायदे)

 

Dr. Vineet Saboo

Dr. Vineet Saboo

एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान

Dr. JITENDRA GUPTA

Dr. JITENDRA GUPTA

एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान

Dr. Sunny Singh

Dr. Sunny Singh

एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान

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