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औसत शारीरिक तापमान 36-37 डिग्री सेल्सियस (96.8-98.6 डिग्री फ़ारेनहाइट) होता है। लेकिन जब तापमान 38.3 डिग्री सेल्सियस (100.94 डिग्री फ़ारेनहाइट) से अधिक हो जाता है, तो यह बुखार कहलाता है। इससे पीड़ित होने पर महिला में कांपना, पसीना निकलना, सिरदर्द, डिहाइड्रेशन, मांसपेशियों में दर्द और थकान आदि लक्षण नज़र आते हैं।

ऐसा माना है कि बढ़ा हुआ शारीरिक तापमान, फिर चाहे वो बुखार की वजह से हो या गर्म पानी से स्नान करने से, तंत्रिका ट्यूब असामान्यता या स्पाइना बिफिडा (Spina bifida; दरार युक्त रीढ़) हो सकती है। लेकिन यह सिर्फ एक मान्यता है जो कभी सिद्ध नहीं हुयी है। बहुत सी महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान बुखार आता है लेकिन उनके बच्चे बिलकुल ठीक ठाक पैदा होते हैं।

(और पढ़ें - गर्भावस्था में थकान)

  1. गर्भावस्था में बुखार आने के कारण - Fever during pregnancy causes in Hindi
  2. प्रेग्नेंसी में बुखार आने का बच्चे पर प्रभाव - Effect of fever on baby during pregnancy in Hindi
  3. गर्भावस्था में बुखार का इलाज और दवाएं - Fever in pregnancy treatment and medication in Hindi
  4. प्रेग्नेंसी में बुखार का घरेलू उपचार - Home remedies to reduce fever during pregnancy in Hindi

गर्भावस्था के दौरान, आपका इम्यून सिस्टम थोड़ा कमजोर हो जाता है क्योंकि यह आपकी और आपके बच्चे दोनों की रक्षा करने के लिए अतिरिक्त काम करता है। इसलिए, आप गर्भावस्था के दौरान संक्रमण, ठंड या बुखार के प्रति अतिसंवेदनशील हो जाती हैं। इस दौरान बुखार आने के अन्य कारण भी हो सकते हैं:

सर्दी जुकाम

सर्दी जुकाम, अक्सर बुखार के कारण ही होता है। इसके लक्षण फ्लू के ही समान होते हैं, और बहती नाक, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में कठिनाई आदि लक्षण भी महसूस होते हैं। ये लक्षण आमतौर पर 3 से 15 दिनों के भीतर सही होते हैं। यदि इससे ज्यादा दिनों तक बुखार हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।

फ्लू

गर्भावस्था के दौरान फ्लू, बुखार का दूसरा प्रमुख कारण है। फ्लू से पीड़ित होने पर दर्द, बुखार, खाँसी, उल्टी और मतली यदि लक्षण अनुभव होते हैं। अगर ये लक्षण अधिक दिनों तक न जाएं तो डॉक्टर से संपर्क करें।

मूत्र पथ संक्रमण (यूटीआई)

लगभग 10% महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान मूत्र पथ संक्रमण (Urinary tract infection) होता है। यूटीआई तब होता है जब बैक्टीरिया योनि से मूत्रमार्ग (Urethra) तथा मूत्राशय (Bladder) तक फैल जाते हैं। इसके कारण झागदार या खूनी मूत्र, बुखार, ठंड और पेशाब के दौरान जलन महसूस होती है।

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल वायरस द्वारा

जब कोई गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल वायरस शरीर में घुस जाता है, तो यह बुखार, उल्टी, दस्त और निर्जलीकरण जैसे लक्षणों के रूप में महसूस किया जा सकता है। इन लक्षणों का यदि समय पर इलाज नहीं किया गया तो ये समय से पूर्व प्रसव का कारण भी बन सकते हैं।

इंट्रा एमनियोटिक इन्फेक्शन या खराब गंध वाला डिस्चार्ज

इंट्रा एमनियोटिक इन्फेक्शन (Intra amniotic infection) एक से दो प्रतिशत गर्भावस्थाओं में होता है। यह बच्चे के आसपास मौजूद एम्नियोटिक द्रव (Amniotic fluid) का बैक्टीरियल संक्रमण होता है। इसके आम संकेत दिल की धड़कन तेज़ होना, गर्भाशय में असहजता, योनिस्राव, पसीना, तेज बुखार और ठंड लगना हैं। यदि गर्भावस्था के अंतिम चरणों के दौरान ये संक्रमण होता है, तो डॉक्टर बच्चे को किसी भी संक्रमण से बचाने के लिए तत्काल सिजेरियन सेक्शन की कराने की सलाह देते हैं। और भविष्य में इस इन्फेक्शन से बचाने के लिए डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाओं की सलाह देते हैं। (और पढ़ें - गर्भधारण करने के उपाय)

पांचवा रोग या पार्वो वायरस बी19

अमेरिकी केंद्रों के रोग नियंत्रण और रोकथाम (सीडीसी) के मुताबिक, केवल पांच प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को ये दुर्लभ संक्रामक संक्रमण होता है। आम लक्षणों में चकत्ते, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश और बुखार आदि अनुभव होते हैं। पार्वो वायरस (Parvovirus B19), मिसकैरेज, भ्रूण में एनीमिया, मृतजन्म मतलब मरा हुआ बच्चा पैदा होने और सीने में जलन जैसी जटिलताएं पैदा कर सकता है।

(और पढ़ें - गर्भावस्था में सीने में जलन के उपाय)

फ्लू जैसी लिस्टेरिया (लिस्टेरियोसिस)

दूषित पानी और भोजन के सेवन से लिस्टेरियोसिस (Listeriosis) होता है। इसके आम लक्षणों में तेज़ बुखार, मतली, मांसपेशियों में दर्द, दस्त, सिरदर्द, गर्दन में अकड़न या ऐंठन आदि प्रमुख हैं। यदि इनका उपचार नहीं किया जाता, तो यह गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकते हैं, जैसे समय से पहले प्रसव, मरे हुए बच्चे का जन्म और मिसकैरेज आदि।

(और पढ़ें - गर्भावस्था में होने वाली समस्याओं के समाधान)

पहली तिमाही में गर्भावस्था के दौरान आने वाला बुखार यदि हल्का होता है तो किसी समस्या का कारण नहीं होता है, लेकिन तेज़ तापमान या बुखार आपके बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है। इसका कारण यह है कि प्रारंभिक अवस्था में भ्रूण का विकास प्रोटीन पर निर्भर करता है जो तापमान के प्रति संवेदनशील होती है। यदि तापमान सामान्य 98.6 से 102 डिग्री सेल्सियस हो जाता है, तो यह प्रोटीन के काम को बाधित करता है और मिसकैरेज कर सकता है।

(और पढ़ें - प्रोटीन युक्त आहार)

एक अध्ययन के अनुसार, प्रारंभिक गर्भावस्था के दौरान बुखार, अजन्मे बच्चों के मुँह में दरार (Oral clefts) होने का खतरा बढ़ा सकता है। तीसरी तिमाही के दौरान आने वाले बुखार से बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचता, लेकिन केवल तब तक जब तक कि यह गर्भाशय के अस्तर (Uterine lining) से संबंधित न हो। लेकिन यह होना स्वाभाविक है इसलिए डरने की आवश्यकता नहीं है। बेहतर होगा अगर आप बुखार को दूर करने के लिए इलाज करें।

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अगर डॉक्टर इस बात की पुष्टि कर देते हैं कि आपका बुखार चिंता का विषय नहीं है, तो आप बुखार कम करने के लिए कुछ निम्नलिखित सरल तरीकों का उपयोग कर सकती हैं -

  1. गर्म पानी से स्नान करें। यह आपके तापमान को कम करने में मदद करता है। ठंडे पानी का उपयोग बिलकुल न करें।
  2. अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन करें अर्थात हाइड्रेटेड रहें। शरीर के तापमान को कम करने और ग्लूकोज और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने के लिए नींबू पानी जैसे जूस का सेवन करें।
  3. अधिक से अधिक आराम करें। निष्क्रिय अवस्था में होने से आपका शरीर ठंडा और हल्का हो जाता है। जिसके कारण चक्कर आने, बेहोशी और ठोकर खा कर गिरने का जोखिम कम हो जाता है।
  4. बुखार कम करने के लिए गर्म या ठंडे पैक का उपयोग करें। आप रेडीमेड गर्म और ठंडे पैक दवाओं के स्टोर से खरीद सकती हैं या उन्हें घर पर भी बना सकती हैं। घर पर गर्म पैक बनाने के लिए, 55 सेकंड के लिए माइक्रोवेव में एक नम कपड़ा गर्म करें। इसका सीधा उपयोग करने से पहले इसका तापमान चेक करें। ठंडा पैक बनाने के लिए आप मलमल के कपड़े या फॉइल (Foil) में बर्फ लपेटकर भी इसे सीधे माथे पर उपयोग कर सकती हैं।

अगर सर्दी खांसी की वजह से बुखार है तो:

  • नाक छिनक कर बलगम को निकाल दें। जब आप ऐसा करती हैं तो कानों के रस्ते पर मौजूद रोगाणु जो कफ बनाते हैं वो दबाव पड़ने से बलगम के साथ निकल जाते हैं।
  • गरारा करना, गले में खराश को दूर करने का सबसे बेहतर उपाय है लेकिन इससे थोड़े समय के लिए ही राहत मिलती है। 230 मिलीलीटर गर्म पानी में आधा चम्मच नमक मिलकर गरारा करें। ऐसा कम से कम दिन में चार बार करें। गले की खराश को कम करने के लिए, आप चाय के साथ गले के लिए एस्ट्रिंजेंट (Astringent) का उपयोग भी कर सकती हैं जिनमें गले की झिल्ली को कसने के लिए तीन मौजूद होता है।
  • हर्बल गर्म पेय जैसे अदरक और हर्बल चाय पीना भी बहुत लाभकारी होता है। हॉट ड्रिंक नाक की झिल्ली में आयी सूजन को कम करने में मदद करती हैं। बंद नाक को भी खोलते हैं और डिहाइड्रेशन को रोकते हैं। हालांकि, कैमोमाइल चाय का सेवन न करें, क्योंकि इसमें ऐसा एजेंट होता है जिसमें मासिक धर्म के डिस्चार्ज को बढ़ाने वाले गुण (Emmenagogue properties) होते हैं, जो रक्तस्राव का कारण बन सकते हैं। (और पढ़ें - सूजन का इलाज)
  • भाप लें। इससे नाक मॉइस्चराइज़ होगी और आपको आराम मिलेगा। यदि आप फ्लू के कारण चक्कर आदि का अनुभव कर रही हैं तो स्टीम बाथ (Steam bath) लें।
  • ऐसी स्थिति में हवाई यात्रा न करें। गर्भावस्था में विमान यात्रा करना सुरक्षित नहीं है, खासकर जब आपको बुखार, सर्दी और फ्लू हो। इसका कारण यह है कि हवा का दबाव पहले से ही बंद नाक में तनाव पैदा कर सकता है। सर्दी और फ्लू होने पर विमान यात्रा के दौरान अस्थायी रूप से कान के पर्दों को नुकसान पहुंच सकता है, क्योंकि टेकऑफ़ और लैंडिंग के दौरान प्रेशर में अंतर होता है। यदि आपको किसी आपात की स्थिति में यात्रा करनी ही पड़े तो नेसल स्प्रे (Nasal spray) साथ ज़रूर रखें। इसके अलावा च्विंगम (Chewing gum) चबाने से प्रेशर कम करने में मदद मिलती है।

(और पढ़ें - कफ, सर्दी, जुखाम, गले में खराश, खाँसी से अगर हैं परेशान, तो ज़रूर सुनें बाबा रामदेव की बात)

ऐसे खाद्य पदार्थ खाएं जो संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं:

  1. यदि आपको बुखार के साथ दस्त भी हो रहे हैं तो केला और चावल खाएं।
  2. विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ बुखार से प्रभावी ढंग से लड़ने के लिए आपकी इम्युनिटी (Immunity) को बढ़ाते हैं।
  3. ब्लूबेरी (Blueberries) बुखार और दस्त को रोकने में मदद करते हैं क्योंकि इनमें एस्पिरिन (Aspirin) पाया जाता है।
  4. काली मिर्च साइनस को खोलती है और फेफड़ों में मौजूद बलगम को निकालती है।
  5. क्रैनबेरी, बैक्टीरिया को मूत्राशय और मूत्र पथ के अस्तर से चिपकने से रोकती हैं।
  6. सरसों और हॉर्सरैडिश (Horseradish) हवा पास होने के रास्ते में मौजूद बलगम को निकालती हैं।
  7. प्याज में फाइटोकेमिकल्स (Phytochemicals) होते हैं जो ब्रोन्काइटिस (Bronchitis) और निमोनिया (Pneumonia) से रक्षा करते हैं।
  8. काले और हरे रंग के चाय में कैटेचिन (Catechins) होते हैं, जो एक प्राकृतिक फाइटोकैमिकल है और दस्त से राहत प्रदान करता है।

उपरोक्त उपायों के साथ, आप गर्भावस्था के दौरान बुखार के इलाज के लिए कुछ प्राकृतिक उपाय कर सकते हैं। दवाएं हमेशा एक समाधान नहीं होती हैं क्योंकि एंटीबायोटिक दवाओं के दुष्प्रभाव भी होते हैं इसके अलावा, प्राकृतिक इलाज आपकी नींद और आपके मूड को प्रभावित नहीं करेंगे।

दवाएं:

  1. डॉक्टर आमतौर पर पेरासिटामोल (Paracetamol) और एसिटामिनोफेन (Acetaminophen) लिखते हैं, ये दोनों ही सुरक्षित दवाएं हैं और बुखार को कम करने में मदद करती हैं।
  2. एस्पिरिन (Aspirin) और नॉनटेरायडियल एंटी-इन्फ्लैमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) जैसे कि इबुप्रोफेन (Ibuprofen) का सेवन न करें।
  3. इसके अलावा, होम्योपैथिक दवाइयां जैसे एचिनासिया (Echinacea) का सेवन भी न करें।

गर्भावस्था के दौरान बुखार के लिए दवा की जानकारी लिए बिना उसका सेवन न करें। एंटीबायोटिक दवाओं को बेतरतीब ढंग से न लें, क्योंकि वे बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए कोई भी दवा डॉक्टर से पूछ कर ही लें।

इस दौरान बुखार से निपटने के कुछ घरेलू नुस्खे इस प्रकार हैं:

  1. आधा कप सिरके को गुनगुने पानी में मिलाकर उस पानी से पांच से दस मिनट तक स्नान करें।
  2. एक चम्मच तुलसी की पत्तियों को गर्म पानी के कप में पांच मिनट के लिए भिगो दें। इसे एक दिन में तीन या चार बार पिएं। अगले दिन तक तेज़ बुखार, कम हो जाएगा।
  3. कच्चे प्याज की एक एक स्लाइस दोनों पैरों के तलवों में रखकर पैरों को गर्म कपड़े से बाँध लें। और सो जाएं सुबह बुखार ठीक हो जायेगा।
  4. एक कप सिरके को एक कटोरे गर्म पानी में मिलाकर इस मिश्रण में कपडा भिगोएं। अब इसे निचोड़कर तेज़ बुखार का इलाज करने के लिए माथे पर रखें।
  5. एक चम्मच सरसों के बीज एक कप गर्म पानी में पांच मिनट के लिए भिगो दें और फिर इस पानी को छानकर पिएं।
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References

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