थायराइड (Thyroid) रोग विभिन्न विकारों का एक समूह होता है, जो आपकी थायराइड ग्रंथि को प्रभावित करता है। थायराइड आपकी गर्दन के सामने वाले हिस्से पर एक छोटी सी तितली के आकार की ग्रंथि होती है जो थायराइड नामक हार्मोन को स्त्रावित करती है। थायराइड हार्मोन शरीर की ऊर्जा का नियंत्रण और इसके उपयोग को निर्धारित करता है। इसके अलावा यह आपके शरीर के संचालन के लिए जरूरी हर आवश्यक अंग को प्रभावित करता है।
थायराइड ग्रंथि में गड़बड़ी के कारण यह हार्मोन शरीर में कभी बहुत ज्यादा, तो कभी बहुत कम हो जाता है। थायराइड हार्मोन के बहुत ज्यादा होने की स्थिति को हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism) कहा जाता है। यह आपके शरीर के कई कार्यों में तेजी लाने का कारण बनता है। वहीं थायराइड हार्मोन के बहुत कम होने की स्थिति को हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) कहा जाता है। यह आपके शरीर के कई कार्यों को धीमा करने का कारण बनता है।
थायराइड की समस्या होने के बावजूद भी आप स्वस्थ रूप से गर्भाधारण कर सकती हैं। इसके लिए आपको थायराइड का नियमित परीक्षण करवाना होगा और डॉक्टर के द्वारा बताई जाने वाली दवाओं का नियमित सेवन करना होगा। आगे इस लेख में आपको गर्भावस्था के दौरान थायराइड होना, गर्भावस्था में थायराइड का महत्व, इसके अलावा हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म के आधार पर इसके लक्षण, कारण, बच्चे पर होने वाले इसके प्रभाव और इसके इलाज के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है।
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- गर्भावस्था में थायराइड का महत्व - Garbhavastha me thyroid ka mahtav
- गर्भावस्था में थायराइड होने के लक्षण - Garbhavastha me thyroid hone ke lakshan
- गर्भावस्था में थायराइड के कारण - Garbhavastha me thyroid ke karan
- गर्भावस्था में थायराइड का इलाज - Garbhavastha me thyroid ka ilaaj
- गर्भावस्था में थायराइड से बच्चे पर पड़ने वाले प्रभाव - Garbhavastha me thyroid se bacche par padne vale prabhav
गर्भावस्था में थायराइड का महत्व - Garbhavastha me thyroid ka mahtav
थायराइड हार्मोन आपके बच्चे के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के सामान्य विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है। गर्भावस्था के पहले 3 महीनों के दौरान आपका बच्चा गर्भनाल के माध्यम से आने वाले थायराइड हार्मोन की आपूर्ति पर ही निर्भर होता है। शुरूआती 12 हफ्तों में ही आपके बच्चे की थायराइड ग्रंथि अपने आप काम करना शुरू कर देती है, लेकिन यह गर्भावस्था के 18 से 20 सप्ताह तक पर्याप्त मात्रा में थायराइड हार्मोन नहीं बना पाती है।
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गर्भावस्था से संबंधित ह्युमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (Human Chorionic Gonadotropin; HCG) और एस्ट्रोजन (Estrogen), इन दोनों हार्मोन्स के कारण ही महिलाओं के रक्त में थायराइड हार्मोन की उच्च मात्रा हो जाती है। गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ महिलाओं में थायराइड बढ़ जाता है। इसके साथ ही साथ गर्भावस्था में थायराइड का बढ़ने और अन्य बदलावों के लक्षणों के सामने आने से थायराइड का पता लगा पाना मुश्किल हो जाता है। जबकि, हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म के कई लक्षणों का आसानी से पता लगाया जा सकता है। इसके लिए आपके डॉक्टर को थायराइड की जांच के लिए विशेष परीक्षण करने होते हैं।
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गर्भावस्था में थायराइड होने के लक्षण - Garbhavastha me thyroid hone ke lakshan
गर्भावस्था में थायराइड के कई लक्षण दिखाई देते हैं। इस अवस्था में हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म दोनों के लक्षण भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं। आगे इन दोनों ही स्तिथियों के लक्षणों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है।
गर्भावस्था में हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism) के लक्षण -
हाइपरथायरायडिज्म के कुछ संकेत और लक्षण सामान्य गर्भधारण में भी होते हैं। इसमें गर्भवती महिला की हृदय गति का तीव्र होना, ज्यादा गर्मी लगना और थकान होने को शामिल किया जाता है।
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हाइपरथायरायडिज्म में निम्न तरह के अन्य लक्षण और संकेत सामने आते हैं -
- हृदय गति दर में तीव्रता और अनियमितता। (और पढ़ें - हृदय को स्वस्थ रखने वाली एक्सरसाइज)
- हाथों का कपकपाना। (और पढ़ें - पार्किंसन रोग के उपचार)
- वजन घटने का कारण न पता लगना। (और पढ़ें - वजन कम करने के उपाय)
- गर्भावस्था में सामान्य वजन बनाए रखने में मुश्किल होना।
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गर्भावस्था में हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) के लक्षण -
हाइपोथायरायडिज्म (थायराइड हार्मोन का कम होना) के जो लक्षण सामान्य लोगों में दिखाई देते हैं, ठीक उसी तरह के लक्षण गर्भवती महिलाओं में भी देखें जाते हैं। इसके कुछ अन्य लक्षण नीचे बताए जा रहें हैं -
- अत्यधिक थकान होना। (और पढ़ें - गर्भावस्था में थकान का इलाज)
- अधिक ठंड लगना।
- मांसपेशियों में ऐंठन होना। (और पढ़ें - मांसपेशियों में दर्द के उपाय)
- कब्ज होना। (और पढ़ें - कब्ज में परहेज)
- याददाश्त या एकाग्रता से जुड़ी समस्या होना।
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गर्भावस्था में हाइपोथायरायडिज्म के अधिकतर मामलों में गर्भवती महिलाओं पर बेहद कम प्रभाव होते हैं। कई बार तो इसके लक्षण भी सही तरह से सामने नहीं आ पाते हैं।
गर्भावस्था में थायराइड के कारण - Garbhavastha me thyroid ke karan
गर्भावस्था में हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म दोनों ही तरह के थायराइड के कारणों में भिन्नता होती है। इनके कारणों को हम विस्तार पूर्वक आगे बता रहें हैं।
गर्भवस्था के दौरान हाइपरथायरायडिज्म होने के कारण-
गर्भावस्था में हाइपरथायरायडिज्म आमतौर पर ग्रेव्स (Graves) रोग के कारण होता है। ग्रेव्स रोग में आप थकान महसूस करते हैं और आपकी आंखे बाहर की ओर आ जाती हैं। यह आपकी प्रतिरक्षा तंत्र का विकार होता है। इस बीमारी में आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली ऐसे एंटीबॉडीज बनाना शुरू करती है, जिसके कारण थायराइड ग्रंथि अधिक मात्रा में थायराइड हार्मोन बनाने लगती है। थायराइड को बढ़ाने वाले इन एंटीबॉडीज को इम्युनोग्लोबुलीन (Immunoglobulin/ प्लाज्मा कोशिका के द्वारा बनने वाला ग्लाइको प्रोटीन) या टीएसआई भी कहते हैं।
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ग्रेव्स रोग गर्भावस्था के दौरान हो सकता है। यदि गर्भवती महिला को यह रोग पहले से ही हो तो वह इसके लक्षणों को दूर करने के लिए दूसरे और तीसरे महीने में इलाज करा सकती हैं। बच्चा पैदा होने के बाद के कुछ महीनों में जब महिलाओं के शरीर का टीएसआई का स्तर बढ़ जाता है तब ग्रेव्स रोग गंभीर रूप धारण कर सकता है। इसके लिए डॉक्टर हर माह कुछ परीक्षण करते हैं और परीक्षणों के आधार पर हाइपरथोरायडिज्म का इलाज करते हैं। थायराइड की अधिक मात्रा गर्भवती महिला और उसके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए खराब होती है।
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हाइपरथोरायडिज्म के कुछ मामलों में महिला को जी-मिचलाना या उल्टियां आने की परेशानी हो सकती है। इसके कारण गर्भवती महिलाओं का वजन कम हो जाता है और उनके शरीर में पानी की कमी हो जाती है।
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गर्भवस्था के दौरान हाइपोथायरायडिज्म के कारण -
गर्भावस्था में हाइपोथायरायडिज्म आमतौर पर हाशिमोटो (Hashimto) रोग के कारण होता है। गर्भधारण करने वाली 100 में से 2 से 3 महिलाओं में यह रोग पाया जाता है। हाशिमोटो रोग प्रतिरक्षा प्रणाली संबंधी विकार है। हाशिमोटो की बीमारी में प्रतिरक्षा तंत्र ऐसे एंटीबॉडीज बनाता है जो थायराइड ग्रंथि पर हमला करते हैं, जिससे इस ग्रंथि में सूजन आ जाती है। जिस कारण यह ग्रंथि थायराइड हार्मोन बनाने में कम सक्रिय हो जाती है।
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गर्भावस्था में थायराइड का इलाज - Garbhavastha me thyroid ka ilaaj
गर्भावस्था में हाइपरथायरायडिज्म का इलाज -
गर्भावस्था में हाइपरथायरायडिज्म होने पर आपको इलाज की आवश्यकता होती है। अगर आपका हाइपरथायरायडिज्म हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम (Hyperemesis gravidarum/ गंभीर रूप से उल्टी होना और पानी की कमी होना) की अवस्था से संबंधित है, तो आपको मात्र उल्टी और निर्जलीकरण का इलाज कराने की जरूरत होती है।
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यदि आपकी हाइपरथायरायडिज्म गंभीर अवस्था में है, तो आपके डॉक्टर एंटीथायराइड दवाओं को लेने की सलाह देते हैं। इन दवाओं से आपकी थायराइड ग्रंथि कम मात्रा में थायराइड हार्मोन बनाती है। इस इलाज से आपका बढ़ा हुआ थायराइड हार्मोन बच्चे के रक्त में जाने से रूक जाता है। इसके लिए आप किसी एंडोक्रिनोलॉजिस्ट या किसी अन्य विशेषज्ञ के पास जा सकती हैं। विशेषज्ञ आपकी मौजूदा स्थिति के बारे में सही तरह से जांच करके उचित दवा दे पाएंगे।
हाइपरथायरायडिज्म के इलाज के लिए विशेषज्ञ के पास जाना इसलिए आवश्यक होता है क्योंकि इसमें कई ऐसी दवाएं होती हैं, जो गर्भ में पल रह बच्चे के लिए खतरनाक हो सकती हैं। कई गर्भवती महिलाओं को तीसरी तिमाही तक एंटीथायराइड दवाओं का सेवन करने की जरूरत नहीं होती है।
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गर्भावस्था में हाइपोथायरायडिज्म का इलाज -
हाइपोथायरायडिज्म की अवस्था में कम हुए हार्मोन्स को दोबारा सुचारू किए जाने पर जोर दिया जाता है। इसके लिए डॉक्टर आपको कुछ दवाएं देते हैं। थायराइड हार्मोन की यह दवा टी4 (T4) की तरह ही होती है। थायराइड में T3 और T4 दो तरह के हार्मोन बनते हैं। इनका काम मेटाबॉलिज्म को ठीक करना होता है। डॉक्टर के द्वारा दी जाने वाली दवाईयां आपके बच्चे के लिए सुरक्षित होती है। इसके साथ ही, जब तक बच्चे के शरीर में खुद थायराइड हार्मोन नहीं बनना शुरू होता है, तब तक यह दवाई काफी उपायोगी मानी जाती है।
इस दौरान आपका थायराइड केवल टी3 हार्मोन ही बनाता है। गर्भावस्था के शुरूआती दौर में टी3, टी4 की तरह आपके बच्चे के मस्तिष्क तक नहीं पहुंच पाता है। जबकि आपके बच्चे के मस्तिष्क को बनने के लिए टी4 की आवश्यकता होती है। टी3 को कई तरह की दवाओं से प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन इन दवाओं से टी4 की कमी को पूरा नहीं किया जा सकता। इसके चलते डॉक्टर गर्भवती महिलाओं टी4 की कमी को पूरा करने के लिए विशेष तरह की दवाइयों को लेने की सलाह देते हैं।
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गर्भावस्था में थायराइड से बच्चे पर पड़ने वाले प्रभाव - Garbhavastha me thyroid se bacche par padne vale prabhav
गर्भावस्था के दौरान होने वाला थायराइड, आपको और आपके बच्चे को प्रभावित कर सकता है। हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म दोनों ही तरह की स्थितियां आप और आपके बच्चे को कैसे प्रभावित करती हैं, यह आगे बताया जा रहा है।
हाइपरथायरायडिज्म के कारण गर्भवती महिला और बच्चे के स्वास्थ पर पड़ने वाला प्रभाव-
गर्भावस्था के दौरान हाइपरथायरायडिज्म का इलाज न किया जाए तो इससे आपको निम्न खतरे हो सकते हैं:
- गर्भपात।
- समय से पहले बच्चे का जन्म।
- जन्म के समय शिशु के वजन मे कमी होना।
- प्री-एक्लेमप्सिया - गर्भधारण के अंतिम चरम में मां के रक्तचाप में तीव्र वृद्धि।
- थायराइड की गंभीर स्थिति उत्पन्न होना।
- दिल की विफलता।
ग्रेव्स रोग में थायराइड हार्मोन अधिक बनने के कारण, यह आपके गर्भ में पल रहे बच्चे के अंदर भी थायराइड हार्मोन अधिक मात्रा में स्त्रावित होने का कारण बनता है। हाइपरथायरायडिज्म की समस्या पर आप रेडियोएक्टिव आयोडिन ट्रीटमेंट से अपना इलाज करवा सकती हैं। इसमें सर्जरी के द्वारा आपके थायराइड कोशिकाओं को निकाल दिया जाता है। लेकिन, इसके बावजूद आपका शरीर दोबारा से टीएसआई एंटीबॉडी बनाने लगता है। जब इनका स्तर बढ़ जाता है तो आपके टीएसआई आपके बच्चे के रक्त में भी पहुंच जाता है। टीएसआई के कारण आपकी थायराइड ग्रंथि अधिक मात्रा में थायराइड हार्मोन बनाती है। इस कारण आपके बच्चे के शरीर में भी थायराइड हार्मोन अधिक बनना शुरू हो जाता है।
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अधिक मात्रा में थायराइड बनने से बच्चे में होने वाली परेशानियां -
- दिल की धड़कने तेज होना एवं दिल की विफलता का कारण बनना। (और पढ़ें - अनियमित दिल की धड़कन का इलाज)
- बच्चे के सिर में नरम स्थान होना।
- बच्चे का वजन कम होना। (और पढ़े - वजन बढ़ाने के तरीके)
- जन्म के बाद चिड़चिड़ापन होना।
कई मामलों में थायराइड के बढ़ने से बच्चे की सांस नली पर दबाव पड़ता है। जिससे बच्चे को सांस लेने में परेशानी होती है। ग्रेव्स रोग होने पर डॉक्टर इसके लिए जरूरी परीक्षण करते हैं।
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हाइपोथायरायडिज्म के कारण गर्भवती महिला और बच्चे के स्वास्थ पर पड़ने वाला प्रभाव -
इसमें महिलाओं को निम्न तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
- एनीमिया होना। (और पढ़ें - गर्भावस्था में खून की कमी का इलाज)
- गर्भपात।
- प्री-एक्लेमप्सिया - गर्भधारण के अंतिम चरम में मां के रक्तचाप में तीव्र वृद्धि। (और पढ़े - प्रेगनेंसी में हाई ब्लड प्रेशर का इलाज)
- जन्म से पूर्व शिशु का वजन कम होना। (और पढ़ें - थायराइड फंक्शन टेस्ट)
- जन्म के समय शिशु के वजन मे कमी होना।
- दिल की विफलता।
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हाइपोथायरायडिज्म के गंभीर मामलों में यह लक्षण मुख्यतः दिखाई देते हैं। थायराइड आपके बच्चे के दिमाग और स्नायु तंत्र को बनाने का काम करता है, इसलिए हाइपोथायरायडिज्म की स्थिति में थायराइड आपके बच्चे के दिमाग और स्नायु तंत्र के विकास पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है।
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