पार्किंसन डिजीज एक तंत्रिका तंत्र से संबंधित समस्या है, जो समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ते जाती है और हमारे शरीर के मूवमेंट को धीमा देती है। इसके अलावा अन्य समस्याएं जैसे कि शरीर के पोस्चर में गड़बड़ी, संतुलन बनाने में गड़बड़ी आदि भी इस बीमारी से जुड़े लक्षण हैं। इस समस्या के दौरान कब्ज होना, थकान एवं याददाश्त सम्बंधित समस्याएं भी आ जाती हैं। इन सभी लक्षणों को एवं बीमारी की स्थिति को आहार में कुछ परिवर्तन करके काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और लम्बे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। इस लेख में हमने आपकी रोज की डाइट में कौन सी चीजें अवश्य होनी चाहिए, लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए आहार में क्या परिवर्तन किये जाने चाहिए एवं एक भारतीय डाइट चार्ट भी शेयर किया है, आइये जानते हैं -

(और पढ़ें - याददाश्त बढ़ाने के घरेलू उपाय)

  1. पर्किंसन में क्या खाएं - Diet for Parkinson's disease patients in Hindi
  2. पर्किंसन में लें संतुलित आहार - Balanced diet for Parkinson in Hindi
  3. पार्किंसन से जुड़े लक्षणों को आहार से कैसे करें नियंत्रित - How to control Parkinson's related symptoms with diet in Hindi
  4. पार्किंसंस में क्या नहीं खाना चाहिए और परहेज - Food we should avoid in Parkinson’s Disease in Hindi
  5. पार्किंसन डिजीज के लिए भारतीय डाइट प्लान - Indian diet plan for Parkinson’s disease in Hindi
  6. पार्किंसन रोग में क्या खाएं, क्या नहीं, परहेज के डॉक्टर

कुछ भोज्य पदार्थ पार्किंसन डिजीज की स्थिति में सुधार ला सकते हैं, आइये जानते हैं कौन से हैं वो भोज्य पदार्थ -

1. मछली का सेवन अवश्य करें : मछलियां ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर होती हैं, जो हमारे मस्तिष्क के लिए आवश्यक पोषक तत्व देने का कार्य करती हैं। इनमें मौजूद विटामिन बी12 हमारे मस्तिष्क को रोगों से बचाता है। कई रिसर्च स्टडी उत्तम फैट के सेवन एवं उससे होने वाले किटोसिस से, मस्तिष्क को रोगों से बचाने एवं इसकी स्थिति को सुधारने, का भी समर्थन करते हैं। अतः सप्ताह में 2-3 बार मछली का सेवन अवश्य करें। यदि शाकाहारी हैं तो इसकी जगह पर कॉड लिवर ऑयल का भी नियमित सेवन कर सकते हैं। (और पढ़ें - मछली के तेल से लाभ)

2. चाय एवं कॉफी लेना हो सकता है फायदेमंद : इस रोग और चाय-कॉफी का काफी पुराना नाता है। कई रिसर्च स्टडी में इस तथ्य को दर्शाया गया है कि कॉफी एवं कैफीन का सेवन स्वस्थ व्यक्तियों में यह रोग विकसित नहीं होने देता, साथ ही जिन लोगों में यह समस्या पहले से है, उनके लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करता है।

3. सूखे मेवे का अवश्य करें सेवन : वैसे तो सभी सूखे मेवे स्वास्थ्यवर्धक वसा प्रदान करते हैं, जो कि दिमाग के स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छे माने जाते हैं। लेकिन विशेष तौर पर अखरोट से संबंधित कई रिसर्च स्टडी में पता चला है कि नियमित रूप से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भी इसके सेवन से मस्तिष्क की एजिंग प्रक्रिया धीमी हो जाती है, साथ ही यह सीखने की क्षमता को नियमित करता है, याददाश्त को भी मजबूत बनाता है एवं शरीर को सही प्रकार से चलने में मदद करता है। कई रिसर्च स्टडी, इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुणों की पुष्टि करती हैं, जो कि फ्री रेडिकल्स के कारण, दिमागी कोशिकाओं को हुए नुकसान को रिपेयर करने में मदद हैं। इसके पूरे फायदे के लिए प्रतिदिन 1 मुट्ठी सूखे मेवे यानी बादाम, अखरोट, चिलगोजा, पिस्ता आदि को मिलाकर सेवन अवश्य करें। (और पढ़ें - याददाश्त बढ़ाने के लिए योग)

4. गाजर जरूर खाएं : गाजर को आंखों के लिए सर्वोत्तम आहारों में से एक माना जाता है, किन्तु इसमें मौजूद ल्यूटिन एवं विटामिन ए इसे दिमाग एवं तंत्रिका तंत्र के लिए भी उत्तम आहार बनाता है। यह दिमाग में होने वाले इन्फ्लेमेशन को कम करता है एवं उम्र के कारण होने वाली याददाश्त की कमी को भी ठीक करने में मदद करता है। इसे आप सलाद, सूप, सब्जी व हलवा आदि के द्वारा ले सकते हैं। (और पढ़ें - आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए क्या खाएं)

5. अलग-अलग प्रकार की बेरी का करें सेवन : इस फल के समूह में एंटीऑक्सीडेंट एवं विटामिन की काफी अच्छी मात्रा पायी जाती है। जो कि तनाव को कम करने, दिमाग की कोशिकाओं के नष्ट होने से रोकने एवं तंत्रिका तंत्र को सुचारु रूप से कार्य करने में मदद करते हैं। इन फलों का पूरी तरह फायदा लेने के लिए शहतूत, ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी एवं रास्पबेरी का सेवन कर सकते हैं।

6. डार्क चॉकलेट भी है फायदेमंद : पार्किंसन डिजीज के दौरान तंत्रिका कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं एवं डोपामाइन का भी स्तर गिरने लगता है। डार्क चॉकलेट में मौजूद कोकोआ में फेनाइलेथैलामाइन सब्स्टेंस पाया जाता है, जो शरीर में डोपामाइन की मात्रा को बढ़ाने का काम करता है। यह इस स्थिति में औषधि की तरह कार्य करता है। 2015 में पब्लिश हुई एक रिसर्च के अनुसार, फेनाइलेथैलामाइन पार्किंसन डिजीज के दौरान काफी सहायक साबित होता है।

(और पढ़ें - नसों की कमजोरी के लक्षण)

पर्किंसन की समस्या के दौरान एक संतुलित आहार लेना काफी फायदेमंद साबित होता है, जिससे शरीर के पूरे स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने में मदद मिलती है एवं इस रोग की स्थिति को सुधारा जा सकता है। ऐसे में अपने आहार में साबुत अनाज, रंग बिरंगे फल एवं सब्जियां, दालें एवं फलियां (अरहर, मसूर, राजमा, लोबिया आदि), अच्छी गुणवत्ता के वसा (सूखे मेवे, सूरजमुखी का तेल, जैतून का तेल, तिल, कद्दू के बीज आदि) एवं अच्छी मात्रा में पानी का सेवन करें। इन सभी चीजों को अपनी डाइट में शामिल करने के लिए, अपनी लम्बाई, वजन, उम्र एवं बीमारी की स्थिति के अनुसार, आहार विशेषज्ञ से मिलकर कस्टमाइज डाइट प्लान बनवा सकते हैं।

(और पढ़ें - वजन कम करने के उपाय)

इस बीमारी के दौरान बहुत सारी अन्य स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं देखने को मिलती हैं, जिन्हें डाइट में कुछ बदलाव करके नियंत्रित किया जा सकता है, आइये जानते हैं कैसे -

1. हाई फाइबर डाइट से करें कब्ज को नियंत्रित : इस समस्या के दौरान बहुत सारे लोग, पाचन तंत्र के ठीक से काम न कर पाने के कारण, कब्ज की शिकायत करते हैं। इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए अपनी रोज की डाइट में ताजे फल एवं सब्जियों को शामिल करें। इनके अलावा साबुत अनाज, दालें भी लाभप्रद साबित होती हैं। कई बार पानी की कमी के कारण भी कब्ज की शिकायत देखी जाती है, ऐसे में रोगी के पानी के सेवन की मात्रा भी जांच लें। (और पढ़ें - कब्ज में क्या खाना चाहिए)

2. पानी की उचित मात्रा से डिहाइड्रेशन को रखें दूर : पार्किंसन डिजीज की कई दवाएं, शरीर में डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) कर देती हैं। निर्जलीकरण के कारण कन्फ्यूजन, संतुलन न बना पाना, कमजोरी, थकान एवं कई बार किडनी संबंधी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं। ऐसे में अपने रोज के पानी के सेवन की मात्रा का अवश्य ध्यान रखें और कोशिश करके कम से कम 2.5-3 लीटर तरल का सेवन पूरे दिनभर में अवश्य करें। इस तरल में आप दूध, छाछ, फलों का जूस, नींबू पानी आदि ले सकते हैं।

(और पढ़ें - पानी की कमी दूर करने वाले फल)

3. यदि खाने का स्वाद न आये तो करें ये बदलाव : इस दौरान खाने का स्वाद न आना काफी साधारण समस्या है, जिस कारण से कई बार वजन कम होना, कुपोषण एवं अवसाद की स्थिति भी देखने को मिलती है। ऐसे में रोगी का पसंदीदा भोजन बनाएं एवं खाने में अच्छी महक व सुंदर दिखने वाले भोजन का चयन करें, जिससे अन्य इन्द्रियों के द्वारा मदद मिल सके। इस दौरान सादे और बिना नमक वाले भोजन का सेवन न करें, क्योंकि उससे भोजन से और मन हट सकता है।

4. पार्किंसन रोग के दौरान डायरिया हो तो क्या खाएं : इस समस्या के दौरान डायरिया भी काफी सामान्य लक्षणों में से एक है। इसे नियंत्रित करने के लिए, छोटे-छोटे आहार और थोड़े-थोड़े समय पर लें, जिससे ऊर्जा का संतुलन बना रहे। पानी का भी विशेष ध्यान रखें, ऐसे में ओआरएस का घोल हर लूस मोशन के बाद देने की आदत डालें। इस लक्षण के दौरान केला, आलू, नींबू पानी, नारियल पानी, टमाटर का जूस, मछली लेने से शरीर में नमक (सोडियम) एवं पोटैशियम की मात्रा ठीक बनी रहती है। (और पढ़ें - दस्त होने पर क्या करें)

5. मितली के लिए कैसी हो डाइट : इस दौरान ली जाने वाली दवाओं के कारण मतली होना आम बात है। ऐसी समस्या होने पर अपने न्यूरोलॉजिस्ट से अवश्य बात कर लें। इस स्थिति को नियंत्रित करने लिए, अदरक एवं पुदीने की चाय का सेवन कर सकते हैं। इस दौरान भारी एवं ज्यादा मात्रा में खाना स्थिति को और खराब कर सकता है, इसके साथ ही छोटे-छोटे आहार लेने की आदत डालें। इस दौरान आसानी से पचने योग्य खाना लें, जैसे कि अच्छे से पका खाना, अंडे की भुर्जी, टोस्ट, उबला एवं मसला आलू, कस्टर्ड आदि का सेवन कर सकते हैं। इसके साथ ही घर में ताजा हवा आने एवं खाना बनाने के बाद महक निकलने की व्यवस्था हो। ऐसे में दूध, ज्यादा तेल युक्त खाना, मिठाई के सेवन से परहेज करें। खाने के तुरंत बाद लेटने से बचें, इससे यह समस्या और बढ़ सकती है।

6. निगलने में समस्या हो तो क्या करें : ऐसे में छोटे-छोटे एवं मसले हुए आहार लेना फायदेमंद होता है। खिचड़ी, सूजी की खीर, दलिया, दाल का सूप, मिल्क शेक, स्मूदी आदि निगलने में आसान होते हैं, इनका सेवन कर सकते हैं। यदि आप बिल्कुल भी खा या निगल नहीं पा रहे, तो ऐसे में आहार विशेषज्ञ से बात करके फूड सप्लीमेंट के विषय में बात कर सकते हैं।

7. दवाओं के साथ ना लें हाई प्रोटीन डाइट : इस रोग के दौरान कार्बिडोपा-लेवोडोपा नामक दवाओं का प्रयोग ज्यादातर किया जाता है, जिसका अवशोषण छोटी आंत में होता है। यदि इनका सेवन हाई प्रोटीन आहार के साथ या आसपास किया जाए, तो दवा के अवशोषण में बाधा पड़ती है। ऐसे में दवा के समय हाई प्रोटीन वाली डाइट न लें, किसी और समय ले सकते हैं, जैसे कि दवा सुबह खानी हो तो नाश्ते में दलिया लेकर, अंडे या पनीर जैसी चीजें दिन के अन्य समय में ले सकते हैं।

(और पढ़ें - प्रोटीन पाउडर के फायदे)

कुछ भोज्य पदार्थ पार्किंसंस डिजीज के लक्षणों एवं स्थिति को बिगाड़ देते हैं, उनसे परहेज करें। जैसे कि -

ज्यादा मात्रा में चीनी युक्त खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ से परहेज करें, क्योंकि ये आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं। पार्किंसंस के लक्षणों को प्रबंधित करने के लिए प्राकृतिक रूप से मीठे भोजन जैसे ताजे फल, खजूर या गुड़ का चयन करें और चीनी का कम से कम सेवन करें।

बहुत अधिक सोडियम/नमक, ट्रांस फैट, कोलेस्ट्रॉल और संतृप्त वसा के उपयोग से बचें। क्योंकि ये बीमारी की स्थिति और लक्षणों को और खराब कर सकते हैं। इसलिए घर पर पका हुआ भोजन लेने की कोशिश करें और प्रोसेस्ड एवं पैकेट वाले उत्पादों से बचें। (और पढ़ें - प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत कैसे करे)

पाइरिडोक्सिन (विटामिन बी6) का सेवन, लेवोडोपा (पार्किंसंस रोग के लिए एक सामान्य दवा) की गतिविधि को रोक सकता है, यदि आप इस दवा को अकेले ले रहे हों तो। इसलिए अपनी दवाओं की जांच करें और यदि आप इस दवा का सेवन कर रहे हैं, तो पोर्क, चिकन, मूंगफली, सोयाबीन, ओट्स (जई), आदि का सेवन दवा के साथ न करें।

पार्किंसंस रोग में शरीर का संतुलन बनाने में समस्या देखी जाती है, ऐसे में सामान्य लोगों की तुलना में, उन्हें शराब का सेवन न करने के विषय में सोचना चाहिए। शराब के अलावा, अन्य मादक पेय से भी बचने की कोशिश करनी चाहिए।

(और पढ़ें - शराब कैसे छुड़ाएं)

यहां पर इस समस्या के दौरान हमने एक सैंपल मेन्यू प्लान दिया है, इस सैंपल मेन्यू प्लान के अनुसार आप अपने दैनिक डाइट प्लान को निर्धारित कर सकते हैं -

सुबह खाली पेट - दूध (1 कप) + अखरोट (4-6)
नाश्ता - गेहूं का दलिया (1 कटोरी) + पपीता (1 कटोरी)
मध्य आहार - सेब (1 छोटा)
दोपहर का खाना - खिचड़ी (1-2 कटोरी) + खीरा रायता (1 कटोरी)
शाम की चाय - ग्रीन टी (1 कप) + पनीर (5-7 टुकड़े) / उबला अंडा (1-2)
रात का खाना -  इडली (2) + सांबर (1-2 कटोरी)
सोते समय - हल्दी वाला दूध (1 गिलास)

(और पढ़ें - रवा इडली बनाने की विधि)

Dt. Akanksha Mishra

Dt. Akanksha Mishra

पोषणविद्‍
8 वर्षों का अनुभव

Surbhi Singh

Surbhi Singh

पोषणविद्‍
22 वर्षों का अनुभव

Dr. Avtar Singh Kochar

Dr. Avtar Singh Kochar

पोषणविद्‍
20 वर्षों का अनुभव

Dr. priyamwada

Dr. priyamwada

पोषणविद्‍
7 वर्षों का अनुभव

और पढ़ें ...

संदर्भ

  1. Hu Gang, et al. Coffee and tea consumption and the risk of Parkinson's disease . Mov Disord . 2007 Nov 15; 22(15): 2242-8. PMID: 17712848
  2. Avallone Rossella, Vitale Giovanni, Bertolotti Marco. Omega-3 Fatty Acids and Neurodegenerative Diseases: New Evidence in Clinical Trials. Int J Mol Sci. 2019 Sep; 20(17): 4256. PMID: 31480294
  3. American Parkinson's Disease Assiciation [Internet]
ऐप पर पढ़ें
cross
डॉक्टर से अपना सवाल पूछें और 10 मिनट में जवाब पाएँ