सीने में जलन की समस्या हृदय से जुड़ी हुई नहीं होती है, बल्कि पेट से संबंधित होती है। असंतुलित खान-पान या किसी बीमारी के साइड इफेक्ट के कारण पेट में गैस या एसिडिटी होने लगती है, जिसके कारण सीने में जलन की परेशानी होती है। कईं लोगों में लोवर इसोफैजियल स्फिंक्टर (एलईएस) ठीक से बंद नहीं होता और अक्सर खुला रह जाता है, जिससे पेट का एसिड वापस बहकर इसोफैगस में चला जाता है। इससे छाती में दर्द और जलन होती है। इसे ही जीईआरडी या एसिड रिफ्लक्स भी कहते हैं। इस दौरान कभी-कभी मुंह में कड़वा या खट्टा स्वाद भी महसूस किया जाता है। आमतौर पर भारी भोजन खाने या लेटने के बाद इसका सामना करना पड़ता है। सामान्यतः यह कुछ मिनटों या कुछ घंटों में ठीक हो जाता है। यदि यह अक्सर देखा जाए तो यह कुछ गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सूचक भी हो सकता है। इस स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए, आहार में बदलाव करना काफी लाभप्रद हो सकता है। कुछ आहार इस स्थिति को सुधारने और कुछ बिगाड़ने का कार्य करते हैं, इस लेख में हम उन्हीं आहारों के विषय में विस्तार में बात करेंगे। आइये जानते हैं :

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  1. सीने में जलन होने पर क्या खाएं - Food to control Heartburn in Hindi
  2. सीने में जलन होने पर क्या न खाएं और परहेज - Food you should avoid in heartburn in Hindi
  3. सीने में जलन के लिए अन्य आहार संबंधी सुझाव - Other dietary tips for heartburn in Hindi
  4. हार्टबर्न के लिए भारतीय डाइट प्लान - Indian Diet plan for Heartburn in Hindi
  5. सीने में जलन होने पर क्या खाना चाहिए, क्या न खाएं और डाइट प्लान के डॉक्टर

कुछ भोजन हार्टबर्न को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। जो इस प्रकार हैं :

अदरक - Ginger for heartburn in Hindi

अदरक अपने एंटी गैस्ट्रिक और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है। अदरक में मौजूद जिंजीरोल इसे औषधीय गुण प्रदान करता है, चाहे वह सामान्य खांसी और सर्दी के लिए या विभिन्न पाचन और आंतों के रोगों के लिए, यह सभी समस्यों में लाभकारी साबित हो सकता है। अदरक में ऐसे गुण होते हैं जो पेट के एसिड को ट्रिगर करने वाले बैक्टीरिया को नष्ट करते हैं। इसके साथ ही, यह सूजन को कम करता है, मितली को कम करता है और पेट की मांसपेशियों को शांत करता है। इसे आप कच्चा खा सकते हैं या चाय में और भोजन के द्वारा भी प्रयोग कर सकते हैं। जब व्यक्ति अपच और हार्टबर्न से पीड़ित हो, तो एक चम्मच अदरक के रस को दो चम्मच शहद के साथ गर्म पानी में मिलाकर पीने से हार्टबर्न के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही यह आपके मेटाबॉलिज्म को भी बूस्ट रखता है।

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सौंफ - Fennel seed is good for heartburn in Hindi

सौंफ के बीज में एनेथोली नामक तत्व होता है। जो पेट के लिए एक अच्छे एजेंट के रूप में काम करता है, यह पेट की ऐंठन और पेट फूलने की समस्या को रोकता है। सौंफ कई विटामिन, मिनरल और महत्वपूर्ण डाइटरी फाइबर से भी भरा है, जो उचित पाचन में मदद करता है। चूंकि सौंफ के बीज में एंटी-अल्सर वाले गुण भी होते हैं, यह पेट की परत को ठंडा करता है और कब्ज से भी राहत दिलाने में मदद करता है। गर्भवती महिलाओं में अपच और एसिडिटी से निपटने के लिए भी सौंफ के बीज फायदेमंद होते हैं।

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गर्भावस्था के दौरान, बहुत सी गर्भवती महिलाएं गंभीर अपच की शिकायत करती हैं। लेकिन गर्भावस्था के कारण वे बहुत सारे खाद्य पदार्थों और दवाओं को नहीं ले सकती हैं। अपच, एसिडिटी और हार्टबर्न को नियंत्रित करने के लिए, सौंफ एक प्रभावी प्राकृतिक उपचार के रूप में काम करता है। हार्टबर्न के लक्षणों को कम करने के लिए 1 चम्मच मिश्री के साथ 1-2 चम्मच सौंफ के बीज का सेवन करें या उन्हें पानी में भिगोकर चाय की तरह उबाल कर प्रयोग करें। तत्काल राहत के लिए आप सौंफ के बीज भी चबा सकते हैं।

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ठंडा दूध - Can cold milk help heartburn in Hindi

यह एक प्रमाणित तथ्य है कि दूध में कैल्शियम की उच्च मात्रा होती है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए एक अच्छा स्रोत है। लेकिन यह कैल्शियम दवा की दुकानों में उपलब्ध एंटासिड में भी मौजूद है जो हार्टबर्न की एक सामान्य दवा के रूप में दिया जाता है। हालांकि, फुल क्रीम और गर्म दूध पेट में गैस की समस्या को और बढ़ा सकते हैं, जिससे पेट में अधिक एसिड बन सकती है। इसलिए ठंडा, कम वसा युक्त या स्किम्ड दूध को हार्टबर्न में लेने की सलाह दी जाती है।

ध्यान रखें कि एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स होने पर दूध में चीनी या चॉकलेट पाउडर की तरह कोई एडिटिव्स न मिलाएं।

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ठंडा पानी - Cold water is beneficial in heartburn in Hindi

जब हार्टबर्न बढ़ जाए तो एक गिलास ठंडा पानी पी लें। यह हार्टबर्न को शांत करता है। यदि आप वास्तव में अपनी सीने में जलन को खत्म करना चाहते हैं, तो अपने शरीर के तरल पदार्थों की मात्रा ठीक रखें एवं पानी पीने के बाद 10 मिनट की सैर करें।

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ऐलोवेरा जूस - Take aleo vera juice empty stomach in Hindi

एलोवेरा अपने औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है। यह आमतौर पर त्वचा के संक्रमण और जलन से राहत पाने के लिए उपयोग किया जाता है। एलोवेरा के पौधे का गूदा भी आंत को साफ रखने और विषाक्त पदार्थों से मुक्त करने में मदद करता है। इसके अलावा ऐलोवेरा विटामिन और मिनरल से भरपूर भी होता है, जो हार्टबर्न को कम करता है और पेट एवं शरीर को ठंडा रखने का काम करता है। इसलिए, यह अम्लीयता और पेट की बीमारियों में त्वरित राहत प्रदान करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

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पका हुआ सेब - Cooked Apple is good for heartburn in Hindi

सेब एसिड-ब्लॉकिंग प्लांट-फाइबर पेक्टिन से भरपूर होता है, जो कि एक घुलनशील फाइबर है और आपके पेट में सूजन कम कर सकता है। यह आपके पेट को भरा हुआ रखने में मदद कर सकता है। जबकि सेब का छिलका पचाने में कठिन हो सकता है, सेब को आग में पकाने या पानी में उबालने से उसके कठोर बाहरी छिलके नरम हो जाते हैं, जिसे आसान तरीके से नाश्ते के समय लिया जा सकता है। इसे एक हेल्दी स्नैक, डेजर्ट या ब्रेकफास्ट के रूप में ले सकते हैं।

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केला - Banana good for heartburn in Hindi

केले को खाली पेट खाने से सीने में जलन को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इस सुपरफूड को इसकी उच्च पोटैशियम के कारण एल्कलाइन फूड के रूप में जाना जाता है। एक पका हुआ केला हार्टबर्न और इससे जुड़े अन्य लक्षणों को रोकने में मदद कर सकता है। हालांकि, कुछ लोगों में केला हार्टबर्न का कारण भी बन सकता है। खासकर अगर केला अभी पका नहीं है। ऐसे में अच्छी तरह से पके हुए केले का सेवन करें।

(और पढ़ें - कच्चे केले के फायदे)

छाछ - Buttermilk help heartburn in Hindi

ठंडी छाछ हार्टबर्न के लिये उपयोगी है। हार्टबर्न से छुटकारा पाने के लिए, भुने हुए जीरा पाउडर के साथ एक गिलास ठंडी छाछ पीना फायदेमंद हो सकता है। छाछ में लैक्टिक एसिड होता है जो पेट में एसिड बनने से रोकता है। लैक्टिक एसिड पेट की परत के ऊपर एक अन्य परत बनाकर जलन और एसिड रिफ्लक्स के लक्षणों को कम करके, पेट को शांत करती है।

इसके अलावा, छाछ को प्रोबायोटिक से भरपूर भी माना जाता है। प्रोबायोटिक्स एक अच्छी पाचन प्रक्रिया में मदद करते हैं। प्रोबायोटिक्स, उन बैक्टीरिया, गैस बनने और सूजन को रोकते हैं जो अक्सर हार्टबर्न पैदा करते हैं। यह पोषक तत्वों और खाद्य पदार्थों को भी पचाने और अवशोषित करने में मदद करता है और पाचन तंत्र संबंधी स्वास्थ्य को अच्छी स्थिति में रखने में मदद करता है।

(और पढ़ें - पेट की गैस दूर करने के उपाय)

गुड़ - Jaggery for heartburn in Hindi

गुड़ भारत की सबसे पुरानी मिठाईयों में से एक है। इसके मैग्नीशियम रिच होने के कारण, गुड़ आंतों की शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। यह पाचन में सहायता करता है और पाचन तंत्र को प्राकृतिक रूप से अधिक क्षारीय बनाता है, इस प्रकार यह हार्टबर्न और पेट की अम्लीयता को कम करता है। भोजन के बाद गुड़ का एक छोटा टुकड़ा लेने से एसिड रिफ्लक्स से राहत मिलती है। गुड़ शरीर के सामान्य तापमान और पेट को ठंडा रखने में भी मदद करता है।

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नारियल पानी - Coconut water good for heartburn in Hindi

नारियल पानी शरीर के पीएच को संतुलित करता है। यदि शरीर का पीएच अम्लीयता के स्तर में है, तो यह उस स्तर को क्षारीय करने में मदद करता है। यह पेट में म्यूकस बनाने में भी मदद करता है, जो पेट को अत्यधिक एसिड उत्पादन के हानिकारक प्रभावों से बचाता है। चूंकि नारियल फाइबर से भरपूर होता है, इसलिए यह पाचन को सुचारू बनाता है और अम्लीयता व हार्टबर्न को पुन: होने से रोकता है।

आंवला - Indian Gooseberry for heartburn in Hindi

आंवला को एक आयुर्वेदिक औषधि के रूप में भी जाना जाता है और जो कि पूरे शरीर के लिए अच्छे भोज्य पदार्थ के रूप में जाता है। इसलिए इसका प्रयोग हार्टबर्न के इलाज के लिए भी किया जाता है। आंवला विटामिन सी का उत्कृष्ट स्रोत है, जो पेट में हुई चोट तथा इन्फेक्शन को ठीक करता है। पेट की बीमारियों को दूर करने के लिए रोजाना एक आंवला खाना फायदेमंद हो सकता है। आप इस आंवले को चटनी, भरता या कैंडी के रूप में ले सकते हैं।

(और पढ़ें - आंवले का मुरब्बा खाने के फायदे)

कुछ खाद्य पदार्थ हैं जो हार्टबर्न को खराब कर सकते हैं, उनसे बचने की कोशिश करें :

  • तैलीय और तला हुआ भोजन - तला हुए, चिकने और वसायुक्त खाद्य पदार्थ हार्टबर्न पैदा कर सकते हैं। क्योंकि यह पेट के एसिड को ऊपर की ओर प्रवाह करने का कार्य करते हैं, जो कि हार्टबर्न के लिए ट्रिगर की तरह कार्य करता है।
  • मसालेदार भोजन - ज्यादातर मसालों में कैप्साइसिन नामक एक तत्व होता है, जो पाचन की दर को धीमा कर सकता है। इसका मतलब है कि भोजन पेट में लंबे समय तक रहेगा, जो हार्टबर्न के लिए एक जोखिम कारक बनता है, अतः इनसे परहेज करें। (और पढ़ें - मसालेदार भोजन के नुकसान)
  • कॉफी और चाय - कैफीनयुक्त पेय पदार्थ एसिड रिफ्लक्स एवं हार्टबर्न को बढ़ाते हैं। इनकी जगह बिना कैफीन वाली चीजें जैसे हर्बल चाय, बिना-कैफीन वाली ग्रीन टी, ठंडा दूध, आदि का विकल्प चुनें।
  • कार्बोनेटेड पेय - कार्बोनेटेड पेय में मौजूद बुलबुले आपके पेट में विस्तार करते हैं, जिससे अधिक दबाव और दर्द होता है। इनकी जगह सादा पानी, छाछ, नारियल पानी आदि चुनें। (और पढ़ें - पानी पीने के फायदे)
  • चॉकलेट - चॉकलेट में एसिड रिफ्लक्स समस्याओं को बढ़ाने वाले सारे भोज्य पदार्थ होते हैं : कैफीन, वसा और कोको। इससे बचने की कोशिश करें। यदि मीठा खाने की इच्छा हो तो गुड़ लेने का प्रयास करें। (और पढ़ें - कोको पाउडर के फायदे)
  • पेपरमिंट - कई रिसर्च स्टडी इस स्थिति के दौरान पेपरमिंट को न लेने की सलाह देती हैं, यह एसिड रिफ्लक्स को बढ़ावा देने का कार्य करता है जो कि हार्टबर्न की स्थिति को और बिगाड़ सकता है। 
  • अंगूर और नारंगी - खट्टे फलों में अम्लीयता ज्यादा होती है, जो कि स्थिति को बिगाड़ सकती है। अतः इनके सेवन बचें। (और पढ़ें - अंगूर खाने के फायदे)
  • टमाटर - कच्चे टमाटर, कैचअप और टमाटर के सूप से बचें, इनमें एसिड की मात्रा ज्यादा होती है, जो कि स्थिति को खराब कर सकते हैं।
  • एल्कोहल - शराब आपके पेट पर दोहरा असर डालती है। एल्कोहल स्फिंक्टर वाल्व को फैला देती है और पेट में एसिड उत्पादन को भी उत्तेजित कर देती है एवं हार्टबर्न को बढ़ावा देती है। (और पढ़ें - शराब छुड़ाने के उपाय)
  • देर रात का नाश्ता - सोने जाने से पहले दो घंटे में कुछ भी खाने से बचें। इसके अलावा, आप दो से तीन बड़े भोजन के बजाय दिन भर में चार से पांच छोटे भोजन खाने की कोशिश करें।

(और पढ़ें - खाना खाने का सही समय)

ऊपर दी गयी जानकारी के आलावा यह कुछ बातें हैं जो आपको ध्यान में रखनी चाहिए -

  • अपने दिन की शुरुआत एक गिलास ठंडे पानी और एक केले से करें।
  • भोजन करते समय अधिक समय लें और अपने भोजन को अच्छी तरह से चबा-चबा कर खाएं।
  • अपने भोजन के आकार को थोड़ा कम करें, विशेष रूप से रात के खाने को।
  • खाना खाने के बाद तुरंत न लेटें।
  • पेट को पूरी तरह से न भरें। यदि पेट भरा हुआ महसूस हो रहा हो तो खाने के बाद मीठा न खाएं।

(और पढ़ें - अच्छी तरह से भोजन न चबाने के नुकसान)

यहां हम एक भारतीय डाइट प्लान साझा कर रहे हैं, जिसका उपयोग हार्टबर्न एवं उससे जुड़े लक्षणों को नियंत्रित करने में काफी फायदेमंद है :

  • सुबह खाली पेट - ठंडा पानी (1 गिलास) + केला (1)
  • सुबह का नाश्ता - बेसन पनीर चीला (2) + हरी चटनी (2 चम्मच)
  • मध्य आहार - भूनी एवं पिसी हुई जीरा के साथ ठंडी छाछ (1 गिलास)
  • दोपहर का भोजन - खिचड़ी (1-2 कटोरी) + दही (1 कटोरी) + सलाद (1 छोटी प्लेट)
  • शाम की चाय - सौंफ के बीज की चाय (1 कप)
  • रात का भोजन - वेजिटेबल सूप (1 कटोरी) + मल्टीग्रेन चपाती (2) + अरहर की दाल (1 कटोरी) + कोई भी मौसमी हरी सब्जी (1 कटोरी)

(और पढ़ें - अपच के घरेलू उपाय)

Dt. Akanksha Mishra

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Surbhi Singh

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संदर्भ

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  6. Koufman Jamie A. Low-acid diet for recalcitrant laryngopharyngeal reflux: therapeutic benefits and their implications. Ann Otol Rhinol Laryngol. 2011 May; 120(5): 281-7. PMID: 21675582
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