सेप्सिस को खून में इन्फेक्शन के नाम से भी जाना जाता है। सेप्सिस शरीर में किसी भी संक्रमण का परिणाम हो सकता है, जैसे कि निमोनिया, इन्फ्लूएंजा या यूरिनरी ट्रैक इन्फेक्शन आदि। सेप्सिस एक गंभीर बीमारी है, जिसके बाद व्यक्ति को ठीक होने में काफी समय लग जाता है। इस बीमारी के दौरान, वजन का कम होना, मांसपेशियों में कमी, शरीर में पानी की कमी, भूख ना लगना आदि समस्याएं भी देखने को मिलती हैं।

लेकिन डाइट में कुछ परिवर्तन करके, हम इन लक्षणों का प्रबंधन कर सकते हैं और अपनी ताकत व स्वास्थ्य स्थितियों को फिर से ठीक कर सकते हैं। इस लेख में, हम लक्षणों को नियंत्रित करने और स्वास्थ्य को तेजी से ठीक करने के लिए डाइट संबंधी बदलाव व एक भारतीय आहार योजना साझा करेंगे :

(और पढ़ें - बच्चों में निर्जलीकरण के लक्षण)

  1. ब्लड इन्फेक्शन के लिए क्या खाना चाहिए - What to eat in Sepsis in Hindi
  2. ब्लड इन्फेक्शन में परहेज और क्या नहीं खाना चाहिए - What not to eat post Sepsis in Hindi
  3. ब्लड इन्फेक्शन के साथ अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए डाइट - Plan your diet to manage with other complication in Sepsis in Hindi
  4. ब्लड इन्फेक्शन के रिकवरी के लिए भारतीय डाइट प्लान - Indian diet plan for Post sepsis recovery in Hindi
  5. ब्लड इन्फेक्शन से रिकवरी के बाद क्या खाना चाहिए, क्या न खाएं और डाइट प्लान के डॉक्टर

यहां हम सेप्सिस के दौरान होने वाली समस्याओं और उनके आहार संबंधित समाधानों का उल्लेख कर रहे हैं :

कम हुए वजन के लिए डाइट - Manage weight loss with diet in sepsis in Hindi

संक्रमण के कारण, इस स्थिति के दौरान वजन कम होना बहुत आम समस्या के रूप में देखा जाता है। कैलोरी से भरपूर सॉफ्ट डाइट, इस के समस्या के दौरान पचाने में भी आसान होती है, साथ ही वजन बढ़ाने में भी लाभप्रद साबित होता है। रोगी को दूध वाली या नमकीन दलिया, सूजी या पनीर की खीर, मसला हुआ आलू, मसला हुआ चावल, अंडे की भुर्जी, दाल या सब्जी का सूप, सब्जियों का स्टू, फल और नट्स की स्मूदी आसानी से दिए जा सकते हैं। कई बार इस दौरान कम हुए वजन को रिकवर करने में समय लग जाता है, साथ ही इन्फेक्शन के रिपीट होने के भी आसार बढ़ जाते हैं, अतः सभी महत्वपूर्ण रिपोर्ट (ऊंचाई, वजन, बीएमआई, लैब रिपोर्ट, स्वास्थ्य की स्थिति, चिकित्सा संबंधित इतिहास) के साथ एक पोषण विशेषज्ञ से परामर्श करें और अपने लिए कस्टमाइज डाइट के बारे में चर्चा करें।

प्रोटीन - Protein for sepsis in Hindi

इस समस्या के दौरान मांसपेशियों का कम होना भी देखा जाता है। प्रोटीन मांसपेशियों के लिए एक बिल्डिंग ब्लॉक की तरह कार्य करता है। कई अध्ययन मांसपेशियों को ठीक करने के लिए प्रति किलोग्राम शरीर के वजन के हिसाब से 1.2-2 ग्राम प्रोटीन लेने का सुझाव देते हैं। ऐसे में हर व्यक्ति की आवश्यकता अलग-अलग हो सकती है। इसलिए अपने कुल प्रोटीन की आवश्यकता एवं सेवन के बारे में अपने पोषण विशेषज्ञ से अवश्य पूछें। अन्यथा, अपने प्रत्येक भोजन में कम से कम एक प्रोटीन विकल्प लेने का प्रयास करें। जैसे कि नाश्ते में अंडा या दूध, मध्य-भोजन में दही या भुना हुआ चना, दोपहर के भोजन में दाल या चिकन और रात के खाने में सोया या पनीर और सोने से पहले दूध। यदि आप अपने प्राकृतिक आहार द्वारा अपनी प्रोटीन की आवश्यकता को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं, तो आप डॉक्टर से सप्लीमेंट के विषय में भी बात कर सकते हैं।

(और पढ़ें - प्रोटीन युक्त भारतीय आहार)

पानी की कमी के लिए डाइट - Diet for dehydration in Sepsis in Hindi

बुखार और संक्रमण के कारण, पोस्ट सेप्टिक रिकवरी के दौरान निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) काफी ज्यादा देखा जाता है। ऐसे में पानी की मात्रा ठीक बनाए रखने के लिए, कम से कम 8-10 गिलास (2.5-3 लीटर) पानी लेने की कोशिश करें। यदि आप सादा पानी पीने में सक्षम नहीं हैं, तो अपने मध्य भोजन में ग्लूकोज के साथ डिटॉक्स वाटर, सूप, फलों के रस को शामिल कर सकते हैं। नारियल पानी और छाछ इलेक्ट्रोलाइट्स के समृद्ध स्रोत होते हैं। निर्जलीकरण के इलाज और इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बनाए रखने के लिए यह एक बढ़िया विकल्प साबित हो सकते हैं, जो तेजी से रिकवरी में मदद करते हैं।

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एंटीऑक्सीडेंट - Anti-oxidants food for Sepsis in Hindi

संक्रमण से बचाव और तेजी से रिकवरी के लिए, प्रतिरक्षा तंत्र को ठीक रखना अति आवश्यक है। रोजाना विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आहार लेने से मजबूत प्रतिरक्षा तंत्र प्राप्त करना संभव हो पाता है। विटामिन ए, सी और ई; सेलेनियम और जस्ता (जिंक), ओमेगा 3 फैटी एसिड वे पोषक तत्व हैं, जिससे मजबूत प्रतिरक्षा स्तर पाने में मदद मिलती है। बेहतर अवशोषण के लिए एक प्राकृतिक आहार के माध्यम से इन पोषक तत्वों को लेने की कोशिश करें। आप अपने नियमित आहार में गाजर, कद्दू, पपीता, हरी पत्तेदार सब्जियां, ब्रोकोली, वसायुक्त मछली, कॉड लिवर ऑयल, नट्स और बीज आदि ले सकते हैं।

हल्दी और ग्रीन टी को एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थों के रूप में भी जाता है। हल्दी में करक्यूमिन होता है, जो हमारे शरीर की सूजन को कम करने और संक्रमण से लड़ने में मदद करता है और ग्रीन टी में कैटेचिन होता है जो हमारे शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है और रिकवरी में मदद करता है। इसलिए इन खाद्य पदार्थों को अपने दैनिक आहार में अवश्य शामिल करें।

(और पढ़ें - सूजन कम करने के घरेलू उपाय)

भूख बढ़ने के लिए - Diet for Loss of appetite in Sepsis in Hindi

भूख की कमी आमतौर पर पोस्ट-सेप्टिक स्थितियों में देखी जाती है। एक व्यक्ति जो इस स्थिति से पीड़ित है, वह मतली, मुंह में धातु जैसा स्वाद और खाने के लिए पर्याप्त ऊर्जा की कमी महसूस कर सकता है। इस स्थिति से लड़ने के लिए, अपने कुल भोजन को 6 भागों में विभाजित करें, 3 बड़े और 3 छोटे भोजन। कोशिश करके छोटे-छोटे भोजन जैसे फल और मेवे का मिल्कशेक, घर पर बना न्यूट्रिशन बार, शहद के साथ फलों का सलाद और भुना हुआ बीज, पनीर या चिकन सैंडविच इत्यादि लेने से, अपनी ऊर्जा की आवश्यकता को पूरा करने में मदद मिल सकती है। मतली से बचने के लिए, खाने के साथ नींबू पानी का सेवन करें।

जैसा कि एक व्यक्ति ज्यादा खाने में सक्षम नहीं है और ठीक होने के लिए पोषक तत्वों की उच्च मात्रा में आवश्यकता होती है। ऐसे में रंगीन और देखने में टेस्टी भोजन सर्व करने की कोशिश करें। अन्यथा, आप कुछ मसालों का उपयोग भोजन के ऊपर कर सकते हैं, जो कि भूख को बढ़ाने में मदद करते हैं जैसे कि अजवाइन, सौंफ, काली मिर्च, ऑरेगैनो आदि।

(और पढ़ें - भूख बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए)

ग्लुटामिन डाइट - Take Glutamine-rich food for fast recovery in Sepsis in Hindi

ग्लुटामिन को इम्युनोन्यूट्रीएंट के रूप में जाना जाता है, जो हमारे शरीर को विभिन्न प्रकार के संक्रमण (जैसे निमोनिया, बैक्टीरिया और सेप्सिस) से लड़ने में और तेजी से ठीक होने में मदद करता है। अपने आहार में इस पोषक तत्व को शामिल करने के लिए, चिकन, मछली, गोभी, पालक, टोफू, दाल, बीन्स आदि को नियमित रूप से लेने की कोशिश करें।

थाइमिन फूड - Thiamine-rich food can be helpful in Sepsis in Hindi

कई साक्ष्य ये बताते हैं कि सेप्सिस और पोस्ट सेप्सिस के दौरान थाइमिन की नियमित मात्रा लेने से तेज रिकवरी में मदद मिलती है। थायमिन को प्राकृतिक रूप से लेने से इस पोषक तत्व की अवशोषण दर बढ़ सकती है और तेजी से रिकवरी में मदद मिलती है। संतरा, टमाटर, साबुत अनाज, पत्तेदार सब्जियां, दूध उत्पाद इस पोषक तत्व के समृद्ध स्रोत हैं। उन्हें अपने नियमित आहार में शामिल करने की कोशिश करें।

(और पढ़ें - रोजाना कितना दूध पीना चाहिए)

विटामिन डी आहार - Add vitamin D in your diet in Sepsis in Hindi

कई शोधकर्ताओं ने सेप्सिस के उपचार के दौरान विटामिन डी लेने का सुझाव दिया है। इस पोषक तत्व को एक इम्युनिटी बूस्टर के रूप में भी जाना जाता है, जो सेप्सिस से रिकवरी के बाद मदद कर सकता है। बेहतर अवशोषण के लिए, रोजाना 15-20 मिनट धूप में बैठने की कोशिश करें। अंडे की जर्दी, मशरूम, वसायुक्त मछली और कॉड लिवर ऑयल में विटामिन डी की कुछ मात्रा होती है, आप इन्हें अपने दैनिक आहार में ले सकते हैं। अन्यथा आप डॉक्टर से परामर्श लेकर सप्लीमेंट शुरू कर सकते हैं।

(और पढ़ें - इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए क्या खाएं)

कुछ खाद्य विकल्प हैं जो संक्रमण को बढ़ाने, वजन को घटाने और रिकवरी को धीमा करने का कार्य कर सकते हैं, उनसे परहेज करें। जैसे कि :

  • कच्चे और बिना पके भोजन जैसे फलों का रस, कच्चा दूध, कच्चा मांस, कच्चा अंडा, आदि विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीवों के वाहक हो सकते हैं और रिकवरी को धीमा कर सकते हैं। इनसे परहेज करें।
  • कई शोधों ने सुझाव दिया है कि प्रोसेस्ड भोजन शरीर में सूजन को बढ़ा सकते हैं, रिकवरी को धीमा कर सकते हैं। अतः इनसे बचने की कोशिश करें।
  • तेलयुक्त और चिकना भोजन पचाने में आसान नहीं होते हैं जो इस स्थिति के दौरान अपच और परेशानी दे सकते हैं। ऐसे में कम तेल, कम मसाला और कम नमक में पकाया हुआ, सॉफ्ट डाइट लेने की कोशिश करें।

यदि व्यक्ति सेप्सिस के साथ-साथ, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग आदि जैसी अन्य समस्याओं से पीड़ित हैं, तो यह समस्याएं स्थिति को खराब कर सकती हैं। यदि आप भी कई स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं, तो अपने पोषण विशेषज्ञ से डाइट में आवश्यक परिवर्तन के बारे में बात करें।

यहां हम सेप्सिस के बाद जल्दी रिकवरी के लिए एक डाइट प्लान साझा कर रहे है, जो इस प्रकार है :
सुबह खाली पेट - गर्म पानी + बादाम (8) + किशमिश (10-12) - भिगोया हुआ
सुबह का नाश्ता - गेहूं का दलिया (1-2 कटोरी) + फुल क्रीम दूध (1 कप) / उबला अंडा (1)
मध्य भोजन - मेवे के साथ मैंगो स्मूदी (1 गिलास)
दोपहर का भोजन - खिचड़ी (1-2 कटोरी) + पालक कढ़ी (1 कटोरी)
शाम की चाय - हल्दी की चाय (1 कटोरी) + भुना मखाना (1 कटोरी) / पनीर सैंडविच (1-2)
रात का खाना - मसला हुआ चावल (1 कटोरी) + धुली मूंग की दाल (1 कटोरी) + आलू का भरता (1 कटोरी) + कोई भी मौसमी सब्जी (1 कटोरी)
सोते समय - हल्दी वाला दूध (1 गिलास)

Dt. Rajni Sharma

Dt. Rajni Sharma

आहार विशेषज्ञ
6 वर्षों का अनुभव

Dt. Ayushi Shah

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Dr. Yogita Johar

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Dt. Miksha Arora

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