गर्भावधि मधुमेह यानी जेस्टेशनल डायबिटीज ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्भवती महिला में ब्लड शुगर (शर्करा) का स्तर बढ़ जाता है। जिन्हें पहले से शुगर नहीं है, वो भी इसकी चपेट में आ सकती हैं। ऐसा तब होता है, जब गर्भवती महिला के शरीर में मौजूद इन्सुलिन, प्लेसेंटा द्वारा प्रोड्यूस किए हार्मोन के कारण सही प्रकार से काम नहीं कर पाता, इस समस्या को इन्सुलिन रेजिस्टेंस भी कहते हैं, ऐसे में इन्सुलिन की आवश्यकता बढ़ जाती है। गर्भवती महिला को दैनिक तौर पर लगभग 3 से 4 बार इन्सुलिन इंजेक्शन लगाने की जरूरत पड़ जाती है। यदि इस इन्सुलिन की आवश्यकता पूरी ना की जाए, तो मां के शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है एवं मां एवं बच्चे दोनों को स्वास्थ्य संबंधित भयानक परिणाम देखने पड़ सकते हैं। आइए जानते हैं जेस्टेशनल डायबिटीज में शुगर की मात्रा कितनी होनी चाहिए, क्या खाएं, क्या न खाएं और परहेज के बारे में।

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  1. प्रेगनेंसी में शुगर में क्या खाना चाहिए - Diet in Gestational Diabetes in Hindi
  2. गर्भावस्था में डायबिटीज में कौन से फल खाने चाहिए - Fruits for Gestational Diabetes in Hindi
  3. गर्भावस्था में शुगर में कौन सी सब्जियां खानी चाहिए - Vegetables for Gestational Diabetes in Hindi
  4. प्रेगनेंसी में डायबिटीज में परहेज - Foods to avoid during Gestational Diabetes
  5. जेस्टेशनल डायबिटीज डाइट चार्ट - Diet plan during Gestational Diabetes Mellitus in Hindi
  6. गर्भावस्था में शुगर में क्या खाएं, क्या नहीं और परहेज के डॉक्टर

गर्भावस्था के दौरान होने वाले डायबिटीज यानी जेस्टेशनल डायबिटीज के उपचार के लिए इंसुलिन थेरेपी के साथ-साथ अपनी दिनचर्या में परिवर्तन को भी शामिल करना अनिवार्य है। दैनिक जीवन में परिवर्तन (LSM) में डाइट में परिवर्तन और व्यायाम से इस स्थिति को नियंत्रित कर सकते हैं। आप निम्न तरीकों से परिवर्तन कर सकते है :

1. छोटे-छोटे आहार लें - अधिक मात्रा में और बहुत देर के बाद भोजन करना आपके शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा को अचानक से बढ़ा देता है। इस स्थिति में गर्भवती महिला को छोटे-छोटे और कम समय अंतराल पर आहार ग्रहण करना चाहिए। 3 घंटे के अंतराल पर 3 मुख्य आहार जैसे - सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का भोजन लेना चाहिए और बीच के अंतराल में 3 छोटे आहार लेने चाहिए जैसे - बीच में लिए जाने वाले स्नैक्स और बेड टाइम स्नैक्स।

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2. ग्लूकोज के धीमे अवशोषण के लिए प्रोटीन - प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट की तुलना में धीरे अवशोषित होता है जो कि ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है। इसलिए आप अपनी डाइट में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को कम करके प्रोटीन की मात्रा को बढ़ाने की कोशिश करें। इस प्रोटीन में आप उच्च जैविक गुण (हाई बायोलॉजिकल वैल्यू) वाले प्रोटीन को रखें जैसे - दूध, मीट, अंडे, मछली इत्यादि। इसके साथ ही आप दालें, फलियां, सोयाबीन तथा मूंगफली को भी अपने आहार में शामिल कर सकते हैं। आप कार्बोहाइड्रेट के साथ प्रोटीन को इन रूप में अपने आहार में शामिल कर सकते हैं, जैसे - दाल और रोटी, दलिया खिचड़ी, बेसन मिश्रित आटे की रोटी, अंडे की भुर्जी और रोटी इत्यादि।

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3. आयरन की मात्रा की पूर्ति कैसे करें - शरीर में रक्त की आवश्यकता बढ़ने पर हीमोग्लोबिन का कम होना सामान्य तौर पर गर्भावस्था के दौरान देखने को मिलता है। लौह तत्व की कमी इसका प्रमुख कारण है। आयरन की बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए आप अपने आहार में साबुत अनाज, फलियां, हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे सरसों का साग, बथुआ, पालक इत्यादि, सूखे मेवे जैसे बादाम और अखरोट, खजूर, अंडे की जर्दी, ऑर्गन मीट इत्यादि को शामिल कर सकते हैं।

4. कैल्शियम से भरपूर आहार - गर्भावस्था के दौरान कैल्शियम एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है, जो कि बच्चे में हड्डियों की वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक है। कैल्शियम की बढ़ी हुई मात्रा की पूर्ति आप इन खाद्य पदार्थों के माध्यम से कर सकते हैं, जैसे - दूध, दूध से बने पदार्थ, दालें, सोयाबीन, अंडे इत्यादि। कैल्शियम के अच्छे अवशोषण के लिए अपने शरीर में विटामिन डी के स्तर की जांच करें और आवश्यकता पड़ने पर विटामिन डी के सप्लीमेंट अवश्य लें।

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6. कब्ज को कम करने के लिए फाइबर युक्त आहार - गर्भावस्था के दौरान फीटल के दवाब के कारण कब्ज का होना भी एक सामान्य समस्या है। अपने आहार में रेशे (फाइबर) युक्त पदार्थों का प्रयोग करके इस समस्या को कम किया जा सकता है। फाइबर से भरपूर आहार जैसे - ताजे फल और सब्जियां, साबुत अनाज, साबुत दालें इत्यादि को आहार में प्रयोग किया जा सकता है। प्रतिदिन 40 ग्राम फाइबर गर्भावस्था के दौरान आवश्यक होता है।

7. कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले आहार - आहार में कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले आहार का प्रयोग करके रक्त में शुगर के स्तर को कम किया जा सकता है। ग्लाइसेमिक इंडेक्स ये बताता है कि किसी भी खाद्य पदार्थ को लेने के बाद आपके शरीर में ब्लड शुगर का स्तर कितनी जल्दी बढ़ता है। कुछ चीजें खाने के बाद रक्त में शुगर का स्तर बहुत तेजी से बढ़ जाता है, इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होता है। जबकि कुछ चीजें ऐसी हैं जो बहुत कम और धीमी गति से शुगर का स्तर बढ़ाती हैं, इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। आप अपने आहार में कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले कार्बोहाइड्रेट का चयन करें जैसे - फलियां (राजमा, छोले), दालें, सेब, संतरा, मेथी, पालक, जौ, ओट्स, कूटू इत्यादि।

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इस समय कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स और ज्यादा फाइबर युक्त फलों का प्रयोग करें। स्नैक्स के रूप में फल का सेवन करना ज्यादा अच्छा होता है। यदि आप अपने मुख्य भोजन में फलों को शामिल करते हैं तो यह आपके ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा देंगे, इसलिए स्नैक्स में ही फलों का प्रयोग करें। हमेशा ताजे फलों का प्रयोग करें, फलों के जूस का नहीं। आप इनमें सेब, नाशपाती, संतरा, खरबूजा, मौसम्बी, इत्यादि को अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।

सब्जियां फाइबर, पानी, आयरन, जिंक इत्यादि के अच्छी स्रोत मानी जाती हैं। प्रत्येक आहार में किसी भी एक सब्जी का प्रयोग (इसमें मौजूद फाइबर के कारण) आपके ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित कर सकता है। आप अपने आहार में सूप, स्टिर फ्राई सब्जियां, स्टू, पकी हुई सब्जियों को शामिल कर सकते हैं। स्टार्च से युक्त सब्जियों मे कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है जो कि आपके ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ाता है, इसलिए अपने आहार में इनके उपयोग से बचें। आप रोज के भोजन में पालक, मेथी, चौलाई, तोरई, लौकी, बैंगन, टमाटर, सहजन इत्यादि को आसानी से शामिल कर सकते हैं।

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कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं, जो आपके शरीर में ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ाते हैं जैसे कि ज्यादा शुगर, ज्यादा वसा एवं प्रेजरवेटिव वाले आहार। इनका सेवन गर्भवती महिला और उसके शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक होता है, इसलिए इनका परहेज करना अनिवार्य है जैसे -

अगर आपको प्रेगनेंसी में डायबिटीज हो गयी है तो सही डाइट चार्ट को फॉलो करके आप इस समस्या को कम कर सकते हैं। इस लेख में प्रेगनेंसी में डायबिटीज डाइट के बारे में दी गयी साड़ी जानकारी को ध्यान में रखते हुए यहाँ ऐसा ही एक डाइट चार्ट दिया गया है। इसे अवश्य आज़मा कर देखें और याद रहे कि अपने डॉक्टर से इसके बारे में सलाह ज़रूर लें -

  • सुबह खाली पेट - कम वसा वाला दूध (1 गिलास) + बादाम (6-8) + अखरोट (2-3)
  • सुबह का नाश्ता - पनीर-बेसन चीला (2) + हरी चटनी (2 चम्मच)
  • मध्य आहार - सेब (1 छोटा)
  • दोपहर का खाना - सब्जियों का सलाद (1 प्लेट - खाने के 15-30 मिनट पहले) + चपाती (2) + अरहर दाल (1 कटोरी) + लौकी की सब्जी (1 कटोरी) + खीरे का रायता (1 कटोरी)
  • शाम की चाय - चाय (1 कप) + भूने मखाने (1 कटोरी) / उबले अंडे (2)
  • रात का खाना - सब्जियों का सूप (1 कटोरी- खाने के 15-30 मिनट पहले)
  • वेजिटेबल सूप (1 कटोरी) + बेसन की रोटी (2) + पनीर की सब्जी / चिकन करी (1 कटोरी)
  • सोते समय - बादाम वाला दूध (1 कप)

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Dt. Akanksha Mishra

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संदर्भ

  1. Farabi Sarah S., Hernandez Teri L. Low-Carbohydrate Diets for Gestational Diabetes. Nutrients. 2019 Aug; 11(8): 1737. PMID: 31357598.
  2. Alfadhli Eman M. Gestational diabetes mellitus. Saudi Med J. 2015; 36(4): 399–406. PMID: 25828275.
  3. Hernandez Teri L., Anderson Molly A., Chartier-Logan Catherine, Friedman Jacob E., Barbour Linda A. Strategies in the Nutritional Management of Gestational Diabetes. Clin Obstet Gynecol. 2013 Dec; 56(4): 803–815. PMID: 24047934.
  4. Diabetes UK What can i eat with gestational diabetes?. The British Diabetic Association. London; What can i eat with gestational diabetes?.
  5. Han Shanshan, Middleton Philippa, Shepherd Emily, Ryswyk Emer Van, Crowther Caroline A. Different types of dietary advice for women with gestational diabetes mellitus. Cochrane Database Syst Rev. 2017 Feb 25;2(2):CD009275. PMID: 28236296.
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