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मैंगनीज हमारे शारीर के लिए एक आवश्यक पोषक तत्व होता है, जो आम तौर पर लौह (आयरन) और अन्य खनिज के साथ मिलकर कई रासायनिक (कैमिकल) प्रतिक्रियाओं में विशेष भूमिका निभाता है। मैगनीज कोलेस्ट्रॉल, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों के अवशोषण का भी कार्य करता है। इसके अलावा यह हड्डियों के द्रव्यमान (bone mass) और हार्मोन संतुलन में भी आपकी मदद करता है। इतना ही नहीं मैगनीज आपके शरीर के लगभग हर प्रतिक्रिया को प्रभावित करता है।

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मैंगनीज शारीर में पोषक तत्वों के अवशोषण करने, पाचन एंजाइम को बनाने, हड्डियों का विकास करने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करता है। इसकी कमी से शारीर में हड्डियों की कमजोरी, जोड़ों में दर्द और मूड में तेजी से बदलाव होने की समस्या शुरू हो जाती हैं।

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शरीर के लिए उपयोगी होने के कारण आपको मैगनीज के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। साथ ही आप जानेंगे कि मैगनीज क्या है, मैगनीज के उपयोग और इसको कितनी मात्रा में लेना चाहिए, आदि।

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  1. मैंगनीज क्या है और कार्य - Manganese kya hai aur karya
  2. मैगनीज के उपयोग और फायदे - Manganese ke upyog aur fayde
  3. मैगनीज कितनी मात्रा में लेना चाहिए - Manganese ko kitni matra me lena chahiye
  4. मैंगनीज के स्रोत - Manganese sources in hindi
  5. मैंगनीज की अधिकता के नुकसान - Manganese ki adhikta ke nuksan in hindi

मैंगनीज एक खनिज है, जो कई खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। इसको एक आवश्यक पोषक तत्व माना जाता है, क्योंकि शरीर के विभिन्न कार्यों के लिए मैगनीज की आवश्यकता होती है। मैंगनीज की कमी से बचने और मैगनीज की कमी के उपचार के लिए आप मैगनीज को दवा के रूप में भी ले सकते हैं। हड्डियों का कमजोर होना (ऑस्टियोपोरोसिस), जोड़ों में दर्द (ऑस्टियोआर्थराइटिस), एनीमिया, वजन कम करने और पीएमएस (Premenstrual syndrome, प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम) के लक्षणों को कम करने में मैगनीज महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। इतना ही नहीं त्वचा के घाव को भरने के लिए भी मैगनीज का उपयोग किया जाता है।

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ऑस्टियोपोरोसिस की दवाओं में मुख्य रूप से मैगनीज का प्रयोग किया जाता है। इसकी अधिक मात्रा लेने से आपको कई तरह की हानियां हो सकती है। मैंगनीज शरीर की कई रासायनिक प्रक्रियाओं में शामिल होने वाला आवश्यक पोषक तत्व है, इसकी मदद से कोलेस्ट्रॉल, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन को बनाने का कार्य किया जाता है। यह हड्डियों के बनने में भी भूमिका निभाता है।

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  1. सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) को कम करने में सहायक – हाल ही में हुए रिसर्च से इस बात का पता चला है कि मैगनीज, सेलेनियम और जिंक को इंजेक्शन के द्वारा लेने से सीओपीडी की गंभीरता को कम किया जा सकता है। इस तरह से मैगनीज को लेने वाले मरीजों की स्थिति में सकारात्मक बदलाव आते हैं और वह मशीन की मदद के बिना खुद ही सांस लेने में सक्षम हो पाते हैं। (और पढ़ें - फेफड़ों को स्वस्थ रखने के वाले आहार)
     
  2. ऑस्टियोआर्थराइटिस से बचाव में सहायक? – ग्लूकोसामाइन हाइड्रोक्लोराइड (glucosamine hydrochloride: मैगनीज युक्त दवा) और कोनड्रोइटिन सल्फेट (Chondroitin sulfate) को साथ में करीब चार महीनों तक लेने से ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों का दर्द कम हो जाता है और वह अपनी रोजमर्रा की ज़िन्दगी के अधिकतर काम करने में फिर से सक्षम होने लगते हैं। जबकि कुछ अध्ययन से यह भी पता चला है कि मैगनीज के बिना ग्लूकोसमाइन और कोनड्रोइटिन लेने से भी ऑस्टियोआर्थराइटिस के इलाज में मदद मिलती है। इस तरह से ऑस्टियोआर्थराइटिस में मैगनीज के प्रभावों के बारे में कुछ सही तरह से नहीं कहा जाता सकता है। (और पढ़ें - गठिया के लिए योग)
     
  3. ऑस्टियोपोरोसिस में सहायक होता है – मैगनीज को कैल्शियम, जिंक और कॉपर के साथ लेने से अधिक उम्र की महिलाओं में रीढ़ की हड्डी टूटने की संभावनाओं को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही मैंगनीज को कैल्शियम, विटामिन डी, मैग्नीशियम, जिंक, कॉपर और बोरॉन के साथ एक वर्ष तक लेने से कमजोर हड्डियों वाली महिलाओं की हड्डियों के द्रव्यमान (bone mass) में सुधार देखने को मिलता है और ऑस्टियोपोरोसिस कम हो जाता है।  (और पढ़ें - हड्डियों की कमजोरी दूर करने के उपाय)
     
  4. पीएमएस (Premenstrual syndrome, प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम) को कम करने में सहायक होता है – कुछ प्रारंभिक रिसर्च से पता चलता है कि कैल्शियम के साथ मैंगनीज लेने से पीएमएस के लक्षणों में सुधार होता है। इसके अलावा मैगनीज से दर्द, अकेलेपन, चिंता, बेचैनी, चिड़चिड़ाहट, मूड में तेजी से बदलाव, अवसाद और तनाव को दूर करने में मदद मिलती है। (और पढ़ें - तनाव के घरेलू उपाय)

मैगनीज के अन्य उपयोग

विभिन्न आयु वर्ग के लोगों को मैगनीज की अलग-अलग मात्रा लेने की आवश्यकता होती है, जिसको नीचे बताया गया है।   

आयु  मात्रा
जन्म से 6 महीने तक 0.003 मिलीग्राम
7 से 12 महीने तक 0.06 मिलीग्राम
1 से 3 साल तक 1.2 मिलीग्राम
4 से 8 साल तक 1.5 मिलीग्राम
9 से 13 साल (लड़कों के लिए) 1.9 मिलीग्राम
14 से 18 साल (लड़कों के लिए) 2.2 मिलीग्राम
9 से 18 साल तक लड़कियों को 1.6 मिलीग्राम
19 और उससे अधिक पुरूषों के लिए 2.3 मिलीग्राम
19 और उससे अधिक महिलाओं के लिए 1.8 मिलीग्राम
14 से 50 साल तक की गर्भवती महिलाओं के लिए 2 मिलीग्राम
स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए 2.6 मिलीग्राम

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मैगनीज की जरूरत को आप अपने आहार से पूरा कर सकते हैं। नीचे कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ बताए गए हैं जिनमें अधिक मात्रा में मैगनीज होता है।

  1. ओट्स –
    ओट्स में मैगनीज के साथ ही अन्य पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। ओट्स से मेटाबॉलिज्म संबंधी विकार और मोटापे को कम किया जा सकता है। 156 मिलीग्राम ओट्स से आपको 7.7 मिलीग्राम मैगनीज मिलता है। (और पढ़ें - मोटापे को कम करने के उपाय)
  2. सोयाबीन –
    सोयाबीन में मैगनीज के साथ प्रोटीन की भी अधिक मात्रा पाई जाती है। इसके सेवन से आपके कोलेस्ट्रोल का स्तर कम होता है। 186 ग्राम सोयाबीन से आपको 4.7 मिलीग्राम मैगनीज मिलता है। (और पढ़ें - सोया मिल्क के फायदे)
     
  3. गेहूं –
    बिना रिफाइंड गेहूं में फाइबर पाया जाता है, जिससे आपके शरीर में रक्त शर्करा और ब्लड प्रेशर का स्तर संतुलित बना रहता है। यह हृदय और पेट के स्वास्थ के लिए भी आवश्यक होता है। गेहूं की 168 ग्राम मात्रा से आपको करीब 5.7 मिलीग्राम मैगनीज प्राप्त होता है। (और पढ़ें - डायबिटीज में क्या करें)
     
  4. राई –
    राई गेहूं के मुकाबले अधिक फायदेमंद होती है। इससे आपको भूख कम लगती है और सूजन की समस्या से भी बचा जा सकता है। राई की 169 ग्राम मात्रा में करीब 4.5 मिलीग्राम मैगनीज होता है। (और पढ़ें - सरसों के तेल के फायदे)
     
  5. जौ –
    जौ में शरीर के विभिन्न कार्यों के लिए आवश्यक सेलेनियम, नियासिन और आयरन पाए जाते हैं। इसके साथ ही जौ में फाइबर की अधिक मात्रा में होती है। 184 ग्राम में करीब 3.6 मिलीग्राम मैगनीज मौजूद होता है। (और पढ़ें - सेलेनियम की कमी का उपचार)
     
  6. लहसुन –
    लहसुन में मौजूद एल्लीसिन (allicin) नामक तत्व शरीर के लिए फायदेमंद होता है। लहसुन से कई तरह की बीमारियों और सर्दी जुकाम की समस्या को दूर किया जा सकता है। 136 ग्राम लहसुन में 2.3 मिलीग्राम मैगनीज मौजूद होता है। (और पढ़ें - खाली पेट लहसुन खाने का तरीका)

मैगनीज के अन्य स्त्रोत

मुख्य रूप से मस्तिष्क में मैंगनीज का अधिक स्तर तंत्रिका से जुड़े विकारों से संबंधित होता हैं। मैंगनीज विषाक्तता होने से आपको सिरदर्द, ट्रिमोर (Tremor: शरीर के किसी अंग में कंपकंपी होना, जैसे पार्किंसन), भूख की कमी, मांसपेशियों में अकड़न, पैर में ऐंठन और बुरे सपने आने जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा मैंगनीज की विषाक्तता से आपको चिड़चिड़ापन भी हो सकता है। इसके कुछ मामलों में लोग हिंसात्मक भी हो जाते हैं। शराब की लत और लिवर की समस्या वाले लोगों में मैंगनीज विषाक्तता होने की अधिक संभावनाएं होती है। स्टील की मिल या खान में काम करने वाले लोग, जब वहां मौजूद मैंगनीज युक्त वाष्प को सांस के माध्यम से शरीर के अंदर लेते हैं, तो उनको मैंगनीज विषाक्तता होने का खतरा बढ़ जाता है। 

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